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"OBO लाइव तरही मुशायरे"/"OBO लाइव महा उत्सव"/"चित्र से काव्य तक" प्रतियोगिता के सम्बन्ध मे पूछताछ

"OBO लाइव तरही मुशायरे"/"OBO लाइव महा उत्सव"/"चित्र से काव्य तक" प्रतियोगिता के सम्बन्ध मे यदि किसी तरह की जानकारी चाहिए तो आप यहाँ पूछताछ कर सकते है !

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राणा साहब रिप्लाई देने का बहुत बहुत शुक्रिया, जिन्हें 11उन्हें 11में लिया जा सकता है? मेरी जानकारी के अनुसार जिन्हें 12उन्हें 12 होता है  और न्हें की मात्रा नहीं गिरा सकते अगर मैं गलत हूँ तो मुझे सही कर  दीजिये 

जिन्हें, उन्हें को मात्रा गिराकर 11 किया जा सकता है, इसी प्रकार "इन्हें, इन्हीं"  को भी  11 मे बांधा  सकता है| जिस ग़ज़ल का यह मिसरा है वो पूरी ग़ज़ल देखिये 

आओ अब मिल के गुलिस्ताँ को गुलिस्ताँ कर दें

हर गुल-ओ-लाला को रक़्साँ ग़ज़ल-ख़्वाँ कर दें

अक़्ल है फ़ित्ना-ए-बेदार सुला दें इस को

इश्क़ की जिंस-ए-गिराँ-माया को अर्ज़ां कर दें

दस्त-ए-वहशत में ये अपना ही गरेबाँ कब तक

ख़त्म अब सिलसिला-ए-चाक-ए-गरेबाँ कर दें

ख़ून-ए-आदम पे कोई हर्फ़ आने पाए

जिन्हें इंसाँ नहीं कहते उन्हें इंसाँ कर दें

दामन-ए-ख़ाक पे ये ख़ून के छींटे कब तक

इन्हीं छींटों को बहिश्त-ए-गुल-ओ-रैहाँ कर दें

माह अंजुम भी हों शर्मिंदा-ए-तनवीर 'मजाज़'

दश्त-ए-ज़ुल्मात में इक ऐसा चराग़ाँ कर दें

ये मेरे लिए नई जानकारी है मुझे नहीं पता था शुक्रिया 


क्रमांक ७ (१) - ग़ज़ल के मात्रा गणना में अर्ध व्यंजन को १ मात्रा माना गया है तथा यदि शब्द में उच्चारण अनुसार पहले अथवा बाद के व्यंजन के साथ जुड जाता है और जिससे जुड़ता है वो व्यंजन यदि १ मात्रिक है तो वह २ मात्रिक हो जाता है और यदि दो मात्रिक है तो जुडने के बाद भी २ मात्रिक ही रहता है ऐसे २ मात्रिक को ११ नहीं गिना जा सकता है 
उदाहरण - 
सच्चा = स१+च्१ / च१+आ१  = सच् २ चा २ = २२ 
(अतः सच्चा को ११२ नहीं गिना जा सकता है)

आनन्द = आ / न+न् / द = आ२ नन्२ द१ = २२१   
कार्य = का+र् / य = कार् २  य १ = २१  (कार्य में का पहले से दो मात्रिक है तथा आधा र के जुडने पर भी दो मात्रिक ही रहता है)
तुम्हारा = तु/ म्हा/ रा = तु१ म्हा२ रा२ = १२२ 
तुम्हें = तु / म्हें = तु१ म्हें२ = १२  
उन्हें = उ / न्हें = उ१ न्हें२ = १२

राणा प्रताप सर ग़ज़ल की बातें  में वीनस जी का ये लेख है इसके अनुसार उन्हें की मात्रा नहीं गिरायी जा सकती कहा  गया है, या मैं कुछ गलत समझ रहा हूँ मेरी शंका दूर करने की कृपा करें  

मात्राओं को गिराने का कोई प्रामाणिक लिखित नियम नहीं है|

जिन्हें, उन्हें, तुम्हें, क्यों आदि शब्दों को लेकर मेरी  वीनस भाई से विस्तार से चर्चा हुई है पर दुर्भाग्यवश हम एक मत नहीं हो सके| मेरा हमेशा से यही मानना है कि इन शब्दों मे मात्राएं गिराई जा सकती है| 

मजाज़ साहब की गजल मे भी मात्राएं गिराकर ही बांधा गया है|

राणा साहब आपने मेरे प्रश्न के उत्तर के लिए इतनी चर्चा की और अपना कीमती समय दिया उसका मैं आभारी हूँ, मैंने जो कुछ भी सीखा है इसी मंच से सीखा है ,इस तरह से मात्रा गिराने वाली बात मेरे लिए नई थी और मंच से भी मैंने यही सीखा था इसलिए आपको तकलीफ दी  आपका बहुत बहुत शुक्रिया |

आद शेख साहब और आद राणा साहब आप की चर्चा मेरे जैसे नौसिखीये कै दिल मे भ्रमा पैदा करती है. आद राणा साहब अगर हम किसी भी मात्रा को गिरा सकते हैं तो फिर तिरा, मिरा आदि रुप क्यों इस्तेमाल होते हैं? सादर.

9अगस्त से 10 जुलाई19 को उत्सव होगा ये लिखने में त्रुटि हो गई क्या आदरणीय

आदरणीय,

अपनी तरही ग़ज़ल में आवश्यक सुधार करना चाहता हूँ.समझ नहीं आ रहा है कैसे करूँ?

कृपया मदद कर अनुग्रहित करें।

सालिक गणवीर

तरही मुशायरे की गजल में संशोधन का कोई प्रावधन नहीं है । उसके लिए अपनी गजल के रिप्लाय बाक्स में ही संशोधन का अनुरोध एड्मिन से कर सकते हैं । यदि संकलन प्रकाशित हुआ तो उसमें स्वयं एड्मिन संशोधन कर देंगे । 

मुख्य पृष्ठ पर लिंक मिल जायेगा। 

"चित्र से काव्य तक" प्रतियोगिता में मैं केसै भाग ले सकता हूँ, कृपया बताने का कष्ट करें.

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