For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Featured Blog Posts – January 2012 Archive (11)

''नाशाद मेरा मिहिर''

नाशाद मेरा मिहिर तो जिंदगी वफात है  

साँसों के गिर्दाब में इस रूह की निजात है l  

 

साहिर है तेरी कलम में कुछ कमाल का

जैसे खून में भरा हो कुछ रंग गुलाल का l

 

हर्फों में छुपा रखी है सदियों की बेबसी 

तेरे चेहरे पे अब देखती हूँ ना कोई हँसी l

 

बातों में बेरुखाई अब होती है इस कदर   

बेजार सी जिंदगी जैसे बन गई हो जहर l

 

तासीर न कम होती है होंठों को भींचकर

या बेसाख्ता बहते हुये अश्कों से सींचकर…

Continue

Added by Shanno Aggarwal on January 24, 2012 at 7:50pm — 9 Comments

तुमनें पूछा ...

मैं कौन हूँ ?

ये ही पूछा हैं न ?

ये मेरी ही दस्तक है

जो फैलाती हैं सुगंध

बनती है मकरंद.

जो काफी है

भौरों को मतवाला बनाने को

और कर देती है लाचार

बंद होने को पंखुड़ियों में ही

तुम नहीं देख पाए मुझको

उन परवानों के दीवानेपन में

जो झोंक देते हैं प्राण शमा पर

क्या मैं नहीं होता हूँ

उन ओस की बूंदों में

जो गुदगुदाती हैं

प्रेमियों को

रिमझिम फुहार में

बस…

Continue

Added by Dr Ajay Kumar Sharma on January 18, 2012 at 4:00pm — 12 Comments

ग़ज़ल

सामान उठाते हैं

अब लौट के जाते हैं

दिल मेरा दुखाने को

अहबाब भी आते हैं

ये चाँद-सितारे भी

रातों को रुलाते हैं

जो टूट के मिलते थे

वो रूठ के जाते हैं

मैं उनका निशाना हूँ

वो तीर चलाते हैं

हम अपनी उदासी को

हँस-हँस के छुपाते हैं

की ख़ूब अदाकारी

पर्दा भी गिराते हैं

.......दीपक कुमार

Added by दीपक कुमार on January 10, 2012 at 12:25am — 10 Comments

पहले सी मासूमियत

याद आता है

अपना बचपन,

जब  हम उड़ान में रहते थे

बेफिक्री के असमान में रहते थे

दिन गुजरता था बदमाशियों में

पर रात अपने ईमान में रहते थे !

याद आता है,

दिन भर तपते सूरज को चिढाना

आंधियो के पीछे भागना

उनसे आगे निकलने की कोशिश करना

जलती तेज हवाओं से हाथ मिलाना,

और फिर ..............

पता ही नही चला कि

कब माँ की कहानियों की गोद से उठकर

हमारी नींद सपनो के आगोश में चली गई !



दिन से अच्छी थी रातें

हमेशा से

और…

Continue

Added by Arun Sri on January 7, 2012 at 11:00am — 6 Comments

सामयिक दोहे

सामयिक दोहे:-
------------   ---------- 

कमर-तोड़ महंगाई पे,बारम्बार चुनाव!

एक गोद में सिसक रहा,उसपे भारी पांव.
------------   ----------   -----------------  --
फिर चुनाव आये सखी,झरने लगे बयान.
अपने-अपने नेता है,अपनी-अपनी तान.
------------   ----------   -----------------  --
लोकपाल है शोक में,जोक मारते लोग.
खुद होकर पाले नहीं ,नेता कोई रोग.
------------   ----------  …
Continue

Added by AVINASH S BAGDE on January 6, 2012 at 7:58pm — 15 Comments

छन्न पकैया , मेहनत की है रोटी

आदरणीय योगराज प्रभाकर जी से प्रभावित होकर मैंने भी  छन्न पकैया  में  कुछ लिखने का प्रयास किया है. मेरी मूल रचना में कुछ कमियाँ थी जो योगराज जी ने सुधारी, योगराज सर आपका बहोत बहोत शुक्रिया. वरिष्टजनों का मार्गदर्शन चाहूँगा !

 

.

छन्न पकैया , छन्न पकैया , मेहनत की है रोटी,

कहने को युवराज है, लेकिन बाते छोटी-छोटी ||१||

.

छन्न पकैया, छन्न पकैया , खूब बड़ी महंगाई

कुर्सी पे हाकिम जो बैठा , शुतुरमुर्ग है भाई…

Continue

Added by shashiprakash saini on January 4, 2012 at 2:30pm — 17 Comments

बेटियाँ – छन्न पकैयावली

आदरणीय योगराज प्रभाकर जी द्वारा इस मंच पर लाई गई इस विलुप्तप्राय विधा से प्रेरित हो मैंने भी चरणबद्ध तरीके से एक बेटी से सम्बंधित कटु सत्यों को रेखांकित करने प्रयास किया है ! वरिष्टजनों का मार्गदर्शन चाहूँगा !

 

 

छन्न पकैया छन्न पकैया सबकी है मत मारी

सर को पकड़े बैठ गए सुन बेटी की किलकारी

 

छन्न पकैया छन्न पकैया छीना है हर मौका

छोड़ पढाई नन्ही बेटी, करती चूल्हा चौंका 



 

छन्न पकैया छन्न पकैया जीवन भर…

Continue

Added by Arun Sri on January 4, 2012 at 2:00pm — 17 Comments

कविता -नव युग की कामना

 ***********************************       
      नव युग की कामना 
**********************************

बीते कल का फ़साना                                          

नहीं दोहराना है जनाब 
नये युग का तराना 
अब गुनगुनाना है जनाब…
Continue

Added by Atendra Kumar Singh "Ravi" on January 4, 2012 at 2:00pm — 10 Comments

छन्न पकैया

सभी सम्माननीय मित्रों को सादर नमस्कार. आदरणीय योगराज भईया द्वारा ओ बी ओ में प्रस्तुत विलुप्त प्राय छंद "छन्न पकैया" सचमुच मन को भाता है... तभी से  -

.

छन्न पकैया, छन्न पकैया, देख देख ललचाऊं,

छंद सुहावन मनभावन ये, मैं भी कुछ रच पाऊं ||

.…

Continue

Added by Sanjay Mishra 'Habib' on January 3, 2012 at 6:30pm — 6 Comments

पतंगबाजी उर्फ तमन्नाओं की ऊँची उड़ान

तमन्नाओं की ऊँची उड़ान

का आभास हुआ

जब कुछ बच्चों को

घर की मुंडेर

पर चढ़कर

पतंग उड़ाते देखा

अलग अलग रंगों की

छटा बिखेरती,

ऊँची और ऊँची

चढ़ रही थी

आसमान में

परिंदे उड़ते हैं जैसे ।

 

मेरी पतंग ही रानी है

शायद यही सोचकर

लड़ाया पेंच एक बच्चे ने,

दूसरी पतंग धराशायी

हो गई

दूसरे बच्चे ने भी हार न मानी

फिर मांझा चढ़ाया

और दूसरे ही क्षण

उसकी शहजादी करने…

Continue

Added by mohinichordia on January 2, 2012 at 10:30am — 7 Comments

तुम्हें बधाई मित्र.

बीता साल चला गया, देकर नन्हा चित्र.

अंग्रेजी नव वर्ष की, तुम्हें बधाई मित्र. 

तुम्हें बधाई मित्र, इसे अपनापन देना.

देकर स्नेह दुलार, इसे नवजीवन देना.

अम्बरीष…

Continue

Added by Er. Ambarish Srivastava on January 1, 2012 at 1:25am — 14 Comments

Featured Monthly Archives

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"//दिल का है टूटने का ग़म 'नाहक'     था सलामत मुआहिदा कोई//    इस…"
3 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब, देरी से प्रतिक्रिया देने की कुछ वजूहात रही होंगी मैं समझ सकता…"
24 minutes ago
dandpani nahak commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आदरणीय नीलेश जी मैं बहुत शर्मिंदा हूँ और मुआफ़ी चाहता हूँ इस देरी के लिए  आपका बहुत बहुत…"
1 hour ago
dandpani nahak commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर ' जी नमस्ते  मुआफ़ी चाहता हूँ देरी से आने के…"
1 hour ago
dandpani nahak commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आदरणीय रूपम kumar 'मीत ' जी नमस्ते मैं देरी से हाजिर होने के लिए मुआफ़ी चाहता…"
2 hours ago
dandpani nahak commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आदरणीय अमीरुद्दीन  'अमीर ' साहब आदाब बहुत मुआफ़ी चाहता हूँ इस देरी के लिए ! आदरणीय…"
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (ज़िन्दगी भर हादसे दर हादसे होते रहे...)
"आदरणीय जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और दाद के लिये…"
2 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"उस्ताद-ए -मुहतरम समर कबीर साहिब आदाब ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हार्दिक आभार। ग़ज़ल पर इस्लाह…"
4 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय अमीरूद्दीन 'अमीर' साहिब आदाब ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हार्दिक आभार। ग़ज़ल पर…"
5 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय भाई लक्मण धामी जी ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
5 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"प्रिय रूपम ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हार्दिक आभार। बालक शाइरी को विज्ञान से जोड़ना ठीक नहीं।…"
5 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल

२१२२ २१२२ फूल काँटों में खिला है, प्यार में सब कुछ मिला है.  है न कुछ परिमाप गम का, गाँव है, कोई…See More
11 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service