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Naveen Mani Tripathi's Blog – February 2019 Archive (4)

ग़ज़ल

अब शहादत को न जाया कीजिये ।

आइना उनको दिखाया कीजिये।।

मुल्क में है इन्तकामी हौसला ।

हौसलों को मत दबाया कीजिये ।।

आग उगलेगी सुख़नवर की कलम ।

अब न कोई सच छुपाया कीजिये ।।

ख़ाब जो देखें हमारे कत्ल की ।

हर सितम उनपे ही ढाया कीजिये ।।

उनके हमले से फ़जीहत हो गयी।

दिल यहाँ अपना जलाया कीजिये ।।

तफ़सरा कीजै नये हालात पर ।

आप अपना घर बचाया कीजिये…

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Added by Naveen Mani Tripathi on February 24, 2019 at 8:39pm — 4 Comments

ग़ज़ल



1212  1122 1212 22/112

क़ज़ा का करके मेरी इंतिज़ाम उतरी है ।

अभी अभी जो मेरे घर मे शाम उतरी है ।।

तमाम  उम्र  का ले तामझाम उतरी है ।

ये जीस्त मौत को करने  सलाम उतरी है ।।

अदाएं देख के उसकी ये लग रहा है मुझे ।

कि लेने  हूर  कोई  इंतिकाम  उतरी है ।।…

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Added by Naveen Mani Tripathi on February 13, 2019 at 8:30pm — 4 Comments

ग़ज़ल

1222 1222 1222 1222

फ़ना के बाद भी अपनी निशानी छोड़ आये हैं ।

जिसे तुम याद रक्खो वो कहानी छोड़ आए हैं ।।

सुकूँ मिलता हमें कैसे यहां परदेश में आकर ।

विलखती मां की आंखों में जो पानी छोड़ आये हैं ।।

कलेजा मुँह को आता है जरा माँ बाप से पूछो ।

जो घर से दूर जा बेटी सयानी छोड़ आये हैं ।।

हमें इंसाफ का उनसे तकाज़ा ही नहीं था कुछ ।

अदालत में तो हम भी हक़ बयानी छोड़ आये हैं ।l

तेरे प्रश्नों का उत्तर था तेरे लहजे में ही…

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Added by Naveen Mani Tripathi on February 11, 2019 at 12:55am — 3 Comments

ग़ज़ल



221 2121 1221 212

छलके जो उनकी आंख से जज़्बात ख़ुद ब ख़ुद ।

आए मेरी ज़ुबाँ पे सवालात ख़ुद ब  ख़ुद ।।

किस्मत खुदा ने ऐसी बनाई है सोच कर ।

मिलती गमों की हमको भी सौगात ख़ुद ब ख़ुद ।।

चर्चा  है  शह्र  में  उसी की  देख आज कल ।

बाँटा है जिसने इश्क़ को ख़ैरात ख़ुद ब ख़ुद ।।…

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Added by Naveen Mani Tripathi on February 1, 2019 at 3:01pm — 3 Comments

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