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Manoj kumar Ahsaas
  • 37, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

221  2121   1221    212क्या है मेरे होठों की दुआ मैं भुला चुका. किस तरह मानता है ख़ुदा मैं भुला चुका.मेरे सभी गुनाहों को अब तू भी भूल जा, तुझसे हुई है जो भी खता मैं भुला चुका.असली खुशी दबी पड़ी है गर्त में कहीं, अब उसको ढूंढने की अदा मैं भुला चुका.नज़दीक से गुज़र के मेरे देख ले कभी, वो तेरी रहबरी की हवा मैं भुला चुका.मुझको पुकार ने की तो आदत सी हो गई, पर किसको दे रहा हूँ सदा मैं भुला चुका.इतना फरेब दुनिया में है ए मेरे ख़ुदा, उस दिलफरेब दिल की दग़ा मैं भुला चुका.तुमने तो कह दिया है ,मुझे है गमों…See More
Saturday
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आदरणीय मुसाफ़िर जी हार्दिक आभार सादर"
Aug 6
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई । मेरी कहीं इक बात पे मेरा में "कहीं " को "कही " कर लें ।"
Aug 6
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

2×15एक ताज़ा ग़ज़ललाखों ग़म की एक दवा है, सोचो ! कुछ भी याद नहीं. कोई शिकायत करने आए,कह दो कुछ भी याद नहीं.हमने उसकी यादें जीकर उसकी याद के गीत लिखे,उसने पढ़कर लिख भेजा है, उसको कुछ भी याद नहीं.मेरी कहीं इक बात पे मेरा साथी रूठ गया मुझसे, मैंने वफ़ा की याद दिलाई,वो तो कुछ भी याद नहीं!मेरी तड़प तो भूलना बेहतर था तेरे जीने के लिए,तुमने काटी थीं जो रातें रो-रो,कुछ भी याद नहीं?सारे कागज़ के टुकड़े तो आग निगलकर खाक हुए,मेरे क़ासिद तुम भी जोर से बोलो, कुछ भी याद नहीं.वक्त गुज़र जाने पर दुनिया में अल्फाज़…See More
Aug 6
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आदरणीय एवम आदरणीया साथियों का हार्दिक आभार सादर"
Aug 6
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"बढ़िया ग़ज़ल ज़नाब मनोज जी।"
Aug 4
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"जनाब मनोज कुमार अह्सास जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें। सादर। "
Jul 30
Dimple Sharma commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज अहसास जी नमस्ते, खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Jul 30
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज अहसास जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jul 30
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज अहसास जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jul 29
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

2122   2122  2122   212.अपनी धुन में सब मगन हैं किससे क्या चर्चा करें. किसको अपना दिल दिखायें किसके ग़म पूछा करें.अब हमारी धडकनों का मोल कुछ लग जाये बस, चल चलें मालिक के दर पर और कोई सौदा करें.ज़िन्दगी इस खूबसूरत जाल में लिपटी रही, रात में लिक्खें ग़ज़ल दिन में तुझे सोचा करें.दे सके तो दे हमें वो वक़्त फिर मेरे ख़ुदा, रात भर जागा करें और खत उन्हें लिक्खा करें.सारा जीवन एक उलझन के भँवर में फँस गया, अपने रिश्तों की ख़ुशी को क्या करें क्या ना करें.रूठ जाने के लिए उनके बहाने बेशुमार, हम मनाने के लिए उनसे…See More
Jul 29
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आदरणीय रवि शुक्ला जी ग़ज़ल पर उपस्थिति के लिए हार्दिक आभार सादर"
Jul 29
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आदरणीय अमीर साहब  सुझाव के लिए हार्दिक आभार सादर"
Jul 29
Ravi Shukla commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज अह्सास जी , अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें। कुछ तो सोचा होगा उसने दुनिया देख रहा है जो  आप भले कह लें उसको ये ज़ालिम है भागवान बहुत "
Jul 21
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास
"जनाब मनोज अह्सास जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें। उर्दू के लफ़्ज़ों ज़्यादा, ज़ालिम में नुक़्ता लगा लें। सादर। "
Jul 21
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

2×15इतने दिन तक साथ निभाया उतना ही अहसान बहुत.दिल का क्या है, ख़ाली घर था, थे इसमें अरमान बहुत.हैरानी से पूछ रहा था इक बच्चा नादान बहुत,गर्मी के मौसम में ही क्यों आते हैं तूफान बहुत.हद से ज्यादा देखभाल का कोई लाभ नहीं पाया,मेरे हाथों मेरे घर का टूट गया सामान बहुत.ऐसे ऐसे मोड़ हमारे रस्ते में आये यारो,जिनमें फंसकर लगने लगा था जालिम है भगवान बहुत.फिर इक दिन वो मुझसे मिलकर दिल की बात बताएंगे,इस आशा में काट रहा हूँ जीवन पथ सुनसान बहुत.सीधी-सादी बात यहाँ पर समझ नहीं पाता कोई, और तसल्ली देते सबको…See More
Jul 19

Profile Information

Gender
Male
City State
saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

Manoj kumar Ahsaas's Blog

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

221  2121   1221    212

क्या है मेरे होठों की दुआ मैं भुला चुका.

किस तरह मानता है ख़ुदा मैं भुला चुका.

मेरे सभी गुनाहों को अब तू भी भूल जा,

तुझसे हुई है जो भी खता मैं भुला चुका.

असली खुशी दबी पड़ी है गर्त में कहीं,

अब उसको ढूंढने की अदा मैं भुला चुका.

नज़दीक से गुज़र के मेरे देख ले कभी,

वो तेरी रहबरी की हवा मैं भुला चुका.

मुझको पुकार ने की तो आदत सी हो गई,

पर किसको दे रहा हूँ सदा मैं भुला…

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Posted on August 8, 2020 at 9:30am

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

2×15

एक ताज़ा ग़ज़ल

लाखों ग़म की एक दवा है, सोचो ! कुछ भी याद नहीं.

कोई शिकायत करने आए,कह दो कुछ भी याद नहीं.

हमने उसकी यादें जीकर उसकी याद के गीत लिखे,

उसने पढ़कर लिख भेजा है, उसको कुछ भी याद नहीं.

मेरी कहीं इक बात पे मेरा साथी रूठ गया मुझसे,

मैंने वफ़ा की याद दिलाई,वो तो कुछ भी याद नहीं!

मेरी तड़प तो भूलना बेहतर था तेरे जीने के लिए,

तुमने काटी थीं जो रातें रो-रो,कुछ भी याद नहीं?

सारे कागज़ के…

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Posted on August 6, 2020 at 12:12am — 2 Comments

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

2122   2122  2122   212

.

अपनी धुन में सब मगन हैं किससे क्या चर्चा करें.

किसको अपना दिल दिखायें किसके ग़म पूछा करें.

अब हमारी धडकनों का मोल कुछ लग जाये बस,

चल चलें मालिक के दर पर और कोई सौदा करें.

ज़िन्दगी इस खूबसूरत जाल में लिपटी रही,

रात में लिक्खें ग़ज़ल दिन में तुझे सोचा करें.

दे सके तो दे हमें वो वक़्त फिर मेरे ख़ुदा,

रात भर जागा करें और खत उन्हें लिक्खा करें.

सारा जीवन एक उलझन के भँवर में फँस…

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Posted on July 29, 2020 at 1:30am — 5 Comments

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

2×15

इतने दिन तक साथ निभाया उतना ही अहसान बहुत.

दिल का क्या है, ख़ाली घर था, थे इसमें अरमान बहुत.

हैरानी से पूछ रहा था इक बच्चा नादान बहुत,

गर्मी के मौसम में ही क्यों आते हैं तूफान बहुत.

हद से ज्यादा देखभाल का कोई लाभ नहीं पाया,

मेरे हाथों मेरे घर का टूट गया सामान बहुत.

ऐसे ऐसे मोड़ हमारे रस्ते में आये यारो,

जिनमें फंसकर लगने लगा था जालिम है भगवान बहुत.

फिर इक दिन वो मुझसे मिलकर दिल की बात…

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Posted on July 18, 2020 at 11:50pm — 5 Comments

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At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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