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=============छन्द/ग़ज़ल==============

===============छन्द================

तुम राह हसीं तुम मंजिल हो, दिल सागर है तुम साहिल हो

महताब तुम्ही बनके चमको, इस चाहत का तुम हासिल हो

हद भी तुम हो तुम बेहद भी, रख शर्म हया तुम फाजिल हो

गुल हो तुम एक गुलिस्ताँ का, खुशबू बनके तुम शामिल हो



संदीप पटेल "दीप"…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on July 26, 2012 at 12:34pm — 1 Comment

पर्यावरण संरक्षण से सम्बंधित दोहे

वृक्षों को मत काटिए, वृक्ष धरा शृंगार.

हरियाली वसुधा रहे, बहे स्वच्छ जलधार..

 

नदियाँ सब बेहाल हैं, इन पर दे दें ध्यान.  

कचरा निस्तारित करें, बन जाएँ इंसान..…

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Added by Er. Ambarish Srivastava on July 26, 2012 at 12:00am — 35 Comments

ओ विषधर! तुझमें कितना जहर है

तीखा विषैला हुआ आज नर है |
ओ विषधर! तुझमें कितना जहर है ||
 
जिसका काटा नहीं मांगे पानी,
विष थूकने में ना कोई सानी |
मत समझ दिल को अब तेरा डर…
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Added by कुमार गौरव अजीतेन्दु on July 25, 2012 at 9:20pm — 4 Comments

कुछ शेर

मुझको भी जिंदगी की, जरुरत बना गई,

वो नज़रों से छु मुझे, खूबसूरत बना गई //



आँखों से तोड़ गयी, ख्वाबों की पंखुड़ियों को,

कांटो ने छोड़ दिया, जख्मी कर उंगलियों को //



देख तुझको निगाहों, में भर आया पानी,

देन है, ये हसीनो की, है मेहरबानी //…



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Added by अरुन 'अनन्त' on July 25, 2012 at 2:21pm — 3 Comments

ये वीरों का आँगन है भारत सुहाना

ये वीरों का आँगन है भारत सुहाना

है उसके लिए ही ये दिल आशिकाना



था इतिहास में जो परिंदा सुनहरा, हिमालय जहाँ अब भी देता है पहरा

जहाँ चाँद बनता है बच्चों का मामा, वो भारत है मेरा वतन आशियाना



ये वीरों का आँगन है भारत सुहाना

है उसके लिए ही ये दिल आशिकाना…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on July 25, 2012 at 12:51pm — 4 Comments

राखी का गिफ्ट



राखी का गिफ्ट

बहना बोली इस बार राखी पे

गिफ्ट अच्छा सा लूँगी

तभी आपकी कलाई पर

राखी मैं बांधूंगी

मैं बोला चाँदी से महँगा हो

गया आलू,टमाटर

ले लेना तुम गिफ्ट में बहना

इक थैला पूरा भर

खुद भी खाना सबको खिलाना

बाँटना सारे मुहल्ले में

खाया न होगा कई दिनों से

अब खाना तुम जी भर

लेकिन धीरे धीरे…

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Added by Deepak Sharma Kuluvi on July 25, 2012 at 12:43pm — 6 Comments

हाइकु बक्सा : रक्षाबंधन

१. भाई-बहिन
बाँटें प्यार ही प्यार
राखी के दिन
 
२. खुशी की घड़ी
न्यारी थाली सजाये
बहना खड़ी
 …
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Added by कुमार गौरव अजीतेन्दु on July 25, 2012 at 12:30pm — 5 Comments

आदमी

आदमी को कर रहा है, तंग आदमी,

सभ्यता सीखा गया बे-ढंग आदमी,



कोशिशें कर-2 हुआ है, कामयाब अब,

आसमां में भर रहा है, रंग आदमी,

देख के लो हो गयीं, हैरान अंखियाँ,

ओढ़ बैठा है, बुरा फिर अंग आदमी,

सोंच के ना काम कोई आज तक…

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Added by अरुन 'अनन्त' on July 25, 2012 at 12:04pm — 6 Comments

सुर्खियाँ है बीते सप्ताह की

सुर्खियाँ है बीते सप्ताह की 

प्रणव जी बन गए राष्ट्रपति 

फिर बढे पैट्रोल के दाम

अखिलेश ने माया को ठेंगा दिखाया
बदल दिए आठ जिलों के नाम 
मानसून ग़ुम हो गया…
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Added by Deepak Sharma Kuluvi on July 25, 2012 at 10:19am — No Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
कुछ हाइकू

कुछ हाइकू
 
१.
है अनासक्त .
निर्मोही सांसारिक .
जीवन-मुक्त .
 
२.
न जीत-हार .
दुआ त्याग करार .
निःस्वार्थ प्यार .
 
३.
संग में खेली .
दूर, फिर भी पास .
सच्ची सहेली .
 
४.
बिम्ब दिखाए .
दोस्ती इक आईना .
अश्रु मुस्काए .

Added by Dr.Prachi Singh on July 24, 2012 at 5:52pm — 11 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
वर्षा के दो रूप

वर्षा के दो रूप (मदन छंद या रूपमाला पर मेरा पहला प्रयास )

(हर पंक्ति में २४ मात्राएँ ,१४ पर यति अंत में गुरु लघु (पताका) २१२२ ,२१२२ ,२१२२ ,२१   संशोधित मदन छंद )

घनन घन बरसे बदरिया ,झूमती हर  डाल|



भीगता आँचल धरा का  ,जिंदगी खुश हाल|   



प्यास फसलों की बुझी अब, आ गए त्यौहार- 



राग मेघ मल्हार सुन-सुन, हृदय झंकृत तार||…

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Added by rajesh kumari on July 24, 2012 at 2:00pm — 12 Comments

"ग़ज़ल"

"ग़ज़ल"



मंजिलों को पा रहा हूँ, दूर खुद से जा रहा हूँ

आइने से रू-ब-रू होकर के धोखा खा रहा हूँ



इश्क हूँ मैं हूँ सनम भी, हू-ब-हू हूँ औ जुदा भी

रूह बनके मैं समाया फिर भी खोजा जा रहा हूँ



दर्द दे ऐ दोस्त मुझको, गमगुसारे यार हूँ मैं

बाँट ले हर दर्द अपना, नज्म मीठी गा रहा हूँ



जिंदगी भर प्यास ले के जी रहा था दीद की मैं

आज मेरा है खुदा वो प्यार उसका पा रहा हूँ



हूँ बड़ा ही भ्रष्ट लोगो, और हूँ मैं…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on July 24, 2012 at 2:00pm — No Comments

कटाक्ष.....

कटाक्ष
हेलमेट-गुटखा संवाद....अध्याय एक प्रारंभ!!!!!!!!
-----------------------------------------------------

सुबह-सुबह हेलमेट और गुटखे की पान की टपरी पे मुलाकात हो गई.

'कैसे हो हेलमेट भाई?'..इधर-उधर आशंका भरी निगाहों से देखते हुये गुटखे ने अपना नकाब सरकते हुये पूछा.
'ठीक  हूँ ' फुरसतिया अंदाज़ में मूंछों पर ताव देते हुये हेलमेट गरियाया .
'यार हमारे तो वांदे है आजकल..फिर से इन तथाकथित समाज के पैरोकारगणों…
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Added by AVINASH S BAGDE on July 24, 2012 at 1:01pm — 1 Comment

सब धर्मो का इक तीर्थ बनाएं भारत में

सब धर्मो का इक तीर्थ बनाएं भारत में

आओ ऐसा नव दीप जलाएं भारत में



अब छेड़ प्रेम की तान मिलाएं हाथ चलो 

रख याद वतन की आन मिलाएं हाथ चलो

अब आपस का ये द्वेष भुलाएँ भारत में



सब धर्मो का इक तीर्थ बनाएं भारत में

आओ ऐसा नव दीप जलाएं भारत में



गंगा यमुना भी भेद नहीं करती लोगो

है सबकी पावन गोद यही धरती लोगो

ये जाति-पाति का रोग मिटाएं भारत में



सब धर्मो का इक तीर्थ बनाएं भारत में

आओ ऐसा नव…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on July 24, 2012 at 12:00pm — 3 Comments

हिसाब का सिलसिला

हिसाब का सिलसिला 



उधार बेच उगाई करने, जब गया,
बोंला हिसाब मिलाया नहीं अभीतक |
समय हो गया दफ्तर बंद करो, 
बोंला रोकड़ का मेल हुआ नहीं अभीतक |
  
ओबीओ काव्य में कौन…
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Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 24, 2012 at 11:30am — 4 Comments

"गांधी जी के बन्दर"

"गांधी जी के बन्दर"



राहों में चलते जाइए

और चलिए

थोडा और

देखिये

देखिये न

देखा !!!!!!!!!!!!!!!

राम राम !!

ये राम को क्यूँ याद किया…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on July 24, 2012 at 10:55am — No Comments

चार कह-मुकरियां

मुख मण्डल उसका सतरंगा

सबका भेद करे वह नंगा

आज हि काम का कल बेकार

क्या वह टीवी ? नहीं अखबार



देह है भूरी मुख है लाल

पिछवाड़े से मुँह में डाल

बारिश में हो जाती चीड़ी

क्या वह कीड़ी ? नहिं भाई बीड़ी



रोज़ रात को मुँह में डालूं

चूस चास के पूरा खा लूँ

हाय वो मीठे रस की खान

क्या रसगुल्ला ? नहिं भई पान



गुड़ से ज़्यादा मीठी लागे

उसके पीछे मनवा भागे

नूरी नूरी रौशन रौशन

क्या वह सजनी ? नहीं पड़ोसन …

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Added by Albela Khatri on July 24, 2012 at 10:00am — 10 Comments

रिश्ते...

उगते रिश्ते ,ढलते रिश्ते ;

रुकते रिश्ते चलते रिश्ते .

मन के रिश्ते मन से रिश्ते

तन के रिश्ते तन से रिश्ते

अपने रिश्ते बनते रिश्ते

सपने रिश्ते तनते रिश्ते .

उसके रिश्ते इसके रिश्ते

रिसते रिश्ते ,घिसते रिश्ते .

शासक रिश्ते शासित रिश्ते ,

बेदम रिश्ते ,बा-दम रिश्ते .

रिश्ते नीरज ,नीरस रिश्ते

रिश्ते सुधा कहीं गरल रिश्ते .

आंगन रिश्ते उपवन रिश्ते ,

हैं धरा जलद गगन रिश्ते .

रिश्ते पूनम क़ा चाँद भी हैं ,

तारे नयनाभिराम भी…

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Added by DEEP ZIRVI on July 24, 2012 at 6:30am — 2 Comments

व्याजोक्ति [लघु कथा ]

आलोक की बहन रीमा के पति के अचानक अपने घर परिवार से दूर पानीपत में हुए निधन के समाचार ने आलोक और उसकी पत्नी आशा को हिला कर रख दिया |दोनों ने जल्दी से समान बांधा ,आशा ने अपने ऐ टी म कार्ड से दस हजार रूपये निकाले और वह दोनों पानीपत के लिए रवाना हो गए ,वहां पहुंचते ही आशा ने वो रूपये आलोक के हाथ में पकड़ाते हुए कहा ,''दीदी अपने घर से बहुत दूर है और इस समय इन्हें पैसे की सख्त जरूरत होगी आप यह उन्हें अपनी ओर से दे…
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Added by Rekha Joshi on July 23, 2012 at 10:48pm — 25 Comments

सावन का सवैया

सावन का सवैया

(प्रस्तुत रचना "सिंहावलोकन सवैया" में रचित है,जिसे सवैया के सभी प्रकारों में लिखा जा सकता है(मेरी रचना मदिरा सवैय पर आधारित है)।सिंहावलोकन सवैया जिन वर्णों और शब्दों से प्रारम्भ किया जाता है,उसी पर अन्त भी किया जाता है।चरणान्त के शब्द चरण के आगे के शब्द होते हैं।)

*****************************

सावन में गरजे बदरा,

मन मोर नचै वन कानन में।

कानन में मनमोह छटा,

घनघोर घटा घिरि गागन में॥

गागन में चमके बिजुरी,

सिकुरी सुनरी निज आंगन में।

आंगन… Continue

Added by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on July 23, 2012 at 9:47pm — 5 Comments

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