For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

इश्क़ से ना हो राब्ता कोई
ज़िन्दगी है की हादसा कोई

वो पुराने ज़माने की बात है
अब नहीं करता है वफ़ा कोई

ज़िन्दगी के जद्दोजहद अपने
मौत का है न फ़लसफ़ा कोई

यहाँ सब बे अदब हैं मेरी जां
अब करे क्या मुलाहिज़ा कोई

दिल का है टूटने का ग़म 'नाहक'
था सलामत मुआहिदा कोई

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 209

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rupam kumar -'मीत' on September 30, 2020 at 7:40am

आदरणीय, अमीरुद्दीन साहिब, प्रणाम ।

आपने शे'र काफी दुरुस्त कर दिए,
हमने भी यह ग़ज़ल पढ़ी लेकिन इतनी नज़र अच्छी नहीं कि इस मेयार तक देख पाते,

आपके एक सवाल है,

"शे'र का शिल्प कमज़ोर है" इस का मतलब क्या हुआ और शिल्प को दुरुस्त कैसे किया जाता है,

मुझे पता नहीं इस मंच पर सवाल जवाब कहाँ किया जाता है, यह कमेंट पढ़ा तो हमने यहीं पूछ लिया ग़लती हुई हो तो मुआ'फ़ी चाहूंगा,

हमने आपको एक मैसेज भी किया था, लेकिन पता नहीं आपको वो मिला नहीं कि आपने वो देखा नहीं अभी तक, हम मुंतज़िर थे आपके जवाब का, सादर।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on September 29, 2020 at 10:46pm

आदरणीय दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बहुत ख़ूबसूरत इन्सानी जज़्बात आपने अपनी ग़ज़ल में पिरोए हैं बधाई स्वीकार करें, कुछ सुझाव पेश करने की जसारत कर रहा हूंँ :

इश्क़ से ना हो राब्ता कोई          इश्क़ से है न राब्ता कोई 

ज़िन्दगी है की हादसा कोई        ज़िन्दगी है कि हादिसा कोई   

वो पुराने ज़माने की बात है        बात वो है गये ज़माने की 

(ये मिसरा बह्र में नहीं है)          अब नहीं करता है वफ़ा कोई

ज़िन्दगी के जद्दोजहद अपने      मरहले ज़िन्दगी में रहते हैं 

(ये मिसरा बह्र में नहीं है)          मौत का है न फ़लसफ़ा कोई 

यहाँ सब बे अदब हैं मेरी जां      बेअदब हैं सभी तो याँ 'नाहक़' 

(ये मिसरा बह्र में नहीं है)          अब करे क्या मुलाहिज़ा कोई

दिल का है टूटने काग़म 'नाहक' दिल जो टूटा तो ग़म नहीं मुझको 

था सलामत मुआहिदा कोई       टूटा थोड़ी महायदा कोई

(इस शे'र का शिल्प कमज़ोर है)  सादर। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 29, 2020 at 7:33pm

आ. भाई दण्डपाणि जी, सादर अभिवादन । गजल का प्रयास अच्छा हुआ है । हार्दिक बधाई ।

मेरे हिसाब से इसे इस प्रकार बाँधते तो और बेहतर हो सकता था

२१२१/१२१२/१२
इश्क़ से नहीं राब्ता कोई
ज़िन्दगी है कि हादसा कोई
वो पुराने ज़माने की बात है

शेष गुणीजनों के विचारों का इतजार करें । सादर..

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 29, 2020 at 9:43am

आ दण्डपाणी जी,

ग़ज़ल के प्रयास हेतु बधाई। कुछ जगह बह्र टूट रही है।

एक टिप है कि सिर्फ मात्राएं गिनने की जगह रचना को लय और ताल पर गुनगुनाएं। 

सादर

Comment by Rupam kumar -'मीत' on September 28, 2020 at 10:27am

बहुत उम्दा शे'र हुए है, आ. नाहक साहिब , 

 

"इश्क़ से ना हो राब्ता कोई"  यहा  "ना "  ज़ियादा  उचित  होगा की "न "  का  इस्तिमाल   रौशनी  डाले इस पर सादर |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज कुमार जी, सादर अभिवादन । गजल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई ।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post एक ही जगह बस पड़ा हूँ मैं......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
1 hour ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

जातीय व्यवस्था की हिलती नींव का दस्तावेज है उपन्यास ‘सुलगते ज्वालामुखी ’:: डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव

‘सुलगते ज्वालामुखी’ कवयित्री एवं कथाकार डॉ. अर्चना प्रकाश जी का नवीनतम लघु उपन्यास है, जिसका कथानक…See More
1 hour ago
Aazi Tamaam posted blog posts
1 hour ago
DR ARUN KUMAR SHASTRI posted blog posts
1 hour ago
सालिक गणवीर posted blog posts
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
1 hour ago
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

221   2121    1221    212अपनी खता लिखूं या ख़ुदा का किया लिखूं .इस दौरे नामुराद को किसका लिखा लिखूं…See More
1 hour ago
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही

212 212 212 2121एक आवाज़ कानों में आती रहीरूह के पार मुझको ले जाती रही2ख़्वाब आँखों को हर पल दिखाती…See More
1 hour ago
amita tiwari posted a blog post

सर्दीली सांझ ऐसे आई मेरे गाँव

 सर्दीली सांझ ऐसे आई मेरे गाँवअभी अभी तो सांझ थी उतरी  चंदा ने कुण्डी खटकाई सूरज ने यों पीठ क्या…See More
1 hour ago
PHOOL SINGH posted a blog post

सच-एक मौन

मौन रहता सच सदा ही, आवाज झूठ ही करता हैकर्म दिखाता सच का चेहरा, झूठ भ्रम को पैदा करता है || प्रमाण…See More
1 hour ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"प्रिय भाई योगराज जी, कई दिनों बाद आज ओ बी ओ पर हाज़िर हुआ हूँ, दुःखद समाचार मिला,  बहुत अफ़सोस…"
Tuesday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service