For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Featured Blog Posts – July 2012 Archive (13)

राखी .

मानो तो रूह क़ा नाता है जी ये राखी

न मानो कच्चा धागा है जी ये राखी .

 

जो राखी को दम्भ-आडम्बर मानते हैं ;

उन का मन भी तो अपनाता है ये राखी .

 

बहना के मन से उपजी हर इक दुआ है ये ;

भाई-बहन से बंधवाता है ये राखी .

 

सभ्य समाज की नींव के पत्थर नातों का…

Continue

Added by DEEP ZIRVI on July 27, 2012 at 7:00pm — 1 Comment

किताबें

"किताबें "

 

किताबें

खटखटा रही हैं

दरवाजे दिमाग के

लायी हैं कुछ

सवाल कुछ जबाब

छू रहीं है

दिल को…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on July 27, 2012 at 3:13pm — 5 Comments

पर्यावरण संरक्षण से सम्बंधित दोहे

वृक्षों को मत काटिए, वृक्ष धरा शृंगार.

हरियाली वसुधा रहे, बहे स्वच्छ जलधार..

 

नदियाँ सब बेहाल हैं, इन पर दे दें ध्यान.  

कचरा निस्तारित करें, बन जाएँ इंसान..…

Continue

Added by Er. Ambarish Srivastava on July 26, 2012 at 12:00am — 35 Comments

सावन का सवैया

सावन का सवैया

(प्रस्तुत रचना "सिंहावलोकन सवैया" में रचित है,जिसे सवैया के सभी प्रकारों में लिखा जा सकता है(मेरी रचना मदिरा सवैय पर आधारित है)।सिंहावलोकन सवैया जिन वर्णों और शब्दों से प्रारम्भ किया जाता है,उसी पर अन्त भी किया जाता है।चरणान्त के शब्द चरण के आगे के शब्द होते हैं।)

*****************************

सावन में गरजे बदरा,

मन मोर नचै वन कानन में।

कानन में मनमोह छटा,

घनघोर घटा घिरि गागन में॥

गागन में चमके बिजुरी,

सिकुरी सुनरी निज आंगन में।

आंगन… Continue

Added by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on July 23, 2012 at 9:47pm — 5 Comments

गजल

छोड़ देना मत मुझे मेरे खुदा मझधार में.

सर झुकाए हूँ खडा मैं तेरे ही दरबार में.

राह में बिकते खड़े हैं मुल्क के सब रहनुमा,

रोज ही तो देखते हैं चित्र हम अखबार में.

देश की गलियाँ जनाना आबरू की कब्रगाह,

इक इशारा है बहुत क्या क्या कहें…

Continue

Added by Sanjay Mishra 'Habib' on July 23, 2012 at 7:00pm — 7 Comments

श्रावणी हाइकू.

फिर लो आया

झीनी फुहारें लाया

सावन आया.

:

लो फूल खिले

कलियाँ भी…

Continue

Added by Ashok Kumar Raktale on July 23, 2012 at 2:09pm — 6 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
वक़्त (कुछ दोहे)

वक़्त (कुछ दोहे)

**************************************************
वक़्त चिरैया उड़ रही , नित्य क्षितिज के पार l 
राग सुरीले छेड़ती , अपने पंख पसार ll
**************************************************
वक़्त परिंदा बाँध ले , बन्ध न ऐसो कोय l
थाम इसे जो उढ़ चले , जीत उसी की होय ll
**************************************************
बीते पल की थाप पर , मूरख नीर बहाय l
खुशियों को ढूँढा…
Continue

Added by Dr.Prachi Singh on July 23, 2012 at 10:00am — 30 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
प्रीत के उपहार

प्रीत के उपहार

छंद रूपमाला (१४ +१० ) अंत गुरु-लघु ,समतुकांत
*****************************************************
झनक झन झांझर झनकती , छेड़ एक मल्हार .
खन खनन कंगन खनकते, सावनी मनुहार .
फहर फर फर आज आँचल , प्रीत का इज़हार .
बावरा मन थिरक चँचल , साजना अभिसार .
*****************************************************
धडकनें मदहोश पागल , नयन छलके…
Continue

Added by Dr.Prachi Singh on July 22, 2012 at 12:00pm — 21 Comments

जो लिक्खेंगे ज़माने से कभी हट कर न लिक्खेंगे....

तुम्हारी हक़ बयानी को कभी डर कर न लिक्खेंगे ...

कि आईने को हरगिज़ हम कभी पत्थर न लिक्खेंगे...



रहे इश्को वफ़ा में ये तो सब होता ही रहता है..

तुम्हारी आज़माइश को कभी ठोकर न लिक्खेंगे....



भरोसा क्या कहीं भी ज़ख्म दे सकता है हस्ती को........

हम अपने दुश्मने जां को कभी दिलबर न लिक्खेंगे.....



तू क़ैदी घर का है, हम तो मुसाफिर दस्तो सहरा के....

कहाँ हम और कहाँ तू हम तुझे हमसर न लिक्खेंगे.....



उड़ानों से हदें होती है कायम हर परिंदे कि…

Continue

Added by MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी) on July 18, 2012 at 9:00am — 6 Comments

नाखून

कभी अपने नाखून देखे हैं

अपने अल्फाजों के नाखून

हाँ यही बहुत पैने हैं तीखे हैं

चुभते हैं

ज़रा तराश लो इन्हें

इनकी खरोंचों से चुभन होती है

ये विदीर्ण कर जाते हैं

मेरे मोम से कोमल ह्रदय को…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on July 13, 2012 at 2:59pm — 9 Comments

“जिन्दगी का गीत”

रास्तों में मुश्किलें हैं आज इनसे होड़ ले.

जिन्दगी भी रेस है तू दम लगा के दौड़ ले.

 

मंजिलें अलग-अलग हैं रास्ते जुदा-जुदा, 

गर तू पीछे रह गया तो साथ देगा क्या खुदा,

हिम्मतों  से काम लेके रुख हवा का मोड़ ले.

जिन्दगी भी रेस है तू दम लगा…

Continue

Added by Er. Ambarish Srivastava on July 13, 2012 at 1:00am — 32 Comments

प्राण प्रिये

वेदना संवेदना अपाटव कपट

को त्याग बढ़ चली हूँ मैं

हर तिमिर की आहटों का पथ

बदल अब ना रुकी हूँ मैं

साथ दो न प्राण लो अब

चलने दो मुझे ओ प्राण प्रिये ।



निश्चल हृदय की वेदना को

छुपते हुए क्यों ले चली मैं

प्राण ये चंचल अलौकिक

सोचते तुझको प्रतिदिन

आह विरह का त्यजन कर

चलने दो मुझे ओ प्राण प्रिये ।



अपरिमित अजेय का पल

मृदुल मन में ले चली मैं

तुम हो दीपक जलो प्रतिपल

प्रकाश गौरव  बन चलो अब

चलने दो मुझे ओ प्राण…

Continue

Added by deepti sharma on July 5, 2012 at 1:00am — 49 Comments

वो बच्चा...

वो बच्चा

बीनता कचरा

कूड़े के ढेर से

लादे पीठ पर बोरी;

फटी निकर में

बदन उघारे,

सूखे-भूरे बाल

बेतरतीब,

रुखी त्वचा

सनी धूल-मिटटी से,

पतली उँगलियाँ

निकला पेट;

भिनभिनाती मक्खियाँ

घूमते आवारा कुत्ते

सबके बीच

मशगूल अपने काम में,

कोई घृणा नहीं

कोई उद्वेग नहीं

चित्त शांत

निर्विचार, स्थिर;

कदाचित

मान लिया खुद को भी

उसी का एक हिस्सा

रोज का किस्सा,

चीजें अपने मतलब की

डाल बोरी में

चल पड़ता…

Continue

Added by कुमार गौरव अजीतेन्दु on July 2, 2012 at 9:24am — 20 Comments

Featured Monthly Archives

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-112

आदरणीय काव्य-रसिको,सादर अभिवादन ! ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह आयोजन लगातार क्रम में इस…See More
2 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on सालिक गणवीर's blog post जिसको हम ग़ैर समझते थे...(ग़ज़ल : सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर साहिब, नमस्कार। बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है जनाब, आपको इस पर ख़ूब सारी दाद और…"
3 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Dipu mandrawal's blog post मशीनी पुतले
"आदरणीया Dipu mandrawal साहिबा, बहुत ख़ूब। बड़ी सच्चाई है आपके अल्फ़ाज़ में। सादर"
3 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Madhu Passi 'महक''s blog post यूँ ख़यालों में सनम आने लगे हैं...(ग़ज़ल मधु पासी 'महक')
"आदरणीया Madhu Passi 'महक' साहिबा, बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही आपने! ओबीओ के मंच पर आपको इस…"
3 hours ago
Madhu Passi 'महक' posted a blog post

यूँ ख़यालों में सनम आने लगे हैं...(ग़ज़ल मधु पासी 'महक')

बह्रे-रमल मुसद्दस सालिम2122 / 2122 / 2122यूँ ख़यालों में सनम आने लगे हैंदिल को मेरे अब वो महकाने लगे…See More
4 hours ago
Dipu mandrawal posted a blog post

मशीनी पुतले

ये जो चलते फिरते मशीनी पुतले हो गए हैं हम । अंधेरे जलसों के धुएँ में खो गए हैं हम । किसी के अश्क़…See More
5 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

कुछ दोहे : प्रश्न - उत्तर:.....

प्रश्नों का प्रासाद है, जीवन की हर श्वास । मरीचिका में जी रहा, कालजयी विश्वास । ।प्रश्नों से मत…See More
6 hours ago
Sushil Sarna replied to Sushil Sarna's discussion भक्तिरस के दोहे : in the group धार्मिक साहित्य
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से…"
7 hours ago
सालिक गणवीर posted a blog post

जिसको हम ग़ैर समझते थे...(ग़ज़ल : सालिक गणवीर)

2122 1122 1122 22जिसको हम ग़ैर समझते थे हमारा निकला उससे रिश्ता तो कई साल पुराना निकला (1)हम भी…See More
8 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post तुम्हीं आये हरदम टहलते हुए.- ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी सादर नमस्कार  आपकी हौसलाअफजाई के लिए दिल…"
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post तुम्हीं आये हरदम टहलते हुए.- ग़ज़ल
"आ. भाई बसंतकुमार जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
18 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

तुम्हीं आये हरदम टहलते हुए.- ग़ज़ल

मापनी १२२ १२२ १२२ १२  कई ख़्वाब देखे मचलते हुए.तुम्हीं आये हरदम टहलते हुए. तबस्सुम के पीछे छिपे…See More
19 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service