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लक्ष्मण रामानुज लडीवाला
  • जयपुर rajasthan
  • India
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लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"लघुकथा सराहने के लिए धन्यवाद आपका श्री विनय कुमार जी | सादर "
Nov 30
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"खुद ने अपने दूसरी माँ के अत्याचार सहे थे  इसलिए बच्ची के चेहरे पर उसे अपना अक्क्स नजर आया और सीने से बच्ची को लगा लिया | सुंदर लघु कथा सृजित हुई है श्री विनय कुमार जी |"
Nov 30
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"प्रयास सराहने के लिए हार्दिक आभार आदरणीय | लघुकथा में पिटा-पुत्र,प्राचार्य और संरक्षक बने तपन सोनी के ही काल्पनिक नाम है और लघुकथा 40 वर्ष पूर्व घटित सच्ची घटना पर आधारित है | सादर आभार श्री योगराज जी साहब !"
Nov 30
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"अभी हाल| ही सृजित लघुकथा सराहने के लिए हार्दिक आभार आपका श्री तस्दीक अहमद साहब !"
Nov 30
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"सन्देशप्रद अच्छी लघुकथा से शुरुआत करने के लिए हार्दिक बधाई आ. मोहम्मद आरिफ साहब !"
Nov 30
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"सुंदर लघुकथा आदरणीया सविता मिश्रा जी "
Nov 30
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"अच्छी लघुकथा | शुरू में तो समझ नहीं आई कहना क्या चाह रहे है क्या वार्निग दे रहे है चाय पिल्लाकर | किन्तु समापन अछा हुआ और प्रस्तुती आदर्श पर जाकर समाप्त हुई | बहुत बह्सुत बधाई साहब !"
Nov 30
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
""जब समझौता ही करना है तो बीबी ही कौनसी बुरी है |" समझाने का तरीका बहुत सुंदर था जिससे आदर्श लघु कथा बन गई | हार्दिक बधाई श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय जी |"
Nov 30
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"अपने माँ-बाप को देख्कार ही सही, उसका हृदय पसीज गया और बड़ा हादसा ताल गया | अच्छी लघुकथा के लिए बधाई श्री तस्दीक अहमद साहब "
Nov 30
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"वाह ! बहुत सुंदर लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई आ. बरखा शुक्ला जी |"
Nov 30
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"देर आये दुरस्त आये | अच्छी लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई आ. वसुधा जी | सादर "
Nov 30
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"अच्छी लघुकथा में कुछ कसावट लायी जा सकती है आदरणीय "
Nov 30
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
""अभी भी देर नहीं हुई है, पढ़ जायेगी तो अपना बचा करने खुद ही सीख जाएगा |" शिक्षा की उपयोगिता दर्शातें सृजित सुंदर लघुकथा के लिए बधाई श्री तेजवीर सिंह जी |"
Nov 30
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"सुबह का शाम तक भी न लौटे तो विलम्ब से लौटने वाला तो खुदगर्जी ही कहलायेगा | लाजवाब लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई आ.मेघा राठी जी | सादर "
Nov 30
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"विदाई में आकर गले मिले तो शिला-शिकवा समाप्त | सुंदर लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई श्री मनन सिंह जी "
Nov 30
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-32
"स्त्रियों और भारत माँ की दयनीय दशा करने के लिए जिम्मेदार माँ के ये भटके हुए  बेटे ही है, जो दुर्दशा कर रहे है | बहुत सुंदर और मार्मिक लघुकथा के लिए बधाई श्री महेंद्र कुमार जी | किन्तु ये सुबह के भूले शीर्षक में अंतर्गत आती है क्या ? विशेषज्ञ ही…"
Nov 30

Profile Information

Gender
Male
City State
JAIPUR
Native Place
India
Profession
Retired Govt service
About me
Interest in writing poems,stories and articles

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About me

 Retired Accountant from Collectorate,Jaipur and Rajasthan Vidhan Sabha,Jaipur

 now working as an Advisor of SBI Life Insurance Co. Ltd.and Investment consultant

  I had been co-editor of "AGRAMMI" monthli magazine since 1975 to 1978, and Editor

 of "Nirala-Samaj" Quarterly both are social magazines of Agrawal community.Jaipur

   Articles published in Rajasthan Patrika, and Rastradoot daily fro JAIPUR in 1970 and 

   1980 decads

लक्ष्मण रामानुज लडीवाला's Blog

जग में करूँ प्रसार (गीत) - रामानुज लक्ष्मण

मुक्त हृदय से आज करूँ मैं, सबका ही सत्कार,

माँ वीणा सद्ज्ञान मुझे दो, जग में करूँ प्रसार ||

माँ-बापू के सद्कर्मों से, आया माँ की गोद।

मिला छत्र छाया में उनके,जीवन का आमोद।।

किये बहत्तर वर्ष पार ये, बिना किसी अवसाद 

स्वर्गलोक से मिलता मुझको,उनका आशीर्वाद।।

माँ-बापू से पाया मैंने,जीवन में संस्कार।

मिला सनातन धर्म रूप में, मुझको भारत वर्ष ।

ऋषि-मुनियों का देश यही है,इसका मुझको हर्ष ||

वन-उपवन में रोप सकूँ मै, कुछ सुन्दर से…

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Posted on November 19, 2017 at 7:30am — 14 Comments

जलकर करता उजियारा (गीत)

गीत - मुखड़ा -

करे तमस को दूर दीप ही, दूर भागता अँधियारा |

दीप निभाये धर्म सदा ही, जलकर करता उजियारा ||

सूर्य किरण उठ भोर झाँकती, नित्य सदा ही खिड़की से

दीन करे विश्राम डरे बिन, सदा मेघ की घुड़की से ।।

दीन-हीन के द्वार जहाँ भी, घिरने लगता अँधियारा

दीप निभाये धर्म सदा ही, जलकर करता उजियारा ।

दीप जलाएं द्वारें जाकर, छँटे दीन का अन्धेरा ।

सबको दे उजियार दीप ही,पर खुद का नही सवेरा ।।

दुख दर्दों की मार झेलता, दीन हीन सा…

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Posted on November 3, 2017 at 2:00pm — 9 Comments

फ़रिश्ता (लघु कथा)

 
चार-पांच वर्ष का बच्चा प्रकाश मकान की दूसरी मंजिल पर छत पर खेलते हुए कटकर आई एक पतंग को लूटने के लिए बालकनी से खिड़की में झुका, तभी पाँव फिसलने से खडकी के बाहर छज्जे से लुडककर सडक पर गिरने लगा तभी सड़क पर दूर से देख एक व्यक्ति चिल्लाया “अरे ये बच्चा गिरा” |
उसी समय उस गली से ससुराल के मकान के नीचे से रोज की तरह गुजर…
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Posted on November 1, 2017 at 7:51pm — 4 Comments

नई कमीज



माँ के निकाले हुए पुराने बर्तन बेचकर दीपावली त्योहार के लिए जरूरी सामान की सूची अनुसार पिताजी बाजार से पूजा का सामान, छोटे-छोटे पाँच फल, दो गन्ने, पाँव लड्डू-जलेबी, फूले-पतासे, लक्ष्मी जी का पाना, और रुई लाकर सामान माँ को देते हुए पूछा 21 की जगह 11 दीपक ही ले आता हूँ । इस पर माँ बोली -"मेरे पीहर के गांव कुंडा से कुम्हार आया था जो कल मना करने पर भी 21 दीपक रख गया है और पूछने पर भी रुपये नही बताये । अब उसे रुपये भाई-दूज के बाद दे आऊंगी । इस बार तो 21 दीपक ही…

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Posted on October 18, 2017 at 6:28pm — 18 Comments

दोहे

महिला दिवस पर रचित दोहे -



मही रूप देवी धरे, धैर्य गुणों की खान

साहस की प्रतिमूर्ति भी, नारी को ही मान | 



सृष्टि सृजनकर्ता यही,यही मही का अर्थ,

रणचण्डी भी बन सके, नारी सभी समर्थ ।



महिला से महके सदा,घर आँगन में फूल

वही सजाती घर सदा, मौसम के अनुकूल ।



जीवन के हर रूप में, नारी मन उपहार,

आलोकित जीवन करे, खुशियों के…

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Posted on March 9, 2017 at 4:30pm — 4 Comments

आस्था (लघु कथा)

संतों तक को झूठी रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तार कर सरकार अच्छा नहीं कर रही | देश विदेश में लाखों अनुयायी किसी के ऐसे ही बनते | मेरे घर से अपनी बहन के साथ इनके आश्रम में 15 दिन रहकर आई है | चेलों का बड़ा ख्याल रखा जाता है | नियमित व्याखान और पूजा पाठ चलता रहता है | बहुत पहुँचे हुए संत है, मैंने भी पुष्कर में इनके प्रवचन सुने है |

पाठक जी बोले - ये सब तो ठीक है ओझा जी, पर इनके खिलाफ अश्लील कारनामे और महिलाओं के साथ लिप्त पाए जाने के पुख्ता सबूत के आधार पर ही गिरफ्तार किया है | कई शहरों में…

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Posted on February 21, 2017 at 12:22pm — 10 Comments

Comment Wall (59 comments)

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At 3:25pm on November 19, 2015, pratibha pande said…

 जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएँ आपको आदरणीय लडीवाला जी  

At 4:56pm on November 19, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीय लडीवाला जी

आपको जन्मदिवस के अवसर पर ढेरो शुभ कामनाये i आप चिरायु हो और स्वस्थ रहें i

At 11:03am on October 2, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

आदरणीय लक्ष्मण भाई , आपका बहुत्बहुत आभार !!

At 9:56pm on September 23, 2013, SANDEEP KUMAR PATEL said…

आदरणीय लक्षमण सर जी सादर धन्यवाद आपका स्नेह और आशीष यूँ ही बनाये रखिये

At 8:53am on September 2, 2013, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

लक्ष्मण भाई- सप्रेम राधे- राधे । सही सलाह एवं गीत को दिल से पसंद करने के लिए हार्दिक् धन्यवाद ॥

At 8:30am on August 15, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय लडीवाला सर  प्रणाम , रचना पसंद करने के लिए आपका तहेदिल से आभार और धन्यवाद !

At 1:34pm on August 11, 2013, mrs manjari pandey said…

आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद जी हार्दिक आभार.

At 4:57pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

abhar laxman ji

At 8:15pm on July 23, 2013, Albela Khatri said…

aapke prem ke liye aabhari hun bahut bahut aabhaar evm dhnyavaad आपका स्नेह, दुलार, आशीष एवं आत्मीयता की सुगंध का झोंका मेरे जीवन में नया उजाला लाएगा ...ऐसा मुझे भरोसा है ........आपकी कृपादृष्टि के लिए कृतज्ञ हूँ

सादर

At 12:30pm on July 18, 2013, राज़ नवादवी said…

आदरणीय लक्ष्मण जी, हांलाकि मुझे दोहों का कुछ ख़ास ज्ञान नहीं है मगर क्या खूब कहा है आपने-

'बहका बहका दिख रहा, खुद का ही व्यवहार

जैसे सब कुछ ख़त्म है, मन मेरा लाचार | '

बधाई हो!

 
 
 

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