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अरुन 'अनन्त''s Blog (103)

हम गीले थे

वो कोमल थे, वो कंटीले थे,

आँखें सूखीं थी, हम गीले थे,

रास्ते फूलों के, पथरीले थे,

जख्मी पग, कांटें जहरीले थे,

ढहे पेंड़ों से, पत्ते ढीले थे,

बिखरे हम, कर उसके पीले थे,

नाजुक लब, नयना शर्मीले थे,…

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Added by अरुन 'अनन्त' on July 21, 2012 at 5:30pm — 7 Comments

पानी था या हवा था

पानी था, या हवा था,

वो किस दिल, की दुआ था,



ठंडा मौसम, कड़ी लू

वो गम था, या दवा था,

 

लगता था, वो खुदा पर,

किस्मत था, या जुआ था,

 

बेवजह…

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Added by अरुन 'अनन्त' on July 20, 2012 at 11:37am — 19 Comments

उम्मीदों का कोना

लहू से लतपथ,  उम्मीदों का कोना है,

कि मैं घडी भर हूँ जागा, उम्र भर सोना है,



मिला लुटा हर लम्हा, जीवन का तिनका सा,

लबों पे रख कर लफ़्ज़ों को, जी भर रोना है,



छुड़ा के दामन अब वो दोस्त, अपना बदला,

मिला के आँखों का गम, सारा आलम धोना है,…



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Added by अरुन 'अनन्त' on July 19, 2012 at 6:15pm — 10 Comments

रिश्तों में आ गई सिलवट

बातों ने ली ऐसी करवट
रिश्तों में आ गई सिलवट

बदला ज़रा - जरा मैं जब
सूरत से था हटा घूँघट

पानी बहा नदी का तब
बखेरी जे वो सुखा कर लट,

कलेजा निकाल कर लाया,
वो रख गयी जुबां पर हट,

आँचल हवा से उड़ता है,
जीवन न अब रहा है कट

Added by अरुन 'अनन्त' on July 19, 2012 at 5:30pm — 3 Comments

दिल तुझसे ज़रा खफा है

आदरणीय गुरुजनों, मित्रों  आज मैंने ग़ज़ल लिखने का प्रयास ओ.बी.ओ. के द्वारा सिखाये गए नियमों का पालन करते हुए किया. कृपया मेरा मार्ग दर्शन करें, मैं सदा आभारी रहूँगा.

खास कर पूज्य योगराज जी, की टिपण्णी का इंतज़ार रहेगा.

नाराज हूँ मैं, दिल तुझसे ज़रा खफा है,

मासूम भोली, सूरत ने दिया दगा है



खंज़र ये आँखों का, दिल में उतार डाला  

हमेशा के लिए मुस्किल, जख्म मुझे मिला है,



डर डर के जिंदगी को, जीने से मौत बेहतर,

कैसा ये दर्द दिलबर, सीने में भर…

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Added by अरुन 'अनन्त' on July 18, 2012 at 5:34pm — 12 Comments

दो घूंट भरके पी ले

आदरणीया/आदरणीय गुरुमां, गुरुजनों और मेरे प्रिय मित्रों. आज पहली बार मैंने ओ.बी.ओ पर ग़ज़ल की कक्षा से सीख कर एक ग़ज़ल लिखने का प्रयास किया है. कृप्या मेरा मार्ग दर्शन करें कि मैंने कहाँ पर त्रुटी की है. सभी को सादर प्रणाम.

दो घूंट भरके पी ले, बड़ी उम्दा शराब है,

ए दोस्त तेरी प्यार में किस्मत ख़राब है,

धोखा है, बेवफा है, ये हुस्न है फरेबी,…

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Added by अरुन 'अनन्त' on July 14, 2012 at 1:30pm — 8 Comments

तेरी याद आती है माँ

दिल खोलकर सखियों में मेरा ज़िक्र करती थी,

ज़रा सी देर क्या हो जाए बहुत फिक्र करती थी.........



तेरी याद आती है माँ, हाँ सच है माँ, बहुत याद आती है माँ......

अश्क आँखों में जब आता है, दर्द जब मुझको सताता है,

जब उदास हो जाता है मन, जब बढ़ जाती है उलझन,

तेरी याद आती है माँ, हाँ…

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Added by अरुन 'अनन्त' on July 13, 2012 at 10:30am — 21 Comments

माँ तेरे बिन

अँधेरा मुझमे सो रहा है, माँ तेरे बिन,

डर को मुझमे बो रहा है, माँ तेरे बिन,



घर में घुस आईं हैं, धूल लेकर आंधियां अब,

कि जीना मुस्किल हो रहा है, माँ तेरे बिन,

ठोकरें लौट आई हैं, भर कर पत्थर राहों में,

नज़रों से उन्जाला खो रहा है, माँ तेरे बिन,…

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Added by अरुन 'अनन्त' on July 12, 2012 at 5:55pm — 9 Comments

अब जीने का खौफ है

शीशे की तरह दिल में, इक बात साफ़ है,

ये दिल दिल्लगी के, बिलकुल खिलाफ है,



खता इतनी थी कि उसने, मज़बूरी नहीं बताई,

फिर भी उसकी गलती, तहे-दिल से माफ़ है,

लगने लगी है सर्दी, अश्कों में भीगने से,

इतना हल्का हो गया, तन का लिहाफ है,…

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Added by अरुन 'अनन्त' on July 12, 2012 at 12:37pm — 10 Comments

दिल लगाने को तुला है

नापाक इरादे से दिल लगाने को तुला है,

इक शक्स मेरी हस्ती मिटाने को तुला है,

  

हजारों किये हैं जुर्म मगर सजा कोई नहीं,

मुझको भी गुनाहों में फ़साने को तुला है,



सौदागर है, दिलों का व्यापार करता है,

धंधा है यही वो जिसको, बढ़ाने को तुला…

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Added by अरुन 'अनन्त' on July 11, 2012 at 2:29pm — 10 Comments

तेरा नाम भूल जाऊँ

बस दो घूंट पियूँ , और सारा जाम भूल जाऊँ

कि तुझे याद करूँ, और तेरा नाम भूल जाऊँ



जीवन के सफ़र में कहीं, तू मिले जो दुबारा,

तेरा हाल पूछूँ, और क्या था काम भूल जाऊँ,

मिलने को तुझसे, जब भी सजाऊँ कोई रात,

मारे ख़ुशी के मैं तो वही, शाम…

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Added by अरुन 'अनन्त' on July 11, 2012 at 12:00pm — 8 Comments

जलाया जब रातों में मुझको

छोड़ कर उल्फत की गलियां, मैं तेरे बिन निकल आया,

जलाया जब रातों में मुझको, इक नया दिन निकल आया,

दिल में दफनाई थी यादें, आज जो फुर्सत में खोदीं,

बे-दर्द जिन्दा जख्मों का, वही पल-छिन निकल आया,

सोंचकर रात भर जागे, सबेरा कल नया होगा,

मगर बीता वही समय उठ के , प्रतिदिन निकल…

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Added by अरुन 'अनन्त' on July 9, 2012 at 4:30pm — 13 Comments

मुस्कुराना भूल आये हैं

ख़ुशी से हंसते-हंसते लब, मुस्कुराना भूल आये हैं,

आज हम अपने ही घर का, ठिकाना भूल आये हैं,



यादों के सब लम्हे , यादों से मिटाकर हम,

उसके साथ वो गुजरा, जमाना भूल आये हैं,

बुझाकर रख गई जब वो, सुहाने साथ बीते पल,

सुलगता यादों का वो पल छिन, जलाना भूल आये…

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Added by अरुन 'अनन्त' on July 8, 2012 at 1:30pm — 10 Comments

थोड़ी दाल थोड़े भात उधार मांगता हूँ

बस नींद भरी रात उधार मांगता हूँ,

दिल के लिए जज़्बात उधार मानता हूँ,

कोई तोड़ जाये जो होंठो से मेरे चुप्पी,

कुछ लफ़्ज़ों की सौगात उधार मानता हूँ,

मुमकिन नहीं है फिर तसल्ली के वास्ते,

गूंगे लबों…

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Added by अरुन 'अनन्त' on July 7, 2012 at 3:39pm — 2 Comments

ज़रा सी बात

ज़रा सी बात बोलो तो बताना हैं बना लेते,
उठा - गिरा कर पलकें फ़साना हैं बना लेते,

कहानी रच लेते हैं, जुबां से लम्बी चौड़ी वो,
पत्थरों को ज़रा छूकर, खज़ाना हैं बना लेते,

निगाहें रूठ जाएँ तो, बस्तियां लुट जाती हैं,
अपने आगे पीछे इक, जमाना हैं बना लेते,

यादों के बीते पल जब - जब जाग जाते हैं,
मेरी सारी खुशियों का हर्जाना हैं बना लेते.....

Added by अरुन 'अनन्त' on July 7, 2012 at 12:00pm — No Comments

कुछ शेर

समाधान चाहिए

बढ़ती हुई समस्याओं का, समाधान चाहिए,

इंसान के अवतार में, फिर भगवान चाहिए,

मुश्किलों से घिरी हुई है,अपनी जन्म-भूमि,

अब एक जुझारू योद्धा,बड़ा बलवान चाहिए, 

बैठे हैं भ्रष्ठाचारी, हर मोड़ हर कदम पर,

अब इनकी खातिर,एक नया शमशान…

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Added by अरुन 'अनन्त' on July 6, 2012 at 5:30pm — No Comments

रात के तेवर

रात के तेवर जब - जब बदले नज़र आये,

तेरी यादों के मौसम बड़े उबले नज़र आये,

 

तसल्ली दे रहे हैं, हालात मुझे लेकिन,

आँखों से सारे मंजर दुबले नज़र आये,

 

भभकते अश्कों को कोई साथ न मिला,

न रुके और न…

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Added by अरुन 'अनन्त' on July 6, 2012 at 12:44pm — 8 Comments

मुकम्मल हो नहीं पाए

ख्वाब आँखों के कोई भी मुकम्मल हो नहीं पाए,

खाकर ठोकर यूँ गिरे फिर उठकर चल नहीं पाए,

खिलाफत कर नहीं पाए बंधे रिश्ते कुछ ऐसे थे,

सवालों के किसी मुद्दे का कोई हल नहीं पाए,

बड़े उलटे सीधे थे, गढ़े रिवाज तेरे शहर के,

लाख कोशिशों के बावजूद हम उनमे ढल नहीं…

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Added by अरुन 'अनन्त' on July 6, 2012 at 12:09pm — 6 Comments

दो कवितायेँ

(१)

मोहब्बतों से विनती



मोहब्बतों से विनती दिलों से निवेदन,

नहीं दिल्लगी में मिले, कोई साधन,



नाजुक बहुत हैं ये रिश्तों के धागे,

नहीं फिर जुड़ेगा, जो टूटा ये बंधन,



संभालेंगे कैसे लडखडाये कदम जब,

फ़िसलेंगे हाथों से अपनों के दामन,



पनप नहीं पाते ज़ज्बात फिर दिलो में,

सूना हो गया जो निगाहों का आँगन,



आँखों का बाँध छूटा तो कैसे बंधेगा,

अश्को से हो जायेगी इतनी अनबन,



(२)

मैं तो…

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Added by अरुन 'अनन्त' on July 5, 2012 at 1:30pm — No Comments

चेहरा है तलाशा

हो गयी चाँद को हैरानी, सागर हुआ है प्यासा,
निगाहों ने मेरी खातिर ऐसा चेहरा है तलाशा,

उजड़े हुए चमन में फिर से फूल खिल गया हो,
मेरे रब ने, जैसे खुद किसी, हीरे को हो तराशा,

यारों दिन में भी हो जाए अंधेरों का इजाफा,
उसकी सूरत जो न दिखे तो बढ जाती है निराशा,

ये पहाड़ सी जिंदगानी चुटकी में गुजर जाए,
तेरा साथ जो मिले, मुझको राहों में जरा सा,

तू ही दिल की आरजू, तू ही प्यार की परिभाषा,
तूफाँ में बुझ रहे चरागों की तू है आशा.......

Added by अरुन 'अनन्त' on July 5, 2012 at 1:00pm — No Comments

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