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Ram Awadh VIshwakarma
  • Male
  • Gwalior Madhyapradesh
  • India
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Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - हम अपने हिस्से का ही आसमान दे बैठे
"आदर्णीय तस्दीक़ अहमद खान साहब बहुत बहुत शूक्रिया।"
May 11
Tasdiq Ahmed Khan commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - हम अपने हिस्से का ही आसमान दे बैठे
"जनाब राम अवध साहिब , मिसरे की शुरुआत रहमदिल से करेंगे तो बह्र में नहीं होगा इसलिए उसे बीच में लेकर बह्र में किया है । सादर"
May 11
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - हम अपने हिस्से का ही आसमान दे बैठे
"आदर्णीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी ग़ज़ल पसन्दगी एवं हौसलाअफजाई के लिये बहुत बहुत शुक्रिया।"
May 11
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - हम अपने हिस्से का ही आसमान दे बैठे
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद खान साहब आपके द्वारा दिये गये अमूल्य सुझाव के लिये बहुत बहुत धन्यवाद। शब्द ब्राहम्मण न होकर हिन्दी में शुद्ध शब्द ब्राह्मण है। इस प्रकार मेरे विचार से मिसरा बह्र में होना चाहिये। ईमान वाले शेर की जगह दूसरा शेर कहना शायद अधिक उचित…"
May 11
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - हम अपने हिस्से का ही आसमान दे बैठे
"आदरणीय समर कबीर साहब जी ग़ज़ल पर सार्थक टिप्पणी करने एवं उत्साहवर्धन के लिये सादर आभार "
May 11
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - हम अपने हिस्से का ही आसमान दे बैठे
"आदरणीय श्री राम शिरोमणि पाठक जी ग़ज़ल पसन्दगी के लिये बहुत बहुत शूक्रिया"
May 11
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - हम अपने हिस्से का ही आसमान दे बैठे
"आ. भाइ रामअवध जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 10
Tasdiq Ahmed Khan commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - हम अपने हिस्से का ही आसमान दे बैठे
"जनाब राम अवध साहिब ,अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें। जनाब नीलेश जी की बातों का संज्ञान ज़रूर लें ।शेर3 उला मिसरा बह्र में नहीं है , ब्राहम्मण की जगह पण्डित करके देखियेगा । शेर4 सानी मिसरे में ईमान की जगह अमान कर सकते हैं ।शेर6उला को यूं…"
May 9
Samar kabeer commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - हम अपने हिस्से का ही आसमान दे बैठे
"जनाब राम अवध जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें,शेष जनाब निलेश जी कह चुके हैं,उनकी बातों का संज्ञान लें ।"
May 9
ram shiromani pathak commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - हम अपने हिस्से का ही आसमान दे बैठे
"बढ़िया तंज़ करती हुई ग़ज़ल आदरणीय।।दिली दाद"
May 9
Ram Awadh VIshwakarma posted a blog post

ग़ज़ल - हम अपने हिस्से का ही आसमान दे बैठे

बह्र - मफाइलुन फइलातुन मफाइलुन फैलुनवो किस तरह से मुकरते ज़ुबान दे बैठे।तभी कचहरी मे झूठा बयान दे बैठे।तमाम दाग थे दामन में जिसके उसको हीटिकट चुनाव का आला कमान दे बैठे।दिखाया स्वर्ग का सपना हमें जो ब्राह्मण नेतो दान में उसे अपना मकान दे बैठे।जो बात करते थे कल राष्ट्र भक्ति का साहब,वो चन्द सिक्कों में अपना ईमान दे बैठे।जब उनके प्यार को माँ बाप ने नकार दिया,नदी में डूब के वो अपनी जान दे बैठे।रहमदिली का ये आलम रहा है अपना भीहम अपने हिस्से का ही आसमान दे बैठे।हम उनके दम पे भला कैसे जंग जीतेंगे,जो…See More
May 9
Ram Awadh VIshwakarma commented on Samar kabeer's blog post 'ग़ज़ल कहने जो बैठोगे तो नानी याद आएगी'
"आदरणीय समर साहब बहुत शानदार ग़ज़ल हुई है। आदरणीय नीलेश जी के साथ 'ग़ज़ल जब भी पढ़ेंगे छेड़खानी याद आयेगी सादर"
May 9
Ram Awadh VIshwakarma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"मगर ये जान मेरी है निकल तो सकती है। वाह क्या कहने आदरणीय नीलेश जीबहुत बहुत बधाई शानदार ग़ज़ल कहने के लिये।"
Apr 28
Naveen Mani Tripathi commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- फँस गया जाल में शिकारी खुद
"आ0 सर लाजवाब प्रस्तुति हेतु बधाई "
Apr 17
Ram Awadh VIshwakarma commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"कुछ उड़ानों की तमन्ना को लिये था जिन्दा बहुत खूबसूरत शेर है बहु बहुत बधाई"
Apr 17
Ram Awadh VIshwakarma commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की-जिस्म है मिट्टी इसे पतवार कैसे मैं करूँ
"आदरणीय नीलेश जी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Apr 17

Profile Information

Gender
Male
City State
Gwalior Madhya pradesh
Native Place
Basti U.P.
Profession
Retired Govt. Servent
About me
Retired as Divisional Engineer BSNL book published 1.Mehman Bhi Ltkate Hain ( Gazals) 2.Chakoo khatkedar hai ab (Gazals) 3.Muft khori Jinda Bad ( Gadya Vyangya ) 4. Vishwakarma Brahmin aur unke gotra 5.Iski Topi Uske Sar Pe (Gazals).

Ram Awadh VIshwakarma's Blog

ग़ज़ल - हम अपने हिस्से का ही आसमान दे बैठे

बह्र - मफाइलुन फइलातुन मफाइलुन फैलुन

वो किस तरह से मुकरते ज़ुबान दे बैठे।

तभी कचहरी मे झूठा बयान दे बैठे।

तमाम दाग थे दामन में जिसके उसको ही

टिकट चुनाव का आला कमान दे बैठे।

दिखाया स्वर्ग का सपना हमें जो ब्राह्मण ने

तो दान में उसे अपना मकान दे बैठे।

जो बात करते थे कल राष्ट्र भक्ति का साहब,

वो चन्द सिक्कों में अपना ईमान दे बैठे।

जब उनके प्यार को माँ बाप ने नकार दिया,

नदी में डूब के वो अपनी जान दे…

Continue

Posted on May 9, 2018 at 5:42am — 10 Comments

ग़ज़ल- फँस गया जाल में शिकारी खुद

बह्र- फाइलातुन मफाइलुन फैलुन

2122 1212 22

मार कर पेट में कटारी खुद।

मर गया एक दिन मदारी खुद।

अपने कर्मों से वो जुआरी खुद।

हो न जाये कभी भिखारी खुद।

पड़ गये दाँव पेंच सब उल्टे,

फँस गया जाल में शिकारी खुद।

आगये दिन हुजूर अब अच्छे

दान देने लगे भिखारी खुद।

हैं नशामुक्ति के अलम्बरदार,

पर चलाते हैं वो कलारी खुद।

खानदानी हुनर है बच्चों में,

सीख लेते हैं दस्तकारी…

Continue

Posted on April 6, 2018 at 5:39am — 17 Comments

ग़ज़ल- बुढ़ापा आ गया लेकिन समझदारी नहीं आई

बह्र - मफाईलुन मफाईलुन मफाईलुन मफाईलुन

बुढ़ापा आ गया लेकिन समझदारी नहीं आई।

रहे बुद्धू के बुद्धू और हुशियारी नहीं आई।

किया ऐलान देने की मदद सरकार ने लेकिन

हमेशा की तरह इमदाद सरकारी नहीं आई।

पड़ोसी के जले घर खूब धू धू कर मगर

साहब,

खुदा का शुक्र मेरे घर मे चिंगारी नहीं आई।

ढिंढोरा देश भक्ति का भले ही हम नहीं पीटें,

मगर सच है लहू में अपने गद्दारी नहीं आई।

बहुत से लोग निन्दा रोग से बीमार हैं…

Continue

Posted on February 26, 2018 at 6:34pm — 7 Comments

ग़ज़ल - अच्छा हुआ जो पाँव से काँटा निकल गया।

बह्र- मफऊल फाइलात मफाईल फाइलुन

संगत खराब थी तभी गुन्डा निकल गया।

अब क्या बतायें हाथ से बेटा निकल गया।

घर से निकल गया मेरे इक दिन किरायेदार,

अच्छा हुआ जो पाँव से काँटा निकल गया।

जिसको खरा समझ के खरीदा था हाट से,

किस्मत खराब थी मेरी खोटा निकल गय।

देखो तो धूल झोंक अदालत की आँख में,

होकर बरी वो ठाठ से झूठा निकल गया।

हिन्दू का घर हो या कि मुसलमान का हो घर,

घर घर अलख जगाता कबीरा निकल…

Continue

Posted on February 14, 2018 at 4:00pm — 9 Comments

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At 9:43pm on July 30, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

Mushayra :- कमेन्ट जीस पोस्ट पर करनी हो ठीक उसके नीचे दाहिने तरफ ब्लू रंग में Reply लिखा हुआ है उसको क्लिक कर जब कमेन्ट करेंगे तो थ्रेड में आएगा, मुख्य बॉक्स में केवल नया पोस्ट करना चाहिए | ( आप नए है इसलिए जानकारी हेतु बता रहा हूँ ) 

इस कमेन्ट को पुनः बताये अनुसार लगा दे |

At 9:56am on July 9, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 7:53pm on July 3, 2011, Admin said…
At 7:18pm on July 2, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…
 
 
 

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