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यादें.................

यादें.................



मन की उदासी को ह्रदय में,

बसा के रख लिया ,

आप की बेवफाई को,

जीवन अंग समझ लिया !

मैंने की बेहद मुहब्बत मगर,

आपको क्या फर्क पडा,

तुमने लिए जो फैसले प्यार में,

उस दर्द से दिल मेरा रो पडा !

मिलेंगे तुम्हें हज़ारो दौलतमंद पर,

प्रीत की होगी वहां न भनक,

राह भूल मेरे अनमोल प्रेम को,

तोड़ देगी पैसे की खनक !

अपने सारे गमो को मै छुपा लूंगा,

एक तुम्हारी ख़ुशी के लिए

अब ना आयेंगे…

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Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on March 3, 2011 at 7:30pm — 2 Comments

आप खुश रहना................

आप खुश रहना................

है दिए जो जख्म आपने दिल को,

भर दे उसे कोई किसी में है ओ प्रीत कहाँ,

बहते मेरे लावारिस अश्को को कोई थामले,

है एक तेरे सिवा दूसरा मन्मित कहाँ, 

है किये जो घोर अँधेरा मेरे जीवन में,

आक़े करे कोई रोशन है यैसी तक़दीर कहाँ,

जब ह्रदय की आशाएं बंद हो चली हो,

फिर इस बेचैन दिल को मिलता है करार कहाँ,

जब तुम कर चले बेदरंग इस जीवन को,

फिर इस जीवन में किसी और प्रीत रंग की है आश…

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Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on March 3, 2011 at 12:00pm — 2 Comments

"हरहर-महादेव"

!! महाशिव रात्री की बहुत ठेर सारी सुभ-कामनाए !!



"ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मा मृतात्"



"समस्‍त संसार के पालनहार तीन नेत्रो वाले शिव की हम अराधना करते है, विश्‍व मे सुरभि फैलाने वाले भगवान शिवमृत्‍यु न कि मोक्ष से हम "OBO" के सारे सभासद को मुक्ति दिलाएं"



"शिव की महिमा,शिव का प्यार



शिव… Continue

Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on March 2, 2011 at 5:37pm — 1 Comment

शब्द जाल

शब्दों के जाल में फँस कर उलझ गया हूँ ,

मैं बस शब्द बन कर रह गया हूँ ,

सोचता हूँ निकल जाऊ इस जाल से ,

मगर वो कर नहीं पाता, कारण ?

जब भी कोशिश करता हूँ ,

और भी उलझता ही जाता हूँ ,

पहले बेटा फिर भाई ,

फिर काका बन गया ,

आगे चल कर पति ,

फिर पिता और अब ,

दादा बन गया हूँ ,

अगर अब भी नहीं निकल पाया ,

तो ये मेरी बदनसीबी हैं ,

हे प्रभु बुद्धि दे ,

मेरी सुधि ले ,

कि मैं इस मकड़ जाल से निकल सकूँ  ,

और इन शब्द जाल से निकल…

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Added by Rash Bihari Ravi on March 2, 2011 at 4:00pm — 3 Comments

कितने अरमान गूंजते थे जुगनुओं से रास्तों में

वक़्त की अठखेलियों से फिर जनाज़े हाय निकले;

एक पिंजरे में कुरेदा तो अनोखे भाव निकले;

कितने अरमान गूंजते थे जुगनुओं से रास्तों में;

सुर्ख थे नींदों में सारे जब जगा तो स्याह निकले.

 

जब जलज की पंखुड़ी पर अश्रु थामे तुम खड़े थे;

दुःख तो थोड़े थे हमारे किन्तु तुम कितने बड़े थे;

नीर था चारों तरफ फिर नाव क्यों चलती नहीं थी;

हम किनारे पर डुबे थे तुम तो दरिया पार निकले.

 

सोचता हूँ इस…

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Added by neeraj tripathi on March 2, 2011 at 11:12am — 5 Comments

अक्षत,हल्दी छूकर सपने.....

अक्षत,हल्दी छूकर सपने, द्वारे-द्वारे जाएंगे.
शायद कुछ लौटे आमंत्रण,अब स्वीकारे जाएँगे.

                               **
जबसे कोई मौन ,दृगों…
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Added by राजेश शर्मा on March 2, 2011 at 9:00am — 7 Comments

ताकि गुजर ना जाए गोधरा



दोस्तों, गुजरात में 2002  में हुए गोधरा काण्ड में विशेष अदालत ने 11  लोगों को मौत और 20 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई  है. आप सब जानते हैं तब गोधरा और गुजरात में क्या हुआ था. इसी विषय पर मेरी अभिव्यक्ति गौर फरमाएं :  
 …


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Added by Akhileshwar Pandey on March 1, 2011 at 4:30pm — 3 Comments

मेरी दुनिया...

कभी मेरी नज़रों से देखो ,

तब तुम समझोगी शायद ,
कि मेरी दुनिया कितनी हसीन है......
 
बड़ी- बड़ी खिड़कियाँ नहीं हैं ,
पर, एक झरोखा है लटका हुआ 
जिससे हर सवेरे सूरज मुझे आवाज़ लगाता है....
 
कुछ खट्टी- मीठी , चटपटी -सी यादें हैं
जीरा बट्टी की गोलियों -सी
चखते ही आँखों से पानी टपक पड़ता है.....
 
घर में सामान कम है
क्यूंकि जगह नहीं है खाली
सपने…
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Added by Veerendra Jain on February 28, 2011 at 11:30pm — 13 Comments

भूले से भी नहीं !!!



तुम मुझसे ज़िन्दगी के गीत सुनना चाहते हो
चाहते हो मैं सबकुछ भूलकर सहज हो जाऊँ
हंसाऊं ... एक गुनगुनाती शाम ले आऊं ...
तुम्हें पता है
ज़िन्दगी मेरे पास है
गुनगुनाती लहरें…
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Added by rashmi prabha on February 28, 2011 at 7:30pm — 18 Comments

मेरे मन के गलियारे में

वो क्या है जो मेरे मन के गलियारे में
खिलखिलाती हुई
मंडराती हुई तितली सी
कभी टिमटिमाती
कभी ओझल हो जाती
वो रौशनी सी
जिसके करीब हँसते मुस्कुराते
जीवन एक नृत्य लगे
वो कोमल सी पंखुड़ी
हवा के साथ उड़ती
मेरे चहरे पे बरस पड़ी
सब ठहर गया
गर्म सांसों को
मंजिल मिल गयी 
सब भुज गया
हम जल उठे
मेरे मन के गलियारे में..

Added by Bhasker Agrawal on February 28, 2011 at 12:36am — 7 Comments

चक्र..

चक्र..

चैन और बेचैन का, चक्र चले दिन रात,

सुख दुःख के ही भोग में, यह आयी बारात.…

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Added by R N Tiwari on February 27, 2011 at 8:30pm — 7 Comments

ग़ज़ल :- और कुछ इत्मीनान है बाकी

ग़ज़ल :- और कुछ इत्मीनान है बाकी…

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Added by Abhinav Arun on February 27, 2011 at 7:00pm — 4 Comments

विश्वास

पराजय कभी इतनी बड़ी नही होती कि ,

आदमी का मनोबल छीन ले जाये ...

हमेशा नए ख्वाब देखो

नक्षत्रों पर भरोसा रखो

कभी भी ' तथास्तु ' कह सकते हैं ...

इस विश्वास से ये सबक सीखो

बुरी बात कभी मुँह से मत निकालो .

बहुत दबे पाँव चलना होता है

मुसीबतें रास्ता रोके खड़ी होती हैं ,

लक्ष्य - भेद उम्र भर का मसला होता है ......

सारथी का चयन भी…
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Added by rashmi prabha on February 27, 2011 at 4:00pm — 10 Comments

एक ग़ज़ल

ख़त आता था ख़त जाता था
बहुत अनकही कह जाता था
 
बूढ़े बरगद की छाया में 
पूरा कुनबा रह जाता था
 
झगडा मनमुटाव ताने सब 
इक आंसू में बह जाता था
 
कहे सुने को कौन पालता
जो कहना हो कह जाता था
 
तन की मन की सब बीमारी 
माँ का आँचल सह जाता था
 
कई दिनों का बोल अबोला 
मुस्काते ही ढह जाता…
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Added by ASHVANI KUMAR SHARMA on February 27, 2011 at 1:00pm — 5 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
बह्र पहचानिये- 5

 ओ. बी. ओ. परिवार के सम्मानित सदस्यों को सहर्ष सूचित किया जाता है की इस ब्लॉग के जरिये बह्र को सीखने समझने का नव प्रयास किया जा रहा है| इस ब्लॉग के अंतर्गत सप्ताह के प्रत्येक रविवार को प्रातःएक गीत के बोल अथवा गज़ल दी जायेगी, उपलब्ध हुआ तो वीडियो भी लगाया जायेगा, आपको उस गीत अथवा गज़ल की बह्र को पहचानना है और कमेन्ट करना है अगर हो सके तो और जानकारी भी देनी है, यदि उसी बहर पर कोई दूसरा गीत/ग़ज़ल मिले तो वह भी बता सकते है। पाठक एक दुसरे के कमेन्ट से प्रभावित न हो सकें…

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Added by Rana Pratap Singh on February 27, 2011 at 10:30am — 1 Comment

मास्क वाले चेहरे

मैं अक्सर निकल जाता हूँ भीडभाड गलियों से

रौशनी से जगमग दुकाने मुझे परेशान करती हैं

मुझे परेशां करती है उन लोगों की बकबक

जो बोलना नहीं जानते

 

मै भीड़ नहीं बनना चाहता बाज़ार का

मैं ग्लैमर का चापलूस भी नहीं बनना चाहता

मुझे पसंद नहीं विस्फोटक ठहाके

मै दूर रहता हूँ पहले से तय फैसलों से

 

क्योंकि एकदिन गुजरा था मै भी लोगों के चहेते रास्ते से

और यह देखकर ठगा रह गया की

मेरा पसंदीदा व्यक्ति बदल चूका था

बदल चुकी थी उसकी…

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Added by Akhileshwar Pandey on February 27, 2011 at 1:28am — 3 Comments

ghazal

सपने सब रंगीं ऊंची दूकानों में 
सच्चाई बसती है फीके पकवानों में
 
हम ने तो समझा था घर के ही हम भी 
गिनती करवा बैठे लेकिन मेहमानों में
 
बस्ती को साँपों ने सूंघा हो जैसे कि
शंखनाद जारी है लेकिन शमशानों में
 
ज़न्नत कि बातें अब सोचें तो क्या सोचें
रोटी तक शामिल है अपने अरमानों में
 
अपना ये होना भी होने में होना है
'होने' को गिनते वो अपने…
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Added by ASHVANI KUMAR SHARMA on February 26, 2011 at 10:52pm — 3 Comments

आप तो आप थे ........."

आप तो आप थे .........



है दिए जो जख्म आपने दिल को,

भर दे उसे कोई किसी में है ओ प्रीत कहाँ,

बहते मेरे लावारिस अश्को को कोई थामले,

 एक तेरे सिवा दूसरा ओ मन्मित कहाँ, 

आप ने  किये जो घोर अँधेरा मेरे जीवन में,

आक़े अब कोई रोशन करे  है यैसी तक़दीर कहाँ,

जब ह्रदय की आशाएं बंद हो चली…

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Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on February 26, 2011 at 7:00pm — 2 Comments

प्रीतम की गली.........

प्रीतम की गली.........

हर किसी के ज़िन्दगी में बसता है किसी के ख्वाबो का कारवां,

दूरियाँ मित जाती है मीट जाते है सारे शिकवे गीले,

हर किसी के धड़कन में होती है किसी की मुहब्बत जवां,

चाहतो का सैलाब लिए जब दो बदन हो एक मीले,

अपने प्रियवर के ख्वाब,को रोशन करे ऐ दिल की समां

उड़ चला जाता है ये मन इस दुनिया से दूर बहुत,

जहां प्रिय मिलन के मदहोश…

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Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on February 26, 2011 at 6:30pm — 2 Comments

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