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मन का डर

काँप उठता है बदन और धड़कने बढ़ जाती हैं

शब्द अटकते है जुबां पर साँसे भी थम जाती हैं

लाल हो जाती है आंखें भौह भी तन जाती हैं

सैकड़ो ख्याल मन को एक क्षण में घेरे जाती हैं

खून बेअदबी से तन में फिर बेधड़क है भागता

नींद से आँखे भरी पर रात भर है जागता

मन किसी भी काम में फिर कहीं लगता नहीं

अपने हीं विचार पर ज़ोर तब चलता…

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Added by AMAN SINHA on March 4, 2022 at 11:30am — No Comments

सरल जीवन

अब न रहे वो चाँदी से दिन,सोने सी वो रातें हैं 

बाबुल का वो प्यारा अंगना,सपनो की सी बातें हैं 

इसी अंगने मेंभाई बहन संग ,खेल कूद कर बड़े हुए 

संग संग खाना,लड़ना झगड़ना,अब बस मीठी यादें हैं 

चैन न था इक पल जिनके बिन,जाने कैसे बिछुड़ गए 

अब सब अपनी अपनी उलझन अलग अलग सुलझाते हैं 

चाहे कितना हृदय दग्ध हो,चाहे कितना बड़ा हो संकट

हम तो बिल्कुल ठीक ठाक हैं,सदा यही दर्शाते हैं 

इस दिखावटी युग में यदि हम,हृदय खोल सुख दुःख बाटें 

निश्चय सरल…

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Added by Veena Gupta on March 4, 2022 at 12:30am — 2 Comments

युद्ध के दोहे- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

देगा हल क्या ये भला, स्वयं समस्या युद्ध

दम्भी इस को ओढ़ता, तजता सदा प्रबुद्ध।१।

*

युद्ध न लाता भोर है, यह दे केवल साँझ

इस के हर परिणाम से, होती धरती बाँझ।२।

*

सज्जन टाले युद्ध को, दुर्जन दे सत्कार

जो झेले वह जानता, कैसी इसकी मार।३।

*

लोग समझते शांति की, यह रचता बुनियाद

लेकिन बचती राख ही, सदा युद्ध के बाद।४।

*

इससे बढ़ता नित्य ही, दुख का पारावार

जाने अन्तिम युद्ध कब, होगा इस संसार।५।

*

सदा प्रगति शान्ति का, युद्ध बना अवरोध

लेकिन…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 3, 2022 at 2:36pm — No Comments

उल्कापिंड

आसमान से टूटा तारा उल्का बनकर दौड़ चला

अन्धकार के महाशून्य में पाने अपनी राह चला

घर छूटने का तो दुःख था साथ टूटने का ग़म भी

अंतिम बार जो मुड़के देखा उसके नैन हुए नम भी

उसके वेग से महाशून्य में ज़ोर की गर्जन फ़ैल गयी

मिलों तक फिर ऊर्जा फैली अंधियारे को लील गयी

अभी जन्म हुआ था उसका चाल में अभी लड़कपन था

सालो बीते चलते चलते अब आने वाला यौवन था

सिर भागता था आगे उसका पूँछ दूर तक फैली थी

पीछे फैली कई मील तक तुक्ष पिंड की रैली…

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Added by AMAN SINHA on March 3, 2022 at 11:40am — No Comments

मेरा अभिमान

उसकी एक हंसी से बगिया की सारी क्यारी खिल गयी

आज हमारे उदासी घर को ढेर सी खुशियां मिल गयी

दिए जलाओ ख़ुशी मनाओ फूलों का झूला तैयार करो

लक्ष्मी चल कर घर है आई मिलकर उसका सत्कार करो

जिसके कर्म बड़े अच्छे हो बड़े पुण्य के काम किए

कर्म फल उनको है मिलता कन्या का अवतार लिए

जिसके घर में बेटी जन्मी , वो घर स्वर्ग बन जाता है

माँ बाप का पूरा जीवन तभी सफल हो जाता है

उसके घर में ना होने से जग सुना हो जाता है

चाहे भीड़ बरी हो घर में…

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Added by AMAN SINHA on March 2, 2022 at 11:27am — 3 Comments

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1222/1222/1222/1222

वही जज़्बा वही लहजा लिए अख़बार आता है

मगर उस हादसे से क्यूँ परे अख़बार आता है ।

चुनावी दौर के वादे मुकम्मल हो न हो लेकिन

तुम्हे भी हो ख़बर घर पर मेरे अख़बार आता है ।

जो भर्तियाँ अटकी हैं उनका क्या हुआ होगा

अभी तो कोर्ट से लड़ते हुए अख़बार आता है ।

यकीनन सच को ही तो सामने आना जरूरी था

अगरचे झूठ के नीचे दबे अख़बार आता है ।

जो उनके पैरहन का रंग भी चर्चा में आ जाए

यहाँ मातम…

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Added by DINESH KUMAR VISHWAKARMA on March 1, 2022 at 6:00pm — No Comments


मुख्य प्रबंधक
दो क्षणिकाएँ

01.ख्वाहिश

साधारण लोग

सहज स्वभाव

छोटी-छोटी बातें

दुःखी कर देती हैं

छोटी-छोटी बातों से

खुश हो जाते हैं

हम तो ख्वाब भी देखते हैं

तो छोटे-छोटे

टुकड़ों में....



नही है ख्वाहिश

आसमान छूने की

इतना चाहते हैं

बस जमीन न छूटे

और न छूटे

अपनों का साथ ।।

02.सनक

कई…

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 1, 2022 at 1:30pm — 2 Comments

शिवमय दोहे - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

भीम, महेश्वर,  शम्भवे,  शंकर,  भोलेनाथ

गंगाधर, श्रीकण्ठ का, सबके सिर पर हाथ।१।

*

गिरिश, कपाली, शर्व ही, शिवाप्रिय, त्रिलोकेश

कृत्तिवासा, शितिकण्ठ का, हिममय है परिवेश।२।

*

वो सर्वज्ञ, परमात्मा, अनीश्वर, त्रयीमूर्ति

हवि,यज्ञमय, सोम हैं, करते इच्छा पूर्ति।३।

*

शूलपाणी , खटवांगी , विष्णुवल्लभ, शिपिविष्ट

भक्तवत्सल,  वृषांक  उग्र,  करते  हरण अनिष्ट।४।

*

तारक,  परमेश्वर,  अनघ,  हिरण्यरेता,  गणनाथ

शशि को धर शशिधर हुए,…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 1, 2022 at 12:26am — No Comments

कुछ चुटकियाँ. . . .

कुछ चुटकियाँ ....

वो चाय क्या

जिसमें भाप न हो

वो नींद क्या

जिसमें ख्वाब न हो

.............      

वो प्याला क्या

जिसमें शराब न हो

वो हिजाब क्या

जिसमें शबाब न हो

.......... ..........

वो किताब क्या

जिसमें गुलाब न हो

वो ख़्वाब क्या

जिसमें माहताब न हो

.....................

वो समर्पण क्या

जिसमें स्वीकार न हो

वो जीत क्या

जिसमें हार न हो

.........................

वो…

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Added by Sushil Sarna on February 28, 2022 at 1:43pm — No Comments

विदाई

कुछ दिन पहले तक ही तो,वो घुटनो के बल चलती थी

अपनी तुतलाती भाषा में, पापा-पापा कहती थी

पहली बार जो अपने मुँह से, पहला शब्द वो बोली थी

मुझे याद अब भी वो तो, पापा ही तो बोली थी

कल ही की तो बात है उसने, गुड़िया मुझसे माँगा था

मेरे काम के थैले को कल ही, खूंटी पर उसने टांगा था

कल तक जो मेरे घुटनो के, ऊपर तक ना बढ़ पाई थी

अपने पैरों पर चल कर वो,…

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Added by AMAN SINHA on February 28, 2022 at 10:44am — No Comments

ग़ज़ल: इक ऐसे ग़म से आज मुलाक़ात हो गई

२२१ २१२१ १२२१ २१२

पाकर जिसे हयात हवालात हो गई

इक ऐसे ग़म से आज मुलाक़ात हो गई

कैसे बताएँ आपके बिन कुछ नहीं हैं हम

कैसे बताएँ आपको क्या बात हो गई

अंजान थी जो आँख मिरी जान अश्क़ से

बाद आपके यूँ रोई की बरसात हो गई

इक पल में खुशनुमा हुई इक पल में रहनुमा

फ़िर एक पल में दर्द की सौग़ात हो गई

कैसी है दास्ताँ ये मिरी जान ज़िंदगी

रौशन हुई कहीं तो कहीं रात हो गई

मौलिक व…

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Added by Aazi Tamaam on February 26, 2022 at 11:30pm — 2 Comments

शोख दोहे .....

शोख़ दोहे : 

कातिल हसीन शोखियाँ, मयखाने सा नूर ।

दिल बहके तो जानिए, सब आपका कुसूर ।।

साँसें दे हर साँस को, साँसों का उपहार ।

साँसों को अच्छा लगे, ये साँसों का प्यार ।।

पागल दिल की हसरतें, पागल दिल के ख़्वाब ।

पागल दिल को कर गए , ख़्वाबों के सैलाब ।।

बड़े तीव्र हैं प्यास के, अधरों पर अंगार  ।

नैनों से नैना करें, मधुर मिलन मनुहार ।।

बेहिज़ाब अगड़ाइयाँ, गज़ब नशीला नूर ।

देख बहकना नूर को, दिल का है…

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Added by Sushil Sarna on February 26, 2022 at 3:53pm — 2 Comments

कम्बख्त ये वक्त

कम्बख्त ये वक्त , बड़ा बेरहम है

खुद ही दवा है अपनी, खुद में ये जखम है

हाथ होता है मगर ये, साथ होता है नहीं

हक़ में लगता है मगर ये, हक़ में होता है नहीं

क्या बला की शै है ये, खुद को ही दोहराता है

बन कभी तस्वीर खुद की, गुमशुदा हो जाता है

शख्श है आवारा जाने, क्यूँ कहीं रुकता नहीं

कोई भी हो सामने पर, ये कभी झुकता नहीं

साथ जिसके ये हुआ, अर्श पर छा जाएगा

सर पे जिसके आ गिरा, वो ख़ाक में मिल जाएगा

कोई कितना भी बड़ा हो,…

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Added by AMAN SINHA on February 26, 2022 at 1:58pm — No Comments

जीवन साथी

जीवन साथी है वो मेरी, साथ हमेशा रहती है

सुख हो या हो दुःख के दिन, पास सदा वो रहती है

साथ फेरों का बंधन बांधे, घर मेरे जब आई थी

खुद से पैसे बच ना पाते, बस इतनी मेरी कमाई थी

घर आई वो साथ में अपने, ढेरों खुशियां ले आयी

मेरे मन के अंधियारे को, दूर किसी को दे आयी

टुटा फूटा डेरा मेरा, सबकुछ उसने अपनाया

दो दिन में ही उस डेरे को ,महलों जैसा मैंने पाया

बिखरा बिखरा जीवन मेरा, जैसे तैसे चलता था

कभी यहाँ पर कभी वहाँ पर, युहीं…

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Added by AMAN SINHA on February 25, 2022 at 11:30am — No Comments

बारिश

बूंदों का बरसना यूं बिजली का कड़कना

कुछ याद पुरानी सी तड़पा के हमको चली गयी

बात हल्की सी थी बिल्कुल फुहारों की तरह

अनसुनी सी कानो में सुना के वो चली गयी

एक मुद्दत से हमने अश्कों को छुपा रक्खा था

बेदर्द थी बारिश आज हमे रुला के चली गयी

आज मस्ती थी बड़ी झूमता हर एक ग़म था

छत फूटी थी मेरी बि स्तर भींगा के चली गयी

पक्के मकान को गर्मी से जैसे राहत थी मिली

फुटपाथ के बर्तन को संग बहा के चली गयी

नांव से खेलते थे बच्चे…

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Added by AMAN SINHA on February 24, 2022 at 10:21am — No Comments

बारिश

बूंदों का बरसना यूं बिजली का कड़कना

कुछ याद पुरानी सी तड़पा के हमको चली गयी

बात हल्की सी थी बिल्कुल फुहारों की तरह

अनसुनी सी कानो में सुना के वो चली गयी

एक मुद्दत से हमने अश्कों को छुपा रक्खा था

बेदर्द थी बारिश आज हमे रुला के चली गयी

आज मस्ती थी बड़ी झूमता हर एक ग़म था

छत फूटी थी मेरी बि स्तर भींगा के चली गयी

पक्के मकान को गर्मी से जैसे राहत थी मिली

फुटपाथ के बर्तन को संग बहा के चली गयी

नांव से खेलते थे बच्चे…

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Added by AMAN SINHA on February 24, 2022 at 10:20am — No Comments

बेबसी

दिलबर है ना तो कोई रहबर है

हाल-ऐ-दिल सुनाए तो किसको

मिले हमसा हमको इस जहां में

खोल के ये दि ल दि खाए उसिको



फासले दरम्यान है हम दोनों के लेकि न

कदम न चले तो मिटेंगे वो कैसे

उन रेलों की पटरी को देखा है मैंने

मिलते नहीं पर संग चलते है जैसे



जो हम न रहे तो रोओगे तुम भी

दि ल से हमे तुम भुलाओगे कैसे

बदन पे तुम्हा रे जो लि ख गया है

मेरा नाम अब तुम मिटाओगे कैसे



है सपना अगर ये तो सोने हो दोना

अगर जग गया मैं तो पाओगे तुम…

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Added by AMAN SINHA on February 23, 2022 at 1:39pm — 3 Comments

मलाल

थक गया हूँ झूठ खुद से और ना कह पाऊंगा

पत्थरों सा हो गया हूँ शैल ना बन पाऊंगा

देखते है सब यहाँ पर अजनबी अंदाज़ से

पास से गुजरते है तो लगते है नाराज़ से

बेसबर सा हो रहा हूँ जिस्म के लिबास में

बंद बैठा हूँ मैं कब से अक्स के लिहाफ में

काटता है खलीपन अब मन कही लगता नहीं

वक़्त इतना है पड़ा के वक़्त ही मिलता नहीं

रात भर मैं सोचता हूँ कल मुझे कारना है क्या

है नहीं कुछ हाथ मेरे सोच के डरना है क्या

टोक न दे कोई मुझको मेरी…

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Added by AMAN SINHA on February 22, 2022 at 3:48pm — No Comments

कुछअनकही सी

अंजाना सफर तनहाई का डेरा

उदासी का दिल मेंं था उसके बसेरा

साँवली सी आंखो पर पालकों का घेरा

भुला नहीं मैं वो चमकता सा चेहरा

आंखे भरी थी और लब सील चुके थे

दगा उसके सीने मे घर कर चुके थे

था कहना बहूत कुछ उसको भी लेकिन

धोख़े के डर से वो लफ्ज जम चुके थे

हाले दिल चेहरे पर दिखता था यू हीं

के ग़म को छुपाने की कोशि श नहीं थी

दिल चाहता तो था संग उसके चलना

मगर साथ चलने की कोशि शनहीं थी

कहा कुछ…

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Added by AMAN SINHA on February 21, 2022 at 3:30pm — No Comments

सामाजिक न्याय दिवस पर दोहे

सामाजिक न्याय दिवस (२० फरवरी) पर

जाति  धर्म  के  फेर  से, मुक्त  नहीं  जब देश

तब सामाजिक न्याय का, मिले कहाँ परिवेश।।

*

कत्ल अपहरण  रेप की, बलशाली को छूट

है सामाजिक न्याय की, यहाँ आज भी लूट।।

*

चन्द यहाँ खुशहाल है, शेष सभी गमगीन

सामाजिक समता नहीं, देश भले स्वाधीन।।

*

धनवानों को न्याय हित, घर आता आयोग

न्याय न्याय चिल्ला मरे, लेकिन निर्धन लोग।।

*

सज्जन को करना क्षमा, एक बार है न्याय

दुर्जन को बस दण्ड ही, केवल शेष…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 19, 2022 at 11:00pm — 10 Comments

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