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Abhinav Arun's Blog – August 2011 Archive (11)

ग़ज़ल :- तलवार की बातें करो छोडो मयान की

ग़ज़ल :- तलवार की बातें करो छोडो मयान की

अब क्या बताएं आपको दुनिया जहान की ,

ये शायरी ज़ुबां है किसी बेज़ुबान की |

 …

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Added by Abhinav Arun on August 31, 2011 at 9:41am — 4 Comments

कविता :- हम नादान ?

कविता :- हम नादान ?

 

कदम आगे कदम पीछे

कभी उभरे कभी बिछे

हमीं इंसान

हम नादान…

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Added by Abhinav Arun on August 27, 2011 at 9:00am — 9 Comments

कविता :- ठहराव का सच

कविता :- ठहराव का सच

 

इच्छाओं की चिकनी सड़क पर फिसलती - संभलती ज़िंदगी की बाइक…

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Added by Abhinav Arun on August 24, 2011 at 9:17am — 2 Comments

ग़ज़ल :- सोच का सन्दर्भ अब कितना इकहरा हो गया

ग़ज़ल :- सोच का सन्दर्भ अब कितना इकहरा हो गया

 

सोच का सन्दर्भ अब कितना इकहरा हो गया ,

आदमी तकनीक के गुलशन का सहरा हो गया | 

 

जड़कटी…

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Added by Abhinav Arun on August 20, 2011 at 3:00pm — 8 Comments

ग़ज़ल :- बाढ़ का हद से गुजरना अच्छा

 ग़ज़ल :- बाढ़ का हद से गुजरना अच्छा
 
बाढ़ का हद से गुजरना अच्छा ,
गाँव का फिर से संवरना अच्छा |
 
इस जगह माँ की याद आती है ,
इस जगह थोडा ठहरना अच्छा…
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Added by Abhinav Arun on August 14, 2011 at 3:33pm — 11 Comments

ग़ज़ल :- ये खबर इस शहर पे तारी हुई

 ग़ज़ल :- ये  खबर इस शहर पे तारी हुई 
 
यह खबर इस शहर पे तारी हुई ,
मछलियों  की जाल से यारी हुई |
 
फूल था मधुरस लुटा हल्का हुआ ,…
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Added by Abhinav Arun on August 14, 2011 at 3:30pm — 14 Comments

कविता = कहाँ आज़ाद हैं हम

कविता = कहाँ आज़ाद हैं हम

कहाँ आज़ाद हैं हम

हजारों हर तरफ ग़म

भ्रष्टाचार के टीले - पहाड़

और जनता की नित हार

अवनति…

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Added by Abhinav Arun on August 14, 2011 at 1:39pm — 16 Comments

कविता- अनुभूत पपड़ियों का महाकाव्य !

कविता-  अनुभूत पपड़ियों का महाकाव्य !…

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Added by Abhinav Arun on August 12, 2011 at 7:37pm — 8 Comments

ग़ज़ल :- हथेली पे कैक्टस उगाने से पहले

ग़ज़ल :- हथेली पे कैक्टस उगाने से पहले

 

हथेली पे कैक्टस उगाने से पहले ,

ज़रा सोचना तिलमिलाने से पहले |

 

मोहब्बत से तौबा तो …

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Added by Abhinav Arun on August 9, 2011 at 7:00am — 19 Comments

ग़ज़ल :- मत फलक पर चाँद तारे बोइये

ग़ज़ल :- मत फलक पर चाँद तारे बोइये

मत फलक पर चाँद तारे बोइए ,

रख परे सपनों को चुपकर सोइए |…

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Added by Abhinav Arun on August 8, 2011 at 2:37pm — 8 Comments

ग़ज़ल - ग़मों का दौर हूँ मैं

ग़ज़ल - ग़मों का दौर हूँ मैं

ग़मों का दौर हूँ मैं ,

ग़ज़ल है और हूँ मैं |

 

दशहरी गंध तुम हो ,

तुम्हारी बौर हूँ मैं |

 

तेरा हर तिल…

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Added by Abhinav Arun on August 1, 2011 at 4:19pm — 15 Comments

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