For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

February 2013 Blog Posts (194)

तुमसे मिलने का असर है मुझ पर --- मीना पाठक

कभी चाह थी बहुत दिल मे 

कि छू लूँ मैं भी बढ़ा के हाथ 

मिट्टी,हवा,पानी इन सब को 

पीछे छोड़ शून्य को 

जिंदगी को चाह थी भरपूर जीने की

थी ललक, कुछ भी कर गुजरने की 

जिंदगी एक किताब खूबसूरत थी 

जिसे पढ़ने की प्यार से तमन्ना थी 



फिर घेरा ऐसा बादलों ने निराशा के 

खुद से बातें करती,हंसती,रोती,बावली 

सी, ना चाह रही जीने की ना…

Continue

Added by Meena Pathak on February 28, 2013 at 8:30pm — 21 Comments

"नेता जी "

झूठे वचन हैं जिसके ,भाषण जिसका काम !
खाये सबकी गालियाँ ,नेता उसका नाम !!


नेता उसका नाम,जो लूटकर ही खाये !
बेचकर शर्म लाज,स्वयं को सही बताये !!


दिखता बंदरबाट ,तो जनता क्यूँ न रूठे !
नहीं रहा विश्वास ,सभी नेता है झूठे!!

राम शिरोमणि पाठक "दीपक"
(मौलिक/अप्रकाशित )

Added by ram shiromani pathak on February 28, 2013 at 8:27pm — 9 Comments

तुम एक धारा

तुम अविराम हृदय में

गहरे पैठे जाते हो

कैसे रोकूं तुमको कि

जाने क्या कर जाते हो

 

तुमसा दूजा कौन जगत में

जिसका मैं विश्वास करूं

पर तुम हो मेरे मन में…

Continue

Added by बृजेश नीरज on February 28, 2013 at 8:17pm — 18 Comments

क्यूंकि तुम प्रेम हो और प्रेम मैं भी हूँ .......

मैं प्रेम हूँ 

तुम भी तो प्रेम ही हो 

प्रेम से हट कर 

क्या नाम दूँ 

तुम्हें भी और मुझे भी ...

कितनी सदियों से 

और जन्मो से भी 

हम साथ है 

जुड़े हुए एक-दूसरे के 

प्रेम में 

हर जन्म में तुमसे 

मिलना हुआ 

लेकिन मिल के भी मेल 

ना हो सका 

प्रेम फिर भी रहा 

तुम में और मुझ में भी 

चलते जा रहें है 

समानांतर रेखाओं की तरह 

साथ हो कर भी साथ…

Continue

Added by upasna siag on February 28, 2013 at 3:30pm — 17 Comments

खास आपके लिए

खास आपके लिए

लाया मैं मिठा सपना

क्या मैं इस योग्य हूँ

मुझे अब तक नहीं पता

इस बात का कि

मैं ला सकता हूँ

आपके लिए मीठा सपना।



लोग कहते हैं मुझको

कि मैं नहीं हूँ योग्य

किसी के लिए कुछ भी

मीठा ला सकने में

ला सकता हूँ मैं सिर्फ

कङवा ही कङवा।



पहली बार लाया था मैं

बङा ही मन लगाकर

किसी अपने के लिए

एक मनपसन्द चीज

मेरे ख्याल से

नहीं पूछा था उसको

कि क्या है उसका मनपसन्द।



देखकर इतना गुस्सा… Continue

Added by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' on February 28, 2013 at 12:49pm — 10 Comments

शपथ

अभिचार सा

करता

छिड़कता जल

चला था,

शून्‍य पथ

धर अफीमी

रूप कोई

रात थी

बेहद सुरत

कुछ धुरंधर

मेघ भी तो

कर गए

नि:शब्‍द ही

गलफड़े भर

श्‍वांस भरके

थे खड़े

कुछ दर्द भी

ढह ना पाई

रोशनी पर

ना हुई

पथ से विपथ

करबले की

ओर बढ़ते

पांवों में थी

जो शपथ

Added by राजेश 'मृदु' on February 28, 2013 at 12:31pm — 9 Comments

मन मोहे सरकार

 सन्दर्भ :-रेल बजट 
-लक्ष्मण लडीवाला 
 
पवन एक्सप्रेस आ गई, लेकर के सौगात,
उम्मीदे हजार बढ़ी,  सुविधाओं की बात । …

Continue

Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 28, 2013 at 10:11am — 18 Comments

कुछ चट-पटॆ सॆर ...मॆरॆ मौला

कुछ चट-पटॆ सॆर ...मॆरॆ मौला

मॆरी बद्दुआ मॆं तासीर, हॊ जायॆ मॆरॆ मौला,

इस कुर्सी कॊ बबासीर, हॊ जायॆ मॆरॆ मौला !!१!!

ना चल सकॆ न बैठ पायॆ,सलीकॆ सॆ कभी,…

Continue

Added by कवि - राज बुन्दॆली on February 27, 2013 at 9:00pm — 18 Comments

"कुछ दोहे " (एक प्रयास)

यदि अंकुश हो क्रोध पर, सहनशीलता पास !

वहां पाप होता नहीं, हो खुशियों का वास !!

*********************************************

गुरुजन की सेवा करो, रहो बढ़ाते ज्ञान !

यदि करना जीवन सफल, दो इनको सम्मान !!

********************************************

धन की चंचल चाल है, क्यूँ करते विश्वास ,

कुछ दिन तेरे साथ है, कल फिर उसके पास !!

********************************************

लोगों  में संस्कार हो, उत्तम हो व्यवहार !

कलह क्लेश  ना फिर वहां, हो प्रसन्न…

Continue

Added by ram shiromani pathak on February 27, 2013 at 9:00pm — 18 Comments

रोला गीत

अपना काम निकाल,भूल हमको वो जाता।
कहता उसको आम,बना जो भाग्य विधाता॥
मन पछताये खूब,बेल विष नेता बोया।
ठगे गये हम लोग,देख अपनापन खोया॥

हमको ले पहचान,वोट लेना जब होता।
सबसे दुआ-सलाम,कौल जमके वह करता॥
सुधरा चतुर सियार,लगे हर जन को गोया।
ठगे गये हम लोग,देख अपनापन खोया॥

जीता चतुर सियार,चाल अब बदली उसकी।
भूला सारे कौल,हौल अब मन में उठती॥
टूटे सारे ख्वाब,हृदय विह्वल हो रोया।
ठगे गये हम लोग,देख अपनापन खोया॥

Added by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on February 27, 2013 at 6:57pm — 14 Comments

आखरी वादा

आखरी वादा ..........

मैं तुझे भूल जाऊं,ना कभी याद आऊँ

यह आखरी वादा तुमने मुझसे ही लिया

जिस पल भी तेरी याद आयी

उस पल को ही मिटा दिया

काश, हवाओं को भी कुछ कह जाती 

मौसमो को भी यह कसम दे…

Continue

Added by pawan amba on February 27, 2013 at 3:58pm — 5 Comments

दोहा मुक्तिका: नेह निनादित नर्मदा संजीव 'सलिल'

दोहा मुक्तिका:

नेह निनादित नर्मदा

संजीव 'सलिल'

*

नेह निनादित नर्मदा, नवल निरंतर धार.

भवसागर से मुक्ति हित, प्रवहित धरा-सिंगार..



नर्तित 'सलिल'-तरंग में, बिम्बित मोहक नार.

खिलखिल हँस हर ताप हर, हर को रही पुकार..



विधि-हरि-हर तट पर करें, तप- हों भव के पार.

नाग असुर नर सुर करें, मैया की जयकार..



सघन वनों के पर्ण हैं, अनगिन बन्दनवार.

जल-थल-नभचर कर रहे, विनय करो उद्धार..



ऊषा-संध्या का दिया, तुमने रूप निखार.

तीर…

Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on February 27, 2013 at 6:30am — 26 Comments

मै आतंकी बनूँ अगर- माँ खुद "फंदा" ले आएगी

हम सहिष्णु हैं भोले भाले मूंछें ताने फिरते

अच्छे भले बोल मन काले हम को लूटा करते

भाई मेरे बड़े बहुत हैं खून पसीने वाले

अत्याचार सहे हम पैदा बुझे बुझे दिल वाले

कुछ प्रकाश की खातिर जग के अपनी कुटी जलाई

चिथड़ों में थी छिपी आबरू वस्त्र लूट गए भाई

माँ रोती है फटती छाती जमीं गयी घर सारा

घर आंगन था भरा हुआ -कल- कोई नहीं सहारा

बिना जहर कुछ सांप थे घर में देखे भागे जाते

बड़े विषैले इन्ही बिलों अब सीमा पार से आते

ज्वालामुखी दहकता दिल में मारूं काटूं…

Continue

Added by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on February 26, 2013 at 10:30pm — 4 Comments

ग़ज़ल - उलझनों में गुम हुआ फिरता है दर-दर आइना

एक नई ग़ज़ल आपकी मुहब्बतों के हवाले कर रहा हूँ, जैसी लगे वैसे नवाजें



उलझनों में गुम हुआ फिरता है दर-दर आइना |

झूठ को लेकिन दिखा सकता है पैकर आइना |



शाम तक खुद को सलामत पा के अब हैरान है,

पत्थरों के शहर में घूमा था दिन भर आइना |



गमज़दा हैं, खौफ़ में हैं, हुस्न की सब देवियाँ,

कौन पागल बाँट आया है ये घर-घर आइना |



आइनों ने खुदकुशी कर ली ये चर्चा आम है,

जब ये जाना था की बन बैठे हैं पत्थर, आइना |



मैंने पल भर झूठ-सच पर…

Continue

Added by वीनस केसरी on February 26, 2013 at 10:00pm — 29 Comments

"कभी हँस भी लिया करो जी "

बस लो भाई राम का नाम ,

बन जायेंगे बिगड़े काम !!



आशिकी का बुखार चढ़ा है ,

आशिकी में करना है नाम!

भेजो ऐसी सुन्दर कन्या ,

जो पिलाए इश्क का ज़ाम!!



इधर ढूंढा,उधर ढूंढा,

हो गई सुबह से शाम !

बेबस ,लाचार सा बैठा .

छोड़कर सब अपने काम !



गर्ल्स होस्टल के चक्कर काटकर,

बन गया हूँ उनका दुश्मन!

लड़कियाँ खोज़ती रहती मुझको ,

लिए हाँथ हाकी तमाम !



गर पिट गया तो गम नहीं ,

चलो ये दर्द भी सह लूँगा !

लेकिन अंत में भेज…

Continue

Added by ram shiromani pathak on February 26, 2013 at 9:22pm — 5 Comments

दम तोड़ देगी

कविता कराह रही है

गली के नुक्कड़ पर पड़ी हुई

 

तेज रफ्तार जिंदगी

रौंदकर चली गयी उसे

 

स्वार्थ और वासना के वस्त्रों पर

प्रेम की ओढ़नी ओढ़े

समाज तमाशबीन…

Continue

Added by बृजेश नीरज on February 26, 2013 at 7:33pm — 13 Comments

समय चक्र

जगाता रहा

समय का चाबुक

जन जन को !

निगाहों पर

तस्वीरों के निशान

उभर आते !

सोयी आँखों में

सपने बनकर

बिचरते हैं !

संकेत देते

बढ़ते कदमो को

संभलने का !

इंसानी तन

लिप्त था लालसा में

नजरें फेरे !

संभले कैंसे

रफ़्तार पगों की

बेखबर दौड़े !

रचना – राजेन्द्र सिंह कुँवर ‘फरियादी’

Added by राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी' on February 26, 2013 at 7:30pm — 4 Comments

बोल मेरे अर्पण

बोल मेरे अर्पण

तुझको क्‍या लुभाए

डैनें बांध रहना

या उड़ना जग उठाए

मूड़ता जो माथा

है वह अनादि गाथा

आवर्त की ये रूनझुन

पथ में सभी ने पाए

रोहित न हो तू लोहित

आकर है तू तो शोभित

स्‍वर दे जरा गमक दे

अनहद तुझे बुलाए

इक दृष्टि अपलक दे

सोंधी सी इक धमक दे

यह चक्र जो अनघ है

सबको ही आजमाए

नीरव निशा जो रहती

श्‍यामल सी चोट सहती

भासित उसी से…

Continue

Added by राजेश 'मृदु' on February 26, 2013 at 10:54am — 4 Comments

शाम आना है सुब्ह जाना है-- ग़ज़ल सलीम रज़ा रीवा

                  || ग़ज़ल ||

शाम आना  है  सुब्ह     जाना है ||

दिल सितारों  से क्या लगाना है…
Continue

Added by SALIM RAZA REWA on February 25, 2013 at 9:00pm — 4 Comments

जूनून -ए-इश्क में आबाद, ना बर्बाद हो पाए मुहब्बत में तुम्हारी कैद ना ,आज़ाद हो पाए

दोस्तों एक गजल लिखने की कोशिश की है अपने कुछ मित्रों के सहयोग से आशा है आप लोग अवलोकित करके मुझे मार्गदर्शित करेंगे |

+++++++++++++++++++++++++++++

जूनून -ए-इश्क में आबाद, ना बर्बाद हो पाए 

मुहब्बत में तुम्हारी कैद ना ,आज़ाद हो पाए ||



कहानी तो हमारी भी बहुत ,मशहूर थी लेकिन 

जुदा होकर न तुम शीरी न हम, फरहाद हो पाए ||



न कुछ तुमने छुपाया था ,न कुछ हमने छुपाया था 

न तुम…

Continue

Added by Manoj Nautiyal on February 25, 2013 at 6:00pm — 12 Comments

Monthly Archives

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Samar kabeer commented on Swastik Sawhney's blog post अब न मिलेगी शह तुझे। (अतुकांत कविता)
"जनाब स्वस्तिक जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
2 hours ago
Samar kabeer commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : ख़ून से मैंने बनाए आँसू
"जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।"
2 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
6 hours ago
SALIM RAZA REWA posted blog posts
6 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सदमे में है बेटियाँ चुप बैठे हैं बाप - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण सिंह धामी जी , इस गंभीर, सामयिक और शिक्षाप्रद प्रस्तुति के लिए बधाई , सादर।"
13 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कठिन बस वासना से पार पाना है-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )
"आदरणीय लक्ष्मण सिंह धामी जी , इस गंभीर प्रेरक प्रस्तुति के लिए बधाई , सादर।"
13 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएँ : ....
""आदरणीय   लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया…"
19 hours ago
Usha commented on Usha's blog post ज़िन्दगी - एक मंच । (अतुकांत कविता)
"आदरणीय श्री लक्ष्मण जी, कविता आपको पसंद आई, ह्रदय से आपका आभार। सादर।"
yesterday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post आक्रोश
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी उत्साह वर्धन के लिए आपका दिल से आभार"
yesterday
Manan Kumar singh posted a blog post

अप टू डेट लोग(लघुकथा)

'भूं  भूं...भूं' की आवाज सुन भाभी भुनभुनाई-- ' भोरे भोरे कहां से यह कुक्कुड़ आ गया रे?' '  कुक्कुड़…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

कठिन बस वासना से पार पाना है-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )

१२२२/१२२२/१२२२अमरता देवताओं  का  खजाना हैमनुज तूने कभी उसको न पाना है।१।यहाँ मुँह तो  बहुत  पर  एक…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post आक्रोश
"आ. भाई छोटेलाल जी, सादर अभिवादन। समसामयिक विषय पर उत्तम दोहे रचे हैं । हार्दिक बधाई।"
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service