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Abhinav Arun's Blog – March 2011 Archive (7)

कविता :- सच कहना तुम भूली मुझको ?

कविता :- सच कहना तुम भूली मुझको ?…

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Added by Abhinav Arun on March 20, 2011 at 6:30pm — 18 Comments

कविता : - रंगों की बूँदें

 

कविता : - रंगों की बूँदें

लाल लाल हरी…

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Added by Abhinav Arun on March 19, 2011 at 1:30pm — 3 Comments

ग़ज़ल :- ऐ खुदा क्योंकर तेरे सागर में सुनामी हुई

ग़ज़ल :- ऐ खुदा क्योंकर तेरे सागर में सुनामी हुई

आपदा की हद हज़ारों ज़िंदगी पानी हुई ,

ऐ खुदा क्योंकर तेरे सागर में सुनामी हुई |

 

है नहीं कूवत लखन सी दौर के इंसान में…

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Added by Abhinav Arun on March 13, 2011 at 3:30pm — 3 Comments

ग़ज़ल :- खार में भी कली खिला देगा

ग़ज़ल :- खार में भी कली खिला देगा

खार में भी कली खिला देगा ,

आदमी जब भी मुस्कुरा देगा |

 

यह तो दस्तूर है ज़माने का ,

नाम लिख कर कोई मिटा देगा…

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Added by Abhinav Arun on March 13, 2011 at 3:00pm — 17 Comments

ग़ज़ल:- अपने शहर में झूठ के चर्चे आम बहुत हैं

ग़ज़ल:- अपने शहर में झूठ के चर्चे आम बहुत हैं

 

अपने शहर में झूठ के चर्चे आम बहुत हैं ,

सच कहने वालों के सर इलज़ाम बहुत हैं…

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Added by Abhinav Arun on March 13, 2011 at 2:55pm — No Comments

ग़ज़ल :- कहीं कोई कमीं है

ग़ज़ल :- कहीं कोई कमीं…

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Added by Abhinav Arun on March 13, 2011 at 1:30pm — 6 Comments

ग़ज़ल : - अपना घर आप जलाने का हौसला कर लूं

ग़ज़ल : - अपना घर आप जलाने का हौसला कर लूं

वक्त वीरान है निशानियां फ़ना कर लूं ,

अपना घर आप जलाने का हौसला कर लूं |

 

आपकी बज़्म में अशआर कई लाया हूँ…

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Added by Abhinav Arun on March 13, 2011 at 1:00pm — 6 Comments

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"आ.लक्ष्मण सिंह मुसाफिर साहब,  अच्छी ग़ज़ल हुई, और बेहतर निखार सकते आप । लेकिन  आ.श्री…"
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"आ.मिथिलेश वामनकर साहब,  अतिशय आभार आपका, प्रोत्साहन हेतु !"
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Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"देर आयद दुरुस्त आयद,  आ.नीलेश नूर साहब,  मुशायर की रौनक  लौट आयी। बहुत अच्छी ग़ज़ल…"
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Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
" ,आ, नीलेशजी कुल मिलाकर बहुत बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई,  जनाब!"
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"आ. भाई मिथिलेश जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
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