For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कितना सुकून है तेरी यादों की छाँव में

2212 1212 2212 12

कितना सुकून है तेरी यादों की छाँव  में

लगता है जैसे बैठे हैं जन्नत की ठाँव में

 

फिरते हैं अब तलाश में जिसकी यहाँ वहाँ

मिलता था वो सुकूँ कभी पीपल की छाँव  में

 

आँखों को इंतिज़ार है आने का आपके

मुड़कर तो आइये ज़रा अपने ही गाँव में

 

कुछ इस्तेमाल कीजिये अपना दिमाग भी   

किसको मिला है फायदा नफरत के दाँव में

 

अब क्या सुबूत दें तुम्हें जद्दोजहद की हम

छाले पड़े हैं आज तक हम सब के पाँव में

 

मुझको मिटाने आए थे मिलजुल के लोग सब

खुद ही उलझ के रह गए अपने ही दाँव में

 

पुछल्ला

फुरसत किसे है बाँट ले खुशियों को अब यहाँ

उलझा हुआ है हर कोई नफरत के दाँव में

 

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 371

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Lajpat Rai Garg on May 24, 2017 at 10:21am

बधाई.अच्छी ग़ज़ल है.

 

Comment by Mahendra Kumar on May 22, 2017 at 8:41am

बढ़िया ग़ज़ल है आदरणीय नादिर जी हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by Gurpreet Singh jammu on May 19, 2017 at 2:00pm

बहुत अच्छी ग़ज़ल है आदरणीय नादिर खान जी,,, मतला बहुत ही खूबसूरत है 

Comment by नादिर ख़ान on May 18, 2017 at 11:07am

शुक्रिया आदरणीय गिरिराज जी ...


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 16, 2017 at 9:39pm

आदरनीय नादिर खान भाई , बहुत अच्छी गज़ल कही है ... मुबारकबाद कुबूल करें ।

 

Comment by नादिर ख़ान on May 16, 2017 at 12:29am

जनाब समर कबीर साहब हौसला अफजाई और मार्ग दर्शन के लिए बहुत शुक्रिया आपका हमने इस्तेमाल को (2221) ले लिया था इसलिये ये त्रुटि आ गई शायद सही उच्चारण इस्तमाल (2121) है । "कुछ तो समझ  का अपनी ज़रा इस्तेमाल कर" इसमें भी लय बिगड़ रही है या  हम  समझ नहीं पा  रहे  हैं । ज़रा 12 के जगह ऐसा शब्द लेना होगा जो 22 हो....

Comment by नादिर ख़ान on May 16, 2017 at 12:18am

आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ साहब, आदरणीय श्याम वर्मा जी आदरणीय सतविन्द्र जी हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया ....

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on May 15, 2017 at 6:47pm
आदरणीय नादिर खान जी,हारदिक बधाई इस उम्दा गजल के लिए!
Comment by Samar kabeer on May 15, 2017 at 6:13pm
जनाब नादिर खान साहिब आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
दूसरे शैर के सानी मिसरे में 'शुकूँ' को "सुकूँ" कर लीजिए ।

'कुछ तो समझ का अपनी इस्तेमाल कीजिये'
ये मिसरा ली में नहीं है,इसे यूँ कर लें :-
"कुछ तो समझ का अपनी ज़रा इस्तेमाल कर"
Comment by Shyam Narain Verma on May 15, 2017 at 12:12pm
बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल ....हार्दिक बधाई ! 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post करता रहा था जानवर रखवाली रातभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई सालिक गणवीर जी सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए आभार ।"
5 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post करता रहा था जानवर रखवाली रातभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई समर कबीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति से मानवर्धन के लिए आभार ।"
6 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post करता रहा था जानवर रखवाली रातभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी , सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए आभार । #कारण से कुछ के - का…"
8 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"आ. भाई तेजवीर जी, एक अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।"
24 minutes ago
namita sunder replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"कैसे- कैसे स्वार्थ और उन्हें सिद्ध करने के कैसे- कैसे तरीके। आसान नहीं होता आदमी को समझना। अपनों के…"
1 hour ago
namita sunder replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"बेहतरीन कथानक। मर्यादा को एक नए ढंग से संप्रेषित किया है, आपने। हमारी सोच को भी नई दिशा मिली।"
1 hour ago
namita sunder replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"बहुत बहुत आभार, गोपाल जी। आपकी प्रतिक्रिया बहुत मायने रखती है। नमिता"
1 hour ago
namita sunder replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"आभार, तेज वीर सिंह जी, आपने बिल्कुल सही कहा, लघु कथा लिखना अभी सीक रहे हैं। लम्बी कहानियां तो लिखी…"
1 hour ago
Veena Sethi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"मर्यादा -वह पन्नी बिननेवाली उसका का रोज का काम सुबह उठकर पोलिथिन की थैलिया और पन्नी बीनना था. वह…"
1 hour ago
सालिक गणवीर commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post आज कल झूठ बोलता हूँ मैं
"प्रिय रुपम कुमार  अच्छी ग़ज़ल हुई है. बधाईयां स्वीकार करो.गुरु जनों की इस्लाह पर अमल करते…"
2 hours ago
सालिक गणवीर commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास
"प्रिय भाई मनोज एहसास जी सादर नमस्कार शानदार ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ स्वीकार करें. दिल में कोई भीड़ सलामत…"
2 hours ago
Anil Kumar Singh left a comment for Anil Kumar Singh
"ग्रुप के माननीय सदस्यों एवं पदाधिकारियों का अभिनंदन  सादर , अनिल कुमार सिंह भा.पु.से (से.नि)"
2 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service