For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (19,159)

" ARUNA shanbhag " -A most sorrowful story in the world

" ARUNA shanbhag " -A most sorrowful story in the world

****************************

किस लिए मासूम रूहों को तड़पने की सज़ा...

अपने बंदों की ख़ुशी से क्यूँ जला करता है तू...

मुंसिफ़े-तक़दीर मिल जाएगा तो पूछेंगे हम...

किस बिना पे…

Continue

Added by Dinesh Choubey on March 7, 2011 at 5:00pm — 1 Comment

अबला जीवन तेरी हाय यही कहानी!

8 मार्च -अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष



जंग ए आजादी के दौर में राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त ने आंख के आंसूओं में अपनी कलम डूबाकर इन पंक्तियों की रचना की थी

अबला जीवन तेरी हाय यही कहानी !

आंचल में है दूध और आंखों में पानी

आज़ादी के दौर में यह कहानी बहुत कुछ बदल चुकी है। देश की महिलाएं  सातवें आसमान में देश का झंडा गाड़कर कल्पना चावला बन रही हैं। किरन बेदी बनकर अपराधियों से लोहा ले रही हैं। अरुणा राय और मेधा…

Continue

Added by prabhat kumar roy on March 7, 2011 at 7:00am — No Comments

नकल का कलंक और नकेल

कई तरह के माफिया की बातंे जिस तरह अक्सर होती हैं, कुछ उसी तरह छत्तीसगढ़ में पिछले बरसांे मंे षिक्षा माफिया भी सक्रिय रहे। छत्तीसगढ़ के कई जिले नकल के लिए ही बदनाम हुए और नकल के कलंक को आज भी ढो रहे हैं। हालांकि आज स्थिति कुछ बदली हुई नजर आती हैं। सरकार और षासन की नीतियांे में बदलाव का ही परिणाम है कि फिलहाल इस बरस की बोर्ड कक्षाआंे में नकल पर नकेल होना, नजर आ रहा है। पिछले दो बरस में हुई परीक्षा की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही। इस सख्ती का सीधा असर छात्रांे की संख्या पर देखी जा सकती है। कई जिलांे में… Continue

Added by rajkumar sahu on March 7, 2011 at 12:46am — No Comments

मैंने प्यार किया था...............

तुमसे कितना प्यार किया ऐ कभी समझा नहीं                  

                 तुम्हारे न आने पर हम कितने उदास होते थे                   

 तुम्हें हम कितना याद करते थे,                                    

               आपने ओ कभी महसूस नहीं किया                                                  

 आप पे हमने कितना…

Continue

Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on March 6, 2011 at 8:00pm — No Comments

कहावत है की प्यार जहाँ, दर्द, वहाँ , आखिर ऐसा क्यूँ ?

कहावत है की प्यार जहाँ, दर्द, वहाँ ,  आखिर  ऐसा क्यूँ ?



प्यार, दर्द, एहसास, सच और झूठ सब मिलकर ' छुपा -छुपी ' का खेल खेलने का फैसला किया ! और जैसे ही दर्द ने छुपाने को कहा सब अपने-अपने जगह छुप गए, फिर दर्द ने गिनती सुरु की और सब पकडे भी गए, पर प्यार पकड़ा नहीं गया, क्यूंकि प्यार गुलाब की झाड़ियों में जा छुपा था, सब ने मिलकर प्यार को खोज निकाला, फिर दर्द ने प्यार को खीचा, गुलाब की झाड़ियों में छुपे होने से दर्द को जोर लगाकर खीचने से गुलाब के कांटे प्यार की…

Continue

Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on March 6, 2011 at 7:30pm — No Comments

अभिराजभी..................................

 

अभिराजभी..................................

तुम्हारा चेहरा जब आँखों के सामने होता है

जो कभी मेरे इस ह्रदय के राजदार थे

आज तेरे वियोग में ह्रदय मेर तड़पता है

तेरे ओ वादे इरादे तेरी ओ कसमे

आज  मेरे ह्रदय के यादगार है,

गलत मै हूँ जो तुम्हें भुला न सका

 तुम तो किये लाख बहाने

दिल लगाने से पहले तैयार थी 

तुम्हारी…

Continue

Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on March 6, 2011 at 12:53pm — No Comments

यादें,,,,,,,,,,,,,,

 

हम जब कभी बारिश की पहली बूंद में भीगे थे
वह बात आज भी तन मन को छू कर जाती है
तो तुम्हें याद करता हूँ,तुम्हें महसूस करता हूँ
इन आँखों में तुम्हारी एक तस्वीर उभर आती है
जब तुमें मै याद करता हूँ,
तुम छोड़ हमें चाहे जाओ कितनी ही दूर
मेरी आँखों का चैन चुरा बन जाओ
किसी का…
Continue

Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on March 6, 2011 at 12:00pm — No Comments

मै तो एक पागल कवि हूँ

                                                        मै  तो एक पागल  कवि हूँ
क्या फर्क पड़ता है 
मै तो एक पागल कवि हूँ 
तम को काटता रवि हूँ
कौन किसलिए जीता है 
कौन किसलिए पीता है 
ज़िन्दगी तो सीता है 
कर्मो की गीता है 
भाग्य विपरीता है 
यहाँ तो हर कोई 
बस अपने लिए जीता है  
मै तो राम की सीता हूँ 
गीतों की गीता हूँ 
पर…
Continue

Added by arvind yogi on March 5, 2011 at 11:43pm — 3 Comments

गहरा प्यार.......................



गहरा प्यार.......................
जब तुम्हें कभी हो यह महसूस   

की प्यार किसी का कम हो रहा है 

आशाओं के तुम्हारे जीवन में

निराशाओं का कुहरा छाने लगे 

प्रेम पथ की गति जब कभी थमने लगे 

खुशियों के दामन में 
जब मायूसी  झाने लगे        
तुम लौट आना-तुम लौट आना

दफ़न किये जो मेरे प्यार को 

अर्थ…
Continue

Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on March 5, 2011 at 5:00pm — No Comments

तुम तो हो न प्रभु

 



हमेशा कई स्वर उभरे
'पैसा बहुत ज़रूरी चीज है
इतना पैसा होना चाहिए कि सुख में कोई कमी न रहे ...'
मैंने हमेशा कहा - 'पैसा ज़रूरी है पर पैसा सुख नहीं ,
'प्यार' में ज़िन्दगी है , वहाँ कोई कमी नहीं होती ... '
ऐसा कहते ... मैं…
Continue

Added by rashmi prabha on March 5, 2011 at 3:38pm — 1 Comment

ek ghazal

एक ग़ज़ल 
 
रिरिया रहे है लोग 
घिघिया रहे है लोग
 
उद्घोष होना चाहिए 
मिमिया रहे है लोग
 
बेदर्द क़त्ल है ये 
बतिया रहे है लोग
 
है वक़्त पूनियों सा 
कतिया रहे है लोग
 
संवेदना मरी है
खिसिया रहे है लोग
 
धोखे की टट्टियों को 
पतिया रहे है…
Continue

Added by ASHVANI KUMAR SHARMA on March 5, 2011 at 10:55am — 5 Comments

कोई सुनेगा

पाषाण समाज के सीने पे पडी नन्ही अश्रु की बूँद गाती है अनसुना गीत ,सुनाती है अजन्मी कहानी .|

उसकी गिरेबां को पकडे रोती ,बिलखती , कोसती, झकझोरती , सवाल करती , पता पूछती हैं उस भ्रूण हत्यारे का|

फिर सहसा आंसू पोछती .सोचती कहती की अच्छा हुआ जन्म  से पहले मिटा दी  गयी पैदा होती तो जाने क्या हश्र होता |…

Continue

Added by Anand Vats on March 5, 2011 at 10:21am — 3 Comments

(: शुभप्रभात :)

बहुत मुमकिन है  ख़्वाबों को हकीकत नाम मिल जाए

किसी बेकार को शायद बहुत सा काम मिल जाए ..
बसेरा हो दिलों में प्यार का तो गम है क्या करना ..…
Continue

Added by Lata R.Ojha on March 5, 2011 at 9:03am — 2 Comments

एक रेलगाड़ी और हम- एक सपना मेरा - जाने क्यों - डॉ नूतन ०4-०3-२०11

  मैंने देखा था इक सपना  

एक रेलगाड़ी और हम  

पिताजी टिकट ले कर आते हुवे 

और लोग स्टेशन का पता पूछते हुवे…

Continue

Added by Dr Nutan on March 5, 2011 at 1:00am — 4 Comments

VISHWA-CUP

विश्व-कप में
टीम इंडिया आई
आस जगाई.....१


इंतजार में 
जोरदार तैयारी
है बेक़रारी ...२

माही! तुम में
ज़ज्बा है हिम्मत भी
सामने आओ ...३

देश का मान
विश्व-कप जीत के 
भारत लाओ ....४

 
अब सचिन! 
शतकों के शतक  
का इंतजार  .....५.

विश्व-कप में 
चासनी घोलता है 
दे भी जाओ न......६ 

 

खेलो न  पूरे
जी जान से निराली
टीम इंडिया ....७

BRIJESH

Added by Dr.Brijesh Kumar Tripathi on March 4, 2011 at 10:00pm — No Comments

अपने औदें पर इतना अक़ड़ता क्यूं हैं...........

अपने औदें पर इतना अक़ड़ता क्यूं हैं

तू बात बात पर यूं बिगड़ता क्यूं हैं



क्या संसद का पानी पी आया हैं

तू बार बार यूं रंग बदलता क्यूं हैं



लिबास तो बड़ा ही सफ़्फ़ाख है…

Continue

Added by अमि तेष on March 4, 2011 at 3:30pm — 4 Comments

प्रेम की अभिव्यक्ति खातिर

सोचता था कि सितारों, पर ज़मीं को साफ़ करके,

और चंदा को टिकाकर, मैं गगन के आसरे से,

कुछ चमन खाली बनाऊं, प्रेम कि अभिव्यक्ति खातिर.



चाहता था खोद डालूं , वृक्ष के भूतल किनारे,

कर दूँ समतल इस धरा के, मस्त से परबत ये सारे,

सोख कर सारा समंदर, और नदियों की रवानी,

कुछ धरा खाली सजाऊं, प्रेम की अभिव्यक्ति खातिर.



किन्तु चंदा और तारे, वृक्ष औ पर्वत हमारे,

सारी नदियाँ सागर सारे, ये दिशायें ये किनारे,

घोल लेते हैं हमें, हैं प्रेम की अभिव्यक्ति सारे.…

Continue

Added by neeraj tripathi on March 4, 2011 at 2:25pm — 4 Comments

कुछ मुक्तक

यही सत्य है इस दुनिया का, कहते अक्षर काले हैं !

जिसने बांटे दर्द सभी के, मिलते उसको छाले हैं !

एक पिता का हाल देखिए, इस नफरत की दुनिया में,

 जिसने धन दौलत तक दे दी, रोटी तक के लाले हैं !

 

अब प्यार के जहाँ में पैगाम नहीं मिलते !
इस भावना को ऊंचे आयाम नहीं मिलते !
मिलती हैं हर तरफ चीखें तो द्रौपदी की,
पर चीर जो बढ़ा दे, घनश्याम नहीं मिलते !

Added by gaurav uphar on March 4, 2011 at 1:00pm — 2 Comments

ek ghazal

कैसे किस्से सामने आने लगे 
लोग कुछ बेबात शर्माने लगे
 
कल जिन्होंने पीठ में घोंपा छुरा 
हमदर्द बन वो घाव सहलाने लगे
 
ये सहर चूजे सी जाये किस जगह 
हर तरफ है बाज मंडराने लगे
 
वाल्मीकि है नहीं कोई यहाँ 
क्रौंच-वध कर लोग इतराने लगे
 
पेट मोटे हो गए बेबात जो 
भूख के वो अर्थ समझाने लगे
 
है…
Continue

Added by ASHVANI KUMAR SHARMA on March 4, 2011 at 9:20am — No Comments

जहाँ फ़ैल रहा प्रकाश वहाँ, क्यों फैला रहे अंधेरा



जहाँ फ़ैल रहा प्रकाश वहाँ, क्यों फैला रहे  अंधेरा,

खुशियों को छीन लो ना उनसे, होने दो वहाँ सवेरा,



जालिम कहर तुम्हारी, बरसे जहाँ जहाँ पर ,

रहते थे शान्ति के पुजारी,बंजर है अब वहाँ पर,

कितनो के चमन उजाड़ दिए, कितनो का लूटोगे डेरा,

खुशियों को छीन लो ना उनसे, होने दो वहाँ सवेरा.



अन्दर तुम्हारे है क्या , लेते सदा सहारा,

खुद की जमीं बचा न सके तो, दूसरों का घर उजाड़ा,



कब तक बनोगे सांप तुम,नचाएगा तुम्हे संपेरा,

खुशियों…

Continue

Added by Dhananjay Pathak on March 4, 2011 at 12:00am — No Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service