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Naveen Mani Tripathi's Blog – October 2018 Archive (9)

कोई ले गया मेरा चाँद है मेरे आसमाँ से उतार कर

11212 11212. 11212. 11212

हुई तीरगी की सियासतें उसे बारहा यूँ निहार कर ।

कोई ले गया मेरा चाँद है मेरे आसमाँ से उतार कर ।।

अभी क्या करेगा तू जान के मेरी ख्वाहिशों का ये फ़लसफा । जरा तिश्नगी की खबर भी कर कोई शाम एक गुज़ार कर ।।

मेरी हर वफ़ा के जवाब में है सिला मिला मुझे हिज्र का । ये हयात गुज़री तड़प तड़प गये दर्द तुम जो उभार कर ।।

ये शबाब है तेरे हुस्न का या नज़र का मेरे फितूर है ।

खुले मैकदे तो बुला रहे तेरे तिश्ना लब…

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Added by Naveen Mani Tripathi on October 30, 2018 at 12:30pm — 1 Comment

हम देखते ही रह गए दिल का मकाँ जलता हुआ

2212 2212 2212 2212

आसां कहाँ यह इश्क था मत पूछिए क्या क्या हुआ ।

हम देखते ही रह गए दिल का मकाँ  जलता हुआ ।।

हैरान है पूरा नगर कुछ तो है तेरी भी ख़ता ।

आखिर मुहब्बत पर तेरी क्यों आजकल पहरा हुआ ।।

पूरी कसक तो रह गयी इस तिश्नगी के दौर में ।

लौटा तेरी महफ़िल से वो फिर हाथ को मलता हुआ ।।

दरिया से…

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Added by Naveen Mani Tripathi on October 27, 2018 at 6:00pm — 18 Comments

ग़ज़ल



1222 1222 1222 1222



महल टूटा जो ख्वाबों का तो फिर बिखरा नज़र आया ।

गुलिस्ताँ जिसको समझा था वही सहरा नजर आया ।।1

बहुत सहमा है तब से मुल्क फिर खामोश है मंजर।

उतरते ही मुखौटा जब तेरा चेहरा नजर आया ।।2

अजब क़ानून है इनका मिली है छूट रहजन को ।

मगर ईमानदारों पर बड़ा पहरा नज़र आया ।।3

सियासत छीन लेती होनहारों के निवालों को ।

हमारा दर्द कब उनको यहाँ गहरा नजर आया ।।4

वो भूँखा चीखता हक माँगता मरता रहा लेकिन…

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Added by Naveen Mani Tripathi on October 25, 2018 at 10:01pm — 13 Comments

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22

शायरी फख्र से महफ़िल में जुबानी आई ।

आप आये तो ग़ज़ल में भी रवानी आई ।।

लौट आयीं हैं तुझे छू के हमारी नजरें ।

जब दरीचे पे तेरे धूप सुहानी आई ।।

पूँछ लेता है वो हर दर्द पुराना मुझसे ।

अब तलक मुझको कहाँ बात छुपानी आई ।।

तीर नजरों से चला कर के यहां छुप जाना ।

नींद मेरी भी तुझे खूब चुरानी आई ।।

मुद्दतों बाद जो गुजरा था गली से इकदिन ।

याद मुझको तेरी हर एक निशानी आई…

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Added by Naveen Mani Tripathi on October 22, 2018 at 8:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल



1212 1122 1212 212



खिजा के दौर में जीना मुहाल कर तो सही ।

मेरी वफ़ा पे तू कोई सवाल कर तो सही ।।

है इंतकाम की हसरत अगर जिग़र में तेरे ।

हटा नकाब फ़िज़ा में जमाल कर तो सही ।।

निकल गया है तेरा चाँद देख छत पे ज़रा ।

तू जश्ने ईद में मुझको हलाल कर तो सही ।।

बिखरता जाएगा वो टूट कर शजर से यहां ।

निगाह से तू ख़लिस की मज़ाल कर तो सही ।।

मिलेंगे और भी आशिक तेरे जहां में अभी ।

तू अपने हुस्न की कुछ देखभाल कर तो सही…

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Added by Naveen Mani Tripathi on October 17, 2018 at 3:49pm — 7 Comments

मेरी हर निशानी मिटाने से पहले

122 122 122 122 

मेरी हर निशानी मिटाने से पहले ।

वो रोया बहुत भूल जाने से पहले ।।1

गयी डूब कश्ती यहाँ चाहतों की ।

समंदर में साहिल को पाने से पहले ।। 2

जफ़ाओं के मंजर से गुज़रा है कोई ।

मेरा ख़त गली में जलाने से पहले ।।3

वो दिल खेलने के लिए मांगते हैं ।

मुहब्बत की रस्मे निभाने से पहले ।। 4



ये तन्हाइयां हो न जाएँ सितमगर ।

चले आइये याद आने से पहले ।।6



मेरे हाल पर छोड़ दे मुझको जालिम ।

मुझे और…

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Added by Naveen Mani Tripathi on October 12, 2018 at 11:15pm — 20 Comments

ऐ अब्र जरा आग बुझाने के लिए आ

221-1221-1221-122.



तपती जमीं है आज तू छाने के लिए आ ।

ऐ अब्र जरा आग बुझाने के लिए आ ।।

यूँ ही न गुजर जाए कहीं तिश्नगी का दौर ।

तू मैकदे में पीने पिलाने के लिए आ ।।

ये जिंदगी तो हम ने गुज़ारी है खालिस में ।

कुछ दर्द मेरा अब तो बटाने के लिए आ ।।

जब नाज़ से आया है कोई बज़्म में तेरी ।

क़ातिल तू हुनर अपना दिखाने के लिए आ।।

शर्मो हया है तुझ में तो वादा निभा के देख ।

मेरी वफ़ा का कर्ज चुकाने के…

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Added by Naveen Mani Tripathi on October 11, 2018 at 7:30pm — 8 Comments

मौत आंगन में आकर टहलती रही

212 212 212 212

जिंदगी रफ़्ता रफ़्ता पिघलती रही ।

आशिकी उम्र भर सिर्फ छलती रही ।।

देखते देखते हो गयी फिर सहर ।

बात ही बात में रात ढलती रही ।।

सुर्ख लब पर तबस्सुम तो आया मगर ।

कोई ख्वाहिश जुबाँ पर मचलती रही ।।

इक तरफ खाइयाँ इक तरफ थे कुएं ।

वो जवानी अदा से सँभलती रही ।।

जाम जब आँख से उसने छलका दिया ।

मैकशी बे अदब रात चलती रही ।।

देखकर अपनी महफ़िल में महबूब को।

पैरहन बेसबब वह बदलती रही…

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Added by Naveen Mani Tripathi on October 9, 2018 at 10:00am — 16 Comments

ग़ज़ल



अभी तो यहाँ कुछ हुआ ही नहीं है ।

वो नादां उसे तज्रिबा ही नही है ।।1

उसे ही मिलेगी सजा हिज्र की अब ।

मुहब्बत में जिसकी ख़ता ही नहीं है ।।2

मिलेगा कहाँ से हमें कोई धोका ।

हमें आप का आसरा ही नहीं है ।।3

अगर आ गए हैं तो कुछ देर रुकिए ।

अभी तो मेरा दिल भरा ही नहीं है ।।4

है बेचैन कितना वो आशिक तुम्हारा ।

कहा किसने जादू चला ही नहीं है ।।5

जिधर जा रही वो उधर जा रहे हम ।

हमें जिंदगी से गिला ही नहीं…

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Added by Naveen Mani Tripathi on October 6, 2018 at 6:31pm — 8 Comments

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