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Mohan Sethi 'इंतज़ार''s Blog – April 2015 Archive (7)

नया तूफ़ान ........इंतज़ार

जिंदगी में कोई

क्यूँ नहीं मिलता

एक नया तूफ़ान

क्यूँ नहीं खिलता

मैं भी देख लूँ जी के

ऊँचे टीलों पे

क्या होते हैं एहसास

इन कबीलों के !

मैं भी उड़ लूँ

तूफ़ानी फिज़ाओं में

जानता हूँ एक दिन

तूफ़ान थम जायेंगे

फिर खुशिओं के

उत्सव ढल जायेंगे

और बेवफाईओं के

ख़ामोश पल आयेंगे !

मौत आ जाये बेधड़क

तूफ़ान के बवंडर में

न होने से तो

कुछ होना अच्छा होगा

प्यार ना मिलने से तो

मिलकर खोना अच्छा…

Continue

Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 29, 2015 at 7:35am — 12 Comments

स्वार्थ ........इंतज़ार

धरती के सीने में

अमृत छलकता है

धरती के ऊपर पानी है

अन्दर भी पानी है

ये धरती की मेहेरबानी है

कि बादल में पानी है

बादल तरसते हैं

तो धरती अपना पानी

नभ तक पहुंचा

उनकी प्यास बुझाती है

बादल बरस कर

एहसान नहीं करते

सिर्फ़ बिन सूद

कर्ज चुकाते हैं

क्यूंकि पानी तो वो

धरती से ही पाते हैं

फिर भी धरती पर गरजते हैं

बिजली गिराते हैं

जहाँ से जीवन पाते हैं

उसी को सताते हैं

जननी का हाल

कुछ ऐसा ही बताया था

परमार्थ का बीज बोया…

Continue

Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 28, 2015 at 7:59am — 14 Comments

तृष्णा ........इंतज़ार

देह में तृष्णा के सागर
रेशम में ढकी गागर
इत्र से दबी गंध
लहू के धब्बों में
धुन्दलाया चेहरा
मुखोटों के पीछे
छिपाया मोहरा
न कोई मंजिल
ना कोई पहचान
बैठ ऊँचे मचान पर
ढूंढे नये आसमान
बे-माईने वक़्त का ये जहान
प्रेम परिभाषा ढूँढता वासना में
तम के घेरे में घिरा इंसान !!

******************************************

मौलिक व अप्रकाशित 

Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 27, 2015 at 6:30am — 18 Comments

पाषाण ........

हो चुकी हो तुम एक पाषाण

वो एहसासों की लहरों पे तैरना

धड़कनों को खामोशीओं में सुनना

होठों को छू लेने की तड़प

आगोश में भर लेने की चसक

सब रेत के घरोंदे थे .........

रेत के इन घरोंदों को

तूफ़ान से पहले क्यूँ खुद ही ढाना पड़ता है !

चादर में ग़मों की फटन को

वक़्त के धागे से क्यूँ ख़ुद ही सीना पड़ता है !

नींद के आगोश में

मरे हुए ख़वाबों को क्यूँ खुद ही ढोना पड़ता है !

उमंगों के उड़ते परिंदों को

दर्द के दरिया में क्यूँ…

Continue

Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 24, 2015 at 4:15am — 12 Comments

कुछ बनना होगा ........'इंतज़ार'

तुम दीया हो तो मुझे बाती बनना होगा

तेरा साथ पाने को चाहे मुझे जलना होगा !

तुम अगर रात हो तो मुझे अँधेरा बनना होगा

तुम से मिलने को मुझे सवेरों से लड़ना होगा !

तुम ग़र दरिया हो तो मुझे समन्दर बनना होगा

तुमको फिर मुहब्बत में मुझ से मिलना होगा !

तुम अगर हवा हो तो मुझे धूल बनना होगा

मुझे आगोश में ले आँधियों में तुम्हें उड़ना होगा !

तुम अगर चाँद हो तो मुझे चकोरी बनना होगा

तुमको हर रात मेरा मिलन का गीत सुनना होगा…

Continue

Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 20, 2015 at 1:25pm — 16 Comments

तेरे बिन ........

हवा क्यूँ है ?

ये सूरज क्यूँ है ?

क्या करूँगा मैं किरणों का

ये सूरज निकलता क्यूँ है ?

ना जमीं मेरी है

ना आसमां मेरा

बस इन अंधेरों का अँधेरा मेरा !

ये चमन क्यूँ है

ये फूल मुरझाये क्यूँ नहीं अब तक

ये तितलियाँ... ये भंवरे

घर गये क्यूँ नहीं अब तक

पेड़ों ने पत्तियाँ गिराई नहीं ?

हर चीज़ क्यूँ मुरझाई नहीं अब तक

धड़कनें क्यूँ चल रही हैं धक धक

जब तू ही नहीं

तो क्यूँ है ये दुनियाँ अब तक…

Continue

Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 9, 2015 at 7:33am — 5 Comments

चींटियाँ .......'इंतज़ार'

जब तुम गयी हो

तो दिल का भवंरा बेसुध

तेरे दिल के बंद दरवाज़े से

जा टकराया

और गिर पड़ा जमीन पर

होश ना रहा उसको !

जब जागा नींद से

तो बेवफ़ाई की चींटियों ने

था उसे घेरा हुआ

नोच नोच कर खा रहीं थी

मेरे दिल के नादान भंवरे को

घसीटते हुए ले जा रहीं थी

अपनी मांद में

तड़पा था बहुत

कोशिश भी की छुटने की

जालिमों ने मौका न दिया

सोचा.... लोग तो चार कांधों की

आरजू करते हैं

और मुझे चार नहीं

हज़ार कांधे नसीब हुए

और…

Continue

Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 2, 2015 at 5:10am — 17 Comments

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