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Naveen Mani Tripathi's Blog – September 2016 Archive (8)

ग़ज़ल - जिंदगी है ढ़लान पर भाई

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आज मुद्दा ज़ुबान पर भाई ।

गोलियां क्यूँ जवान पर भाई ।।



उठ रहीं बेहिसाब उँगली क्यूँ ।

इस लचीली कमान पर भाई ।।



कुछ वफादार हैं अदावत के।

तेरे अपने मकान पर भाई।।



बाल बाका न हो सका उनका।

खूब चर्चा उफान पर भाई ।।



मरमिटे हम भी तेरी छाती पर।

चोट खाया गुमान पर भाई ।।



बिक रही दहशतें हिमाक़त में ।

उस की छोटी दुकान पर भाई ।।



गीदड़ो का फसल पे हमला है ।

बैठ ऊँचे मचान पर भाई ।।



यार… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 27, 2016 at 12:34am — 4 Comments

ग़ज़ल - मेरी ग़ज़ल पे निशाना है बात क्या करना

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बड़ा खराब ज़माना है बात क्या करना ।

मेरी ग़ज़ल पे निशाना है बात क्या करना ।।



नहीं है नज्म की तहजीब जिस मुसाफिर को ।

उसी से दिल का फ़साना है बात क्या करना ।।



अजीब शख़्स यूँ पढ़ता उन्हीं निगाहों को ।

किसी को वक्त गवाना है बात क्या करना ।।



बिखर गए है तरन्नुम के हर्फ़ महफ़िल में ।

नजर नज़र से मिलाना है बात क्या करना ।।



हुजूर जिन से दुपट्टे कभी नही सँभले ।

उसे भी घर को बसाना है बात क्या करना ।।



दिखी है… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 25, 2016 at 6:00pm — 16 Comments

ग़ज़ल - आँख जब भी कभी लड़ी होगी

बहरे ख़फ़ीफ़ मुसद्दस् मख़बून

फाइलातुन मुफाइलुन् फेलुन



2122 1212 22



उन अदाओं में तिश्नगी होगी ।

कोई खुशबू नई नई होगी ।।



यूं ही नाराजगी नही होती ।

बात उसने भी कुछ कही होगी ।।



होश आया कहाँ उसे अब तक ।

कुछ तबीयत मचल गई होगी ।।



बेकरारी का बस यही आलम ।

बे खबर नींद में चली होगी ।।



कर गया इश्क में तिज़ारत वह ।

शक है नीयत नहीं भली होगी ।।



वो बगावत की बात करता है ।

खबर शायद सही पढ़ी होगी… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 24, 2016 at 11:54am — 12 Comments

ग़ज़ल - कब तक खिंजां का साथ निभाया करेंगे आप।

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चिलमन तमाम वक्त हटाया करेंगे आप ।

तश्वीर महफ़िलों में दिखाया करेंगे आप ।।



चुप चाप आसुओं को छुपाया करेंगे आप ।

कुछ बात मशबरे में बताया करेंगे आप।।



मुझको मेरे नसीब पे यूं छोड़िये जनाब ।

कब तक खिंजां का साथ निभाया करेंगे आप।।



तहज़ीब मिट चुकी है जमाने के आस पास ।

बुझते मसाल को न जलाया करेंगे आप।।



यह बात सच लगी कि मुकद्दर नही है साथ ।

मेरे ज़ख़म पे ईद मनाया करेंगे आप ।।



आजाद आसमा के परिंदे हैं बदजुबान… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 10, 2016 at 3:44pm — 2 Comments

दोहे

बलात्कार पर कर रहे मोदी बिल को पेश ।

दलित नही महिला अगर होगा हल्का केस ।।



ब्लात्कार में भेद कर तोड़ा है विश्वास ।

अच्छे दिन अब लद गए टूटी सबकी आस ।।



कितना सस्ता ढूढ़ता कुर्सी का वह मन्त्र ।

मोबाइल के दाम में बिक जाता जनतन्त्र ।।



सड़को पर इज्जत लुटे मथुरा भी हैरान ।

न्याय बदायूं मांगता सब उनके शैतान ।।



नए सुशासन दौर में जनता है गमगीन ।

सौगातों में ला रहे वही सहाबुद्दीन ।।



छूटा गुंडा जेल से जिसका था अनुमान ।

जंगल… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 10, 2016 at 12:28am — 6 Comments

ग़ज़ल : गालों पर है रंग गुलाबी तौबा तौबा

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गालों पर है रंग गुलाबी तौबा तौबा ।

मतवाली की चाल शराबी तौबा तौबा ।।



कातिल शम्मा रात जला कर लूटे हस्ती।

नयी अदा में बात नबाबी तौबा तौबा ।।



अंदाजों से हुस्न बयां वो आधा है अब ।

हुई हया से आँख हिजाबी तौबा तौबा ।।



खंजर दिल पे मार गई है हक से यारों ।

पढ़ती है वो रोज तराबी तौबा तौबा ।।



खैरातों में इश्क बटा कब उस के दर पे ।

निकली वह भी खूब हिसाबी तौबा तौबा ।।



अंगड़ाई न ले तू खुले दरीचों से अब…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 5, 2016 at 9:30pm — 8 Comments

ग़ज़ल : टूटती सारी हदें सड़कों पे अब

212 22 12 22 12

टूटती सारी हदें सड़कों पे अब ।

लुट रहीं हैं इज्जतें सड़को पे अब ।।



ऐ मुसाफिर देख जंगल राज ये ।

फिर खड़ी है जहमतें सड़कों पे अब ।।



हैं बहुत दागी यहां की खाकियां ।

बिक रही है हरकतें सड़को पे अब ।।



हो चुके हैं राज में गुंडे बहुत ।

लग रहीं हैं महफ़िलें सड़कों पे अब ।।



दिख रही इंसानियत की बेबसी ।

हर तरह की सोहबतें सड़कों पे अब ।।



बाप जिन्दा लाश बनकर रह गया ।

मिट गयीं सब अस्मतें सड़को पे अब ।।…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 3, 2016 at 5:30am — 4 Comments

ग़ज़ल: शूलियों पर चढ़ चुकी सम्वेदनायें

212 22 12 22122



शूलियों पर चढ़ चुकी सम्वेदनायें ।

बाप के कन्धों पे बेटे छटपटाएं ।।



लाश अपनों की उठाये फिर रहा है ।

दे रही सरकार कैसी यातनाएं ।।



है यही किस्मत में बस विषपान कर लें ।

दर्द की गहराइयां कैसे छुपाएँ ।।



सिर्फ खामोशी का हक अदने को हासिल ।

डूबती हैं रोज मानव चेतनाएं ।।



हम गरीबों का खुदा कोई कहाँ है ।

मुफलिसी पर हुक्मरां भी मुस्कुराएं।।



वो करेंगे जुर्म का अब फैसला क्या ।

जो नचाते सैफई में…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 1, 2016 at 9:30pm — 6 Comments

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