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कथ्य-शिल्प गोष्ठी-०२ एक रपट

कथ्य-शिल्प गोष्ठी-०२ एक रपट
बनारस की साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था द्वारा कथ्य शिल्प गोष्ठी का आयोजन रविवार १२ दिसंबर को चेतगंज स्थित मंशाराम फाटक सभागार में किया गया |अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार और 'सोच-विचार'के संपादक डॉ.जीतेंद्र नाथ मिश्र ने की |विषय प्रवेश दानिश जमाल ने किया |
इस बार चयनित युवा रचनाकार अभिनव अरुण (अरुण कुमार पाण्डेय अभिनव)ने अपनी चुनिन्दा दस रचनाओं का पाठ किया | इस पर…
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Added by Abhinav Arun on December 13, 2010 at 1:54pm — 4 Comments

विधि का विधान : प्रो. सत्यसहाय दिवंगत.....

विधि का विधान : प्रो. सत्यसहाय दिवंगत.....
संजीव वर्मा 'सलिल' SS Shrivastava.jpg
वयोवृद्ध शिक्षाविद-अर्थशास्त्री प्रो. सत्यसहाय श्रीवास्तव
बिलासपुर, छत्तीसगढ़ २८.११.२०१०. स्थानीय अपोलो चिकित्सालय में आज देर रात्रि विख्यात अर्थशास्त्री, छत्तीसगढ़ राज्य में महाविद्यालायीन शिक्षा के सुदृढ़ स्तम्भ…
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Added by sanjiv verma 'salil' on December 13, 2010 at 2:07am — 3 Comments

GHAZAL - 12

                               ग़ज़ल





आ  जाओ  हमारी  बांहों  में,   कुछ   प्यार   मोहब्बत   हो  जाये |

ये    प्यार   इबादत   होता   है,  आओ   ये   इबादत  हो   जाये ||



दुनिया  से  भला  क्या   घबराना, जलता  है  कोई  तो  जलने  दो.

आ  जाओ  मिला  लें  दिल  से दिल,  दुनिया से…

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Added by Abhay Kant Jha Deepraaj on December 13, 2010 at 12:30am — 1 Comment

महल्ला का गुंडा , देश का गुंडा , दुनिया का गुंडा

महल्ला का गुंडा , देश का गुंडा , दुनिया का गुंडा .



देश की सीमा कि तरह गुंडो का भी अधिकार क्षेत्र होता है। जैसे महल्ले का गुंडा ,…

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Added by madan kumar tiwary on December 12, 2010 at 10:00pm — No Comments

विज्ञान के विद्यार्थी का प्रेम गीत

अवकलन समाकलन

फलन हो या चलन-कलन

हरेक ही समीकरन

के हल में तू ही आ मिली



घुली थी अम्ल क्षार में

विलायकों के जार में

हर इक लवण के सार में

तु ही सदा घुली मिली



घनत्व के महत्व में

गुरुत्व के प्रभुत्व में

हर एक मूल तत्व में

तु ही सदा बसी मिली



थीं ताप में थीं भाप में

थीं व्यास में थीं चाप में

हो तौल या कि माप में

सदा तु ही मुझे मिली



तुझे ही मैंने था पढ़ा

तेरे सहारे ही बढ़ा

हुँ आज भी वहीं खड़ा

जहाँ मुझे थी तू…

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Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on December 12, 2010 at 6:33pm — 3 Comments

मैंने लिखना छोड़ दिया

जब शब्द पड़ गए कम तो मैंने लिखना छोड़ दिया

जब आँखें न हुई नम तो मैंने लिखना छोड़ दिया

पूछा गया के तुमने महफिल में दिखना छोड़ दिया

हम बोले की हमने बिकना छोड़ दिया

न लडखडाये उस वक्त जब राहों में रुकना छोड़ दिया

उड़ने लगे जो आसमां में हम तो कदमों ने दुखना छोड़ दिया

पीते थे जिस जाम में उस जाम को मैंने तोड़ दिया

लिखते लिखते लिख पड़ी कलम के मैंने लिखना छोड़ दिया

Added by Bhasker Agrawal on December 12, 2010 at 4:31pm — 2 Comments

GHAZAL - 10

                           ग़ज़ल





महबूब   मेरे   सूरत   तेरी,   मुझे   इतनी   प्यारी   लगती   है |

सौ  जन्मों  से  भी  पहले  की,  तेरी  -  मेरी   यारी   लगती   है ||



तेरा  प्यार  मेरी रग़ - रग़ में बसा है, बन के नशा हमराज़ मेरे,

एक  पल  की   भी  तन्हाई  मुझे,  कातिल …

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Added by Abhay Kant Jha Deepraaj on December 12, 2010 at 1:30pm — No Comments

GHAZAL - 4

                                   ग़ज़ल



छोटे  से  दिल  में  दुनिया  का,   दर्द   छुपाये  फिरता  हूँ |

आंसू  के   फूलों  से   अपनी,   लाश   सजाए   फिरता  हूँ ||



अपना  बनकर  दिल  को  लूटना,  है  दस्तूर ज़माने का,

मैं  ऐसे  ही  कुछ  रिश्तों  पे,  खुद  को  लुटाये फिरता हूँ…

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Added by Abhay Kant Jha Deepraaj on December 12, 2010 at 1:00pm — 1 Comment

GHAZAL - 3

                                 ग़ज़ल



हर  पल  दिल  ने  तुझे  पुकारा  है यूँ अय हमराज़ मेरे |

भींग   गए   हैं   रोते-रोते   आंसू   से   हर   साज़   मेरे ||



जी  करता  है -   इन  रश्मों  की  दीवारों  से  लड़ जाऊं,…

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Added by Abhay Kant Jha Deepraaj on December 12, 2010 at 12:30pm — 1 Comment

GHAZAL - 9

                                  ग़ज़ल



मित्रों , हमें ज्ञान का दीपक  घर-घर  आज  जलाना  होगा |

भटक  गयी है जो  मानवता ,  उसको  राह  दिखाना  होगा ||



दिल  से  दिल  को आज जोड़ना होगा हमको आगे बढ़कर,…

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Added by Abhay Kant Jha Deepraaj on December 12, 2010 at 2:00am — 1 Comment

GHAZAL - 2

                                ग़ज़ल



यारों ,   पापों  के  हिंडोले  की  यह  डोली   बहुत   बुरी   है |

होली  खेलो   मगर   खून  की  होली  यारों  बहुत  बुरी  है ||



तन से मानव बहुत मिलेंगे पर तुम बनना मन से मानव,

गोली  बनो  दवा  की …

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Added by Abhay Kant Jha Deepraaj on December 12, 2010 at 1:30am — 2 Comments

कविता : हवाई जहाज

हवाई जहाज को

दुनिया और ख़ासकर शहर

बड़े खूबसूरत नजर आते हैं

सपाट चमचमाती सड़कों से उड़ना

रुई के गोलों जैसे

सफेद बादलों के पार जाना

हर समय चमचमाते हुए

हवाई अड्डों पर उतरना या खड़े रहना

दरअसल

असली दुनिया क्या होती है

हवाई जहाज

ये जानता ही नहीं

वो अपना सारा जीवन

असली दुनिया से दूर

सपनों की चमकीली दुनिया में ही बिता देता है



हवाई जहाज भी क्या करे

उसका निर्माण किया ही गया है

सपनों की दुनिया में रहने के लिए

वो रिक्शे या साइकिल…

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Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on December 11, 2010 at 8:20pm — 1 Comment

पल : जो तुम संग बिताये..

आँखों में तुम बसे हो ऐसे ..

कोई अधुरा ख्वाब हो जैसे !

वो तुम्हारा कुछ पलों का साथ

और उन पलों में तुम्हारा असीमित प्यार

तमाम उम्र के लिए अपनी पलकों में

कैद कर के रख लिया ...

वो हसीन से लम्हे

शरीर से लम्हे .

जिन लम्हों को तुम संग जिया

सम्हाल के उनको रख लिया ...

न जाने क्या बात हुई

खफा हो गए मुझसे तुम

यूँ मुंह फेरे बैठे हो

'जैसे'

मैं 'हूँ' , कोई बीता हुआ पल

कोई गुजरा…

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Added by Anita Maurya on December 11, 2010 at 4:25pm — 4 Comments

बड़े भोले हम भारत वासी ,

बड़े भोले हम भारत वासी ,

जादू तो हमपे चल जाता हैं ,

कोई लूटे लाखो काटे चाँदी ,

मेहरबानी हम कर जाते हैं ,

ये सब हुई अब पुरानी बाते ,

खुल रही हैं अब अपनी आँखे ,

अब चोरो को मार भगायेंगे ,

जो कम करेंगे आगे जायेंगे ,

वो भी अब ना बच पायेंगे ,

जो बने उनका रहम वाली ,

बड़े भोले हम भारत वासी ,

अब जो भी लूट मचाएगा ,

वो एक दिन पकड़ा जायेगा ,

उसकी कुशल नही अब यारो ,

कानून अपना चक्कर चलाएगा ,

जो कानून को धोखा दे जाये ,

तब गुरु…

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Added by Rash Bihari Ravi on December 11, 2010 at 11:30am — 2 Comments

एक दीप कहीं यूँ भी जलाया होता........

एक दीप कहीं यूँ भी जलाया होता,


किसी नन्हे से दिल--दिमाग़ को रोशिनी…
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Added by Lata R.Ojha on December 11, 2010 at 2:00am — 2 Comments

रात..........

लिटाया तकिये पे हौले से थपकियाँ देकर .

और परियों की कहानी भी सुना डाली हैं...

उनींदी रात ये जगार की एक जिद सी लिए बैठी है...

चाँद आये तौ मैं कह दूंगा सुला दौ इसको...

तमाम ख्वाब मेरे खिडकियों पे बैठे हैं....…
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Added by Sudhir Sharma on December 10, 2010 at 11:19pm — 4 Comments

GHAZAL - 8

                       ग़ज़ल



मेरी  मौत  के  बाद  मेरा  गम,  तुझको  बहुत सताएगा |

मेरे  दिल  का  ये  भोलापन,   तुझको   बहुत   रुलाएगा ||


आज  शरारत  मेरी  तुझको,  शायद  बोझिल  लगती हैं ,

कल   मेरी   ख़ामोशी   का   वो,…
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Added by Abhay Kant Jha Deepraaj on December 10, 2010 at 9:00pm — 1 Comment

कविता :- माफ करना स्वस्तिका

कविता :- हमें माफ करना स्वस्तिका

हमें माफ करना स्वस्तिका

हमने भुला दी है इंसान होने की संवेदना

अब हमें तुम्हारे…

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Added by Abhinav Arun on December 10, 2010 at 4:51pm — 14 Comments

आँखों में सपने सजाये हुए - सजाये हुए ,

आँखों में सपने सजाये हुए - सजाये हुए ,
आज द्वार पे तेरे हम आये हुए ,
दरस तू देदे एक झलक दिखा दे ,
मन की अर्ज यार पूरा तू कर दे ,
सच आँखों में सूरत बसाये हुए - बसाये हुए ,
आँखों में सपने सजाये हुए - सजाये हुए ,
तुमसे ही जीवन ये पार लगेगी ,
तेरे ही चाहत में जीवन कटेगी ,
तू तो साथी मेरे सुख दुःख के यारा ,
रखूँगा पलकों में छुपाये हुए - छुपाये हुए ,
आँखों में सपने सजाये हुए - सजाये हुए ,

Added by Rash Bihari Ravi on December 10, 2010 at 4:16pm — 1 Comment

आखरी पन्नें-4 दीपक शर्मा' कुल्लुवी'





गतांक से आगे
आखरी पन्नें-4 दीपक शर्मा कुल्लुवी
कितना बदल गया



मेरा शहर कितना बदल गया

मेरे वास्ते अब क्या रहा

मेरा शहर कितना बदल -----

न वोह मंजिलें न वोह रास्ते

जो कभी थे मेरे…
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Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 10, 2010 at 3:00pm — 1 Comment

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