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SALIM RAZA REWA's Blog – November 2017 Archive (9)

तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा

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तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं

रात - रात भर तेरा इंतज़ार करते हैं

-

तुमको प्यार करते थे तुमको प्यार करते हैं

जाँ निसार करते थे जाँ निसार करते हैं

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ख़ुश रहे हमेशा तू हर ख़ुशी मुबारक हो

ये दुआ खुदा से हम बार - बार करते हैं

-

उँगलियाँ उठाते हैं लोग दोस्तों पर भी

हम तो दुश्मनों पर भी ऐतबार करते हैं

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वादा उसका सच्चा है लौट के वो आएगा

इस उमीद पर अब भी इंतज़ार करते…

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Added by SALIM RAZA REWA on November 22, 2017 at 8:30am — 6 Comments

छोड़कर दर तेरा हम किधर जाएँगे - सलीम रज़ा रीवा

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छोड़कर दर तेरा हम किधर जाएँगे

बिन तेरे आह भर-भर के मर जाएँगे

 -

चाँद भी देख कर उनको शरमाएगा 

मेरे महबूब जिस दम संवर…

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Added by SALIM RAZA REWA on November 20, 2017 at 10:00am — 15 Comments

चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा

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चांद  का टुकड़ा है या कोई  परी या हूर है 

उसके चहरे पे चमकता हर घड़ी इक नूर है

-

हुस्न पर तो नाज़ उसको ख़ूब था पहले से ही …

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Added by SALIM RAZA REWA on November 17, 2017 at 10:30am — 14 Comments

सबसे छोटा क़ाफ़िया और सबसे बड़ी रदीफ़ पर एक और ग़ज़ल - सलीम रज़ा रीवा



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-

जब तुम्हारी महब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगी /

लब तुम्हारी महब्बत में खो…

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Added by SALIM RAZA REWA on November 15, 2017 at 9:00am — 21 Comments

मुझसे रूठा है कोई उसको मनाना होगा - सलीम रज़ा रीवा

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मुझसे रूठा है कोई उसको मनाना होगा

भूल कर शिकवे-गिले दिल से लगाना होगा   

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जिन चराग़ों से ज़माने में उजाला फैले 

उन चराग़ों को हवाओ से बचाना…

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Added by SALIM RAZA REWA on November 13, 2017 at 11:00am — 24 Comments

हरेक ज़ुल्म गुनाह-ओ- ख़ता से डरते हैं - सलीम रज़ा रीवा ( ग़ज़ल )

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    हरेक ज़ुल्‍म गुनाह-ओ- ख़ता से डरते हैं.

    जिन्हे है ख़ौफ़-ए-ख़ुदा वो ख़ुदा से डरते हैं 

    -

    न…
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Added by SALIM RAZA REWA on November 12, 2017 at 10:00am — 28 Comments

नाराज़गी है कैसी भला ज़िन्दगी के  साथ - सलीम रज़ा रीवा

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नाराज़गी है कैसी भला ज़िन्दगी के  साथ.

रहते हैं ग़म हमेशा ही यारों खुशी के साथ

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नाज़-ओ-अदा के साथ कभी बे-रुख़ी के साथ.

दिल में उतर  गया वो बड़ी सादगी के साथ

-

माना कि लोग जीते हैं हर पल खुशी के साथ.

शामिल है जिंदगी में मगर ग़म सभी के साथ

-

आएगा मुश्किलों में भी जीने का फ़न तुझे.

कूछ दिन गुज़ार ले तू मेरी जिंदगी के साथ

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ख़ून-ए- जिगर निचोड़ के रखते हैं शेर में.

यूँ ही नहीं है  प्यार हमें   शायरी के…

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Added by SALIM RAZA REWA on November 8, 2017 at 3:30pm — 16 Comments

जैसे चमन को फूल कली ताज़गी मिले - सलीम रज़ा रीवा

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जैसे चमन को फूल कली ताज़गी मिले-

वैसे ही जिंदगी तुम्हें महकी हुई मिले  



ये है दुआ तुम्हारा मुकद्दर  बुलंद …

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Added by SALIM RAZA REWA on November 6, 2017 at 11:00am — 8 Comments

जिधर देखो उधर मेहनत कशों की - सलीम रज़ा रीवा

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जिधर देखो उधर मिहनत  कशों की ऐसी हालत है-

ग़रीबों  की  जमा अत पर अमीरों की क़यादत…

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Added by SALIM RAZA REWA on November 1, 2017 at 9:30am — 15 Comments

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