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Naveen Mani Tripathi's Blog – September 2017 Archive (9)

ग़ज़ल -- कीचड़ के आस पास में देखा कवँल गया

*221 2121 1221 212*



सारा चमन गुलाब था अश्कों में ढल गया ।

था बारिशों का दौर समंदर मचल गया ।।



रुसवाईयां तमाम थीं दिल में मलाल थे ।

देखा जो हुस्न आपका पत्थर पिघल गया ।।



खुशबू बनी हुई है अभी तक दयार में ।

महबूब मेरा ख्वाब में आकर टहल गया ।।



कैसा नशा था इश्क़ में मदहोशियों के बीच ।

जो भी थे दफ़्न राज़ वो पल में उगल गया।।



जब मैं जला तो लोग बहुत जश्न में मिले ।

जैसे किसी नसीब का सिक्का उछल गया ।।



कहता था है ये आग… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 23, 2017 at 2:00am — 4 Comments

ग़ज़ल - बेसबब यूँ ही नही परदा करो

2122 2122 212

इस तरह बे फिक्र मत निकला करो ।

कुछ ज़माने को भी अब समझा करो।।



लोग पलकें हैं बिछाए राह में ।

बेसबब यूँ ही नहीं परदा करो ।।



है मुहब्बत से सभी की दुश्मनी।

ज़ालिमों से मत कभी उलझा करो ।।



फिर सितारे टूटकर गिरते मिले ।

आसमा पर भी नज़र रक्खा करो ।।



कुछ परिंदे हो गए बेख़ौफ़ हैं ।

कौन कैसा उड़ रहा देखा करो ।।



दाग दामन पर लगे कितने यहां ।

आइनो से भी कभी पूछा करो ।।



वक्तपर अक्सर मुकर जाते हैं लोग… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 22, 2017 at 8:38am — 1 Comment

ग़ज़ल शाम होते ही सँवर जाएंगे

2122 1122 22

चाँद बनकर वो निखर जाएंगे ।

शाम होते ही सँवर जाएंगे ।।



जख्म परदे में ही रखना अच्छा ।

देखकर लोग सिहर जाएंगे ।।



छेड़िये मत वो कहानी मेरी।

दर्द मेरे भी उभर जाएंगे ।।



घूर कर देख रहे हैं क्या अब।

आप नजरों से उतर जाएंगे।।



वक्त रुकता नहीं है दुनिया में ।

दिन हमारे भी सुधर जाएंगे ।।



क्या पता था कि जुदा होते ही ।

इस तरह आप बिखर जाएंगे ।।



ये मुहब्बत है इबादत मेरी ।

एक दिन दिल मे ठहर में… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 19, 2017 at 1:00pm — 14 Comments

ग़ज़ल

1222 1222 122

रकीबों को उठाया जा रहा है ।

किसी पर जुल्म ढाया जा रहा है ।।



मैं छोड़आया तुम्हारी सल्तनत को।

मगर चर्चा चलाया जा रहा है ।।



मुखौटे में मिले हैं यार सारे ।

नया चेहरा दिखाया जा रहा है।।



सुखनवर की किसी गंगा में देखा ।

नया सिक्का चलाया जा रहा है ।।



सही क्या है गलत क्या है ग़ज़ल में ।

नया कुछ इल्म लाया जा रहा है ।।



अदब से वास्ता जिसका नहीं था ।

उसे आलिम बताया जा रहा है ।।



सिकेंगी रोटियां अब… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 13, 2017 at 5:30pm — 11 Comments

ग़ज़ल - जो मुद्दत से मुझे पहचानता है

1222 1222 122

मेरी पहचान को खारिज़ किया है ।

जो मुद्दत से मुझे पहचानता है ।।



खुशामद का हुनर बख्सा है रब ने ।

खुशामद से वो आगे बढ़ रहा है ।।



जतन कितना करोगे आप साहब ।

ये भ्रष्टाचार अब तक फल रहा है ।।



यकीं होता नही जिसको खुदा पर ।

वही इंसां खुदा से माँगता है ।।



उन्हें ही डस रहें हैं सांप अक्सर ।

जो सापों को घरों में पालता है ।।



गया मगरिब में देखो आज सूरज ।

पता वह चाँद का भी ढूढता है ।।



मदारी के लिए… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 12, 2017 at 1:58pm — 13 Comments

सियाह ज़ुल्फ़ के साये में शाम हो जाये

1212 1122 1212 22*

ये ख्वाहिशें हैं कि दिल तक मुकाम हो जाये ।

सियाह ज़ुल्फ़ के साये में शाम हो जाये ।।



हैं मुन्तज़िर सी ये आंखे कभी तू मिल तो सही।

नए रसूख़ पे मेरा कलाम हो जाये ।।





बड़े गुरुर से उसने उठाई है बोतल ।

ये मैकदा न कहीं फिर हराम हो जाये ।।



फिदा है आज तलक वो भी उस की सूरत पर ।

कहीं न वो भी सनम का गुलाम हो जाये ।।



अदा में तेज हुकूमत की ख्वाहिशें लेकर ।

खुदा करे कि वो दिल का निजाम हो जाए ।।





किसी… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 9, 2017 at 1:30am — 9 Comments

रहमतों से फ़ासला हो जाएगा

मत कहो हमसे जुदा हो जाएगा ।

वह मुहब्बत में फ़ना हो जाएगा ।।





इश्क के इस दौर में दिल आपका ।

एक दिन मेरा पता हो जाएगा ।।



धड़कनो के दरमियाँ है जिंदगी ।

धड़कनो का सिलसिला हो जाएगा ।।



इस तरह उसने निभाई है कसम ।

वह हमारा देवता हो जाएगा ।।



ऐ दिले नादां न कर मजबूर तू ।

वो मेरी ज़िद पर ख़फ़ा होजाएगा ।।



पत्थरो को फेंक कर तुम देख लो ।

आब का ये कद बड़ा हो जाएगा ।।



मत निकलिए इस तरह बे पैरहन ।

फिर चमन में हादसा… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 6, 2017 at 11:49pm — 8 Comments

आप क्या हैं इसे जानता कौन है

212 212 212 212

पूछिये मत यहां गमज़दा कौन है ।

पूछिये मुद्दतों से हँसा कौन है ।।



वो तग़ाफ़ुल में रस्में अदा कर गया ।

कुछ खबर ही नहीं लापता कौन है ।



घर बुलाकर सनम ने बयां कर दिया ।

आप आ ही गये तो ख़फ़ा कौन है ।।



इस तरह कोई बदला है लहजा कहाँ ।

आपके साथ में रहनुमा कौन है ।।



आज तो बस सँवरने की हद हो गई ।

यह बता दीजिए आईना कौन है ।।



अश्क़ आंखों से छलका तो कहने लगे ।

ढल गई उम्र अब पूंछता कौन है ।।



यूँ भटकता… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 5, 2017 at 3:17pm — 12 Comments

धब्बा लगा रहा है कोई आफ़ताब में

221 2121 1221 212



आ जाइये हुजूर जरा फिर हिजाब में ।

लगती बुरी नजर है यहां माहताब में ।।



बच्चों की लाश पर है तमाशा जनाब का ।

औलाद खो रहे किसी खानाखराब में ।।



अंदाज आपके हैं बदलते अना के साथ ।

शायद कोई नशा है यहां इंकलाब में ।।



सत्ता मिली जो आपको चलने लगे हैं दौर ।

डूबे मिले हैं आप भी महंगी शराब में ।।



खामोशियों के बीच जफा फिर जवाँ हुई ।

आंखों ने अर्ज कर दिया लुब्बे लुआब में ।।



यूँ ही किया था जुर्म वो दौलत… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 1, 2017 at 11:06pm — 20 Comments

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