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Nita Kasar
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Nita Kasar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post तज़ुर्बे (लघुकथा)
"बुरे  तजुर्बे ही अच्छे तजुर्बे की राह खोलते है बस हौंसलाअफजाई होना चाहिये कथा के लिये बधाई आद० शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी ।"
Apr 9
Nita Kasar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post ग़ुस्ताख़ी मुआफ़ (लघुकथा)
"उर्दू के कठिन शब्दों ने कथा समझने में परेशानी पैदा की है,पाठक मन शब्दों के मकडजाल में ना उलझकर सामान्य शब्दों को आसानी से समझ पाता है ।एहसास ए बरतनी है या ग़ुरूर ए बरतनी ।ऊपर से निकल गया ।फ़िलहाल कथा के लिये बधाई आद० शेख़ शाहजाद उस्मानी जी ।"
Apr 8
Nita Kasar commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post राजनीति की औकात (लघुकथा)
"क़लम की ताक़त ने तख्तोंताज के ताबूत में कील ठोककर सत्ता परिवर्तन करवा दिया  है ।इतिहास गवाह है जनता ने क़लम का भरोसा किया है बधाई आद० कल्पना भट्ट जी ।"
Apr 8
Nita Kasar commented on Sunil Verma's blog post मछली (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"शुरू में मछली,मेंढक पर आधारित कथा पति पत्नी के मतभेद पर आधारित होती है।वे ये नही जानते उनके इस व्यवहार का असर घर के माहौल और बच्चे पर पड़ता है।अंतिम पंक्ति में पात्रा द्वारा प्रभावी संदेश कथा को सशक्त बनाने में सहायक होता ।कथा के लिये बधाई आद० सुनील…"
Apr 3
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"आयोजन में सहभागिता हेतु बधाई आद० कनक जी ।,वरिष्ठजन कथा के बारे में राय व्यक्त कर चुके है ,संज्ञान लेंवें ।"
Mar 31
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"इस शैली में कथा लिखने का प्रयास करना ही कुछ कम बात नही है ।बधाई आ० शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी ।"
Mar 31
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"खेल के बहाने ही सही मातापिता बेटे के मन में आत्मविश्वास जगाने में सफल हुये ।बच्चे को बचपन लौटाना इससे बड़ी खुशी कोई नही ।बड़ी ही सरलता सादगी से कथा से रूबरू कराते है ।कथा के लिये बधाई प्रेषित है ।"
Mar 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"सूर्यपुत्र कर्ण के मन की पीड़ा को उकेरने का प्रयास किया है आपने ।बोझिल शब्दों के समावेश से कथा की स्पष्टता प्रभावित हो जाती है।कथा के लिये बधाई आद० नयना जी ।"
Mar 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"शीर्षक उम्दा है यदि साँप ,बिच्छु के विष से प्रेरणा लेकर इंसान कुछ सीख पा लेता  तो कथा के जरिये सार्थक  संदेश पहुँचता ।फिर भी आपने प्रयास किया है बधाई आद० आरिफ़  मोहम्मद खान जी ।"
Mar 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-36 (विषय: पराजित योद्धा)
"आयोजन का श्रीगणेश आपकी कथा से ।बधाई कथा उम्दा है।नयापन लिये हुये।बेल की जगह अन्य शब्द प्रतीक स्वरूप इस्तेमाल किया जा सकता है।कथा हेतु बधाई ।आद० तेजवीर सिंह जी ।"
Mar 30
Nita Kasar commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post शर्तों की शतरंज (लघुकथा)
"बच्चे गीले मिट्टी की तरह होते है,मातापिता जैसे चाहे उस साँचे में उन्है ढाल लें ।बच्चों को मालूम होना चाहिये उनकी ज़िद पूरी करने के लिये  पिता को कितना कष्ट कितना उठाना पड़ सकता है ।बाल मनोविज्ञान पर आधारित प्रेरक कथा के लिये बधाई आद० कल्पना…"
Mar 29
Nita Kasar commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post उसकी लाठी आवाज नहीं करती (लघुकथा)
"जैसी करनी वैसी भरनी ।भ्रष्टाचार का घड़ा फूटना ही था ।पर जब ये कर्म किये जाते है ।तब व्यक्ति किसी से नही डरता पर भगवान की लाठी में आवाज़ नही होती ।उम्दा कथा है आद० सुरेंद्र नाथ कुशक्षत्रप जी ।"
Mar 29
Nita Kasar commented on VIRENDER VEER MEHTA's blog post आदर्शवाद - लघुकथा
"पत्थरबाज़ दोषी हो सकते है उनके परिवार वाले नही ।आदशवाद विचारों से आता है यदि वे पढ़ेलिखे शिक्षित होते तो एेसी घटनाओं में शामिल ना होते ।समाज की मुख्यधारा शामिल करने से ही से ही उन्है भटकाव से बचाया जा सकता है ।उम्दा कथा के लिये बधाई आद० वीरेंद्र…"
Mar 29
Nita Kasar commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--कठपुतली
"व्यंग्यपूर्ण कथा,नेताओं पर आधारित कथा के लिये बधाई आद० मोहम्मद आरिफ़ जी ।वे हाईकमान के इशारों पर नाचते है ।"
Mar 24
Nita Kasar commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा- हिंसा
"कुछ शब्दों को प्रतीक बना कर आपने उम्दा कथा लिखी है।कथा के लिये बधाई आद०मोहम्मद आरिफ़ जी ।"
Mar 12
Nita Kasar commented on TEJ VEER SINGH's blog post महामूर्ख  -  लघुकथा  –
"धार्मिक ग्रंथों के बारे में कुछ क्छ सब को मालूम रहती है पर उनको कल्पना शक्ति के आधार पर कथा का तानाबाना बुनना कठिन व रोचक कार्य है ।आपने सुंदर प्रयास किया है ।बधाई आद० तेजवीर सिंह जी ।"
Mar 10

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लघु कथा

"अपमान "



'जल्दी से आ जा मोनू ,खाना गरम है,खा लें,सबके साथ ।

क्या जल्दी है ,माँ खाना खाना लगा रखा है ?

आते साथ चुपचाप बैठा देख माँ से रहा ना गया।

हाथ धोकर आजा बेटा, फिर खाना खाने बैठ।

जितना तुझे ज़रूरत हो उतना ही लेना,छोड़ना मत ।माँ ने लाड़ले को समझाना चाहा ।

'अब पेट कोई कमरा नही है खाता जाऊँगा ,थोड़ा छूट गया तो क्या फ़र्क़ पड़ता है ?

ये अन्नदेव का अपमान है बेटा ।

वो कैसे ?जिस दिन तुम्है ग़ुस्सा आ जाता है,और उस दिन तुम खाना नही खाते तब ये संतुलन और… Continue

Posted on September 12, 2016 at 9:30pm — 3 Comments

वृद्धाश्रम: लघुकथा

कौन है जो घंटी बजा रहा है,?चौकीदार तुम से काम ढंग से नही होता तो काम छोड़ दो।

'मेडम जी एक बुड्डा आया है,जिद्दी है कहता मिलना ज़रूरी है।

"देख राजू आख़िरी चेतावनी है तेरे लिये आलतू ,फ़ालतू लोगों को भगा नही सकता चले आते है समय बेसमय।

लगता हैवह इनाम की आस में आया है , हमारे टामी का विज्ञापन पढ़कर।"

अरे! क्या कह रहे हो राजू उसे बैठक में बैठाओ ,पानी,चाय लेते आना ,अभी आती हूँ।

बाहर ससुर को देखकर मालकिन के पाँव तले ज़मीन खिसक गई ।

"बेटा ,टामी वृद्धाश्रम आ गया था मेरे…

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Posted on August 2, 2016 at 9:00pm — 8 Comments

फेरे लघुकथा

फेरे '



घर के काम से फ़ुरसत हो थोड़ा आराम करने जा ही रही थी , वक़्त बेवक्त घंटी के बजते ही मन में आया इस समय कौन होगा, अभी सूरज के आने का समय तो हुआ नहीं है, दरवाज़े पर पति को देख मैं चकित रह गई।

"अरे आप !!!!" पति को अचानक सामने ,पसीने से तरबतर देख ,अपने आप को बोलने से रोक ना पाई।

पानी लेने जा रही थी, सूरज ने हाथ पकड़ कर रोक लिया।

"तुमसे कुछ कहना है मुझे सुमन, मैं फिसल गया, रोशनी से संबंध बना बैठा , मुझे माफ़ करोगी ना मुझे हर सज़ा मंज़ूर है।

तुम्हारे,बच्चों के बिना… Continue

Posted on December 26, 2015 at 6:20pm — 8 Comments

फूल चोर

"फूल चोर"



मंदिर में वर्मा जी की थाली में अपने बागीचे के विदेशी फूल देखकर वृंदा के आश्चर्य का ठिकाना न रहा। वे पूजा की थाली हाथ में पकडे मूर्ति के सामने खड़े हुए थे, जिसे देखकर वृंदा के चेहरे पर अविश्वास और क्रोध के मिश्रित भाव उभर आए।



दरअसल बचपन से ही वृंदा को जूनून की हद तक बागवानी का बेहद शौक था। तरह तरह से रंग सजावटी पौधों, हरी भरी घास, रंग बिरंगे फूलों तथा विभिन्न प्रकार के बेल बूटों से भरा बगीचा पूरी कॉलोनी में चर्चा का विषय बन चुका था। जो भी देखता, बगीचे और वृंदा की… Continue

Posted on October 19, 2015 at 5:04pm — 25 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 1:46pm on November 16, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
हृदयतल से बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ आदरणीया नीता कसार जी आपकी लघु-कथा "फूल चोर" को इस माह की सर्वश्रेष्ठ कृति चुने जाने पर। समाज में व्याप्त किसी भी छोटी सी या बड़ी बुराई या ग़लत मानसिकता पर तीखा व्यंग्य या कटाक्ष करते हुए उत्कृष्ट लघु कथा सृजन करते हुए आपकी लेखनी वास्तव में सम्मानीय व अनुकरणीय है। सादर बधाई। आशा है हम नव रचनाकारों को आपकी और भी बेहतरीन लघु कथाएँ पढ़ने का अवसर मिलता रहेगा।
At 1:13pm on November 16, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया नीता कसार जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "फूल चोर" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:07pm on July 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 4:59pm on June 28, 2015, Nita Kasar said…
"बंधन"
स्वर्ण आभूषणों क़ीमती कपड़ों की चकाचौंध से उसका रूप सौंदर्य दमक रहा था, स्वर्ग से अप्सरा उतर आई हो जैसे।
और कोई होती तो मारे ख़ुशी से बावली हो जाती, पर नाम की लक्ष्मी का मन डूबा जा रहा था।
लोग क़यास लगाने में उलझे हुये थे।
पर कुछ जोड़ी अनुभवी आँखें युवती
की मन, की मलिनता समझ रही थी पर मजबूर थी। उनके हाथ बँधे जो थे।
"तू जल्दी से तैयार हों जा लक्ष्मी, सरपंच के बेटे की बहू बनकर जा रही है बहुत खुश रहेगी।
सुनो न माँ ------।कुअें से डूबती आवाज़ से पुकारा लक्ष्मी ने । माँ लौटी नसीहत के साथ, 'रानी बनकर राज करेगी ' लाड़ों, कहकर माँ ने उसके गोरे,गोरे गाल थपथपा दिये, पर वे शर्मो हया के मारे लाल न हुये ।
'दुल्हन को बुलाओ, मुहुरत निकला जा रहा है'। पर उसका निर्णय अटल था
वह घर के पिछले दरवाज़े से निकल चुकी थी अपनी पसंद के साथ, प्रेमपथ पर, आज़ाद हो सारे बंधनों से ।
एक एेसी नदी जिसे कोई बाँध, बंधन मंज़ूर नही, अनवरत चाहती थी, उन्मुक्त हो निर्बाध बहना ।

मौलिक व अप्रकाशित नीता कसार
जबलपुर (म०प्र) ।
At 2:58pm on June 24, 2015, Nita Kasar said…
सुलझती उलझन

पिछली कुछ रातों से मनु चैन से सो न पाया अक्सर आये सपने से चौंक कर उठ कर बैठ जाता ।
छोटा बच्चा नहीं है वह मिनी से शादी करता पर माँ पापा की कट्टरता के आगे समर्पण कर बैठा।
अब आजीवन जेल में रहना होगा क्या मुझे जेल में नही !!!!!!
वह बिन ब्याही मिनी और उसके बच्चे का पिता होने के जुर्म में सवालों के पीछे पहंुच गया ।
मनु आदतन अपराधी नही था पूरी ज़िंदगी उसके और मिनी के सामने थी ।अदालत ने इसी आधार पर उसकी ज़मानत अर्ज़ी मंज़ूर कर ली ।
अब वह बेटे को अपना नाम देगा,अच्छा पति बनेगा ।ज़िम्मेदारियों के अहसास ने उसे कश्मकश के भँवर से भी मुक्त कर दिया ।
नीता कसार
जबलपुर
मौलिक व अप्रकाशित ।
At 7:33pm on April 29, 2015, Nita Kasar said…
दर ए दीवार लघुकथा ।
एक ही मोहल्ले में,एक ही गली में रहने वाले दो परिवार,अपनापन इतना ज़्यादा कि लोग एक ही परिवार समझते।
वक़्त की नज़ाकत,व बड़ों का बचपना,दोनों मंे अनबोला हो गया।
हालत इतने बिगड़ गये कि एक दूसरे कि सूरत देखना गवांरा नही था।
अचानक आये भूकंप ने सबको स्तब्ध कर दिया।
भूकंप की थरथराहट ने दीवार को ज़मींदोज़ कर
दिया ।
क़ुदरत के क़हर के आगे सब बौने है?

अप्रकाशित मौलिक

नीता कसार
At 7:43am on April 29, 2015, Nita Kasar said…
Thank you
At 11:41pm on April 9, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !

 
 
 

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