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हम उनकी याद में रोए भी मुस्कुराए भी (~रूपम कुमार 'मीत')

बह्र- 1212 / 1122 / 1212 / 22 (112)

अज़ाब-ए-हिज्र में सुख-दुख के गीत गाए भी
हम उनकी याद में रोए भी मुस्कुराए भी [1]

ख़ुदा ने ख़ल्क़ किया है चराग़ जैसा हमें
वही जलाए हमें फिर वही बुझाए भी [2]

अजीब साल ये गुज़रा हमारी जिंदगी में
ख़ुदा करे न दुबारा कभी फिर आए भी [3]

हमारे यार का अंदाज़-ए-इश्क़ सबसे जुदा
कभी हँसाए वो हमको कभी रुलाए भी [4]

गुलाब जैसे लबों से वो हमको चूमता है
निशान प्यार के सीने से फिर मिटाए भी [5]

बनाने वाले ने सब को बनाया ऐसा यहाँ
जो चोट दे भी सके और जो चोट खाए भी [6]

यक़ीन कैसे करूँ बे-वफ़ा की बातों पर
मैं उसके दिल में हूँ तो चीर कर दिखाए भी [7]

~रूपम कुमार 'मीत'

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on September 27, 2020 at 9:18pm

जनाब रूपम कुमार जी, 

//यक़ीन कैसे करें बे-वफ़ा की बातों पर

हम उनके दिल में हैं तो चीर कर दिखाए भी [7]//

इसे यूँ कर सकते हैं :

यक़ीन कैसे करूँ बे-वफ़ा की बातों पर

हूँ उसके दिल में जो मैं चीर कर दिखाए भी    

Comment by Rupam kumar -'मीत' on September 27, 2020 at 12:48pm

आ.  निलेश साहिब जी, शुतुरगुर्बा दोष  मुझे लगता था, सिर्फ हम और मै मेरी इन  हर्फ़ के साथ होते हैं  आपने एक नई जानकारी दी, खैर 

मैं और कुछ सोचता हूँ , नहीं कर पाया तो शे'र हटा दूंगा आपका बहुत शुक्रिया साहिब 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 27, 2020 at 12:29pm

आ. रूपम जी, 
उसके करने से वहां जो "हम" है उस से शुतुरगुर्बा हो जाएगा 

Comment by Rupam kumar -'मीत' on September 27, 2020 at 12:25pm

आदरणीय निलेश साहिब जी,  मेरा  प्रणाम आपको ,  ग़ज़ल  पर आपकी  उपस्थिति और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत शुक्रिया , अपना स्नेह बनाए रखिए बालक पर ,

अगर 'उनके' को हटा कर 'उसके दिल में' तो मिसरा ठीक हो जाएगा कृपया मार्गदर्शन कीजिए 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 27, 2020 at 12:20pm

आ. रूपम जी,
अच्छी ग़ज़ल हुई है, ढेरों दाद.
अंतिम शेर के सानी में 'उनके' आने से दिखाएँ भी आना चाहिए अत: पुनर्विचार कीजियेगा 
सादर 

Comment by Rupam kumar -'मीत' on September 27, 2020 at 10:49am

आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिब जी,  मेरा  प्रणाम आपको ,  ग़ज़ल  पर आपकी  उपस्थिति और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत शुक्रिया , अपना स्नेह बनाए रखिए बालक पर ,

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on September 27, 2020 at 10:37am

वाह जनाब रूपम कुमार जी आदाब, क्या ज़बरदस्त ग़ज़ल कही है आपने हरेक शे'र शानदार है, दाद के साथ भरपूर मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।

कृपया ध्यान दे...

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