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Mohan Sethi 'इंतज़ार''s Blog – May 2015 Archive (6)

दिल से जाती नहीं ........इंतज़ार

बेचारा ...बेबस... लाचार दिल

आँखों से कितनी दूर है

जो बस गए हैं सपने

उन्हें सच समझने को मजबूर है

आँखों की कहानी अपनी है

जो देखा बस वोही खीर पकनी है

छल फ़रेब की चाल रोज़ बदलनी है

क्या करे दिल की दुनियाँ का

वहाँ तो सिर्फ़ दिल की ही दाल गलनी है

हाँ ....बंद आंखें दिल को देखती हैं

मगर आँखों को

बंद आँखों से देखने पर भरोसा ही नहीं

क्यूंकि वो जानती हैं कि दिल मजबूर है

और सच्चाई सपनों से कितनी दूर है

यूँ हर किसी का दिल आँखों से दूर…

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Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on May 31, 2015 at 2:36pm — 9 Comments

मुझे अच्छा लगा ....इंतज़ार

तेरी चाहत में

सारी उम्र गलाना अच्छा लगा !

ना पा कर भी

तुझे चाहना अच्छा लगा ! 

लिख लिख के अशआर

तुझे सुनाना अच्छा लगा !

सच कहूँ तो मुझे

ये जीने का बहाना अच्छा लगा !! 



दुप्पट्टा खिसका कर 

चाँद की झलक दिखाना अच्छा लगा !

पास से निकली तो

हलके से मुड़ के तेरा मुस्कुराना अच्छा लगा !

बदली से निकल कर आज

चाँद का सामने आना अच्छा लगा !!



मिलने नहीं आयी मगर

रात सपनों में तेरा आना अच्छा लगा !

ला इलाज ही सही मगर

प्रेम का ये…

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Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on May 18, 2015 at 8:04am — 13 Comments

उतरान ........इंतज़ार

तुम चढ़ान हो जीवन की

मैं उतरान पे आ गया हूँ

चलो मिलकर समतल बना लें

हर अनुभूति

हर तत्व की

मिलकर औसत निकालें

कहीं तुम में उछाल होगा

कहीं मुझमें गहन बहाव होगा

चलो जीवन के चिंतन को

मिलकर माध्य सार बनालें

कभी तुम पर्वत शिखर पर हिम होगी

मैं ढलता सूरज होकर भी

तुम्हें जल जल कर जाऊँगा

चलो मिलकर जीवन को

अमृत धार बनालें

कभी तुम भैरवी सा राग होगी

मैं तुम्हारे सुर के पृष्ठाधार में ताल दूंगा 

चलो मिलकर जीवन काया को

समझौतों का एक मधुर…

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Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on May 16, 2015 at 5:50pm — 6 Comments

प्यार ........इंतज़ार

सुनो ...प्यार बड़ी चीज़ है

सबके काम आता है ये

डूबतों का तिनका

दुखियों का सहारा है ये

रोते हुओं के आँसू पोंछ

टूटे हुए दिलों को जोड़ जाता है ये

रूठों को मना लाता है

रिश्तों को शहद बनाता है ये

'इंतज़ार' कम ही लोगों को

करना आता है ये

इसकी तहज़ीब सीख लीजिये

वर्ना सोने वालों की

नीद उड़ा ले जाता है ये

उमंगों को भड़का

ज़िंदगी का मकसद बन जाता है ये

सुनो ...एहसासों का बुलबुला है ये

कांटा लगा ......तो

हवा हो जाता है ये…

Continue

Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on May 14, 2015 at 7:18am — 14 Comments

जीवन .......इंतज़ार

ज़िंदगी है तो

जीने से डरना क्या !

ख़वाब रंगीन होते हैं

देखने से डरना क्या !

जाम जब होंठों को छू जाये

तो फिर पीने से डरना क्या !

प्यार हो जाये

तो इकरार से डरना क्या !

ज़िंदगी एक सफ़र ही तो है

फिर रास्तों से डरना क्या !

सफ़र में कई हमसफ़र होंगे

मिलना क्या बिछुड़ना क्या !

हर मंजिल एक पड़ाव ही तो है

पाना क्या और खोना क्या !

जीवन सिर्फ़ एक आवागमन ही तो है

फिर आना क्या और जाना क्या…

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Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on May 12, 2015 at 6:00pm — 4 Comments

खारे पानी में भी मिठास होती है .....

दर्द के दरिया में सब कुछ खारा है

तुम ना जानो ...

क्यूंकि ये दर्द तो हमारा है

वो जो परिंदा इसमें डूबा है

इसे तुमने ही वहां उतारा है !

मगर समंदर के खारे पानी में

मछलियाँ ख़ुशी से तैर रही हैं

एक दूजे से खेल रही हैं

दुखी नज़र नहीं आतीं वो

यहाँ से निकलने का कोई

उतावलापन भी नहीं दिखता उन्हें

और अगले पल की फिक्र भी नहीं !

मैं भी तो मछली बन सकता हूँ

मुठ्ठी ढीली छोड़

ग़मों को आज़ाद कर सकता हूँ

और पकड़ सकता हूँ

कुछ…

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Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on May 4, 2015 at 9:51am — 12 Comments

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