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Shyam Narain Verma's Blog (60)

यार बैरी बना आशिकी के लिये |

शोर होता रहा रोशनी के लिये |

लोग लड़ते रहे चाशनी के लिये |

बेबसी का नज़ारा न देखा कोई ,

मार होती रही चाँदनी  के लिये |

लूट मचती रही चीख होता रहा , 

अश्क गिरते रहे ज़िंदगी के लिये |

हाथ बाँधे खड़े देखते रह गये ,   

घर जला आग में दोस्ती के लिये |

नाव डूबी वहीँ आब ना था जहाँ ,

यार बैरी बना…

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Added by Shyam Narain Verma on November 22, 2014 at 5:00pm — 7 Comments

सभी को गले से लगाने लगे हैं |

सुना है सितारे सजाने लगे हैं |

सभी को गले से लगाने लगे हैं |



वहीँ जो लिए सात फेरे ख़ुशी में ,

जुदा हो ग़मों में जलाने लगे हैं |



नदी में नहा के किनारे खड़े हैं ,

जिगर से लगा के भुलाने लगे हैं |



जिसे देव माना सहारा समझ के , 

बेगाना बनाके सताने लगे हैं |



कहानी पुरानी वहीँ है ए वर्मा ,

निगाहें अभी भी…

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Added by Shyam Narain Verma on November 15, 2014 at 11:30am — 2 Comments

राह चले शादी हो जाती |

अजीब बात  है ये प्यार  की    , भूले वो सारा  संसार |

सारा यौवन   बर्बाद   करे , मिल गया बेवफा जो यार | 

शादी बंधन अपवित्र करे  , रिश्ते  को गड्ढे में डाल | 

जिंदगी  ही  डूबे  नर्क में , आगे का अब कौन हवाल |

माता पिता जब करे  शादी , जा कर ही देखे घर बार |

जान पानी  छान कर पीते , तब  कहीं करते  ऐतबार |

शादी पावन है  जीवन में ,   इसी से   चलता संसार |

राह चले शादी हो जाती ,   दूसरे  दिन पड़ता दरार |

गोद में जब बालक आये , आशिक हो जाता  फरार  | 

मुँह…

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Added by Shyam Narain Verma on August 25, 2014 at 5:00pm — 8 Comments

जोड़ी बिना अधूरा है |

जीवन के अनजाने पथ पर  , मोड़ अनेको आते हैं |
पथिक अकेला चलता रहता , मिल  लोग  बिछड़ जाते हैं |
कुछ तो मिलकर मन बहलाते ,  कुछ मौन चले जाते हैं | 
कोई दे  सर्द हवा  झोंका ,      कोई ग़म  दे जाते  हैं |  …
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Added by Shyam Narain Verma on May 17, 2014 at 12:00pm — 11 Comments

सदा देश है प्यारा |

सार छंद | १६-१२ पर यति , अंत दो गुरु |

 

पवन वेग से दीप बचाना, छा ना जाये अंधेरा | 
बढ़ते जाओ चढ़ते जाओ, तोड़ो यम का  डेरा |  …
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Added by Shyam Narain Verma on August 14, 2013 at 1:00pm — 12 Comments

हरे भरे बागों को मिटाया जा रहा है |कविता - अतुकांत |

कागज़ के फूलों को सजाया जा रहा है |
हरे भरे बागों को मिटाया जा रहा है |
क्या होगा हाल उन कश्तियों का ,
जिन्हें सुर्ख रेत पर चलाया जा रहा है | 
कैसे सूखे आँसू  उन ग़मगीन आँखों का …
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Added by Shyam Narain Verma on August 3, 2013 at 3:54pm — 8 Comments

जब जब नये फूल आते |

आती है जब ग़म की आँधी  , डूबता खुशी का किनारा | 
मंजिल पाने की चाहत में , कोई जीता या हारा |
कुछ सोचें कुछ हो जाता है , मारा जाता है बेचारा |
हार जीत के लालच  में  ही , बस…
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Added by Shyam Narain Verma on August 1, 2013 at 2:26pm — 9 Comments

सावन है अति पावन | वीर छंद |

जब घिर बदरा  रिम झिम बरसे  , तब दादुर नाचे बन  मोर |
पवन बहे जब झूम झूम के , तब घासें झूमें झकझोर  |
चाँद छुप छुपआये गगन में , जनु   चाँदनी छुपे हर ओर | 
आया है मन भावन सावन , सब कजरी गावें चहुओर | 
डाली झूम जनु  गुनगुनायें , कोयल भी गाये दिल…
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Added by Shyam Narain Verma on July 27, 2013 at 5:30pm — 5 Comments

बूँद बूँद से सागर भरता | विनय - अतुकांत |

आगे आओ हाथ बढाओ , साथी फँसे मुसीबत में |
बूँद  बूँद से सागर भरता , हाथ बँटाओ आफत में |  
एक चना भाड़ नहीं फोड़े , मदद चाहिए विपदा में |   
हर देशवाशी दें सहारा , आगे आयें…
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Added by Shyam Narain Verma on June 22, 2013 at 11:22am — 4 Comments

खुशी कहीं गम |

है रुत मन भावन , वर्षा पावन , आयें हैं घन , खुश दिल से |
जब आये फुहार , भिगे दिल तार , गावें मल्हार , सब दिल से | 
हरे भये उपवन , खिले बाग़ वन , खुश हैं हर जन , सब दिल से | …
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Added by Shyam Narain Verma on June 18, 2013 at 12:52pm — 13 Comments

वक़्त लगता है गहरा जख्म भरने में |

वक़्त लगता है गहरा जख्म भरने में |
वर्षों लगता है जिन्दगी सँवरने में |
जिन्दगी के मोड़ पर मिलते हैं  राही ,
पर सभी हिचकते हैं मदद  करने  में |…
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Added by Shyam Narain Verma on June 14, 2013 at 1:28pm — 10 Comments

मेरा प्यारा भारत

मेरा देश स्वर्ग से सुन्दर, जग में सबसे महान है |

वक्ष पर शोभें गंगा यमुना, प्रहरी हिमालय शान है |

जलधि हिन्द आ पाँव पखारे, सागर करें नित गान हैं |

हरदम रहे सुहाना मौसम, खेत की फसलें जान हैं |

सब मिलकर हर पर्व मनाते, भेद भाव का नाम नहीं |

साथ साथ रहते जनु भाई, मिलकर करते काम कहीं…

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Added by Shyam Narain Verma on June 8, 2013 at 3:30pm — 3 Comments

जल से भरा सरोवर |

एक मीन गंदा करती है  , पर सारे होते बदनाम | 
सच्चाई कोई ना जानें , लग जाता  सब पर इलजाम |
नकली ही बन जाता असली ,  झूम कर  घूमे खुलेआम |
पुलिस वाले ढूढते रहते , असली का ना…
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Added by Shyam Narain Verma on June 6, 2013 at 12:30pm — 12 Comments

मेहनत |

हार जीत का खेल अजब है , यारों निराश ना होना |
मेहनत से कभी  ना डरना ,  देखो  साहस ना खोना | 
बिना पसीना खेती ना हो ,  फिर बदले मौसम का रोना | 
बिना पसीना खेती ना हो , …
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Added by Shyam Narain Verma on June 5, 2013 at 6:01pm — 5 Comments

गरमी बाकी है |

झमाझम गिरे बारिश  ,  राहत मिला मिली तपन से |
लू का घेरा  बंद हुआ   ,  मलय शीतल पवन से |
आँखों में  पड़े ना धूल , कीचड से पाँव…
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Added by Shyam Narain Verma on May 31, 2013 at 4:00pm — 3 Comments

सबने कहा गलत है राह |

मानव जब दानव बन जाता , खो देता आचार विचार |
घूमता है जानवर जैसे , कुछ भी समझाये  परिवार |
जान की परवाह ना करता , भूल जाता भरा  संसार |
पाप का घडा जब  भरता है , कोई ना मिले…
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Added by Shyam Narain Verma on May 25, 2013 at 11:50am — 2 Comments

वो कुछ ना कह पाती |

जब कली ही मुरझाने लगी ,  फूल कहाँ से आयेगा |
फिर निर्जन विरान मरूस्थल में , फूल कहाँ से लायेगा | 
सब तोड़ते रहेंगे कली ,  पौधा कौन बनाएगा  | 
वो दिन भी ऐसा आयेगा , जब गुलशन…
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Added by Shyam Narain Verma on May 14, 2013 at 4:23pm — 7 Comments

नेक काम करो |

चाँद बसे आकाश में , फिर भी लगता पास |
मंजिल कितनी दूर हो , रहे मिलन की आस |
जब  ऊँची उडान भरो , दुनिया में हो  नाम | 
सब को अच्छी राह का , सदा मिले पैगाम…
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Added by Shyam Narain Verma on April 30, 2013 at 12:01pm — 8 Comments

जागो भारत माँ के जवान |

जागो भारत माँ  के जवान , सीमा पर बैरी आया |
और अधिक पाने की चाहत ,  बढ़ने का राह दिखाया |  
दोस्त का दिखावा करके ही , अपना वो जाल बिछाया | 
सखा की ही नियत बिगड़ी जब , भाई को भी  भूलाया | …
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Added by Shyam Narain Verma on April 29, 2013 at 3:27pm — 6 Comments

रोने धोने का काम नहीं |

दहाड़ते चलो सभी रण में ,  मारो दुश्मन को ललकार |
आगे बढ लक्ष्मी बाई सा , रोको इनका अत्याचार |
मानव ना ये दानव सा हैं , करते पशुवो सा व्यवहार |
रोने धोने का  काम नहीं , देख  करो इनका संहार | …
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Added by Shyam Narain Verma on April 26, 2013 at 11:38am — 5 Comments

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