For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

केवल प्रसाद 'सत्यम''s Blog – May 2015 Archive (10)

साहित्य....

हिंदी-साहित्य

साहित्य,

दर्पण सा मजबूर

इसका अपना कोई अक्स नहीं होता

रूप-रंग, वेष-भूषा, आकार-प्रकार

सब शून्यवत

अदृश्य आत्मा सा भाषा हीन

भावनाओं की आकृतियां अनुभव से सराबोर

आंसुओं में दर्द के बीज

संगठित मोतियों का वजूद

दफ्न हो जाते होंठो के कोर पर

संवेदनहीनता के मरूस्थल गढ़ते नई भाषा

साहित्य की आत्मा

पत्रकारिता की देह में ऐंठती मूॅछ

उगलती भाषाओं की जातियां, भ्रम....क्लीष्टतम रस

क्षेत्रीयता के कलश हवाओं में लटके

मुंह…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 29, 2015 at 12:22pm — 13 Comments

जीवन.....

जीवन.....

हरी पत्तियो से ढके 

और फलों से लदे 

पंछियोंं के घने बसेरे

आस-पास वृहद सागर सा लहराता वन,

आल्हादित हैं पवन-बहारें

सॉझ-सवेरे झंकृत होते

पंछियो के कलरव स्वर

नदियों की कल-कल,

आते-जाते नट कारवॉ

उड़ते गुबार, मद्धिम होती रोशनी, आँख मींचते बच्चे

तम्बू में घुस कर खोजते, दो वक्त की रोटी...

पेट की आग का धुआँं, करता गुबार

रूॅधी सांसों के कुहराम

आधी रोटी के लिए करते द्वन्द

तलवारें चमक जाती, बिजली सी

धरा…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 27, 2015 at 10:30pm — 14 Comments

छलकते अमी का-----

तरही गजल...

बह्र....122 122 122 122

तरानाा फॅसाना नया चाहता हूँ

तुम्हीं से मुहब्बत-वफा चाहता हूँ।



चमन, फूल-कॉटों सभी से निभाया,

रहा दोष फिर भी क्षमा चाहता हूँ।



हॅसीं खाब-जन्नत-बहारें तुम्हीं से,

तरो ताजगी की हवा चाहता हूँ।



कदम चूम कर नित्य सजदा करूं मैं,

मेरी जिन्दगी की दवा चाहता हूँ।



खयालों में अक्सर बहुत चोट खाये,

मिलो रूबरू फलसफा चाहता हूँ।



हुआ वक्त घायल ये इन्सा-जमीं भी,…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 27, 2015 at 8:00pm — 15 Comments

एकान्त की काकी....

एकाकीपन

उदासियां--!

मन के कोनो अतरों में जीती

सुबह -दोपहर-सायं

एकान्त की काकी, एकाकी

क्यों ? न पालती अपने नौलिहाल

रस-छन्द-अलंकारों को

अलसाई तन्द्रा

इन्द्रधनुषी रंग में रॅगती- कोरी चुनरी

ईर्षा,-द्वेष, छल-कपट से टॉकती

अहं के चमकते सितारे

अति निष्ठुर ।

हथेली की उॅगलियों में फॅसी ध्रुम द-िण्डका

रह-रह कर जलती- बुझती.....कुढ़ती

आवारा काले बादलों सा उगलती ....धुआँं

कलेजों के टुकड़ाें की धौंकनी बढ़ जाती…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 24, 2015 at 9:30am — 5 Comments

मां सरस्वती - वन्दना...

गीतिका छंद......गीतिका छ्न्द में 14-12 के क्रम में कुल 26 मात्राएं होती हैं.  इस छंद की प्रत्येक पंक्ति की तीसरी, दसवीं, सत्रहवीं व चौबिसवी मात्राएं अनिवार्य रूप से लघु ही होती हैंं.

मां सरस्वती - वन्दना

शारदे मां वर्ण-व्यंजन में प्रचुर आसक्ति दो।

शब्द-भावों में सहज रस-भक्ति की अभिव्यक्ति दो।।

प्रेम का उपहार नित संवेदना से सिक्त हो।

हर व्यथा-संघर्ष में भी क्रोध मन से रिक्त हो।।1

वृक्ष सा जीवन हमारा हो नदी की भावना।

तृप्त ही…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 23, 2015 at 11:00pm — 4 Comments

भूकम्प...

भूकम्प....

यादों के शहर में

मुॅह बिचकाती सड़कें

दरक कर उलाहना देतीं ....दीवारें खिसियाती

जमीं पर भटकते अबोध सितारे

औंधें मुॅह धूल चाटतीं ऐतिहासिक धरोहरें

झुके वृक्ष कुछ और झुक कर पूछना चाहते....कैसे हो?

भूकम्प के झटकों से टेढ़ा हुआ चॉद

चॉदनी धू-धूसरित....

मलबे के नीचे दबे विदीर्ण स्वर अतिशांत

प्रकृति भी सहम उठती।

अडिग अट्टालिकाएं चकनाचूर

बिछड़े आँखों के नूर

भाग्य स्वयं को कोसते.....तो, संवेदनाएं मूक।

मैदानों…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 20, 2015 at 8:00pm — 8 Comments

विकासवाद का चरित्र---

विकासवाद का चरित्र

सड़क, गली, कूचों व मैदानों में

उन्मादी संक्रमण मस्ती करते

विकल, प्राण पखेरू

समूहों में फड़फडाते- गिड़गिडाते

गगन, हवा, दीवारों में सिर मार कर डूब जाते

सागर, सरोवर, ताल, नदी, झीलों में

बजबजाता विकासवाद

अशिष्ट पन्नियों से ।

दलदल में कमलदल, दलगत उन्मुक्त पर

स्थिर, मूक, भावहीन संज्ञाएं

क्रियाशील भौंरे सब हवा हो गए

गुम गयीं - तितलियॉं

सौन्दर्य निगलती- वादियॉं

दिशाएं- दिशाहाीन, पूर्णत: शुष्क पछुवा पर निर्भर…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 18, 2015 at 9:08pm — 16 Comments

चुने कंट........

चुने कंट............शक्ति छंद

दिये से दिये को जलाते चलें।

बढी आग दिल की बुझाते चलें।।

रहे प्रेम का जोश-जज्बा सदा।

चुने कंट सत्यम गहें सर्वदा।।1



नहीं दीन कोई न मजबूर हों।

सभी शाह मन के बड़े शूर हों।।

न कामी न मत्सर सहज प्यार हो।

बहन-भ्रात जैसा मिलन सार हो।।2



यहां सिंधु भव का बड़ा क्रूर है।

लिए तेज सूरज मगर सूर है।। 

यहाँ तम मिटा कर खड़ा नूर जो।

बुलाता उन्हे पास,  हैं दूर जो।।3



भिगोते रहे अश्रु…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 16, 2015 at 5:00pm — 2 Comments

अपेक्षाएं....

दृढ़ता में

भूखे श्रमिकों के श्रम रखते

विकास की नींव

सफलता के केतु आकाश को ढक देते

धरा से गगन को चूमती अट्टालिकाएं उकेरतीं,

झुग्गियों का दर्द

आलसी, धुंध चढ़ जाता ऊपरी मंजिल तक

धूल में लिपटे श्रमिक झाड़ देते

लोभ, इच्छा और आवश्यकताएं भी

श्रम, अटल सत्य-

तनिक भी अपेक्षा नहीं रखती।

टेढ़ी-मेढ़ी सकरी पगड-िण्डयां

स्वयं राजपथ होने का दंभ भरतीं

हुंकारती, अहं के आकार-प्रकार

बहुआयामी अपेक्षाएं- लक्ष्य से कोसों आगे,

दूर की सोच सदैव…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 8, 2015 at 9:25pm — 11 Comments

सत्य.....

सत्य.....

पंच महाभूतों की आस्था

विज्ञान भी मानता- शोध में,

वेद-पुराणों, महाकाव्यों के आधार बिन्दु

जीवन के सेतु-बंध,

उपकृत करते-

क्षित, जल, पावक, गगन व समीर

एक दूसरे के पूरक

महाकाश से घटाकाश तक सर्वत्र व्यापी

तल-वितल, अतल भी

धारण करते पिण्ड स्वरूप.....अखण्ड ब्रह्म,

कण-कण रोमांच से भरपूर

क्षर कर भी सृजन के चंद्र-सूर्य

चक्राकार आवृत्ति के द्विगुण- सघन तम व तेज

विस्तारित करते रहस्य

आकार लेते, आभाष - अनुभव…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 4, 2015 at 8:30am — 14 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"नीलेश भाई के विचार व्यावहारिक हैं और मैं भी इनसे सहमत हूँ।  डिजिटल सर्टिफिकेट अब लगभग सभी…"
11 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार, अब तक आए सभी विचार पढ़े हैं। अधिक विचार आयोजन अवधि बढ़ाने पर सहमति के हैं किन्तु इतने…"
19 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इन सुझावों पर भी विचार करना चाहिये। "
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"यह भी व्यवहारिक सुझाव है। इस प्रकार प्रयोग कर अनुभव प्राप्त किया जा सकता है। "
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"हाल ही में मेरा सोशल मीडिया का अनुभव यह रहा है कि इस पर प्रकाशित सामग्री की बाढ़ के कारण इस माध्यम…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय प्रबंधन,यह निश्चित ही चिंता का विषय है कि विगत कालखंड में यहाँ पर सहभागिता एकदम नगण्य हो गयी…"
yesterday
amita tiwari posted a blog post

निर्वाण नहीं हीं चाहिए

निर्वाण नहीं हीं चाहिए---------------------------कैसा लगता होगाऊपर से देखते होंगे जबमाँ -बाबाकि…See More
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम…See More
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी सदस्यों को सादर सप्रेम राधे राधे सभी चार आयोजन को को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। ( 1…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"चर्चा से कई और पहलू, और बिन्दु भी, स्पष्ट होंगे। हम उन सदस्यों से भी सुनना चाहेंगे जिन्हों ने ओबीओ…"
Monday
pratibha pande replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय मिथिलेश जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ। कैलेंडर प्रथम सप्ताह में आ जाय और हफ्ते बाद सभी आयोजन…"
Mar 14
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय को नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर जी का ये उत्तम विचार है। अगर इसमें कुछ परेशानी हो तो एक…"
Mar 13

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service