For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

विनय कुमार's Blog (188)

स्वाद

"ये क्या मम्मी , फिर आपने इस ठेले वाले से सब्ज़ी खरीद ली । कितनी बार कहा है की सामने वाले शॉपिंग माल से ले लिया करो । सब्ज़ियाँ ताज़ी भी मिलती हैं और अच्छी भी । क्या मिलता है आपको इसके पास"।

"बेटा , इसकी सब्ज़ी में अपनापन है और उसमे जो स्वाद मिलता है न वो और कहीं नहीं मिलता"।

मौलिक एवँ अप्रकाशित

Added by विनय कुमार on July 23, 2014 at 3:00am — 12 Comments

भूख (लघुकथा)

"अरे बेटा , कैसे खा लिया तुमने उस ठेले से समोसा और पानी पूरी ? तुम तो जानते नहीं कि कितने गंदे हाथ होते हैं उनके और कैसा पानी और तेल इस्तेमाल करते हैं वो लोग"! मम्मी परेशान थीं और पापा चिंतित |
बड़े भाई ने भी टोक दिया "तुमसे ये उम्मीद नहीं थी, तुम तो मेडिकल के छात्र हो" |
"लेकिन मम्मी, मुझे भूख बहुत लगी थी"|
अब सब खामोश थे |

.
(मौलिक व अप्रकाशित)

Added by विनय कुमार on July 19, 2014 at 1:00pm — 14 Comments

अंतिम संस्कार

" मेरे पास समय बहुत कम है , डाक्टर ने बता दिया है कि कैंसर अपने आखिरी स्टेज में है , प्लीज बेटे को बुला लो अब" | पापा की दर्द भरी आवाज सुनकर वो अपने आप को रोक नहीं सकी , आँसू बेशाख्ता आँखों से बह निकले | माँ तो जैसे जड़ हो गयी थी , सिर्फ सूनी सूनी आँखों से कभी पापा को , तो कभी उसे देखती रहती |

कैसे बताये उनको , कल ही तो उसने फोन किया था भाई को | पूरी बात सुनने से पहले ही बोल पड़ा " मैं बार बार नहीं आ सकता वहां , अभी १५ दिन पहले ही तो आया हूँ | इतनी छुट्टी नहीं मिल सकती मुझे , और हाँ…

Continue

Added by विनय कुमार on July 12, 2014 at 4:30am — 15 Comments

अपनें

" क्या बात है वर्माजी , बड़े खुश नज़र आ रहे हैं आप , कोई लाटरी तो नहीं लग गयी इस उम्र में" |
" नहीं भाई , दरअसल अख़बार में खबर थी कि एक वृद्धाश्रम बन रहा है अपने शहर में , अब कम से कम बाक़ी जिंदगी तो अपनों में गुजरेगी "|

मौलिक एवँ अप्रकाशित

Added by विनय कुमार on July 11, 2014 at 2:30am — 10 Comments

नज़र

वह दोस्तों के साथ मूवी देखकर और लंच करके लौटी थीं | घर में घुसते ही माँ ने कहा:

"अरे शर्मा अंकल आए हैं, ड्राइंग रूम में जा के नमस्ते तो कर ले |"
"ठीक है माँ, मिल लेती हूँ जा के , जरा दुपट्टा तो डाल लूँ |"

(मौलिक और अप्रकाशित)

Added by विनय कुमार on July 8, 2014 at 12:00am — 15 Comments

थप्पड़

"तड़ाक !"

थप्पड़ बड़े जोर का था और साहब की उतनी ही तीखी आवाज़

"खाने में फिर बाल , दिखाई नहीं देता तुमको "|

बाई भी सहम गयी और सोचने लगी कि कल तो मेमसाब कह रहीं थीं कि कैसा मर्द है तुम्हारा, तुमको पी कर पीटता है , और साहब ने तो आज पी भी नहीं है | 

 ( मौलिक और अप्रकाशित )

Added by विनय कुमार on July 6, 2014 at 11:30am — 11 Comments

आज़ादी

हैप्पी इंडिपेंडेंस डे , आज़ादी की वर्षगांठ मुबारक | आतिशबाजियां छुड़ाते और एक दूसरे को मिठाई खिलाते हुए लोग चिल्ला रहे थे और एक दूसरे को इंडिपेंडेंस डे की शुभकामना भी दे रहे थे |
और सामने की मिठाई की दुकान पर छोटू दौड़ दौड़ कर लोगों को पानी दे रहा था और टेबल साफ़ कर रहा था |


( मौलिक और अप्रकाशित )

Added by विनय कुमार on July 6, 2014 at 12:30am — 14 Comments

पढ़ाई लिखाई

बीबी जी, आप नौकरी क्यों करते हो ? आपके पास तो पैसे की कोई कमी नहीं है |"
"पैसा ही सब नहीं होता रे जिंदगी में, आखिर इतनी पढ़ाई लिखाई कब काम आएगी" मैंने अपनी काम वाली बाई को समझाते हुए कहा.
अभी कुछ दिन पहले ही जब उसने तनख्वाह बढ़ाने की प्रार्थना की थी मैंने बड़े ही कठोर लहजे में मना कर दिया था | आज शायद पढ़ाई लिखाई का महत्त्व बाई की समझ में आ गया था |

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Added by विनय कुमार on July 5, 2014 at 3:00am — 15 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"वाह, वाह, बहुत जबरदस्त और लोगों के मानसिकता पर चुटीला प्रहार करती हुई लघुकथा हुई है. बहुत बहुत बधाई…"
1 hour ago
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"बहुत बढ़िया और प्रभावशाली लघुकथा हुई है प्रदत्त विषय पर और यह वर्तमान हालात को भी बखूबी बयां कर रही…"
1 hour ago
Kanak Harlalka replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"लघुकथा ------------ धड़कनों का सफर ----------------------- "या अल्लाह! जान को ये कैसा धड़की का…"
2 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"रामनगर एक्सप्रेस  ****************एक का नाम तो अब्दुल्ला ही था पर दूसरे का दीवाना नहीं था। पर…"
3 hours ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post आख़िर नुक़सान हमारा है
"हार्दिक आभार आपका"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"आदाब। हार्दिक स्वागत आदरणीय। मानवेतर लघुकथा चंद प्रतीकों में कहते हुए बहुत से मुद्दे उभारे गये हैं…"
4 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"                सवाल तब हवा भी कैद थी। बलिष्ठ बाहों में…"
4 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post माइल नहीं हुआ (ग़ज़ल)
"आदरणीय समर कबीर साहब, बहुत बहुत शुक्रिया आपके मेहर-ओ-करम का।"
4 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"आदाब। वास्तव में आप एक बढ़िया लघुकथा कहने जा रहे थे, लेकिन विवरण अधिक हो गया। बहुत बढ़िया कथानक व…"
4 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"आदाब। रचना पढ़कर लगभग हर पाठक को अपने अनुभव याद हो आयेंगे। ऐसे ही आत्मविश्वासी दृढसंकल्पित दिव्यांग…"
5 hours ago
VIRENDER VEER MEHTA replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"विषय पर प्रस्तुति तो अच्छी हुयी है भाई तेज वीर सिंह जी, लेकिन जैसा कि आदरणीय योगराज सर ने कहा, मैं…"
5 hours ago
VIRENDER VEER MEHTA replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"बेहतरीन लघुकथा आदरणीय बागी सर।  सफर विषय को छू कर निकलती यह रचना विकलांग विषय और विकलांगों की…"
5 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service