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Akhand Gahmari's Blog (81)

आदमी हूँ सनम कोई तोता नहीं

सोचते ही रहे खेत जोता नहीं

प्‍यार के फूल क्‍यों कोई बोता नहीं



लुट गई देख अबला कि अस्‍मत यहाँ

शर्म से कोई आँखे भिगोता नहीं



तोड़ कर कोई जाता न दिल प्‍यार में

साथ अपनो का अब कोई खोता नहीं



सोच हैरान क्‍यों रोज इज्‍जत लुटे

चैन की नी़ंद क्‍यो़ं कोई सोता नहीं



क्‍या भरोसा करें हम किसी का सनम

आदमी आदमी का ही होता नहीं



बात में बात सबकी मिलाता रहूँ

आदमी हूँ सनम कोई तोता नहीं

मौलिक एवं…

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Added by Akhand Gahmari on June 7, 2014 at 6:30pm — 3 Comments

कुहरा धना है गजल तरही गजल

2122 2122 2122

मत कहो आकाश में कुहरा धना है

जाल धुमते बादलो ने बस बुना है



धूप की चादर अभी फैली फिजा में

चाँदनी को चाँद से मिलना मना है



भूल से भी हम न तड़़पाये तुझे थे

दे गवाही आज वो तेरा अना है



फूल भी रोने लगे तब से चमन में

रौद देगा माली ही जब से सुना है



नींद भी तब से नहीं आती किसी को

आदमी शैतान ही जब से बना है



आज ये सुन  शर्म खुद रोने लगा क्‍यों

औरतो ने राह पर  बच्‍चा जना है



मौलिक एवं…

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Added by Akhand Gahmari on June 1, 2014 at 1:00am — 13 Comments

गजल दिल जलाते है

1222   1222   1222  1222

कहाँ से अजनबी दिल के हमारे पास आते है/

हमारे दिल में बस कर वो हमारा दिल चुराते है



हमारी‍ जिन्‍दगी भी तो अमानत होे गई जिनकी

वही अब जिन्‍दगी में आग जाने क्‍यों लगाते है





जहर खाना नहीं जीवन बड़ा अनमोल सुन लो तुम



न खाये हम जहर तो क्‍या करें वो दिल जलाते है





हमारे सपनो को अपना कभी वो समझते ले‍किन

न जाने क्‍यों…

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Added by Akhand Gahmari on May 31, 2014 at 10:00pm — 7 Comments

बस जा तू

गीत

मेरे ख्‍वाबो में बस जा तू तेरे हम साथ चल देगे

तेरा सूना पड़ा जीवन प्‍यार मे हम तो बदल देगे



तेरे तो साथ चलने को मेरा यह दिल तड़पता है

वि़ऱह की अाग जो जलती रही उसमें ये सुलगता है

कभी तुम पास आ देखो तुम्‍हे़ हम प्‍यारा कल देगे

मेरे ख्‍वा़बो में बस जा तू तेरे हम साथ चल देगे



खुली आँखो से देखे थे कभी हम सपनो जो तेरे

सनम तू आके बन जाना हकीकत सपनो के मेरे

तुझे छुअेगे  कभी काँटे हम काँटो को मसल देगे

मेरे ख्‍वाबो में बस जा तू तेरे हम…

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Added by Akhand Gahmari on May 28, 2014 at 10:36am — 12 Comments

जिन्‍दगी में हमने जिनको वफा सिखाया था

2122      1222      1212   211

जिन्दगी भर जिसे हमने इश्क सिखाया था

बेवफा हम नहीं हमने उसे बताया था

दिल दुखाया नहीं हमने कभी न माने वो

आग में जल पड़े दुश्मन गले लगाया था

बात भी प्‍यार से वाे अब कभी नही करते

चाँदनी रात में जिसने कभी बुलाया था

हम मनाते रहे कसमे जिसे सभी देकर

मौत की नीद भी हमको वही सुलाया था

जल रहा…

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Added by Akhand Gahmari on May 27, 2014 at 9:30pm — 6 Comments

प्रीति की रीत

2122 1221 2212

चोट खाते रहे मुस्‍कुराते रहे

प्‍यार के फूल हम तो खिलाते रहे

अब भरोसा नहीं जिन्‍दगी का हमे

दर्द सह कर उसे हम मनाते रहे

जिन्‍दगी प्‍यार उनको सिखाती रही

और वो जिन्‍दगी को भुलाते रहे

साथ वो चल दिये है किसी गैर के

प्रीत की रीत हम तो निभाते रहे

आज की रात हम मर न जाये कही

पास अपने उसे हम बुलाते रहे

बात जब है चली बेवफाई की तो

बेवफा कह हमे वह बुलाते रहे

बात उनकी करे ना करे हम मगर

याद मे उन की आँसू बहाते…

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Added by Akhand Gahmari on May 18, 2014 at 9:22am — 20 Comments

अश्‍क

गजल अश्‍क

212   212     212    212

गीत उसके लिखे गुनगुनाता रहा

हाल दिल का सभी को बताता रहा

ये उदासी भरी जिन्‍दगी क्‍योंं मिली

सोच कर अश्‍क मैं तो  बहाता रहा

हम को उसके शहर में मिली मौत थी

लाश अपने शहर में जलाता रहा

चाँद में दाग है चाँदनी में नही

बात दिल को यही मैं बताता रहा

प्‍यार से चल सके ना कदम दो कदम

जाम पी पी तुझे तब भुलाता रहा 

मौलिक एवं अप्रकाशित…

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Added by Akhand Gahmari on May 15, 2014 at 10:30am — 26 Comments

गजल रचना ----वो पल

प्‍यार तुमसे किया तुम निभा ना सके

दर्द दिल का कभी हम मिटा ना सके

जिन्‍दगी तो हमारी रही ना मगर

मौत से हाथ भी हम मिला ना सके

चाँद कह कह पुकारा हमे जो तुने

उन पलो को कभी हम भुला ना सके

ना किये वेवफाई कभी हम मगर

बात का हम भरोसा दिला ना सके

टूट कर बिखर तो हम गये हैं मगर

खा लिये हम जहर पर खिला ना सके

रात भर आइ सपनो में तुम तो मगर

बात अपनी तुझे हम बता ना सके

लौट आता सुहाना समय वो मगर

गीत भी प्‍यार के हम सुना ना सके

थक गये है…

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Added by Akhand Gahmari on May 11, 2014 at 1:00pm — 8 Comments

फायदा क्‍या गजल

2122 2122 1222

क्‍या शिकायत करू मैं इस जमानें से

फायदा क्‍या है किसी को बतानें से

अब मजारो की तरफ यूँ न देखो तुम

आ सकेगें हम न आँसू बहानें से

बदनसीबी साथ मेरे उम्र भर थी

सो रहा हूँ चोट खा कर जमानें से

यार मेरे तुम बहाओ न अश्‍को को

फायदा क्‍या अब यहाँ दिल जलानें से

रूठ कर हम से चले ही गये वो जब

साथ ना अब तो मिले कुछ बतानें से

मौलिक एवं अप्रकाशित अखंड गहमरी गहमर…

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Added by Akhand Gahmari on April 16, 2014 at 6:00pm — 16 Comments

आस के दीप गजल

212 212 212 212
गीत गा कर उसे हम सुनाते रहे
हाल दिल का उसे हम बताते रहे

रात भी तो गुजरने लगी थी मगर
पास आये न बाते बनाते रहे

प्‍यार उन से करे हम कहाँ बैठ जब
चाँद से भ्‍ाी उसे हम छुपाते रहे

प्‍यार हमने किया प्‍यार उसने किया
वो मिटाते रहे हम निभाते रहे

माँग उसकी सजाई लहू से मगर
साथ चल ना सके हम बुलाते रहे

फिर मिलेगे कभी ना कभी हम यहाँ
आस के दीप मन में जलाते रहे

मौलिक व अप्रकाशित अखंड गहमरी

Added by Akhand Gahmari on April 15, 2014 at 12:30pm — 10 Comments

साथ उनका मिला

चल रहे थे अकेले हम वो मिल गये

साथ उनका मिला बुझे दीप जल गये



बीत गये हमारे पल इंतजार के

बंध गये थे हम धागो में प्‍यार के

जिन्‍दगी में चाहत के फूल खिल गये

साथ उनका मिला बुझे दीप जल गये

चल रहे थे अकेले हम वो मिल गये



हर चाहतो को मेरी जानने लगे

आँखो की भाषा को पहचाने लगे

जीवन के रंग ढ़ग सभी बदल गये

साथ उनका मिला बुझे दीप जल गये

चल रहे थे अकेले हम वो मिल गये



इक दिन जाने कैसा आया जलजला

टूट गया उसके आने का…

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Added by Akhand Gahmari on April 9, 2014 at 5:30pm — 10 Comments

खुश रहना

 5 हायकु

उदास हम

हो गये हैं फिर से

छले जो गये

मिले वो हमें

जिन्दगी बन कर…

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Added by Akhand Gahmari on April 4, 2014 at 7:13pm — 6 Comments

दामन के दाग गजल

बात भी दिल की तुझे हम अब बतायें कैसे

साथ जो हमने बिताये पल भुलायें कैसे

बंद रखना तू न ओठों को बता दे इतना

बात जो दिल पर लिखी तुमने मिटायें कैसे

मौत भी करती रही है वेवफाई मुझसे

पास हम अपने बुलायें तो बुलायें कैसे

आपकी तो चाहतो में खुद जले थे ऐसे

लाश भी कोई हमारी अब जलायें कैसे

खोल कर अपने लबों को तू बता दे यारा

दाग दामन पर लगे हैं वो धुलायें कैसे

मौलिक एवं अप्रकाशित अखंड गहमरी

Added by Akhand Gahmari on April 3, 2014 at 5:17pm — 12 Comments

मेरा वहम

देखा है जब से तेरी तस्‍वीर को सनम

आँखो मे मेरे बस गइ खा के कहूँ कसम

कैसा है तुमसे रिश्‍ता हमको नही पता

पर बात अपने दिल की मैं तुमको दूँ बता

जैसे है तेरे साथ रिश्‍ता मेरा अहम

आँखो मे मेरे बस गइ खा के कहूँ कसम

देखा है जब से तेरी तस्‍वीर को सनम

देखा था मैनें सपना एक रात क्‍या कहूँ

आँखो से छलकते अश्‍कों के साथ मैं बहूँ

ये बात मेरी ऐसी नहीं हो तुझे हजम

आँखो मे मेरे बस गइ खा के कहूँ कसम

देखा है जब से तेरी…

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Added by Akhand Gahmari on March 4, 2014 at 4:48pm — 24 Comments

चले जायेगें गीत

तड़पता छोड़  हमको जो चले जायेगें

दिल का दर्द हम तो अब किसे दिखायेगे

 

कभी प्यार से मिला करती मुझसे वो तो

हवा में अपना आंचल लहराती वो तो

बन गये जो सपने वह किसे बतायेगे

दर्द दिल का हम तो अब किसे दिखायेगे

तड़पता छोड़  हमको जो चले जायेगें

 

रोज सपने में मेरे वो तो आती थी

बंद ओठो से हमको गीत सुनाती थी

यादो को उसके कैसे हम भुलायेगें

दर्द दिल का हम तो अब किसे दिखायेगें

तड़पता छोड़  हमको जो चले जायेगें

 

वेवफाई का जो…

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Added by Akhand Gahmari on February 20, 2014 at 8:44pm — 4 Comments

ऐ जिन्‍दगी मुझ पे भरोसा ना करना गीत

ऐ जिन्‍दगी मुझ पे भरोसा ना करना

हमें तो है किसी की चाहत पे मरना

 

सवाँर पाओ ना तु बिखर जायेगे हम

आपकी दुनिया से चले जायेगें हम

हँसते रहेगें वो तुम रोते रहना

हमें तो है किसी की चाहत पे मरना

ऐ जिन्‍दगी मुझ पे भरोसा ना करना



आँख मे अश्‍क उसके दे जायेगें हम

तड़पते रहो तुम चले जायेगें हम

हमे हैं जमाने से कभी कुछ न कहना

हमें तो है किसी की चाहत पे मरना

ऐ जिन्‍दगी मुझ पे भरोसा ना करना

 

बैठा करे हम कभी नदीया किनारे

लेकर वो…

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Added by Akhand Gahmari on February 16, 2014 at 12:18pm — 12 Comments

गजल - बदनाम (अखंड गहमरी)

2122  2122   2122   2122

 

इस जमाने में हमे तुमकेा बुलाना भी नहीं हैं

तड़पते ही रहे मगर जख्‍म दिखाना भी नहीं है

चाँद छुप छुप जा रहा क्‍यों बादलो के संग देखो

राज की ये बात बेवफा को बताना भी नहीं है

दर्द ही हमको मिला जो दिल लगाया था किसी से

जख्‍म जो दिल पर लगे  उन्‍हे दिखाना भी नहीं है

आई फिर ना वो बहारे जो चली इस बार गई पर

दर्द फूलो का बहारो को बताना भी नहीं है

नाम भी बदनाम उसका प्‍यार में ना…

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Added by Akhand Gahmari on January 31, 2014 at 8:00pm — 11 Comments

किताबी बाते

दिल से प्‍यार

रूह से प्‍यार

प्रतिक ताजमहल

सीता,सती,अनुसुईया

बाते किताबों की

आज का प्रेम तन

वासना, भूख

अंहकार,पुरूषार्थ का

अपमान सहे कैसे

खोजे सूनी राह

शांत गलीयाँ

लूटे अस्‍मत,

इज्‍जत तार तार

अबला देख रही  थी सपने

दिखा रही सपने

कर गुजरने की चाहत

सीखने सीखाने की चाहत

पर अब अंधकार में  कैद

लाख साथ जमाना

साथ में ताना

क्‍यों क्‍या कैसे

दिल को भेदते…

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Added by Akhand Gahmari on January 12, 2014 at 10:25am — 6 Comments

साथ (अखंड गहमरी)

अपनो से दूर

अपने पराये

पराये अपने

चुटकी भर

सिंदूर से

पास मेरे

तन मन

अर्पण

मैं सुखी

उसकी खुशी

हर चाहते

सपने उमंग

चेहरे पर तेज

हर पल साथ

साँसो के साथ

मेरे अपने

उसके अपने

निर्स्‍वाथ सेवा

हम दो शब्‍द

प्‍यार के नहीं

जज्‍बातो से खेलते

हर सपने तोड़ते

शिव है हम

मगर वह सीता

सह गयी जुल्‍म

मगर ना मिला

राम को…

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Added by Akhand Gahmari on January 7, 2014 at 11:00pm — 18 Comments

कहाँ जाऊँ

अंजान जिन्‍दगी से

उड़ती पतंगो की तरह

सोलह बसंत पार

चली साजन के घर

सजाये सपने प्‍यार के

चाहत के अरमान के

मगर तबाह हुई

जिन्‍दगी मेरी

उनके झूठ से

राम कृष्‍ण के वंशज

जमाना कर्जदार

बेटा परिवार का दिवाना

परदेश कमाता

परिवार का रखवाला

शर्मीला,शांत, सुशील

बड़े अरमान से पाला

सर्वगुण सम्पन्न है

क्‍या क्‍या सुनी कहानी

सपनो को मिली हवा 

हकीकत हकीकत थी  

ना छुट पायी…

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Added by Akhand Gahmari on January 4, 2014 at 3:00pm — 13 Comments

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