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Khursheed khairadi's Blog – December 2014 Archive (4)

नया सूरज नई आशा चलो इक बार फिर से

1222 1222 1222 122

नया सूरज नई आशा चलो इक बार फिर से 

शब-ए-ग़म में नया  किस्सा चलो इक बार फिर से 

तेरे पिंदार का दामन तसव्वुर थाम  लेगा 

तेरी यादें तेरा चर्चा चलो इक बार फिर से 

किसे हसरत बहारों की किसे चाहत चमन की 

वही जंगल वही सहरा चलो इक बार फिर से 

किसी पर तंज़िया पत्थर उछालेंगे न हरगिज 

यही ख़ुद से करें वादा चलो इक बार फिर से 

बुझेगी तिश्नगी अपनी शरारों से हमेशा 

निगलने आग का दरिया चलो…

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Added by khursheed khairadi on December 31, 2014 at 11:00am — 13 Comments

महबूब ख़ुदा मेरा ,उल्फ़त ही इबादत है

 २२१ १२२२ २२१ १२२२

महबूब ख़ुदा मेरा ,उल्फ़त ही इबादत है 

है दीन बड़ा मुश्किल ,आसान मुहब्बत है 

तेजाब छिड़कते हो कलियों के तबस्सुम पर 

कहते हो इसे मज़हब ,क्या ख़ूब इबारत है 

ये खून खराबा क्यूं ,ये शोर शराबा क्यूं 

मैं किसको झुकाऊँ सिर ,इसमें भी सियासत है 

इक सब्ज़ पैराहन पर , है खून के कुछ छीटें

दहशत में लड़कपन है ,नफ़रत की वज़ाहत है              वज़ाहत=विस्तार \पराकाष्टा 

बारूद की बदबू है ,बच्चों के खिलौनों…

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Added by khursheed khairadi on December 28, 2014 at 11:00pm — 10 Comments

ग़ज़ल : डर लगता है

अपनी ही परछाई से डर लगता है

मुझको इस तन्हाई से डर लगता है

 

साथ देखकर भाईयों का जग डरता

भाई को अब भाई से डर लगता है

 

मनमोहक है भोलापन उसका इतना

दुनिया की चतुराई से डर लगता है

 

मौन रहूं या झूठ कहूं उलझन में हूं

लोगों को सच्चाई से डर लगता है

 

सारा जीवन सहराओं में भटका हूं

मुझको अब अमराई से डर लगता है

 

कानों में इक सिसकी सीसा घोल गई

मुझको अब शहनाई से डर लगता है

 

ग़म…

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Added by khursheed khairadi on December 24, 2014 at 3:30pm — 10 Comments

एक धरा है एक गगन है

एक धरा है एक गगन है

किंतु विभाजित अपना मन है

 

मीत किसी का ख़ाक बनेगा

उसकी ख़ुद से ही अनबन है

 

याद तुम्हारी महकाये मन

इस सहरा में इक गुलशन है

 

स्वर्ग तिहारे चरणों की रज

मातृधरा तुझको वंदन है

 

चौक बड़ा सा एक चबूतर

यादों में कच्चा आँगन है

 

नहीं बहलता खुशियों से मन

ग़म से अपना अपनापन है

 

आँसू बाती आँखें दीपक

दुख की लौ में सुख रोशन है

 

घाव दिये…

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Added by khursheed khairadi on December 23, 2014 at 12:30pm — 22 Comments

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