For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Anwar suhail's Blog – March 2013 Archive (7)

मांगना

किसी से

कुछ भी माँगना

मुझे लगता है

बहुत बुरा...



कुछ भी मांगने से पहले

करना पड़ता है अभ्यास

कैसे हुआ जाएगा प्रस्तुत

देने वाले के सामने

समय कौन सा उचित हो

जब दाता का मूड ठीक हो

किस अंदाज़ में माँगा जाए

भाषा कैसी हो

कि पिघल जाए दाता...



मांगने का अर्थ है

कि गिरवी रख दिया जाए

अपना समूचा अस्तित्व

साथ ही मन में

रहा आये संशय

कि मांगने पर भी

कुछ न मिले तब....?



बड़ी शर्मिंदगी भर देता… Continue

Added by anwar suhail on March 29, 2013 at 8:59pm — 13 Comments

नरकवासी

हमने चुना

अपने लिए

एक नर्क

या धकेल दिया था तुमने

हमें नर्क में...

कोई फर्क नहीं पड़ता...

 

नर्क

भले ही जैसा था

हमने उसमें बसने का

बना लिया मन

और ठुकरा दिया

तुम्हारे स्वर्ग को

उन लुभावने सपनो को

जिसे दिखलाते रहे तुम

और तुम्हारे दलाल…

Continue

Added by anwar suhail on March 27, 2013 at 7:52pm — 4 Comments

कैसे चले जांगर

थका तन

थका मन

कैसे चले जांगर

क्या जा पाएंगे घर ?

 

हुक्म देने वाले 

ठाने बैठे हैं जिद

एक काम होता नही खत्म

कि दूजे का हुक्म मिल जाता..

 

पंछी भी लौट आते

घर अपने

नियत समय पर

लेकिन हम पंछी नहीं

 

सूरज भी छिप जाता

क्षितिज पार

नियत समय पर

लेकिन हम सूरज नही

 

तो क्या हम समंदर की लहरें हैं

जो दिन-रात अनथक

आ-आकर टकराती रहतीं किनारों पर

और…

Continue

Added by anwar suhail on March 16, 2013 at 9:00pm — No Comments

टूथ-पेस्ट की ट्यूब

टूथ-पेस्ट की ट्यूब

 

और एक दिन ऐसा भी आता है

खूब खूब दबाने से निकलता

चने के दाने बराबर

इत्ता सा टूथ-पेस्ट...

कि बने झाग थोडा सा

मुंह की बदबू दूर हो जाए

मुहलत मिले इतनी कि

शाम खदान से लौटते वक्त

ज़रूर खरीद लाना है

एक नया टूथ-पेस्ट...

 

अगली सुबह

हड़बड़ी में

वाश बेसिन के सामने

ब्रुश उठाते ही हाथ में

दिख जाता वही

पिचका

चिपटा

तुडा-मुडा टूथपेस्ट

मुंह…

Continue

Added by anwar suhail on March 13, 2013 at 9:31pm — 4 Comments

समीक्षा उपन्यास पहचान

समीक्षा: उपन्यास ‘पहचान’

जद्दोजहद पहचान पाने की

-जाहिद खान

किसी भी समाज को गर अच्छी तरह से जानना-पहचाना है, तो साहित्य एक बड़ा माध्यम हो सकता है। साहित्य में जिस तरह से समाज की सूक्ष्म विवेचना होती है, वैसी विवेचना समाजशास्त्रीय अध्ययनों में भी मिलना नामुमकिन है। कोई उपन्यास, कहानी या फिर आत्मकथ्य जिस सहजता और सरलता…

Continue

Added by anwar suhail on March 12, 2013 at 9:00pm — 1 Comment

ज़रूरी नहीं...

ज़रूरी नहीं

कि हम पीटें ढिंढोरा

कि हम अच्छे दोस्त हैं

कि हमें आपस में प्यार है

कि हम पडोसी भी हैं

कि हमारे साझा रस्मो-रिवाज़ हैं

कि हमारी मिली-जुली विरासतें हैं

कतई ज़रूरी नहीं है ये

कि हम दुनिया के सामने

अपने प्यार का इज़हार करें

क्योंकि जब दोस्ती टूटती है

जब प्यार नफरत में बदलता है

तब रिश्तों में खटास आती है

तब दिल टूट जाते हैं

तब अकबका जाते हैं वे लोग

जिनके दिल मोम हैं

जो…

Continue

Added by anwar suhail on March 10, 2013 at 7:24pm — 8 Comments

आतंकवादी

जाने क्यों आजकल

जब भी

देखता / सुनता हूँ ख़बरें

तो धड़कते दिल से

यही सुनना चाहता हूँ

न हो किसी आतंकी घटना में

किसी मुसलमान का हाथ...

 

अभी जांच कार्यवाही हो रही होती है

कि आनन्-फानन

टी वी करने लगता घोषणाएं

कि फलां ब्लास्ट के पीछे है

मुस्लिम आतंकवादी संगठन...

 

बड़ी शर्मिंदगी होती है

बड़ी तकलीफ होती है

कि मैं भी तो एक मुसलमान हूँ

कि मेरे जैसे

अमन-पसंद मुसलमानों के बारे…

Continue

Added by anwar suhail on March 8, 2013 at 9:11pm — 11 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Monday
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
Monday
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service