For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts

ह्रदय की कोमलता मत खो देना.

जग की कटुता देख, ह्रदय की कोमलता मत खो देना.

मधुमास सुबास सुमन तन की, हर इक सांसों में भर देना.

तेरे होठों की लाली से, उषा का अवतरण हुआ.

तेरी जुल्फों की रंगत से, ज्योति का अपहरण हुआ.

अपने खंजन- नयन में रम्भे, अश्रु कभी मत भर लेना.

मधुमास सुबास सुमन तन का, हर इक साँसों में भर देना.

पाता है रवि रौनक तुमसे, चाँद- सितारे शीतलता.

पवन सुगंध- हिरण चंचलता, रसिक - नयन को मादकता.

जग को मिलता प्राण तुम्हीं से, तुम्हे जगत से क्या लेना.

मधुमास सुबास सुमन तन का,… Continue

Added by satish mapatpuri on June 23, 2010 at 3:53pm — 4 Comments

मैं सब कुछ जानता हू

मुझे हसाना तो नहीं आता

मगर, रुलाना आता है ..दोस्त !



मुझे स्तुति -गान नहीं आता

मगर ,निंदा -गान आता है ...दोस्त !



मुझे तैरना नहीं आता

मगर , डुबाना आता है ....दोस्त !



मुझे धोती पहनाना नहीं आता

मगर , नंगा करना आता है ...दोस्त !



मैं गाली नहीं सुन सकता

मगर ,मगर गाली देना आता है ...दोस्त !



मुझे लिखना नहीं आता

मगर ,गलतियां निकाल लेता हू ...दोस्त !



सच में ,

मैं जानता कुछ नहीं ...मेरे दोस्त

फिर भी ,… Continue

Added by baban pandey on June 23, 2010 at 3:35pm — No Comments

बेवफा तुमको कैसे कहें.

तेरे प्यार में दर्द लाखों सहें.

मगर बेवफा तुमको कैसें कहें.

जिन्हें प्यार से तुमने चुमा कभी.

उन्हीं आँखों से गम का दरिया बहे.

मगर बेवफा तुमको कैसे कहें.

अब भी हमें ऐसा लगता अक्सर.

तुम्हीं सामने से चले आ रहे.

मगर बेवफा तुमको कैसे कहें.

टूटे हुए दिल की है ये सदा.

जफा करने वाले सदा खुश रहें.

मगर बेवफा तुमको कैसे कहें.

मापतपुरी की यही एक ख्वाहिश.

किसी मोड़ पे वो ना फिर से मिलें.

मगर बेवफा तुमको कैसे कहें.

गीतकार- सतीश… Continue

Added by satish mapatpuri on June 21, 2010 at 4:01pm — 5 Comments

भारतीय कुत्ते

भारत
कुत्तों के भौकने की
इधर -उधर सूघने की
एक अच्छी जगह ॥

गाहे -बगाहे
समय -कुसमय
चोर देखकर भौकना
और कभी -कभी
बिना चोर देखे
तेजी से भौकना ॥

गज़ब चरित्र है इनका ...
साधारण जनता
इनकी मानसिकता नहीं समझ सकते ॥

कुत्तों की सर्वोच्च संस्था
कहती है .....
भौकने की यह प्रवृति
परिपक्वता को दर्शाता है ॥

Added by baban pandey on June 21, 2010 at 1:59pm — 4 Comments

हमार जीवन

माँ - जब हम पैदा भईनी

हम त कुछ न जानत रहनी

कि डायबिटीज भी कुछ होखेला

आ एकरा से जीवन में कुछ फरक परेला

हम त ईहे जानत रहनी कि

अइसही होखत होई - खूब भूख लगत होई -

अइसहीं होखत होई - कबो खूब घुमरी आवत होई

हाथ - पैर झनझनात होई - चश्मा लगवले पर ठीक लऊकत होई I



हमरा खातिर त ई दुनिया

तबो अइसने रहे - सामान्य

हमरा खातिर ई दुनिया

आजो अइसने बा - सामान्य

बाकिर हमार - ना - तहार दुनिया बदल गईल

तब तूं खूब रोवलू

जब तहरा के बतावल गईल… Continue

Added by Neelam Upadhyaya on June 21, 2010 at 11:46am — 6 Comments

घर

घर
प्यार औ अपनत्व
जब दीवारों की
छत बन जाता है
वो मकान
घर कहलाता है
रजनी छाबरा

Added by rajni chhabra on June 21, 2010 at 10:55am — 3 Comments

मेरी उबड़ -खाबड़ गज़लें ( भाग -३)

तुम्हें दिखाउगा आइना, क्योकि वह केवल सच बोलता है

उनके लिए कौन लडेगा , जो केवल अपना हक मांगता है ॥



क्या मेरा इधर -उधर झाकना , तुम्हें नागबार लगता है

तो खुद ही बता दो वे बातें , जो हमें ख़राब लगता है ॥



सूरज तो निकलेगा एक दिन ,बादलों की उम्र ही क्या है

सच्चाई वय़ा करेंगे वे लोग , जिन्हें आज डर लगता है ॥



वो परेशां है इसलिए क़ि उनकी झूठ पकड़ ली गई है

इधर देखें ,उधर देंखें वे कही देखें , अब शर्म लगता है ॥



वे नंगे थे शुरू से ही ,नंगापन… Continue

Added by baban pandey on June 21, 2010 at 6:10am — 1 Comment

स्मृति गीत: हर दिन पिता याद आते हैं... संजीव 'सलिल'

स्मृति गीत:







हर दिन पिता याद आते हैं...





संजीव 'सलिल'





*





जान रहे हम अब न मिलेंगे.





यादों में आ, गले लगेंगे.





आँख खुलेगी तो उदास हो-





हम अपने ही हाथ मलेंगे.





पर मिथ्या सपने भाते हैं.





हर दिन पिता याद आते हैं...





*





लाड, डांट, झिडकी, समझाइश.





कर न सकूँ इनकी पैमाइश.





ले पहचान गैर-अपनों… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on June 20, 2010 at 7:49pm — 2 Comments

भोजपुरी के संग: दोहे के रंग ---संजीव 'सलिल'

भोजपुरी के संग: दोहे के रंग





संजीव 'सलिल'





भइल किनारे जिन्दगी, अब के से का आस?



ढलते सूरज बर 'सलिल', कोउ न आवत पास..



*



अबला जीवन पड़ गइल, केतना फीका आज.



लाज-सरम के बेंच के, मटक रहल बिन काज..



*



पुड़िया मीठी ज़हर की, जाल भीतरै जाल.



मरद नचावत अउरतें, झूमैं दै-दै ताल..



*



कवि-पाठक के बीच में, कविता बड़का सेतु.



लिखे-पढ़े आनंद बा, सब्भई… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on June 20, 2010 at 7:33pm — 2 Comments

श्रंधान्जली

आज पिर्तु दिवस पर मै श्रधान्जली के रूप में अपना नाम ;; कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा'' रखता हूँ ,आने वाली रचनाओ में इसी नाम से आप लोग ,अपना प्यार और आशीर्वाद दें...धन्यवाद

Added by कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा on June 20, 2010 at 2:15pm — 2 Comments

सीढिया

हर जगह
छलांग नहीं लगाया जा सकता ॥

मंजिल तक
पहुचने के लिए
सीढियों की ज़रूरत
तो पड़ती ही है ॥

इन सीढियों को
हम जितनी
मेहनत /श्रम /लगन से बनायेगें ....

ये सीढिया ...
उतनी जल्दी ही
हमें अपनी मंजिल तक
पंहुचा देगी ॥
----------बबन पाण्डेय

Added by baban pandey on June 20, 2010 at 9:56am — 3 Comments

मैं तुझ से मिलने आऊंगा

मैं तुझ से मिलने आऊंगा

मैं तुझ से मिलने आऊंगा

हर रात हौले से जब बंद करेगी तू अपनी आँखें

तेरे सपनो के द्वार इक दस्तक मैं दे जाऊँगा

मैं तुझ से मिलने आऊंगा

मैं तुझ से मिलने आऊंगा







लाख लगा ले तू पहरा अपने महलों की द्वारों पे

नज़र उठा के देख ज़रा लिखा है मैने नाम तेरा चाँद सितारों मे

जानता हूँ हर रोज़ जाती है तू फूलों के बागों मे

बालों मे लगाती है इक गजरा पिरोके उनको धागों मे

इक दिन बनके फूल तेरे गजरे का तुझ ही को महकाऊँगा

मैं… Continue

Added by Pallav Pancholi on June 20, 2010 at 12:47am — 5 Comments

.मै इन्सान नहीं हूँ ..!!

कौन कहता है ........मै इन्सान नहीं हूँ ,

हरकतें तो वही हैं ,मतलब भगवान नहीं हूँ ॥



मन में सब दुनियावी इच्छओं का ढेर लगा है ,

सब है फिर भी मुझको भी, ९९ का फेर लगा है ॥



मन की सारी चिंताएं बिलकुल, सबके जैसी हैं ,

मेरी हैं सबसे अलग, तुम्हारी बताना कैसी है ॥



हम तो सबका भला मांगते, ऐसा मन कहता है ,

पर हमेशा अपने भले की ,दुआ ये मन करता है ॥



हूँ इन्सान पर कहता हूँ'' मै बेईमान नही हूँ '',

अगर यह सच है, तो लगता है ''इन्सान नही हूँ… Continue

Added by कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा on June 19, 2010 at 8:01pm — 3 Comments

""सफलता का दर्पण""

करो जीवन मे जो प्रण,

पुरा करने को उसे,

कर दो तन-मन सब कुछ अर्पण।





राह मे आए चाहे कितनी भी कठिनाइयां,

चाहे हँसती रहे तुमपर सारी दुनिया,

अगर पक्का है तुम्हारा इरादा,

तोड़ सकते हो तुम हर बाधा,

सदा रखो स्वयं पर नियंञण,

अस्वीकार कर दो लोभ का हर निमंञण,

ज्यों-ज्यों लक्ष्य के प्रति बढेगा आर्कषण,

चिड़िया की तरह तिनका तिनका उठाना होगा,

तुम्हे रात-दिन अपना पसीना बहाना होगा,



हिम्मत मेहनत और लगन से

पुर्ण किया जो तुमने…
Continue

Added by Raju on June 19, 2010 at 12:46pm — 5 Comments

माँ ! तुम यहीं कहीं हो

माँ ....
मैं तुम्हें खोज लूँगा
तुम यहीं कहीं हो
मेरे आस -पास .... ॥

आपकी अस्थियां
प्रवाहित कर दी थी मैंने
गंगा में ॥
भाप बन कर उड़ी
गंगा -जल
और फिर बरस कर
धरती में समा गई

मैं सुबह उठकर
धरती को प्रणाम करता हू
इसे चन्दन समझ
माथे पर तिलक लगाता हू ॥

ऐसा कर
आपका
प्यार और वात्सल्य
रोज पा लेता हू .. माँ ॥
-------------बबन पाण्डेय

Added by baban pandey on June 19, 2010 at 6:20am — 5 Comments

AAS KA PANCHHI

आस का पंछी
मन इक् आस का पंछी
मत क़ैद करो इसे
क़ैद होंने के लिए
क्यां इंसान के
तन कम हैं

Added by rajni chhabra on June 19, 2010 at 1:00am — 3 Comments

ये कैसा शरारा है.

दरिया में ही ख़ाक हुए, ये कैसा शरारा है.
साहिल पे ही डूब गए, ये कैसा किनारा है.
यहाँ छांव जलाती है,मुस्कान रुलाती है.
रातों में खुद को खुद की ही, परछाईं डराती है .
ये कौन सी दुनिया है, ये कैसा नज़ारा है.
साहिल पे ही डूब गए, ये कैसा किनारा है.
बीच भंवर में अटक गए, मंजिल से हम भटक गए.
वक़्त ने ऐसा पत्थर फेंका, सारे सपने चटक गए.
मापतपुरी को अब बस, मालिक का सहारा है.
साहिल पे ही डूब गए, ये कैसा किनारा है
गीतकार- सतीश मापतपुरी
मोबाइल- 9334414611

Added by satish mapatpuri on June 18, 2010 at 11:12am — 5 Comments

गर्म खबरों में अब दम कहां

गर्म हवा की तपिश से
उठे ववंडरों ने
उनकी आँखों में धूल झोंक दी
उनके कपडे भी उड़ा ले गयी
वे नंगा हो गए ॥

मगर .....
गर्म खबरों ने
उनको नंगा नहीं किया
क्योकि .... उन्होनें
नोटों की माला से
अपना शारीर ढक रखा था ॥

अब
गर्म खबरों में
गर्म हवा जैसी ताकत कहां ??

Added by baban pandey on June 18, 2010 at 6:56am — 4 Comments

रिश्तों की नई परिभाषा ( आज के सन्दर्भ मे )

(१)

शादी ....

समझौते की गाडी मे

स्नेह की सीट पर बैठकर

अंतिम स्टेशन तक

पहुचने की चाह रखने वाले

दो सहयात्री ॥



(२)

गर्लफ्रेंड -बॉय फ्रेंड का प्यार .....

कसमों - वादों की सिलवट पर

लुका -छिपी की नमक के साथ

पिसी गई

मुस्कराहट की चटनी ॥



(३)

पत्नी का प्यार ........

उबड़ -खाबड़ रास्तो पर

रातों को उगने वाला

गंध -विहीन

कैक्टस के फूल

सूघने जैसा ॥



(४)

शाली (पत्नी की छोटी बहन ) का… Continue

Added by baban pandey on June 18, 2010 at 6:54am — 3 Comments

दोहा का रंग भोजपुरी के संग: संजीव वर्मा 'सलिल'

दोहा का रंग भोजपुरी के संग:





संजीव वर्मा 'सलिल'





सोना दहलs अगनि में, जैसे होल सुवर्ण.



भाव बिम्ब कल्पना छुअल, आखर भयल सुपर्ण..



*



सरस सरल जब-जब भयल, 'सलिल' भाव-अनुरक्ति.



तब-तब पाठकगण कहल, इहै काव्य अभिव्यक्ति..



*



पीर पिये अउ प्यार दे, इहै सृजन के रीत.



अंतर से अंतर भयल, दूर- कहल तब गीत..



*



निर्मल मन में रमत हे, सदा शारदा मात.



शब्द-शक्ति वरदान दे, वरदानी… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on June 17, 2010 at 8:54am — 3 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service