For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Ravi Prabhakar
  • Male
Share on Facebook MySpace

Ravi Prabhakar's Friends

  • मेघा राठी
  • Seema Singh
  • harivallabh sharma
  • savitamishra
  • saalim sheikh
  • Sushil Sarna
  • जितेन्द्र पस्टारिया
  • बृजेश नीरज
  • MAHIMA SHREE
  • Yogyata Mishra
  • योगराज प्रभाकर
  • Rash Bihari Ravi
 

Ravi Prabhakar's Page

Latest Activity

Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-66 (विषय: "देश")
"मुर्दों का शहर घेरा बनाकर खड़े जानवरों के चेहरों पर भय और चिंता की गहरी रेखाएँ व्याप्त थीं। उनकी जलती आँखें मध्य में हैरान-परेशान सिर झुकाए खड़े कब्र बिज्जू को घूर रही थीं। "दिमाग़ तो खराब नहीं हो गया तुम्‍हारा... जो तुमने ऐसी हरकतें…"
Sep 29, 2020
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"ओबीओ के 'लघुकथा स्‍कूल' में हम सब शिक्षार्थी हैं आदरणीय कनक हरलालका जी।"
Mar 31, 2020
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"एक सजग रचनाकार अतीत की पृष्‍भूमि पर खड़ा होकर भविष्‍य की ओर देखता है किंतु टकराता अपने वर्तमान समय से है जिसे साहित्‍यिक जन वास्‍तविक जीवन कहते है (इसका सबंध ही वर्तमान से ही है) आजकल समाज में जो संकीर्ण साेच व्‍याप्‍त हो…"
Mar 31, 2020
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"शानदार कथानक का चुनाव किया है आपने बेगोवाल साहिब। लघुकथा का प्रस्‍तुतिकरण और बेहतर हो सकता था। शीर्षक चयन भी एकदम सटीक। पर प्रदत्‍त विषय से तारतम्‍य बन रहा है इसमें मुझे कुछ संशय है। सादर"
Mar 31, 2020
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"शानदार लघुकथा आदरणीय ओमप्रगास क्षत्रिय जी। प्रधान संपादक की टिप्‍पणी से सहमत कि अंतिम दो पंक्‍तियॉं नहीं होनी चाहिए थीं। वैसे भी 'दुआओं क धरोहर' मेरे पल्‍ले नहीं पड़ा। लघुकथा का शीर्षक कथानक से पूर्णत: न्‍याय करता प्रतीत हो…"
Mar 31, 2020
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"मेरा सदैव यह मानना रहा है कि समसामयिक विषयों पर लिखते समय इस बात का ध्‍यान रखना चाहिए कि सामयिक प्रयोजन सिद्ध होने के बाद भी रचना की प्रासंगिकता बनी रहे। अंतिम दो पंक्‍तियों से पहले यह कथा क्षणिक मनोउद्गार जैसी लगी परंतु दादाजी  द्वारा…"
Mar 31, 2020
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"मानव और मानवता के हित में अच्‍छा साकारात्‍मक संदेश देती यह लघुकथा अपनी उपेदाशत्‍मकता के कारण लघुकथा से बोधकथा की ओर अधिक झुकती प्रतीत हो रही है। प्रतिपादित विषय 'धरोहर' से मैं इसे कनेक्‍ट नहीं कर पा रहा हूँ। सादर"
Mar 30, 2020
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"क्षमासहित निवेदन है कि मैं इस लघुकथा के अभीष्‍ट तक पहुँच नहीं पाया। शायद लघुकथा अस्‍पष्‍ट है अथवा मेरी अल्‍पबुद्धि। सादर"
Mar 30, 2020
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"समसामयिक विषय को आधार बनाकर दिए गए विषय को परिभाषित करने का अच्‍छा प्रयास किया है। खिलाड़ियों के प्रति सरकार की उदासीनता को भी निशाना बनाने का अच्‍छा प्रयास किया गया है। कथानक तो अच्‍छा है परंतु पदक बेचने के कथ्‍य को तथ्‍य का…"
Mar 30, 2020
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आज के हालात से जोड़कर प्रदत्‍त विषय को परिभाषित करने की कल्‍पना प्रभावित करती है। साकारात्‍मक संदेश देती इस उत्‍कृष्‍ट लघुकथा प्रेषण हेतु शुभकामनाएँ।"
Mar 30, 2020
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"बहुत शानदार लघुकथा आदरणीय रवि भसीन साहिब। प्रतिपादित विषय को अत्‍यंत कुशलता से परिभाषित करती इस लघुकथा में राष्‍ट्रीय चेतना का स्‍वर प्रतिध्‍वनित हो रहा है। संकीर्ण सोच से उपर उठकर देखे जाए तो ताजमहल केवल भारतीय ही नहीं अपितु…"
Mar 30, 2020
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"संकट की इस काली रात में आशा की नई किरण दिखाती इस गोष्‍ठी के लिए हार्दिक आभार।"
Mar 30, 2020
Ravi Prabhakar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"इस लघुकथा के माध्‍यम से चिरपरिचित कथानक को आधार बनाकर विषय को परिभाषित करने का अच्‍छा प्रयास किया गया है। पात्रों की भाषा से उनके परिवेश का बाखूबी चित्रण किया गया है। /कर्ज होवे ही जोंक की तरह,जान लेके ही पिण्ड छोङे।'/ यह वाक्‍य…"
Mar 30, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
Punjab
Native Place
Patiala
Profession
Computers
About me
A Straight Forwerd Man.

Ravi Prabhakar's Blog

सिसकियां (लघुकथा)/ रवि प्रभाकर

‘चल अब छोड़, जाने भी दे! इसमें इतना रोने की क्या बात है, यह कोई नयी बात थोड़े ही है। हम जैसे लोगों के साथ तो ये हमेशा से ही होता आया है। तू इतने टेसुए क्यों बहा रही हो ? वैसे गल्ती भी तेरी ही है, अगर तुझे प्यास लगी थी तो अपने पीने का पानी बाहर ही तो रखा होता है फिर तू रसोईघर में क्यों गई ?’ सिसक रही अपनी पत्नी को वो दिलासा दे रहा था।

‘मैं तो यही सोच कर इनके यहां काम करने को लगी थी कि चलो पढ़-लिख कर अफसर बन गए है तो क्या हुआ, हैं तो ये हम लोगों में से ही ना। पर ये लोग... कोई और हमारे…

Continue

Posted on January 18, 2016 at 9:00pm — 8 Comments

मुखौटे (लघुकथा)/ रवि प्रभाकर

 ‘बेशक हमारे भाई साहिब को देश छोड़े एक अर्सा हो गया यू.एस.ए. में उन्होनें अपना बिजनेस एम्पायर खड़ा कर लिया है पर उन्हें अपने देश और अपनी संस्कृति से अब भी बहुत प्यार है। इसलिए वो अपने बेटे के लिए मेम नहीं बल्कि एक सुसंस्कृत भारतीय बहू चाहते है।’ शहर के नामचीन बिल्डर अपनी डाॅक्टर पत्नी सहित मेयर साहिब के घर उनकी इकलौती बेटी के लिए अपने भतीजे के रिश्ते के सिलसिले के लिए बतिया रहे थे।

‘यह तो बहुत अच्छी बात है। मेरी बहन व बहनोई भी यू.एस.ए. सिटीज़न हैं । वो आपके भाई साहिब को बहुत…

Continue

Posted on December 19, 2015 at 1:46pm — 9 Comments

संत्रास (लघुकथा) : रवि प्रभाकर

ढलती शाम के वक्त खचाखच भरी बस में सेंट की खूशबू में लबालब जैसे ही वह दो लड़कियां चढ़ी तो सभी का ध्यान उनके जिस्म उघाड़ू तंग कपड़ों की ओर स्वत ही खिंचता चला गया । बस की धक्कमपेल का नाजायज़ फायदा उठाते हुए कुछ छिछोरे किस्म के लड़के रह रह कर उन्हे स्पर्श करते हुए बीच बीच में कुछ असभ्य कमेंट भी कर रहे थे परन्तु वो दोनों लड़कियां इन सबसे बेपरवाह आपस में हँस-हँस कर बातें करने में व्यस्त थीं।

‘इधर बैठ जाओ बेटी !’ सीट पर बैठा हुआ एक बुर्जुग बच्चे को सीट से अपनी गोद में बिठा कर थोड़ा एक तरफ…

Continue

Posted on July 21, 2015 at 8:30am — 22 Comments

चट्टे-बट्टे (लघुकथा)/ रवि प्रभाकर

‘मंत्री जी ! ‘भाई’ अब फिर से नयी ‘डिमांड’ कर रहा है। पिछले हफ्ते डी.आई.जी. साहिब को ‘सेवा’ पहुँचाई है और अभी ‘पार्टी फंड’ भी जमा करवाना है । आपको तो पता ही है कि आपके इलेक्शन के वक्त भी हम किसी भी तरह पीछे नहीं हटे थे।  तो फिर कभी ‘भाई’ तो कभी पुलिस।  ऐसे कैसे चलेगा ?’

‘अरे परेशान काहे हो रहे हो। अब अकेले तुम्हारी वजह से ही तो इलेक्शन नहीं न जीते हैं हम... सभी ने साथ दिया था हमारा और ध्यान भी तो सभी का ही रखना पड़ेगा ना। और तुम घबरा काहे रहे हो, ऊ ससुरा जो पुल बना रहे हो ना उसमें से दो…

Continue

Posted on July 18, 2015 at 12:08am — 9 Comments

Comment Wall (9 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 1:26am on May 1, 2015, Dr. Vijai Shanker said…
आदरणीय रवि प्रभाकर जी , लघु-कथा पर अपनी द्वितीय प्रस्तुति पर आपकी प्रतिक्रिया अभी विलम्ब से देखी , आपकी सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार एवं धन्यवाद। सादर।
At 4:34pm on September 30, 2014, MAHIMA SHREE said…

नमस्कार आ. रवि प्रभाकर भाई साहब ..स्वागत है :)

At 1:57pm on January 7, 2014, Abhinav Arun said…

आदरणीय श्री रवि प्रभाकर  जी आपकी प्रस्तुति गर्भाधान (लघुकथा) को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित \ पुरस्कृत  किये जाने पर हार्दिक बधाई और नव वर्ष की  हार्दिक शुभकामनायें !!

At 6:59pm on January 6, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीय रवि प्रभाकर जी

सर्व् श्रेष्ठ होना चरम उपलब्धि है i ओ बी ओ का यह सम्मान आपके आत्म  विश्वास को अधिकाधिक बढ़ाएगा , यही कामना है i

At 7:26pm on January 5, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रवि प्रभाकर जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी प्रस्तुति गर्भाधान (लघुकथा) को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस नामित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |


शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी

संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 

ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:25am on January 1, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 7:02pm on October 21, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 3:40pm on October 20, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

At 12:40pm on October 20, 2010, Admin said…

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
16 hours ago
Admin posted discussions
yesterday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175

 आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ

   जिस-जिस की सामर्थ्य रही है धौंस उसी की एक सदा से  एक कहावत रही चलन में भैंस उसीकी जिसकी लाठी…See More
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आपने कहे को सस्वर किया इस हेतु धन्यवाद, आदरणीय  //*फिर को क्यों करने से "क्यों "…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना को आपने अनुमोदित कर मेरा उत्साहवर्धन किया, आदरणीय विजत निकोर जी हार्दिक आभार .. "
yesterday
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"आदरणीय जी सादर प्रणाम -  अद्भुत सृजन - हृदय तटों को छूती गहन भावों की अभिव्यक्ति ने अहसासों की…"
yesterday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
Monday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
Monday
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service