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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"वाह खूब ग़ज़ल कही है..बधाई"
Saturday
vijay nikore commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"बहुत ही खूबसूरत गज़ल के लिए बधाई, मित्र अशोक कुमार जी।"
Oct 8
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"बहुत सारी शिकायतों का गज़ल में सुंदर समावेष किया है अशोक जी बधाई"
Oct 7
dandpani nahak commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी आदाब बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें! सभी शैर लाज़वाब वाह! क्या कहने! दिल से बधाई"
Oct 6
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"आदरणीय सुशील सरना साहब सादर नमस्कार, गज़ल पर हुए मेरे प्रयास को सराहने के लिए आपका हृदय से आभार ।सादर ।"
Oct 6
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार ,  आपसे मिली दाद ने मेरे रचना कर्म को सार्थक किया है । हार्दिक आभार । सादर ."
Oct 6
Sushil Sarna commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"बिछा हर तरफ सिर्फ कंक्रीट है झुलसने लगे अब शजर देख लो ।वाह आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत सुंदर और यथार्थ का चित्रण करती बेहतरीन ग़ज़ल। दिल से बधाई सर।"
Oct 4
Samar kabeer commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गज़ल
"जनाब अशोक कुमार रक्ताले जी आदाब,बहुत उम्द: ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Oct 4
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

गज़ल

उठाओ नजर रहगुज़र देख लो ।यहाँ जिन्दगी का सफ़र देख लो । नियम कायदे तो बने हैं कईमगर भंग हैं सब जिधर देख लो । न भय है न चिंता न है शर्म हीबना है बशर जानवर देख लो । कहीं लूट है तो कहीं क़त्ल हैकिसी भी नगर की ख़बर देख लो । गले मिल रहे दोस्त खंजर लिएबदलते समय का असर देख लो । करें फ़िक्र उनकी जो हैं नापसंदसियासत का है ये हुनर देख लो । बिछा हर तरफ सिर्फ कंक्रीट हैझुलसने लगे अब शजर देख लो । मौलिक/अप्रकाशित. See More
Oct 3
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई सतवींद्र कुमार जी सादर, प्रदत्त  चित्र प्र आपने  सुन्दर तोमर छ्न्द रचे हैं हार्दिक बधाई स्वीकारें । सादर ।"
Sep 22
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय बागी जी सादर, आपसे प्रस्तुति पर सराहना  पाकर रचना कर्म सार्थक हो गया है । आपका हृदयतल से आभार । सादर ।"
Sep 22
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण  श्रीवास्तव साहब सादर, लिखते  लिखते  कब पाँच  छन्द हो गये पता ही न चला । आपके  द्वारा इंगित पंक्ति में मैं कुछ और फेर बदल चाहता था किन्तु वह हो नहीं  सका  । इसलिये उसे ज्यों का त्यों रहने दिया ।…"
Sep 22
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई सत्यनारायण सिंह जी सादर, आपको मेरी  प्रस्तुति  चित्र अनुरूप  लगी ।मेरा रचना कर्म सफल हुआ । हार्दिक आभार । सादर ।"
Sep 22
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार, प्रस्तुति पर आपकी प्रशंसा मिली मन प्रसन्न हो गया. आपका ह्रदय से आभार.//सभी एक हो चलो ठान लें'// इस पंक्ति को मैंने //सभी एक मत हो चलो ठान लें'// ...इस तरह लिखा था. किन्तु किसी कारणवश ड मत टंकित होने…"
Sep 22
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्यनारायण सिंह जी सादर, प्रदत्त चित्र को उकेरते हुए शक्ति छंद आधारित सुंदर गीतिका रची है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. अंतिम पंक्ति में नशा  या नशे  आएगा. देख लें. सादर. "
Sep 22
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया मंजीत कौर जी सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते अच्छे शक्ति छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. फिरभी कुछ और प्रयास की आवश्यकता है. //खडी़ गाडियाँ हैं , स्कूटर चले//.......इस पंक्ति पर आदरणीय समर साहब ने मात्रिक त्रुटि देखी है जो कि…"
Sep 22

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujjain
Native Place
Ujjain
Profession
service
About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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Ashok Kumar Raktale's Blog

गज़ल

उठाओ नजर रहगुज़र देख लो ।

यहाँ जिन्दगी का सफ़र देख लो ।

 

नियम कायदे तो बने हैं कई

मगर भंग हैं सब जिधर देख लो ।

 

न भय है न चिंता न है शर्म ही

बना है बशर जानवर देख लो ।

 

कहीं लूट है तो कहीं क़त्ल है

किसी भी नगर की ख़बर देख लो ।

 

गले मिल रहे दोस्त खंजर लिए

बदलते समय का असर देख लो ।

 

करें फ़िक्र उनकी जो हैं नापसंद

सियासत का है ये हुनर देख लो ।

 

बिछा हर तरफ सिर्फ कंक्रीट…

Continue

Posted on October 2, 2019 at 10:00pm — 8 Comments

सावन आया है

फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन

 

गुपचुप उसपर मन आया है

लगता है सावन आया है

 

महका है हर कोना-कोना

अम्बर से चन्दन आया है

 

देखो नभ पर छाये बादल

दूल्हा ज्यों बनठन आया है 

 

भीग रही है प्यासी धरती

ज्यों बीता यौवन आया है

 

रह-रह नाच रही हैं बूँदें

राधा का मोहन आया है

 

झूला झूल रही हैं सखियाँ

सज रक्षा बंधन आया है

 

कागज़ की नैया ले आओ

याद मुझे बचपन आया…

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Posted on November 30, 2018 at 9:00am — 9 Comments

रसाला छंद एक प्रयास – (भ न ज भ ज ज ल)

जीवन विषम अबोध , जानकर ना डर मानव |

प्राप्त प्रथम कर ज्ञान, ज्ञान बिन पार न हो भव ||

अंतर तल अँधियार , दूर कर रोशन हो मग |

हो जगमग हर पंथ , पंथ अति रोशन हो जग ||

 

श्रेष्ठ जटिल हर कर्म, है मनुज उन्नति दायक |

भूल बिसर मत कृत्य, सत्य हर भूपति नायक ||

भूमि सतह पर स्वर्ग, कर्म बिन हो कब संभव |

जीवन पथ पर कर्म , धर्म सम भूल न मानव ||

 

मानव परहित कार्य , हैं न बस दाहकता दुख |

कष्ट सहन कर लाख, एक यदि जीवन का सुख…

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Posted on September 22, 2017 at 1:30pm — 2 Comments

आया मधुमास (अति बरवै पर आधारित गीत)

सजनी ने साजन को, खींच लिया पास |

अमराई फूल गई, आया मधुमास ||

  

धूप खिली निखरी-सी, आयी मुस्कान |

बागों में छेड़ दिया, भँवरों ने तान ||

कलियों के मन जागी, खिलने की आस......... 

खिड़की से झाँक रही, जिद्दी है धूप |

रंग बिना लाल हुआ, गोरी का रूप  ||

सखियों की सुधियों में, कौंधा परिहास........... 

 

डाली है अल्हड पर , फिरभी है भान |

बौराए महुए के , खींच रही कान ||

महक रहे वन-कानन, महका…

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Posted on February 2, 2017 at 11:00pm — 21 Comments

Comment Wall (25 comments)

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At 10:20pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

 
 
 

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