For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

वक्त आता है

चला जाता है

हमे नही लगता कि

वक्त के आने और जाने से

कुछ फर्क पड़ता है

क्योंकि हम

अपने निकम्मेपन की धुन में

ही मग्न रहते है और

बीतती जाती है उम्र

फिर एक दिन जब दर्पण

हमे चेतावनी देता है

हम रह जाते हैं

अवाक् 

और भय से देखते है

अपने उजले हो चुके बाल

धंसी हई आँखें  

पोपला मुख

और सारे चेहरे पर

अनगिनत वक्त के निशान   

तब हम जान पाते हैं कि

वक्त हमे छूकर  

यूँ ही नही गया था 

वह छोड़ गया था अपना निशान

जिसे तब नही देख पाए थे हम

क्योकि वह हमेशा   

आख़री दहलीज पर प्रकट होता है

हठात्  

एक संवर्धित

ला-इलाज कैंसर की तरह  

(मौलिक/अप्रकाशित )

Views: 579

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by babitagupta on July 7, 2018 at 6:11pm

वक्त की महत्वत्ता को वयां करती बेहतरीन रचना, हार्दिक बधाई आदरणीय सर जी. 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 5, 2018 at 5:37pm

वाह आदरणीय डा. साहब उत्तम कोटि की कविता...

Comment by नाथ सोनांचली on July 5, 2018 at 3:56pm

आद0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन भाव सम्प्रेषण। बहुत उम्दा लिखा आपने। बधाई इस प्रस्तुति पर। सादर

Comment by Sushil Sarna on July 4, 2018 at 5:03pm

वाह आदरणीय गोपाल जी बहुत सुंदर। ... अंतर्मन की व्यथा का एक चुभन देता सत्य। सही बात है वक्त क्या है , ये पता ही तब चलता है जब वक्त शेष नहीं रहता। बहरहाल इस बेहतरीन प्रस्तुति के लिए दिल से बधाई सर। सादर नमन आपकी लेखनी को।

Comment by Shyam Narain Verma on July 4, 2018 at 3:38pm
सुंदर रचना के लिए बहुत बधाई सादर
Comment by Samar kabeer on July 4, 2018 at 11:36am

जनाब डॉ.गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,बहुत उम्दा,सोचने पर मजबूर कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कुछ टंकण त्रुटियाँ देख लें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 4, 2018 at 7:41am

आ. भाई गोपालनारायण जी, बेहतरीन रचना हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on July 3, 2018 at 9:52pm

बढ़िया बिम्ब लेकर बढ़िया शीर्षक के साथ सबक़, हिदायत व हौसला और प्रेरणा देता बेहतरीन सृजन। हार्दिक बधाई और आभार आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहिब।

Comment by TEJ VEER SINGH on July 3, 2018 at 2:57pm

हार्दिक बधाई आदरणीय  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी।बेहतरीन संदेशप्रद प्रस्तुति।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
2 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Thursday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Jul 5
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service