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रविकर's Blog – August 2013 Archive (6)

अंध-न्याय की देवि ही, खड़ी निकाले खीस-

टला फैसला दस दफा, लगी दफाएँ बीस |
अंध-न्याय की देवि ही, खड़ी निकाले खीस |


खड़ी निकाले खीस, रेप वह भी तो झेले |
न्याय मरे प्रत्यक्ष, कोर्ट के सहे झमेले |


नाबालिग को छूट, बढ़ाए विकट हौसला |
और बढ़ेंगे रेप, अगर यूँ टला फैसला ||

.

मौलिक / अप्रकाशित

Added by रविकर on August 31, 2013 at 6:30pm — 11 Comments

चोरों की बारात, बजाये रविकर वंशी-

वंशीधर का मोहना, राधा-मुद्रा मस्त । 

नाचे नौ मन तेल बिन, किन्तु नागरिक त्रस्त । 

 

किन्तु नागरिक त्रस्त, मगन मन मोहन चुप्पा । 

पाई रहा बटोर, धकेले लेकिन कुप्पा । 

 

बीते बाइस साल, हुई मुद्रा विध्वंशी । 

चोरों की बारात, बजाये रविकर वंशी ॥ 

मौलिक / अप्रकाशित

Added by रविकर on August 29, 2013 at 8:30am — 12 Comments

हाकी काकी सी सरस, क्रिकेट बुआ हमार-

मौलिक / अप्रकाशित

हाकी काकी सी सरस, क्रिकेट बुआ हमार |
राखी भैया-द्वीज पर, पा विशेष उपहार |


पा विशेष उपहार, हार हीरों का पाई |
जाए हीरो हार, करोड़ों किन्तु कमाई |


काकी का कर्तव्य, करे नित सेवा माँ की |
लेडी मेवा खाय, खूब चीयर हा हा की ||

Added by रविकर on August 27, 2013 at 12:00pm — 6 Comments

उनको सुवर हराम, अहिंसा अपने आड़े-

मौलिक / अप्रकाशित

"पक्के-बाड़े" में पिले , जबसे सु-वर तमाम ।

मल-मलबा से माल तक, खाते सुबहो-शाम ।

खाते सुबहो-शाम, गगन-जल-भूमि सम्पदा ।

करें मौज अविराम, इधर बढ़ रही आपदा ।

उनको सुवर हराम, अहिंसा अपने आड़े ।

"मत" हिम्मत से मार, शुद्ध कर "पक्के-बाड़े" ।।

Added by रविकर on August 22, 2013 at 8:58am — 6 Comments

हारे भारत दाँव, सदन हत्थे से उखड़े -

मौलिक / अप्रकाशित

उखड़े मुखड़े पर उड़े, हवा हवाई धूल ।

आग मूतते हैं बड़े, गलत नीति को तूल ।


गलत नीति को तूल, रुपैया सहता जाए ।

डालर रहा डकार, कौन अब लाज बचाए ।

बहरा मोहन मूक, नहीं सुन पाए दुखड़े ।

हारे भारत दाँव, सदन हत्थे से उखड़े ॥

Added by रविकर on August 20, 2013 at 1:42pm — 5 Comments

सरेआम लें लूट, गिरी माँझा बिन गुड्डी--रविकर

मौलिक / अप्रकाशित

गुड्डी-गुड़ी गुमान में, ऊँची भरे उड़ान |
पेंच लड़ाने लग पड़ी, दुष्फल से अन्जान |


दुष्फल से अन्जान, जान जोखिम में डाली |
आये झँझावात, काट दे माँझा-माली |


लग्गी लेकर दौड़, लगाने लगे उजड्डी |
सरेआम लें लूट, गिरी माँझा बिन गुड्डी ||

Added by रविकर on August 17, 2013 at 2:43pm — 5 Comments

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