For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Featured Blog Posts – October 2015 Archive (6)


सदस्य कार्यकारिणी
ऐ सुखनवर साथ चल -- (ग़ज़ल) -- मिथिलेश वामनकर

2122---2122---2122---212

 

दौर बदला है, बदल जा,   ऐ सुखनवर साथ चल 

सोचता है जिस जबां में, उस जबां में लिख ग़ज़ल

 

जिंदगी बदलाव है...... गर थम गए…

Continue

Added by मिथिलेश वामनकर on October 29, 2015 at 2:44pm — 36 Comments

राम जी रावणी मन हुआ है (दशहरा विशेष)

2122 122 122 2122 122 122



किस तरह से दशहरा मनायें; राम जी रावणी मन हुआ है।

राम नामी वसन पर न जायें, राम जी रावणी मन हुआ है।।



वासना से भरा है कलश ये, हो गया कामनाओं के वश में।

भेष साधू का झूठा, भुलायें राम जी रावणी मन हुआ है।।



स्वर्ण का ये महल चाहता है, मन्त्र बस धन का ये बांचता है।

किस तरह से "स्वयं" को जगायें, राम जी रावणी मन हुआ है।।



स्वार्थ का आचरण हर घड़ी है, नेक नीयत दफ़न हो गयी है।

आज खुद को विभीषण बनायें, राम जी रावणी मन…

Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on October 22, 2015 at 7:00pm — 6 Comments

वो जाग रहे हैं

वो जाग रहे हैं

दिन है फिर भी जाग रहे हैं

अक्सर वो रात में जागते है

अँधेरी और खामोश रात में

अब वो दिन में भी जाग रहे हैं

रात रौशन जो हो रही है

उन्हें एतराज़ है इस बात पर

रात रौशन क्यों है

वो बहुत गुस्से में है

वो बहुत गुस्से में है

वो साबित करना चाहते है

वो भी प्रहरी है

सूखी हुई खेती के

और उसको काटने नहीं देगे

और अपने मुलायम आसान से उतर आये है

वो अनशन भी कर सकते है

उन्हें डायबटीज़ है मानसिक

मीठा नहीं खा… Continue

Added by Manoj kumar Ahsaas on October 21, 2015 at 8:21pm — 10 Comments

फूल चोर

"फूल चोर"



मंदिर में वर्मा जी की थाली में अपने बागीचे के विदेशी फूल देखकर वृंदा के आश्चर्य का ठिकाना न रहा। वे पूजा की थाली हाथ में पकडे मूर्ति के सामने खड़े हुए थे, जिसे देखकर वृंदा के चेहरे पर अविश्वास और क्रोध के मिश्रित भाव उभर आए।



दरअसल बचपन से ही वृंदा को जूनून की हद तक बागवानी का बेहद शौक था। तरह तरह से रंग सजावटी पौधों, हरी भरी घास, रंग बिरंगे फूलों तथा विभिन्न प्रकार के बेल बूटों से भरा बगीचा पूरी कॉलोनी में चर्चा का विषय बन चुका था। जो भी देखता, बगीचे और वृंदा की… Continue

Added by Nita Kasar on October 19, 2015 at 5:04pm — 25 Comments

स्वेटर (लघुकथा)

जनवरी की हड्डी कंपा देने वाली ठंड..मैं ऊपर से नीचे तक गर्म कपड़ों के बावजूद कांप रही थी ।कक्षा में पहुंच कर एक नजर, मेरे सम्मान में खड़े सभी बच्चों पर डाली और बैठने का इशारा किया । तभी मेरी नजर उन बच्चों पर पड़ी जिनके बदन पर कपड़ों के नाम पर बस कपड़ों का नाम था।मैंने उन सभी बच्चों को खड़ा कर दिया ।

"क्यों!स्वेटर कहां है तुम्हारे?स्कूल से स्वेटर के लिये पैसा मिला ना तुम लोगों को फिर..?"लहजा सख्त था । बच्चे सहम गये ।फिर सामने जो कहानी आई बेशक अलग-अलग थी लेकिन नतीजा एक,कि उनके अभिभावक सारा…

Continue

Added by Rahila on October 18, 2015 at 9:30pm — 39 Comments

शोधन मन का बहुत जरूरी!

शोधन मन का बहुत जरूरी,
क्यों खलता है खालीपन ?
**
बैठो कभी सरित के तट पर
गाते हैं मधुवन
बजते स्वर सुधियों के मद्धिम 
मधुरिम सा गुंजन
 …
Continue

Added by kalpna mishra bajpai on October 11, 2015 at 9:00am — 11 Comments

Featured Monthly Archives

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post गजल- कोख में आने से साँसों के ठहर जाने तक
"आद0 रवि भसीन 'शाहिद' भाई जी सादर अभिवादन आपकी दाद पाकर प्रफुल्लित हूँ। शुक्रियः आपका। सादर"
1 hour ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post गजल- कोख में आने से साँसों के ठहर जाने तक
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' साहिब, आदाब! आपको इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर दिली…"
2 hours ago
Usha Awasthi posted a blog post

शिवत्व

जब मन वीणा के तारों पर स्वर शिवत्व झन्कार हुआचिरकालिक,शाश्वत ,असीमप्रकटा , अमृत संचार हुआनिर्गत हुए…See More
2 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

गजल- कोख में आने से साँसों के ठहर जाने तक

बह्र- 2122   1122   1122  112/22कोख में आने से साँसों के ठहर जाने तकज़िन्दगी में सकूँ मिलता नहीं मर…See More
2 hours ago
anjali gupta posted a blog post

ग़ज़ल

221 1221 1221 122शतरंज में रिश्तों की मैं हारा नहीं होता  अपनों को बचाने में जो उलझा नहीं होतायादें…See More
2 hours ago
आशीष यादव posted a blog post

उसने पी रखी है

2122 2122 2122 2122वो न बोलेगा हसद की बात उसने पी रखी है सिर्फ़ होगी प्यार की बरसात उसने पी रखी…See More
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मौत की दस्तक है क्या...)
"मुहतरम जनाब रवि भसीन शाहिद साहिब आदाब।हक़ीर की ग़ज़ल पर आपकी आमद, सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई के…"
16 hours ago
Madhu Passi 'महक' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post झूलों पर भी रोक लगी -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी नमस्कार ।वर्तमान की मुख्य समस्या करोना पर एक प्रेयसी की…"
18 hours ago
Madhu Passi 'महक' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल -दौर वह यारो गया और उसके दीवाने गए
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' सादर नमस्कार! आज की राजनीति पर कटाक्ष करती सुंदर…"
18 hours ago
Madhu Passi 'महक' commented on सालिक गणवीर's blog post लोग घर के हों या कि बाहर के...(ग़ज़ल : सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी सादर नमस्कार। बहुत ही भावपूर्ण व सुन्दर ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद।"
19 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post वो भी नहीं रही (ग़ज़ल - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"आदरणीया Madhu Passi 'महक' साहिबा, नमस्कार! आपकी नवाज़िश और प्रोत्साहन के लिए…"
21 hours ago
Madhu Passi 'महक' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post वो भी नहीं रही (ग़ज़ल - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी नमस्कार । ग़ज़ल बहुत अच्छी हुई है। हर शैर दिल को छू गया। इसके…"
23 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service