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'देखो हिंदौस्तान फूँकता है'

2122 1212 112/22

जिस्म में पहले जान फूँकता है

बाद-अज़-जाँ अज़ान फूँकता है

सब्र कर शब गुज़र ही जाएगी

क्यों ये अपना मकान फूँकता है

अपनी नफ़रत की आग से कोई

देखो हिंदौस्तान फूँकता है

पास आकर वो गर्म साँसों से

मेरे दिल का जहान फूँकता है

आग तो सर्द हो चुकी कब की

क्यों अबस राखदान फूँकता है

हुक्म से रब के ल'अल मरयम का

देखो मुर्दे में जान फूँकता है

रोज़ आयात पढ़ के क़ुरआँ की

मुझ प इक मह्रबान फूँकता है

"समर कबीर"

मौलिक/अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Samar kabeer on October 29, 2019 at 2:14pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका आभारी हूँ ।

Comment by amita tiwari on August 17, 2019 at 2:01am

अपनी नफ़रत की आग से कोई

देखो हिंदौस्तान फूँकता है

जनाब कबीर  साब ,

इस  में वो सब कह दिया आपने जिसे लिखने में कितने पन्ने लग जाएँ तो भी न लिखा जाए 

बहुत बहुत  मुबारक 

Comment by Md. Anis arman on August 14, 2019 at 3:26pm

बहुत ख़ूब समर साहब बेहतरीन ग़ज़ल हुई है हर शेर लाजवाब है ख़ूब अच्छे से सजाया है इसे आपने बहुत बहुत मुबारक 

Comment by Naveen Mani Tripathi on August 9, 2019 at 6:43pm

वाह सर हर एक शेर बहुत कीमती लगा । बेहतरीन ग़ज़ल के लिए तहेदिल से बधाई ।

Comment by TEJ VEER SINGH on August 7, 2019 at 7:37pm

हार्दिक बधाई आदरणीय समर क़बीर साहब जी। आदाब।लाज़वाब गज़ल।

अपनी नफ़रत की आग से कोई

देखो हिंदौस्तान फूँकता है

Comment by Rachna Bhatia on August 7, 2019 at 7:25pm
आदरणीय समर कबीर जी, आज को उजागर करती लाजवाब ग़ज़ल ।
हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 7, 2019 at 5:47am

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" on August 6, 2019 at 6:50pm

 Samar kabeer जी,
आज के हालात पर इससे बेहतर रचना का निर्माण नहीं हो सकता | एक-एक शेर दर्द से भरा है | शानदार अभिव्यक्ति के लिए हार्दिक बधाई सर | 

Comment by Sushil Sarna on August 6, 2019 at 5:10pm

जिस्म में पहले जान फूँकता है

बाद-अज़-जाँ अज़ान फूँकता है

सब्र कर शब गुज़र ही जाएगी

क्यों ये अपना मकान फूँकता है...... वाह आदरणीय समर कबीर साहिब वाह किस शेर की बात करें हर शेर अजब कहानी का मंज़र पेश करता है। अहसासों का ऐसा तर्ज़ुमा आपके सिवा कौन कर सकता है। इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं सर।

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