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"अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा"

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन

अगर वो मुफ़लिसी को रौनक़-ए-बाज़ार कर देगा
कई महरुमियों को बर सर-ए-पैकार कर देगा

सभी ने कर लिया इक़रार, लेकिन जानता है वो
अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा

किताबों में लिखा है उसको जन्नत की बशारत है
वफ़ा की राह में क़ुर्बान जो घर बार कर देगा

मिलाएगा अगर हर बात में जो हाँ में हाँ उसकी
उसे नीलाम वो इक दिन सर-ए-बाज़ार कर देगा

हमारे इश्क़ का चर्चा अभी सरगोशियों तक है
जो बाक़ी काम है वो सुब्ह का अख़बार कर देगा

पुराने ज़ख़्म दिल के भर चुके,अब देख लेना वो
हमारे वास्ते पैदा नया आज़ार कर देगा

अगर आमाल की उसके मज़म्मत की नहीं हमने
हमारा साँस लेना भी "समर"दुश्वार कर देगा
----
महरूमी-ना उमीदी,मायूसी,नाकामी
बर सर-ए-पैकार-जंग के लिए तैयार
बशारत-ख़ुश ख़बरी
सर गोशियों-काना फूसी
आज़ार-दुख, तकलीफ़
आमाल-अमल का बहुवचन
मज़म्मत-निंदा

समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 1, 2017 at 10:58pm
आ. भाई समर जी, बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 1, 2017 at 10:08pm
सभी ने कर लिया इक़रार, लेकिन जानता है वो
अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा..बेमिसाल शेर

हमारे इश्क़ का चर्चा अभी सरगोशियों तक है
जो बाक़ी काम है वो सुब्ह का अख़बार कर देगा..अनुपम..नमन है लेखनी को..सभी शेर कमाल हुए आदरणीय
Comment by Mohammed Arif on November 1, 2017 at 9:51pm
हमारे इश्क़ का चर्चा अभी सरगोशियों तक है
जो बाक़ी काम है वो सुब्ह का अख़बार कर देगा । वाह!वाह! क्या अशआर है ।

पुराने ज़ख़्म दिल के भर चुके,अब देख लेना वो
हमारे वास्ते पैदा नया आज़ार कर देगा वल्लाह कमाल है ! कमाल है!
शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब ।
Comment by SALIM RAZA REWA on November 1, 2017 at 8:44pm

आली जनाब समर साहिब ,

बहुत ख़ूब शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद.

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on November 1, 2017 at 6:45pm
आदरणीय समर साहब जी आपकी गजल की हर पंक्तियां बहुत बेहतरीन हैं कितनी भी प्रशंसा की जाय कम है,इसके लिये आपको बहुत बहुत मुबारकबाद
Comment by Afroz 'sahr' on November 1, 2017 at 6:36pm
वाह वाह आली जनाब समर साहिब बहुत ख़ूब शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ,,,सादर
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 1, 2017 at 5:50pm
वाह.. //किताबों में लिखा है उसको जन्नत की बशारत है, वफ़ा की राह में क़ुर्बान जो घर बार कर देगा//.. बेहतरीन मक़्ते के साथ बेहतरीन ग़ज़ल के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 1, 2017 at 4:08pm

आदरणीय समर सर बहुत ही शानदार ग़ज़ल है ..हर शेर उम्दा है 

हमारे इश्क़ का चर्चा अभी सरगोशियों तक है
जो बाक़ी काम है वो सुब्ह का अख़बार कर देगा

पुराने ज़ख़्म दिल के भर चुके,अब देख लेना वो
हमारे वास्ते पैदा नया आज़ार कर देगा ये दो शेर बेहद पसंद आये ..इस रचना पर हार्दिक बधाई सादर प्रणाम स्वीकार करें 

Comment by नाथ सोनांचली on November 1, 2017 at 1:34pm
सभी ने कर लिया इक़रार, लेकिन जानता है वो
अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा

वआह वाह बाकमाल शैर
हमारे इश्क़ का चर्चा अभी सरगोशियों तक है
जो बाक़ी काम है वो सुब्ह का अख़बार कर देगा

वआह वाह वाह,बहुत बढ़िया,

आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम, किसी एक शैर को क्या कहूँ,इस ग़ज़ल के सभी शेर बहुत उम्दा बन पढ़ें है, हरेक शैर पर दाद के साथ ढेरों मुबारकबाद हाजिर है।
Comment by TEJ VEER SINGH on November 1, 2017 at 1:32pm

हार्दिक बधाई आदरणीय समर क़बीर साहब जी।आदाब। बहुत खूबसूरत गज़ल।

हमारे इश्क़ का चर्चा अभी सरगोशियों तक है
जो बाक़ी काम है वो सुब्ह का अख़बार कर देगा

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