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Neelam Upadhyaya
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Neelam Upadhyaya commented on Manan Kumar singh's blog post बापू की जय(लघु कथा)
"आदरणीय मनन सिंह जी, समाज में फैले भ्रस्टाचार पर कटाक्ष करती बेहतरीन रचना । बधाई ।"
10 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on somesh kumar's blog post नंगे सच का द्वंद
"अदरणीय सोमेश जी, अच्छी प्रस्तुति के लिए बधाई ।"
10 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on TEJ VEER SINGH's blog post मृत्यु भोज - लघुकथा –
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी, आज के समाज में दिखावट के चलन पर चोट करती बहुत ही अच्छी ल्रचना । बधाई स्वीकार करें ।"
10 hours ago
Neelam Upadhyaya posted a blog post

रजिस्ट्री

"चाचा, ईहाँ हमनीके बानी सन । तूँ कतहीं अऊरी जा के सूत जा ।"नन्द किशोर जी को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ । बड़े भाई की जो लड़कियां उनके कंधों पर खेल कूद कर बड़ी हुयी आज उन्होंने ही उन्हें घर से बाहर जाने के लिए कह दिया, वो भी ऐसे मौके पर जब बड़े भाई की तेरहवीं का सारा काम उन्होने आज ही निपटाया था ।नन्द किशोर जी अपने पिता के एकलौते पुत्र थे और श्रीनाथ जी, जिनकी आज तेरहवी थी, उनके ताऊजी के पुत्र थे। समय के साथ परिवार बड़ा हुआ तो संयुक्त परिवार का भी बटवारा हो गया । बटवारे के बाद भले ही पुराने घर का…See More
yesterday
pratibha pande commented on Neelam Upadhyaya's blog post भाग्य
"बढिया लघुकथा आदरणीया नीलम जी बधाई स्वीकार करें। आदरणीय सोमेश जी की बात से सहमत हूँ अंतिम पंक्ति के बिना भी कहानी कथ्य संप्रेषण मे सफल है"
Monday
Neelam Upadhyaya commented on Neelam Upadhyaya's blog post भाग्य
"अदरणीय समर कबीर जी एवं अदरणीय रक्षिता जी, लघु कथा पसंद करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।"
Monday
Neelam Upadhyaya commented on Neelam Upadhyaya's blog post भाग्य
"अदरणीय सोमेश जी, बहुत बहुत धन्यवाद । आइंदा भी आप के मार्गदर्शन की आवश्यकता रहेगी ।"
Monday
Neelam Upadhyaya commented on Neelam Upadhyaya's blog post भाग्य
"अदरणीय उस्मानी जी, मार्गदर्शन के लिए बहुत आभार । आइंदा भी आप के मार्गदर्शन की आकांक्षी रहूँगी ।"
Monday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Neelam Upadhyaya's blog post भाग्य
" तथाकथित आधुनिक रईस लोगों की एक मानसिकता को चित्रित करती बढ़िया भावपूर्ण रचना के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया  Neelam Upadhyaya  जी। मैं आदरणीय सोमेश कुमार जी की टिप्पणी से सहमत हूं। इस पंक्ति की आवश्यकता नहीं लगती।  इसी…"
Sunday
somesh kumar commented on Neelam Upadhyaya's blog post भाग्य
"भला भिखारी के "डौगी" जैसे भाग्य कहाँ  मेरे विचार में बिना निष्कर्ष के भी लघुकथा अपनी बात कहने में सफल है | रचना के लिए बधाई "
Sunday
Rakshita Singh commented on Neelam Upadhyaya's blog post भाग्य
"आदरणीय, नीलम जी दिल को छू लेने वाली बहुत ही सुन्दर लघुकथा। बहुत बहुत बधाई।"
Thursday
Samar kabeer commented on Neelam Upadhyaya's blog post भाग्य
"मोहतरमा नीलम उपाध्याय जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 7
Neelam Upadhyaya posted a blog post

भाग्य

एक कार आकर रज़ाई बनाने वाले की दुकान के आगे खड़ी हुयी । कार के पिछले दरवाजे से साहबनुमा व्यक्ति बाहर निकला । दुकान वाले की बांछें खिल गईं । भला कौन इस तरह उसकी दुकान पर इतनी बड़ी गाड़ी लेकर आता है ।दुकानदार से उन्मुख होते हुए साहब ने छोटे साइज़ के रज़ाई, गद्दा, तकिया और चद्दर दिखने को कहा । दुकानदार ने सोचा साहब को अपने छोटे बच्चे के लिए ये सब चाहिए, सो बड़े उत्साह से चीजें दिखने लगा । पर साहब ने बताया कि उन्हें ये सब समान अपने "डौगी" के लिए लेना है । दुकानदार बड़ी फुर्ती से उन्हें छोटे साइज़ के गद्दे…See More
Dec 7

Profile Information

Gender
Female
City State
NOIDA, Uttar Pradesh
Native Place
Distt. Gopalganj, Bihar
Profession
In Central Government job
About me
Ego khanti Bhartiya, aa ohu mein pakka bhojpuria, hindustani sangeet ke vidyarthi jekara apana sanskriti se bahut lagaw ba. Pichhala 16 saal se "Swar Trishna Vrinda" naam ke choir mein singer hayee. Ghar-office ke dayra ke beech mein rah ke bhi apana bhasha-bhashi ke sangat khojat rahile.

Neelam Upadhyaya's Blog

रजिस्ट्री

"चाचा, ईहाँ हमनीके बानी सन । तूँ कतहीं अऊरी जा के सूत जा ।"



नन्द किशोर जी को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ । बड़े भाई की जो लड़कियां उनके कंधों पर खेल कूद कर बड़ी हुयी आज उन्होंने ही उन्हें घर से बाहर जाने के लिए कह दिया, वो भी ऐसे मौके पर जब बड़े भाई की तेरहवीं का सारा काम उन्होने आज ही निपटाया था ।



नन्द किशोर जी अपने पिता के एकलौते पुत्र थे और श्रीनाथ जी, जिनकी आज तेरहवी थी, उनके ताऊजी के पुत्र थे। समय के साथ परिवार बड़ा हुआ तो संयुक्त परिवार का भी बटवारा हो गया । बटवारे के… Continue

Posted on December 12, 2017 at 3:48pm

भाग्य

एक कार आकर रज़ाई बनाने वाले की दुकान के आगे खड़ी हुयी । कार के पिछले दरवाजे से साहबनुमा व्यक्ति बाहर निकला । दुकान वाले की बांछें खिल गईं । भला कौन इस तरह उसकी दुकान पर इतनी बड़ी गाड़ी लेकर आता है ।

दुकानदार से उन्मुख होते हुए साहब ने छोटे साइज़ के रज़ाई, गद्दा, तकिया और चद्दर दिखने को कहा । दुकानदार ने सोचा साहब को अपने छोटे बच्चे के लिए ये सब चाहिए, सो बड़े उत्साह से चीजें दिखने लगा । पर साहब ने बताया कि उन्हें ये सब समान अपने "डौगी" के लिए लेना है ।…

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Posted on December 7, 2017 at 10:30am — 8 Comments

लघु कथा - पगडंडी

काले कोलतार की चमक लिए पक्की सड़क । वहीं बगल में थोड़ी निचाई पर पक्की सड़क के साथ-साथ ही चलती एक पगडंडी ।

सड़क पर लोगों की खूब आमोदरफ्त रहती, गाड़ियों का आवागमन रहता । अपना मान बढ़ता देख सड़क इतराती रहती । एक दिन उसने पगडंडी से कहा – "मेरे साथ चल कर क्या तू मेरी बराबरी कर लेगी ।  कहाँ मैं चमकती हुयी चिकनी सड़क और कहाँ तू कंकड़-पत्थर से अटी हुयी बदसूरत सी पगडंडी । महंगी से महंगी और बड़ी से बड़ी गाडियाँ मेरे ऊपर से आराम से गुजर जाती हैं । और तू...हुंह... ।" क्यों अपना समय बेकार करती है । यहीं रुक…

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Posted on March 27, 2017 at 2:00pm — 3 Comments

भाड़ा

 

"साहेब, कोई पुराना चद्दर हो तो दे दीजिये । बहुत ठंढा गिरने लगा है । कोई पुराना चद्दर दे दीजिये ।"

 

यूं तो वर्किंग डे पर रात के किसी भी आयोजनों में जाने का प्रोग्राम कम ही बनता है । लेकिन फिर भी कभी-कभी कुछ ऐसे मौके भी आ ही जाते हैं जब इस तरह के किसी आयोजन में जाना पड़ जाता है । ऐसे ही एक आयोजन को अटेण्ड कर वापस आते-आते रात के साढ़े ग्यारह बज गए । गोल्फ कोर्स मेट्रो स्टेशन से घर तक जाने के लिए आटो…

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Posted on March 14, 2017 at 4:23pm — 4 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 11:55pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 4:01pm on June 20, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

आदरणीया नीलम जी, सादर 

जन्म दिन की शुभ कामनाएं 

At 8:33pm on January 5, 2012, Mukesh Kumar Saxena said…


आपका वहुत धन्यबाद कि आपने मेरा मनोबल बढाया

At 12:10pm on June 23, 2011, Deepak Sharma Kuluvi said…
BAHUT HI SUNDAR RACHNAYEN NEELAM JI

REGARDS

KULUVI
At 6:25pm on June 20, 2011, ratan jaiswani said…
Happy birth day neelam ji.
At 6:09pm on June 20, 2011, Sanjay Rajendraprasad Yadav said…
At 9:06am on June 20, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 5:30pm on April 7, 2011, nemichandpuniyachandan said…
aap dwara housala aphazai ke liye aabhar.
At 10:03am on August 27, 2010, Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह said…
.

@► नीलम जी , मित्र के रूप में आपका स्वागत है ...

.
At 1:28pm on July 5, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

 
 
 

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"आद0 सुरेंद्र नाथ सिंह जी, हार्दिक आभार"
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"आदरणीय मनोज श्रीवास्तव जी, इस उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिये हृदय से धन्यवाद"
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