For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

भोजपुरी साहित्य

Information

भोजपुरी साहित्य

Open Books Online परिवार के सब सदस्य लोगन से निहोरा बा कि भोजपुरी साहित्य और भोजपुरी से जुड़ल बात ऐह ग्रुप मे लिखी सभे ।

Location: All world
Members: 172
Latest Activity: Dec 19, 2017

Discussion Forum

भोजपुरी गीत : शाबास बबुआ 16 Replies

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi". Last reply by indravidyavachaspatitiwari Sep 22, 2015.

"ओ बी ओ भोजपुरी काव्य प्रतियोगिता" अंक - 2 100 Replies

Started by Admin. Last reply by बृजेश नीरज Jun 1, 2013.

भोजपुरी हास्य घनाक्षरी 6 Replies

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi". Last reply by Meena Pathak Nov 8, 2013.

भोजपुरी लघु कथा : पकडुआ बियाह 23 Replies

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi". Last reply by sanjiv verma 'salil' Jan 27, 2013.

Comment Wall

Comment

You need to be a member of भोजपुरी साहित्य to add comments!

Comment by Manan Kumar singh on April 14, 2015 at 7:13pm
एडिट कैसे करें यह पता नहीं चल रहा है।
Comment by Manan Kumar singh on April 10, 2015 at 7:26pm
भोजपुरी गजल
मनब कि ना मनब, बेशी अगरइब?
आइल बुढ़ापा,अब गरहा में जइब।
खोज तार फूल अब कहाँ लेकेे जइब?
नजर धुंधला गइल,सुँघब कि सटइब?
बेरी-बेरी हो छेदी,काहे तू तुड़ात बाड़?
अब कवना देवी के फूल तू चढ़इब?
बेदी-बेदी घूम अइल,का भइल कह ना?
अब कवन बेदी जाके फेर अझुरइब?
सुन मान बात,छोड़ द लगावल पायेंत,
नयकिन के नजर पड़ी,खूब धसोरइब।
कॉपी@मनन
Comment by PRAMOD SRIVASTAVA on May 29, 2014 at 5:26pm

dhanyavaad Shyam Narayan Verma ji.

Comment by Shyam Narain Verma on May 15, 2014 at 4:23pm
सुन्दर गीत रचना के लिए बधाई....
Comment by PRAMOD SRIVASTAVA on May 15, 2014 at 4:19pm

गीत
दिनवा ओराये लागल
रतिया हेराए लागल
बुते लागल असरा क. बरल. तु दियना
कह. अइब. कबले, लागे मोर जिय ना
का ओही देसवा मा-
बाटे, जे बिलमि गइल.
मइया क. बूढउती क.
बने तु अलमि गइल..
दूजि क. चाँद भइल. ,आंखी मोर सावना
कह. अइब. कबले, लागे मोर जिय ना

खेल कूद, लिखा पढ़ी
सबकर गवाही बा
इहवें क. धुरिया तोहरे
पोर-पोर समाइल बा
कइसे से उखरल बाबा दुलरवा क. सियना
कह. अइब. कबले, लागे मोर जिय ना

आम बउरे, मेघा चुये
माटी सोंधियाइल फेरू
कोयलिया क. कुहूक से 
गूँजल अमराई फेरू
जोहे चउपाल, टोला, राह, साथी, संगना
कह. अइब. कबले, लागे मोर जिय ना

घरे घरे लट्टू,टीवी
डहर. कोलतारी
गाँव मनरेगा,चलल
विकास क. बयारी
गवई शहराए लागल, जाइ बाँच. सुगना
कि आइ हिये लाग. ना
कह. अइब. कबले, लागे मोर जिय ना
प्रमोद श्रीवास्तव, लखनऊ

 (मौलिक एवम् अप्रकाशित)

Comment by Shyam Narain Verma on May 7, 2013 at 12:38pm
गीत |
बहियाँ छोड़ा के जाल राजा  , मानेल ना  कहना हमार |
डार्लिंग दगाबाजी कईल , काहें करवल गवना हमार |, 
केकरा से आग मान्गबी , केकरा से मान्गबी  पानी |
केकरा से प्यार मान्गबी , चढ़ल बा जवानी | 
काहें करेल मनमानी सईयाँ , तोडी के जाल हियरा हमार |
डार्लिंग दगाबाजी कईल , काहें करवल गवना हमार |, 
रोके तोहके खनकत चूड़ी , रोके  तोहक कंगना |
हमरा के छोडी के जाल , सूना कईके अंगना |
ना सुनेल कवनो निहोरा , करेल ना मन में विचार  |
डार्लिंग दगाबाजी कईल , काहें करवल गवना हमार |, 
अब जब जईब पीया , कईसे बीती रतिया |
संगवा में के करी  ,  मीठी मीठी बतिया  |
वर्मा तोहरा पईयाँ पडीं , सुनिल अरजिया हमार |
डार्लिंग दगाबाजी कईल , काहें करवल गवना हमार |, 
श्याम नारायण वर्मा 
(मौलिक व अप्रकाशित)
Comment by Brij kishor Chaubey on February 23, 2013 at 5:02pm
बरसे नयन नादानी मे

सब जानल पहचानल भुईया
धांगल ह बचकानी मे
अब काहे अबूझ अनजानी 
लागे देखी जवानी मे .................
कातना लुका छुप्पी खेलनी 
बूझत बूझ पलानी मे 
माई के तावा के रोटी 
लुटत भाग चुहानी मे.....................
अल्लहड़ पन के छुवा छूवौवल
डुबकी मारी के पानी मे
सोचत सिहरन उठे देह
मन भटकल कथा कहानी मे.........................
सब कुछ बदलल बदलल लागे
घर दुआर बगवानी मे
भागे दूर देखी सब लरिका
का अइहे अगवानी मे.....................
देखनी धानी चुनरी ओढ़े
सजनी ठाढ़ दलानी मे
का बृज कही न फूटे बानी
बरसे नयन नादानी मे......................
Photo: बरसे नयन नादानी मे सब जानल पहचानल भुईया धांगल ह बचकानी मे अब काहे अबूझ अनजानी लागे देखी जवानी मे ................. कातना लुका छुप्पी खेलनी बूझत बूझ पलानी मे माई के तावा के रोटी लुटत भाग चुहानी मे..................... अल्लहड़ पन के छुवा छूवौवल डुबकी मारी के पानी मे सोचत सिहरन उठे देह मन भटकल कथा कहानी मे......................... सब कुछ बदलल बदलल लागे घर दुआर बगवानी मे भागे दूर देखी सब लरिका का अइहे अगवानी मे..................... देखनी धानी चुनरी ओढ़े सजनी ठाढ़ दलानी मे का बृज कही न फूटे बानी बरसे नयन नादानी मे......................
Comment by एम. के. पाण्डेय "निल्को" on January 18, 2013 at 12:51pm

बहुत नीमन लागता, पहली बार ऐजा आइल बानी ........ अद्भुत ........ बधाई आ शुभकामना बा ओपेन बुक्स ऑनलाइन के की उ अइसन मंच बनावलस । 

Comment by Admin on December 18, 2012 at 7:24pm

आदरणीया मंजरी पाण्डेय जी आपकी रचना कमेंट बॉक्स में  हो गई है , कृपया यह रचना कमेंट बॉक्स के ऊपर बने +Add Discussion बटन को क्लिक कर पोस्ट करें ।

Comment by mrs manjari pandey on December 18, 2012 at 7:16pm

भोजपुरी माई के समर्पित एगो गीत -
रहिया मोती बिछाइल बटोर ना .

चलली  धीरे धीरे एक -एक डगरिया
लोगवा से गउवा आइ गइली नगरिया
समुन्दर हम होई गइली आइ के रजधानिया
हिलोर ना
भरल रतन हियरवा हिलोर ना
 रहिया .......

घरवा में रहि के कुछु नाही कईली
देस विदेस जाई के नउवा कमईलीं
बिरह के घाव अब ई कईसों पुरवली
दिदोर ना घाऊ वा बाटे दिदोर ना
 रहिया .........

जेइ सपनवा के ओढ़ी हम सुतलीं
एकरा अलावे कुछु बूझत न रहलीं
सपनवा संजवत जिनगिया बितवली
झिंझोर  ना
अन्हिया से इ सपनवा झिंझोर ना
रहिया ............

मनवा के ताना बाना बीनत रहलीं
कतना त ताना मेहना सहत रहलीं
हार बाकि कबहूँ न रजको हं मनली
बिटोर ना
तनकी मिलल अंजोरिया बिटोर ना
 रहिया ..............

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (तोड़ते भी नहीं यारी को निभाते भी नहीं)
"मुह तरमा नीलम साहिबा   , ग़ज़ल पसंद करने और आपकी हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया…"
21 minutes ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post तेरे आने से आये दिन सुहाने ।
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । ' हमारे…"
45 minutes ago
Samar kabeer commented on Rakshita Singh's blog post विरह गीत
"मुहतरमा रक्षिता सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । पटल पर बहुत समय…"
1 hour ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post प्रिय भाई डा० रामदरश मिश्र जी
"आपका हार्दिक आभार, आदरणीया नीलम जी"
2 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on Sushil Sarna's blog post स्वतंत्रता दिवस पर ३ रचनाएं :
"आदरणीय सुशिल सरना जी, नमस्कार।  वर्तमान में समाज में व्याप्त विसंगतियों कटाक्ष करती बहुत…"
2 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (तोड़ते भी नहीं यारी को निभाते भी नहीं)
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी, नमस्कार।  बहुत ही बेहहतरीन ग़ज़ल की पेशकश ।  मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
2 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : जग-जगती में // -- सौरभ
"आदरणीय सौरभ पाण्डे जी, नमस्कार ।   बहुत ही सूंदर गीत की रचना।  प्रस्तुति पर …"
2 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुछ दोहे -लक्ष्मण धामी"मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, नमस्कार ।   अच्छे दोहे हुए हैं।  प्रस्तुति पर  हार्दिक…"
2 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on vijay nikore's blog post प्रिय भाई डा० रामदरश मिश्र जी
"आदरणीय विजय निकोर जी, नमस्कार।  रामदरश मिश्र जी को हमारी तरफ़ से भी जन्म दिन की हार्दिक बधाई…"
2 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'ताटंक छंद अभ्यास'
" आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी, नमस्कार।  ताटंक छंद के प्रयास की जितनी प्रशंसा की जाय कम है…"
2 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post नींव की ईंट--लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ मुहतरम जनाब समर कबीर साहब"
2 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on Rakshita Singh's blog post विरह गीत
"बहुत ही अच्छी  रचना ।  प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें रक्षिता जी। "
2 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service