For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts

पिताजी की डायरी से..

पिताजी की डायरी से..…















Continue

Added by R N Tiwari on February 14, 2011 at 5:57pm — No Comments

एक और वैलेंटाइन डे ..



कहते  तो हैं की इश्क है हमसे..
इश्क है क्या ये जानते ही नहीं..
यूं तो लेते हैं न जाने कितनी कसमें..
कसमों की कीमत है क्या जानते ही नहीं..
चाह…
Continue

Added by Lata R.Ojha on February 14, 2011 at 5:27pm — 4 Comments

एक ग़ज़ल

एक ग़ज़ल 
 
बात मुझ से ये  कर  गया  पानी 
ये ना सोचो कि डर गया पानी
 
वो   हुनरमंद   है    ज़माने    में 
जिन की आँखों का मर गया पानी
 
हुई जो हक की बात महफ़िल में
जाने किस का उतर गया पानी
 
कल जो सैलाब था ज़माने पर 
अब समंदर के घर गया पानी
 
दौर  के  तौर  को  बदल  देगा 
जब भी सर से गुजर गया…
Continue

Added by ASHVANI KUMAR SHARMA on February 13, 2011 at 2:30pm — 10 Comments

चुभती साँसें मत देखा कर

ख्वाब पुराने मत देखा कर,
धुंधली यादें मत देखा कर,

और भी दर्द उभर आयेंगे,
दिल के छाले मत देखा कर,

जीवन में पैबंद बहुत हैं,
मूँद ले आँखें मत देखा कर,

अपने घर कि बात अलग है,
घर औरों के मत देखा कर,

कहने वाले बस कहते हैं,
दिन में सपने मत देखा कर,

जीवन का जब जोग लिया है,
चुभती साँसें मत देखा कर,

- आकर्षण

Added by Aakarshan Kumar Giri on February 13, 2011 at 10:00am — 3 Comments

" चुनावी मौसम "

दिल में फिर 
एक आस जगी है ,
चुनावी मौसम है
और प्यास बड़ी है |
नेता आयेंगे ,
नोट लायेंगे ,
हम तो हैं नालायक ;
फिर से नोट खायेंगे |
वोट करने भी जायेंगे
पर वापस आकर ,
बार बार चिल्लायेंगे
इसने तो कुछ किया नहीं |
अगली बार ,
दूसरे नेता को…
Continue

Added by Akshay Thakur " परब्रह्म " on February 13, 2011 at 9:01am — 8 Comments

दो आंख

 

 

 …

Continue

Added by R N Tiwari on February 13, 2011 at 7:41am — No Comments

चिड़िया से

चिड़िया तुम चहचहाइ

पौ फटने पर 

तुम्हारे चहचहाने पर ही है 

दारोमदार पौ फटने का.

अँधेरे को फाड़ कर निकलता

सिन्दूरी सूरज का गोला 

चमत्कार है तुम्हारी ही आस्था का

तुम्हारी ही आस्था ने बिखेरे है

जीवन में रंग 

पेड़ों को पराग 

गेंहूँ को बाली

आदमी को भरा धान का कटोरा 

मिला है तुम्हारे ही गीतों से 

जानता हूँ आदमी आजकल 

धान का कटोरा नहीं 

बन्दूक की गोली लिये

ढूँढता है तुम्हे 

पर…

Continue

Added by ASHVANI KUMAR SHARMA on February 12, 2011 at 10:30pm — No Comments

दुनियादारी (लघुकथा)



एक बार में ट्रेन में पुणे से मथुरा आ रहा था

जैसा की ज्यादातर यात्री करते हैं हम कुछ लोग भी एक मुद्दे पे बातचीत करके अपना समय काटने की कोशिश कर रहे थे

बात चल रही थी कश्मीर के हालातों पर .सब कश्मीर मुद्दे पे अपनी राय एक दूसरे को बता रहे थे

जैसा की हमेशा होता है मेरी राय ओरों से कुछ अलग ही थी और लोग उसपे सहमती नहीं दिखा रहे थे…

Continue

Added by Bhasker Agrawal on February 12, 2011 at 7:47pm — No Comments

ग़ज़ल...



तेरी आहट मेरे कानों को लगती है ग़ज़ल..

तेरी खुशबु मेरी साँसों में महकती सी ग़ज़ल..

तेरी बातों का सुकूँ रूह में बसती सी ग़ज़ल..

तेरा यकीं मुझे रौशनी देती सी…

Continue

Added by Lata R.Ojha on February 12, 2011 at 7:30pm — 3 Comments

ग़ज़ल :- कितने गडबड झाले हैं

ग़ज़ल :- कितने गडबड झाले हैं

कितने गडबड झाले हैं ,

और हम बैठे ठाले हैं |

 

तेल खेल ताबूत तोप में ,

घोटाले घोटाले हैं |

 

राजनीति अब शिवबरात है ,

नेताजी मतवाले हैं |

 

कलम की पैनी धार कुंद है ,

बाजारू रिसाले हैं |

 

बिकता नहीं साहित्य आजकल…

Continue

Added by Abhinav Arun on February 12, 2011 at 7:30am — 5 Comments

चैनलों में श्रेय लेने की होड़

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के धौड़ाई के पास माहराबेड़ा से यात्री बस को रोककर गणतंत्र दिवस के ठीक, एक दिन पहले 25 जनवरी को 5 जवानों तथा एक स्थानीय युवक को मुखबिरी के शक में नक्सली अगवा कर ले गए थे। बाद में युवक को नक्सलियों ने छोड़ दिया। इसके बाद अगवा किए गए जवानों के परिजन, नक्सलियों से लगातार गुहार लगा रहे थे, लेकिन नक्सली अपनी कुछ मांगों पर अड़े रहे। इस बीच मीडिया द्वारा मामले को कव्हरेज दिया जाता रहा। यहां बताना यह आवश्यक है कि जब से जवान अगवा किए गए थे, उसके बाद विपक्ष भी सरकार पर दबाव बनाया…

Continue

Added by rajkumar sahu on February 11, 2011 at 11:48pm — No Comments

andhere ki chikh se

अँधेरे की चीख से 
 
रोटियों से यहाँ भली गोली 
इसलिये है नहीं टली गोली
 
ग़ज़ब कि आप को लगी कैसे 
ये हवाओं में थी चली गोली
 
अमन औ चैन बरक़रार रहा 
आप को किसलिये खली गोली
 
आजकल वादियों में गूंजे है
बूट, खाली गली , गोली
 
आपका हक बड़ा जो हक में है
सिर्फ बन्दूक क़ी नली गोली
 
गंध बारूद क़ी है…
Continue

Added by ASHVANI KUMAR SHARMA on February 11, 2011 at 10:39pm — No Comments

मेरी त्रिवेनियाँ...

 

 

 1 .  एक को समझाऊँ तो दूसरी रोने लगती है ,
       थक -सा गया हूँ सबको मनाते मनाते ,
       
       ये तमन्नाओं का कटोरा कभी भरता ही नहीं |
 
2 .   मैंने छिपा लिया उन्हें मुट्ठियों में मोती समझकर…
Continue

Added by Veerendra Jain on February 11, 2011 at 7:17pm — 5 Comments

रिपोर्ट :- आचार्य का बाण भट्ट काशी में

रिपोर्ट :- आचार्य का बाण भट्ट काशी में

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का 'रंगमंडल' इन दिनों काशी में है | ०९ और १० फरवरी २०११ को एम.के.रैना के निर्देशन में "बाण भट्ट की आत्मकथा "का मंचन किया गया | नागरी नाटक मंडली के प्रेक्षागृह में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की इस कालजयी रचना को कलाकारों ने जीवंत कर…

Continue

Added by Abhinav Arun on February 11, 2011 at 1:23pm — 6 Comments

बक्त....

Added by अमि तेष on February 11, 2011 at 1:25am — 3 Comments

एक ग़ज़ल अँधेरे की चीख से

 
 ख़त्म विश्वास सा लगे लोगो 
ज़िन्दगी हादसा लगे लोगो
 
हाल जिस का भी पूछ कर देखो 
वही उदास सा लगे लोगो
 
आदमी एक वो जो पगलाया
अनबुझी प्यास सा लगे लोगो
 
जिंदगी जो हुई है बेगैरत 
किसी का हाथ सा लगे लोगो
 
आदमी तोड़ता दिखे तो है
जारी रिवाज सा लगे लोगो
 
जिसे अधिकार मैं समझता हूँ 
उन्हें लिहाज सा लगे लोगो…
Continue

Added by ASHVANI KUMAR SHARMA on February 9, 2011 at 11:30pm — No Comments

आओ थोड़ा सा व्यर्थ जियें

अपनों से दिल की बात, सुनहरी आँखों के ज़ज्बात;

बारिश में भी साथ, तुम्हारे हाथों में इक हाथ ;

चाँद की उजियारी रात, भोर के आने की सौगात;

जब सब बेगाना लगता हो.......

तो वापस जाना वहीँ, जहाँ तुम ह्रदय गंवाया करते थे;

जब दिल में कोई बात न थी, तब भी हकलाया करते थे;

जब आँखों पर चश्मा डाले, तुम तारे रोज़ गिनाते…
Continue

Added by neeraj tripathi on February 9, 2011 at 4:33pm — No Comments

बड़े सामान्य से दिन हैं

बड़े सामान्य से दिन हैं ....

बेमौसम बारिशें हैं,

और सांझ की बयार में ख्वाहिशें हैं,

वही सहमी सी धूप है,

और कहीं इसमें गुमसुम,

छांव का इक रूप है,

वही चंचल से वृक्ष हैं,

और बहती हवा के साथ निष्पक्ष हैं,

वही हैं चेहरे....जाने पहचाने,

और छुपे हुए उनमे रंग,

कितने अनजाने,

वही हैं मुरादें अब भी....मन में,

और जानता है मस्तिष्क,

नहीं होंगी ये पूरी,

इस जीवन में.

बड़े सामान्य से दिन हैं ....

Added by neeraj tripathi on February 9, 2011 at 4:31pm — 1 Comment

भौगोलिक दूरियां

बड़ा बेमानी लगता है;



सुबह जो मेरे घर कि जब कहीं की सांझ होती है,







यहाँ पर सूर्य इतराता है, शाखाओं से पेड़ों की,



वहां मदहोश होने की, चाँद की तैयारी होती है,



यहाँ पर आँख खुलती है, लिहाफों के घरोंदो में,



वहां बुझती सी पलकों पर नींदें भारी होती हैं,



ये दूरी है समय की या धरा भूगोल ऐसा है,



की जगना दो घरों का साथ में, दुशवारी होती है,…

Continue

Added by neeraj tripathi on February 9, 2011 at 4:28pm — No Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service