For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Tasdiq Ahmed Khan's Blog – March 2016 Archive (5)

ग़ज़ल(एतबार न कर )

ग़ज़ल(एतबार न कर )

---------------------------

2122 ----1212 -----112

मान मेरी सलाह प्यार न कर |

हुस्न वालों का एतबार न कर |

हो न  जज़्बात  जाएँ   बेक़ाबू

जानेजां हद वफ़ा की पार न कर

बेच दी जिन सुख़नवरों ने क़लम

उनके जैसा मुझे  शुमार न कर|

हुस्न वाले  वफ़ा नहीं  करते

तू यक़ीं उनपे  बार बार न कर |

आँख भीगी है और हंसी लब  पर

राज़े उल्फ़त को आशकार न कर |

वक़्ते रुख़सत निगाह नम…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on March 13, 2016 at 9:20pm — 12 Comments

ग़ज़ल (मुहब्बत से किनारा कर रहा है )

ग़ज़ल (मुहब्बत से किनारा कर रहा है )

------------------------------------------------

1222 --------1222 --------122

मुहब्बत से किनारा कर रहा है |

हमें वह बे सहारा  कर रहा है |

तुम्हारा देखना रह रह के मुझको

वफ़ा को आश्कारा  कर रहा है |

न कोई देख ले यह डर मुझे है

वो खिड़की से इशारा  कर रहा है |

युं ही क़ायम रहे यह दोस्ताना

कहाँ आलम गवारा  कर रहा है |

वो लाके ग़ैर को महफ़िल में…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on March 7, 2016 at 1:08pm — 19 Comments

सहारा (लघुकथा )

बेटा ख़ानदान का चराग़ और बुढ़ापे का सहारा होता है , बेटियां पराया धन हैं दूसरे के घर चली जाती हैं | शान्ती की यही सोच ज़िंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हो चुकी थी | ..... इकलौते बेटे को प्राइवेट कॉलिज में और बेटियों को सरकारी कालिज में पढ़ाया ,यही नहीं ज़ेवर बेचकर बेटे को एम बी ए कराया और बेटी इस से महरूम रह गयी | घर का खर्चा पति की पेंसन और सिलाई करने से चल रहा  था मगर हाय क़िस्मत बेटा भी बहू के बहकावे में आकर माँ और बहनों को बेसहारा छोड़ गया। ...... पति ज़िंदा होते तो यह दिन देखने न पड़ते | शान्ती दुखों…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on March 6, 2016 at 10:00pm — No Comments

ग़ज़ल (पास है वह कहाँ दूर है )

ग़ज़ल (पास है वह कहाँ दूर है )

--------------------------------------

212 -------212 --------212

जो तसव्वुर में मामूर है |

पास है वह कहाँ दूर  है |

आइने पर न तुहमत रखो

वह तो पहले से मग़रूर है |

मुस्करा उनके हर ज़ुल्म पर

यह ही उल्फ़त का दस्तूर है |

उनके दीदार का है असर

मेरे रुख पे न यूँ नूर है |

बे वफ़ाई है वह हुस्न की

जो ज़माने में मशहूर है |

छोड़ जाये गली किस…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on March 1, 2016 at 9:04pm — 10 Comments

हिफ़ाज़त (लघु कथा )

दिन ढलने का वक़्त क़रीब आरहा था कि अचानक रास्ते पर सामने से कारवां की तरफ कोई आदमी भागता हुआ नज़र आया | वह हांफता हुआ पास आकर बोला ,आगे ख़तरा है मेरा क़ाफ़ला लुट  चूका है | सालारे कारवां ने बिना सोचे समझे उसकी बातों पर यक़ीन करके वहीँ पर क़याम करने का हुक्म देदिया ,हामिद ने लाख कहा इस पर यक़ीन मत करो , मुझे इसकी आँखों में फ़रेब नज़र आरहा है | ...... मगर सब बेकार गया | रात को जब क़ाफ़ले वाले बेख़बर सो रहे थे ,हामिद की आँखों से नींद गायब थी | ...... यकबयक उसे घोड़ों के टापों की आवाज़ सुनाई दी…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on March 1, 2016 at 7:30am — 12 Comments

Monthly Archives

2019

2018

2017

2016

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 102 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सतविंदर भाई, आपने तो मुझे चकित कर दिया !  कुंडलिया छंद को आधार बनाकर मुखड़े और आधार…"
1 hour ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 102 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश भाई जी, आपकी कुण्डलिया संयत, शिल्पगत एवं चित्रानुरूप हुई हैं। हार्दिक बधाइयाँ.. "
1 hour ago
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 102 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी, नमन सादर। सुन्दर कुण्डलिया छन्द के लिए हार्दिक बधाई।"
5 hours ago
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल: वक़्त की शतरंज पर किस्मत का एक मोहरा हूँ मैं।
"आदरणीय दंडपाणि जी,  आपको ग़ज़ल पसंद आई, मेरा लिखना सार्थक हुआ।  बहुत बहुत…"
11 hours ago
Balram Dhakar commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post ग़ज़ल - चरागाँ इक मुहब्बत का जला दो तुम
"जनाब प्रशांत जी,  ग़ज़ल का प्रयास बहुत अच्छा है, मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाएं।  आदरणीय समर सर…"
12 hours ago
Balram Dhakar commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post जाते हो बाजार पिया (नवगीत)
"इस सुंदर प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें, आदरणीय धर्मेंद्र जी।  सादर। "
12 hours ago
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल: वक़्त की शतरंज पर किस्मत का एक मोहरा हूँ मैं।
"आदरणीय दंडपाण जी,  आपको ग़ज़ल पसंद आई, मेरा लिखना सार्थक हुआ।  बहुत बहुत…"
12 hours ago
Balram Dhakar commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल: वक़्त की शतरंज पर किस्मत का एक मोहरा हूँ मैं।
"आदरणीय प्रशांत भाई,  बहुत बहुत धन्यवाद।  सादर। "
12 hours ago
dandpani nahak commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल
"परम आदरणीय समर कबीर साहब प्रणाम , मेरी भूल है !अरकान 122 122 122 पर कोशिश की है कृपा कर मार्गदर्शन…"
16 hours ago
प्रशांत दीक्षित 'सागर' commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post ग़ज़ल - चरागाँ इक मुहब्बत का जला दो तुम
"बहुत बहुत धन्यवाद समर सर । प्रयास करता हूँ ।"
19 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey and प्रशांत दीक्षित 'सागर' are now friends
20 hours ago
Samar kabeer commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post ऐसी ही रहना तुम (नवगीत)
"जनाब धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी आदाब,अच्छा नवगीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
21 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service