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Tilak Raj Kapoor
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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"यह डेटाबेस तक पहुंच का प्रश्न है। सामान्यतः पोर्टल सर्विसेज एजेंसी साइट ओनर को डेटाबेस तक पहुंच देती हैं। अगर हम डेटाबेस बैकअप ले सके तो अपनी आवश्यकतानुसार प्रत्येक सदस्य अपनी सामग्री अवश्य प्राप्त कर सकेगा। एक बार एडमिन की ओर से यह सुविधा मिल जाए…"
May 7

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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अभी प्रश्न व्यय का ही नहीं सक्रियता और सहभागिता का है। पोर्टल का एक उद्देश्य है और अगर वही डगमगा रहा है तो उसपर पहले सोचना होगा कि इसकी निरंतरता कैसे हो। व्यय भार करने का एक व्यावहारिक मार्ग है और मैं भोपाल लौटते ही उसपर कार्य करूंगा, कोशिश रहेगी कि…"
May 6

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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर हमारे समूह में कोई व्यवसायी हैं और उनके पास कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड्स हों तो वे इसके वार्षिक व्यय की पूर्ति उन फंड्स से कर सकते हैं।"
May 2

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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सदस्यों में रुचि के अभाव ने इसे बंद करने के विचार का सूत्रपात किया है। ऐसा लगने लगा था कि मंच को अखाड़ा बना कर तो चर्चा बहुत होती है लेकिन इसके मूल उद्देश्यों की दिशा में सार्थक चर्चा कम हो रही है। इस मंच ने एक लंबी अवधि तक अपना काम पूरी गंभीरता से…"
May 2

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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"अच्छा है। "
Mar 30

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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"दिल रुलाना नहीं कि तुझ से कहें हम ज़माना नहीं कि  तुझ से कहें । अच्छा शेर हुआ। ज़माना तो तुम्हारा दिल दुखा सकता है, हम नहीं का भाव लिये।    फ़कत अहसास वो गुनाह का है  दुख फ़साना नहीं कि तुझ से कहें (गिरह) गिरह का मिसरा तो…"
Mar 29

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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"वो तराना नहीं कि तुझ से कहें आशिक़ाना नहीं कि तुझ से कहें । यह शेर कहता है कि यह तराना आशिक़ाना नहीं है इस कारण तुझसे कहने लायक नहीं है। इस दृष्टि से कहन पूर्णता में है। ग़म दबाना नहीं कि तुझ से कहें दर्द जाना नहीं कि तुझ से कहें  यह…"
Mar 29

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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"यह मेरी बेध्यानी का परिणाम है, मुझे और सतर्क रहना पड़ेगा। "
Mar 29

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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"यह तो ऋचा जी की ग़ज़ल पर कहा था, यहॉं न जाने कैसे चिपक गया। आपकी ग़ज़ल अभी पढ़ी नहीं है।"
Mar 29

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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"मुझे लगता है कि मूल ग़ज़ल के शेर की विवेचना यह समझने में सहायक होगी कि ऐसी कठिन ज़मीनों पर शेर कैसे बॉंधे जाते हैं। दुख फ़साना नहीं कि तुझ से कहें दिल भी माना नहीं कि तुझ से कहें। फ़साने (अफ़साने) कहे जाते हैं लेकिन दु:ख तो अनुभूति होता है अत: शायर…"
Mar 29

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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"कुछ भी होना नहीं कि तुझसे कहें रोना धोना नहीं कि तुझसे कहें १ मतले में जो क़ाफ़िया निर्धारित हुआ उसके स्थान पर दिया गया क़ाफ़िया शेष ग़ज़ल में अपनाया गया है। सीखने-सिखाने के क्रम में इसे क़ाफ़िया देने हुई त्रुटि के आधार पर छोड़ा जा सकता है। हक़…"
Mar 29

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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"ग़ज़ल में बह्र, रदीफ़, क़ाफ़िया का पालन अच्छा हुआ है। ग़म-ए-दौलत मिली है किस्मत से, ये लुटाना नहीं कि तुम से कहें। में अगर आप ग़म की दौलत कह रही हैं तो दौलत-ए-ग़म होगा। मिसरे अपनी जगह ठीक हैं लेकिन शेर क्या कहना चाह रहे हैं, यह समझने में कठिनाई…"
Mar 29

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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सच फ़साना नहीं कि तुझ से कहें ये बहाना नहीं कि तुझ से कहें। शेर का शेर के रूप में पूरा होना और एक अच्छा शेर होना, दो अलग बात हैं। दोनों पंक्तियों को जोड़कर शेर क्या कह रहा है, यह स्पष्ट होना चाहिये। यहॉं दोनों पंक्तियॉं स्वतंत्र वाक्य हैं। उन्हें…"
Mar 29

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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"इस मंच पर ग़ज़ल विधा पर जितनी चर्चा उपलब्ध है उसे पढ़ना भी महत्वपूर्ण है। इस पर विशेष रूप से ध्यान देना आवश्यक है। मेरा अनुरोध शायद इससे समझ आ जाये कि उदाहरण ग़ज़ल और उदाहरण क़ाफ़िया को देखें उससे क़ाफ़िया "आना" निर्धारित होता है जबकि…"
Mar 29

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Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आपकी बात से सहमत हूँ। यह बात मंच के आरंभिक दौर में भी मैंने रखी थी। अससे सहजता रहती। लेकिन उसमें समस्या यह रही कि यह जिस कंटेट मैनेजमेंट सर्वर पर बनी है उसमें ऐसा प्रावधान नहीं है।"
Mar 23

सदस्य टीम प्रबंधन
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इन सुझावों पर भी विचार करना चाहिये। "
Mar 19

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, MP
Native Place
Bhopal
Profession
Retired persson

Comment Wall (36 comments)

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At 1:02pm on July 26, 2015, Santlal Karun said…

आदरणीय, सादर अभिवादन ! जन्म-दिन पर सहृदय शुभ कामनाएँ !

At 1:30am on July 26, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें....

At 12:42pm on July 20, 2015, Ravi Shukla said…

आदरणीय तिलक जी

सादर प्रणाम

ग्रजल की कक्षा में आपके लेख पढ़ रहा हूॅं बहुत सी जानकारी मिली आभार

10 आलेख के बाद मुझे और पोस्‍ट दिखाई नही दी

क्‍या वे कक्षा में उपलब्‍ध है या नही

और भी जानकारी चाहता हॅूं क्‍योंकि बह्र के बारे में अभी भी मैं मुतमईन नहीं हूँ इसकी मुझे और जानने की जरूरत है  । साथ ही कुछ आलेख में आपने जुज आदि का भी जिक्र किया था उसके बारे में भी जानना है । आशा है मार्ग दर्शन मिलेगा तो शौक को सहारा मिलेगा ।

सादर ।

At 7:43pm on January 11, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
आदरणीय तिलक राज जी आप वे जानकारी मुझे भी भेजने का कष्ट करें तो बडी मेहरबानी होगी जो जानकारी आपने आदरणीय मिथिलेश जी को भेजने की बात की है! सादर!
मेरी ई मेल आई डी है
" panchal92rahul@gmail.com"
आपने कहा था!
"मिथिलेश जी
आप अपना ई-मेल आई डी मुझे भेज दें। मैं आपको एकजाई सभी बह्र और उनकी मुज़ाहिफ़ शक्‍लें भेज देता हूँ। "
At 9:21pm on July 26, 2014,
सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh
said…


At 7:33pm on April 24, 2014, Sushil Sarna said…

आदरणीय तिलक राज जी , नमस्कार -ये आपसे मेरे प्रथम परिचय है - सर ग़ज़ल विधा में मात्राओं का वर्गीकरण मेरी समझ में नहीं आ रहा - ग़ज़ल लिखता हूँ लेकिन मात्रा भार में पिछड़ जाता हूँ - हिन्दी में लघु और गुरु समझ में आती है लेकिन ग़ज़ल में ?? आपसे अनुरोध है की मेरी प्रेषित ग़ज़ल जो निम्न प्रकार से है उसकी मात्रा/अरकान से समझा देंगे तो आपकी कृपा होगी -

आबाद हैं तन्हाईयाँ ..तेरी यादों की महक से
वो गयी न ज़बीं से .मैंने देखा बहुत बहक के
कब तलक रोकें भला बेशर्मी बहते अश्कों की
छुप सके न तीरगी में अक्स उनकी महक के
सुर्ख आँखें कह रही हैं ....बेकरारी इंतज़ार की
लो आरिज़ों पे रुक गए ..छुपे दर्द यूँ पलक के
ज़िंदा हैं हम अब तलक..... आप ही के वास्ते
रूह वरना जानती है ......सब रास्ते फलक के
बस गया है नफ़स में ....अहसास वो आपका
देखा न एक बार भी ......आपने हमें पलट के
सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

At 8:50am on October 7, 2013, Abhinav Arun said…

हार्दिक स्वागत और सादर प्रणाम आदरणीय ! स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त हो यही कामना है !!

At 9:03am on July 26, 2013, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिन की हार्दिक शुभ कामनाए | प्रभु आपको नए आयाम स्थापित करने दिनोदिन प्रगति का 

मार्ग प्रशस्त करने में सक्षमता प्रदान करे |

At 3:30pm on June 29, 2013, Dr Babban Jee said…

परम आदरणीय निकोर एवं कपूर साहेब ........दरअसल आपने मुझे अपने अनुगृहीत किया अपनी जमात में जगह देकर / आपका आशीर्वाद बना रहे , यही एक छोटी सी चाहत है/ श्रधा के साथ

At 3:12pm on June 29, 2013, Dr Babban Jee said…

परम आदरणीय निकोर एवं कपूर साहेब ........दरअसल आपने मुझे अपने अनुगृहीत किया अपनी जमात में जगह देकर / आपका आशीर्वाद बना रहे , यही एक छोटी सी चाहत है/ श्रधा के साथ

 
 
 

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