For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अरुन 'अनन्त''s Blog – July 2012 Archive (28)

कुछ और शे'र

प्यार से मुझको, अनमोल नगीना दे दो,

जिंदगी को बस , इक और महीना दे दो,



हम जितना उनको देख मुस्कुराते चले गए,

वो उतना ही दिल कसम से दुखाते चले गए,



हुस्न की फिर से, कुछ अदाएं ढूंढ़ लाया हूँ,

आज अपनी खातिर, सजाएं ढूंढ़ लाया हूँ.....…



Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 27, 2012 at 4:25pm — 10 Comments

शायद मैं नहीं रहा

दोस्त ....दोस्त वो नहीं रहा,

दिल के मारे, दिल नहीं रहा,



बहता पानी, आँख में नमी,

सागर छूटा, अब नहीं रहा,

धड़कन धीमी, और हो गयी,

काबू खुद पर, जो नहीं रहा,

अब बस तेरा, इंतज़ार है,…

Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 27, 2012 at 2:04pm — 6 Comments

कुछ शेर

मुझको भी जिंदगी की, जरुरत बना गई,

वो नज़रों से छु मुझे, खूबसूरत बना गई //



आँखों से तोड़ गयी, ख्वाबों की पंखुड़ियों को,

कांटो ने छोड़ दिया, जख्मी कर उंगलियों को //



देख तुझको निगाहों, में भर आया पानी,

देन है, ये हसीनो की, है मेहरबानी //…



Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 25, 2012 at 2:21pm — 3 Comments

आदमी

आदमी को कर रहा है, तंग आदमी,

सभ्यता सीखा गया बे-ढंग आदमी,



कोशिशें कर-2 हुआ है, कामयाब अब,

आसमां में भर रहा है, रंग आदमी,

देख के लो हो गयीं, हैरान अंखियाँ,

ओढ़ बैठा है, बुरा फिर अंग आदमी,

सोंच के ना काम कोई आज तक…

Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 25, 2012 at 12:04pm — 6 Comments

इक तरफ - इक तरफ

इक तरफ सुन्दर, जग-जमाना,

इक तरफ लुटता, मैं खज़ाना,

इक तरफ प्याला, है मदहोश,

इक तरफ लब, मेरे खामोश,

इक तरफ बिजली, हैं बादल,

इक तरफ आशिक, मैं पागल,

इक तरफ सागर, है गहरा,

इक तरफ खाली, मैं ठहरा,…

Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 23, 2012 at 11:22am — No Comments

हम गीले थे

वो कोमल थे, वो कंटीले थे,

आँखें सूखीं थी, हम गीले थे,

रास्ते फूलों के, पथरीले थे,

जख्मी पग, कांटें जहरीले थे,

ढहे पेंड़ों से, पत्ते ढीले थे,

बिखरे हम, कर उसके पीले थे,

नाजुक लब, नयना शर्मीले थे,…

Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 21, 2012 at 5:30pm — 7 Comments

पानी था या हवा था

पानी था, या हवा था,

वो किस दिल, की दुआ था,



ठंडा मौसम, कड़ी लू

वो गम था, या दवा था,

 

लगता था, वो खुदा पर,

किस्मत था, या जुआ था,

 

बेवजह…

Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 20, 2012 at 11:37am — 19 Comments

उम्मीदों का कोना

लहू से लतपथ,  उम्मीदों का कोना है,

कि मैं घडी भर हूँ जागा, उम्र भर सोना है,



मिला लुटा हर लम्हा, जीवन का तिनका सा,

लबों पे रख कर लफ़्ज़ों को, जी भर रोना है,



छुड़ा के दामन अब वो दोस्त, अपना बदला,

मिला के आँखों का गम, सारा आलम धोना है,…



Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 19, 2012 at 6:15pm — 10 Comments

रिश्तों में आ गई सिलवट

बातों ने ली ऐसी करवट
रिश्तों में आ गई सिलवट

बदला ज़रा - जरा मैं जब
सूरत से था हटा घूँघट

पानी बहा नदी का तब
बखेरी जे वो सुखा कर लट,

कलेजा निकाल कर लाया,
वो रख गयी जुबां पर हट,

आँचल हवा से उड़ता है,
जीवन न अब रहा है कट

Added by अरुन 'अनन्त' on July 19, 2012 at 5:30pm — 3 Comments

दिल तुझसे ज़रा खफा है

आदरणीय गुरुजनों, मित्रों  आज मैंने ग़ज़ल लिखने का प्रयास ओ.बी.ओ. के द्वारा सिखाये गए नियमों का पालन करते हुए किया. कृपया मेरा मार्ग दर्शन करें, मैं सदा आभारी रहूँगा.

खास कर पूज्य योगराज जी, की टिपण्णी का इंतज़ार रहेगा.

नाराज हूँ मैं, दिल तुझसे ज़रा खफा है,

मासूम भोली, सूरत ने दिया दगा है



खंज़र ये आँखों का, दिल में उतार डाला  

हमेशा के लिए मुस्किल, जख्म मुझे मिला है,



डर डर के जिंदगी को, जीने से मौत बेहतर,

कैसा ये दर्द दिलबर, सीने में भर…

Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 18, 2012 at 5:34pm — 12 Comments

दो घूंट भरके पी ले

आदरणीया/आदरणीय गुरुमां, गुरुजनों और मेरे प्रिय मित्रों. आज पहली बार मैंने ओ.बी.ओ पर ग़ज़ल की कक्षा से सीख कर एक ग़ज़ल लिखने का प्रयास किया है. कृप्या मेरा मार्ग दर्शन करें कि मैंने कहाँ पर त्रुटी की है. सभी को सादर प्रणाम.

दो घूंट भरके पी ले, बड़ी उम्दा शराब है,

ए दोस्त तेरी प्यार में किस्मत ख़राब है,

धोखा है, बेवफा है, ये हुस्न है फरेबी,…

Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 14, 2012 at 1:30pm — 8 Comments

तेरी याद आती है माँ

दिल खोलकर सखियों में मेरा ज़िक्र करती थी,

ज़रा सी देर क्या हो जाए बहुत फिक्र करती थी.........



तेरी याद आती है माँ, हाँ सच है माँ, बहुत याद आती है माँ......

अश्क आँखों में जब आता है, दर्द जब मुझको सताता है,

जब उदास हो जाता है मन, जब बढ़ जाती है उलझन,

तेरी याद आती है माँ, हाँ…

Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 13, 2012 at 10:30am — 21 Comments

माँ तेरे बिन

अँधेरा मुझमे सो रहा है, माँ तेरे बिन,

डर को मुझमे बो रहा है, माँ तेरे बिन,



घर में घुस आईं हैं, धूल लेकर आंधियां अब,

कि जीना मुस्किल हो रहा है, माँ तेरे बिन,

ठोकरें लौट आई हैं, भर कर पत्थर राहों में,

नज़रों से उन्जाला खो रहा है, माँ तेरे बिन,…

Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 12, 2012 at 5:55pm — 9 Comments

अब जीने का खौफ है

शीशे की तरह दिल में, इक बात साफ़ है,

ये दिल दिल्लगी के, बिलकुल खिलाफ है,



खता इतनी थी कि उसने, मज़बूरी नहीं बताई,

फिर भी उसकी गलती, तहे-दिल से माफ़ है,

लगने लगी है सर्दी, अश्कों में भीगने से,

इतना हल्का हो गया, तन का लिहाफ है,…

Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 12, 2012 at 12:37pm — 10 Comments

दिल लगाने को तुला है

नापाक इरादे से दिल लगाने को तुला है,

इक शक्स मेरी हस्ती मिटाने को तुला है,

  

हजारों किये हैं जुर्म मगर सजा कोई नहीं,

मुझको भी गुनाहों में फ़साने को तुला है,



सौदागर है, दिलों का व्यापार करता है,

धंधा है यही वो जिसको, बढ़ाने को तुला…

Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 11, 2012 at 2:29pm — 10 Comments

तेरा नाम भूल जाऊँ

बस दो घूंट पियूँ , और सारा जाम भूल जाऊँ

कि तुझे याद करूँ, और तेरा नाम भूल जाऊँ



जीवन के सफ़र में कहीं, तू मिले जो दुबारा,

तेरा हाल पूछूँ, और क्या था काम भूल जाऊँ,

मिलने को तुझसे, जब भी सजाऊँ कोई रात,

मारे ख़ुशी के मैं तो वही, शाम…

Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 11, 2012 at 12:00pm — 8 Comments

जलाया जब रातों में मुझको

छोड़ कर उल्फत की गलियां, मैं तेरे बिन निकल आया,

जलाया जब रातों में मुझको, इक नया दिन निकल आया,

दिल में दफनाई थी यादें, आज जो फुर्सत में खोदीं,

बे-दर्द जिन्दा जख्मों का, वही पल-छिन निकल आया,

सोंचकर रात भर जागे, सबेरा कल नया होगा,

मगर बीता वही समय उठ के , प्रतिदिन निकल…

Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 9, 2012 at 4:30pm — 13 Comments

मुस्कुराना भूल आये हैं

ख़ुशी से हंसते-हंसते लब, मुस्कुराना भूल आये हैं,

आज हम अपने ही घर का, ठिकाना भूल आये हैं,



यादों के सब लम्हे , यादों से मिटाकर हम,

उसके साथ वो गुजरा, जमाना भूल आये हैं,

बुझाकर रख गई जब वो, सुहाने साथ बीते पल,

सुलगता यादों का वो पल छिन, जलाना भूल आये…

Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 8, 2012 at 1:30pm — 10 Comments

थोड़ी दाल थोड़े भात उधार मांगता हूँ

बस नींद भरी रात उधार मांगता हूँ,

दिल के लिए जज़्बात उधार मानता हूँ,

कोई तोड़ जाये जो होंठो से मेरे चुप्पी,

कुछ लफ़्ज़ों की सौगात उधार मानता हूँ,

मुमकिन नहीं है फिर तसल्ली के वास्ते,

गूंगे लबों…

Continue

Added by अरुन 'अनन्त' on July 7, 2012 at 3:39pm — 2 Comments

ज़रा सी बात

ज़रा सी बात बोलो तो बताना हैं बना लेते,
उठा - गिरा कर पलकें फ़साना हैं बना लेते,

कहानी रच लेते हैं, जुबां से लम्बी चौड़ी वो,
पत्थरों को ज़रा छूकर, खज़ाना हैं बना लेते,

निगाहें रूठ जाएँ तो, बस्तियां लुट जाती हैं,
अपने आगे पीछे इक, जमाना हैं बना लेते,

यादों के बीते पल जब - जब जाग जाते हैं,
मेरी सारी खुशियों का हर्जाना हैं बना लेते.....

Added by अरुन 'अनन्त' on July 7, 2012 at 12:00pm — No Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service