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Sanjiv verma 'salil''s Blog – August 2010 Archive (13)

बाल गीत: माँ का मुखड़ा -- संजीव वर्मा 'सलिल'

बाल गीत



माँ का मुखड़ा



संजीव वर्मा 'सलिल'

*

मुझको सबसे अच्छा लगता -

अपनी माँ का मुखड़ा!

*

सुबह उठाती गले लगाकर,

नहलाती है फिर बहलाकर,

आँख मूँद, कर जोड़ पूजती ,

प्रभु को सबकी कुशल मनाकर. ,

देती है ज्यादा प्रसाद फिर

सबकी नजर बचाकर.



आँचल में छिप जाता मैं ज्यों

रहे गाय सँग बछड़ा.

मुझको सबसे अच्छा लगता -

अपनी माँ का मुखड़ा.

*

बारिश में छतरी आँचल की ,

ठंडी में गर्मी दामन की.,

गर्मी में… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on August 28, 2010 at 5:19pm — 4 Comments

गीत: आराम चाहिए... संजीव 'सलिल'

गीत:



आराम चाहिए...



संजीव 'सलिल'

*

हम भारत के जन-प्रतिनिधि हैं

हमको हर आराम चाहिए.....

*

प्रजातंत्र के बादशाह हम,

शाहों में भी शहंशाह हम.

दुष्कर्मों से काले चेहरे

करते खुद पर वाह-वाह हम.

सेवा तज मेवा के पीछे-

दौड़ें, ऊँचा दाम चाहिए.

हम भारत के जन-प्रतिनिधि हैं

हमको हर आराम चाहिए.....

*

पुरखे श्रमिक-किसान रहे हैं,

मेहनतकश इन्सान रहे हैं.

हम तिकड़मी,घोर छल-छंदी-

धन-दौलत अरमान रहे… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on August 26, 2010 at 9:52pm — 3 Comments

मुक्तिका: समझ सका नहीं संजीव 'सलिल'

मुक्तिका:



समझ सका नहीं



संजीव 'सलिल'

*

*

समझ सका नहीं गहराई वो किनारों से.

न जिसने रिश्ता रखा है नदी की धारों से..



चले गए हैं जो वापिस कभी न आने को.

चलो पैगाम उन्हें भेजें आज तारों से..



वो नासमझ है, उसे नाउम्मीदी मिलनी है.

लगा रहा है जो उम्मीद दोस्त-यारों से..



जो शूल चुभता रहा पाँव में तमाम उमर.

उसे पता ही नहीं, क्या मिला बहारों से..



वो मंदिरों में हुई प्रार्थना नहीं सुनता.

नहीं फुरसत है उसे… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on August 22, 2010 at 3:25pm — 4 Comments

गीत: आपकी सद्भावना में... संजीव 'सलिल'

निवेदन:



आत्मीय !



वन्दे मातरम.



जन्म दिवस पर शताधिक मंगल कामनाएँ भाव विभोर कर गयी. सभी को व्यक्तिगत आभार इस रचना के माध्यम से दे रहा हूँ.



मुझसे आपकी अपेक्षाएँ भी इन संदेशों में अन्तर्निहित हैं. विश्वास रखें मेरी कलम सत्य-शिव-सुन्दर की उअपसना में सतत तत्पर रहेगी. विश्व वाणी हिन्दी के सभी रूपों के संवर्धन हेतु यथाशक्ति उनमें सृजन कर आपकी सेवा में प्रस्तुत करता रहूँगा.



पाँच वर्ष पूर्व हिन्दीभाषियों की संख्या के आधार पर हिन्दी का विश्व में दूसरा… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on August 21, 2010 at 9:39am — 5 Comments

सामयिक गीत: आज़ादी की साल-गिरह / संजीव 'सलिल'

सामयिक गीत:



आज़ादी की साल-गिरह



संजीव 'सलिल'

*

*

आयी, आकर चली गयी

आज़ादी की साल-गिरह....

*

चमक-दमक, उल्लास-खुशी,

कुछ चेहरों पर तनिक दिखी.

सत्ता-पद-धनवालों की-

किस्मत किसने कहो लिखी?

आम आदमी पूछ रहा

क्या उसकी है कहीं जगह?

आयी, आकर चली गयी

आज़ादी की साल-गिरह....

*

'पट्टी बाँधे आँखों पर,

अंधा तौल रहा है न्याय.

संसद धृतराष्ट्री दरबार

कौरव मिल करते अन्याय.

दु:शासन… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on August 17, 2010 at 8:00pm — 5 Comments

मुक्तिका: कब किसको फांसे संजीव 'सलिल'

मुक्तिका:



कब किसको फांसे



संजीव 'सलिल'

*

*

सदा आ रही प्यार की है जहाँ से.

हैं वासी वहीं के, न पूछो कहाँ से?



लगी आग दिल में, कहें हम तो कैसे?

न तुम जान पाये हवा से, धुआँ से..



सियासत के महलों में जाकर न आयी

सचाई की बेटी, तभी हो रुआँसे..



बसे गाँव में जब से मुल्ला औ' पंडित.

हैं चेलों के हाथों में फरसे-गंडांसे..



अदालत का क्या है, करे न्याय अंधा.

चलें सिक्कों जैसे वकीलों के झाँसे..



बहू… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on August 17, 2010 at 7:36pm — 2 Comments

स्वाधीनता दिवस पर विशेष रचना: गीत भारत माँ को नमन करें.... संजीव 'सलिल'

स्वाधीनता दिवस पर विशेष रचना:



गीत



भारत माँ को नमन करें....



संजीव 'सलिल'

*



आओ, हम सब एक साथ मिल

भारत माँ को नमन करें.

ध्वजा तिरंगी मिल फहराएँ

इस धरती को चमन करें.....

*

नेह नर्मदा अवगाहन कर

राष्ट्र-देव का आवाहन कर

बलिदानी फागुन पावन कर

अरमानी सावन भावन कर



राग-द्वेष को दूर हटायें

एक-नेक बन, अमन करें.

आओ, हम सब एक साथ मिल

भारत माँ को नमन करें......

*

अंतर में अब रहे न… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on August 14, 2010 at 11:39pm — 5 Comments

गीत: कब होंगे आजाद... ----संजीव 'सलिल'

गीत:

कब होंगे आजाद

संजीव 'सलिल'

*

*

कब होंगे आजाद?

कहो हम

कब होंगे आजाद?....

*

गए विदेशी पर देशी अंग्रेज कर रहे शासन.

भाषण देतीं सरकारें पर दे न सकीं हैं राशन..

मंत्री से संतरी तक कुटिल कुतंत्री बनकर गिद्ध-

नोच-खा रहे

भारत माँ को

ले चटखारे स्वाद.

कब होंगे आजाद?

कहो हम

कब होंगे आजाद?....

*

नेता-अफसर दुर्योधन हैं, जज-वकील धृतराष्ट्र.

धमकी देता सकल राष्ट्र को खुले आम महाराष्ट्र..

आँख दिखाते सभी… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on August 10, 2010 at 5:02pm — 2 Comments

गीत: हर दिन मैत्री दिवस मनायें..... संजीव 'सलिल'

गीत:

हर दिन मैत्री दिवस मनायें.....

संजीव 'सलिल'

*

हर दिन मैत्री दिवस मनायें.....

*

होनी-अनहोनी कब रुकती?

सुख-दुःख नित आते-जाते हैं.

जैसा जो बीते हैं हम सब

वैसा फल हम नित पाते हैं.

फिर क्यों एक दिवस मैत्री का?

कारण कृपया, मुझे बतायें

हर दिन मैत्री दिवस मनायें.....

*

मन से मन की बात रुके क्यों?

जब मन हो गलबहियाँ डालें.

अमराई में झूला झूलें,

पत्थर मार इमलियाँ खा लें.

धौल-धप्प बिन मजा नहीं है

हँसी-ठहाके… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on August 8, 2010 at 11:32am — 3 Comments

हिन्दी वैभव: मगही / भोजपुरी / अंगिका / बघेली / उर्दू खड़ी बोली

हिन्दी वैभव:

हिन्दी को कम आंकनेवालों को चुनौती है कि वे विश्व की किसी भी अन्य भाषा में हिन्दी की तरह अगणित रूप और उन रूपों में विविध विधाओं में सकारात्मक-सृजनात्मक-सामयिक लेखन के उदाहरण दें. शब्दों को ग्रहण करने, पचाने और विधाओं को अपने संस्कार के अनुरूप ढालकर मूल से अधिक प्रभावी और बहुआयामी बनाने की अपनी अभूतपूर्व क्षमता के कारण हिन्दी ही भावी विश्व-वाणी है. इस अटल सत्य को स्वीकार कर जितनी जल्दी हम अपनी ऊर्जा हिन्दी में हिंदीतर साहित्य और संगणकीय तकनीक को आत्मसात करेंगे, अपना और हिन्दी का… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on August 6, 2010 at 7:57pm — 2 Comments

मुक्तिका: मन में दृढ़ विश्वास लिये. संजीव 'सलिल'

मुक्तिका:



मन में दृढ़ विश्वास लिये.



संजीव 'सलिल'

**

मन में दृढ़ विश्वास लिये.

फिरते हैं हम प्यास लिये..



ढाई आखर पढ़ लें तो

जीवन जियें हुलास लिये..



पिये अँधेरे और जले

दीपक सदृश उजास लिये..



कोई राह दिखाये क्यों?

बढ़ते कदम कयास लिये..



अधरों पर मुस्कान 'सलिल'

आयी मगर भड़ास लिये..



मंजिल की तू फ़िक्र न कर

कल रे 'सलिल' प्रयास… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on August 4, 2010 at 8:37am — No Comments

गीत... प्रतिभा खुद में वन्दनीय है... संजीव 'सलिल'

गीत...



प्रतिभा खुद में वन्दनीय है...

संजीव 'सलिल'

**



प्रतिभा खुद में वन्दनीय है...

*

प्रतिभा मेघा दीप्ति उजाला

शुभ या अशुभ नहीं होता है.

वैसा फल पाता है साधक-

जैसा बीज रहा बोता है.



शिव को भजते राम और

रावण दोनों पर भाव भिन्न है.

एक शिविर में नव जीवन है

दूजे का अस्तित्व छिन्न है.



शिवता हो या भाव-भक्ति हो

सबको अब तक प्रार्थनीय है.

प्रतिभा खुद में वन्दनीय है.....

*

अन्न एक ही खाकर… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on August 2, 2010 at 10:45am — 3 Comments

आचार्य संजीव 'सलिल तथा डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री : श्रेष्ठ गीतकार अलंकरण से सम्मानित

सितारों की महफ़िल में आज डा. रूप चन्द्र शास्त्री मयंक और आचार्य संजीव वर्मा सलिल

लखनऊ, गुरुवार, २९ जुलाई २०१०

ब्लोगोत्सव-२०१० को आयामित करने हेतु किये गए कार्यों में जिनका अवदान सर्वोपरि है वे हैं डा. रूप चन्द्र शास्त्री मयंक और आचार्य संजीव वर्मा सलिल जिन्होनें उत्सव गीत रचकर ब्लोगोत्सव में प्राण फूंकने का महत्वपूर्ण कार्य किया. ब्लोगोत्सव की टीम ने उनके इस अवदान के लिए संयुक्त रूप से उन दोनों सुमधुर गीतकार को वर्ष के श्रेष्ठ उत्सवी गीतकार का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on August 2, 2010 at 10:41am — 2 Comments

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