For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (19,149)

"माई के तुलना ना हो सकेला"

माई हिमालय से भी…

Continue

Added by Raju on March 29, 2010 at 7:53pm — 7 Comments

जय हो ,

जय हो ,

अइसन दिन देखि आइल ,

लोगवा बा भकुआइल ,

सुप्रीम कोर्ट के हम का बोली ,

जज के सरम ना आइल ,

जय हो ,

चोरी छिपे जे मिळत रहे ,

छुट के मिळत बाटे ,

सब कोई के सामने अब ,

संगे रात बितावत बाटे,

सरम के इ ता घोर के पि गइल,

कहत बा कोर्ट के आर्डर बाटे ,

जय हो ,

बाबु जी से बेटी बोली ,

फलना के हम चाही ले ,

राजी हो जा बाबु जी ,

ओकरा संगे रात बिताइले ,

कवनो इ गलत नइखे ,

कोर्ट से सुनत बनी ,

जय हो ,

अइसन दिन आ… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on March 29, 2010 at 5:00pm — 3 Comments

हर पल हसणे वाले को,खुद हसणे का भी वक़्त नही

हर खुशी है लोगो के दामन मे,

पर एक हसी के लिए वक़्त नही,

दिन रात दौड़ती दुनिया मे,

ज़िंदगी के लिए वक़्त नही,



माँ की लॉरी का एहसास तो है,

पर माँ को माँ कहने का वक़्त नही,

सारे रिश्तो को तो हम मार चुके,

उन्हे दफ़नाने का भी वक़्त नही,



सारे नाम मोबाइल मे हैं,

लेकिन दोस्ती के लिए वक़्त नही,

दिल है गम से भरा हुआ,

पर रोने का भी वक़्त नही,



पैसे की दौड़ मे ऐसे दौड़े,

की थकने का भी वक़्त नही,

पराए एहसासो की क्या कद्र…
Continue

Added by PREETAM TIWARY(PREET) on March 29, 2010 at 9:10am — 2 Comments

जिन्दगी की दास्तान

अपने इच्छाओँ का त्याग करके,

अपने आप को संभाला हमनेँ।

फिर भी शान्ति नही रहती है,

अपने आप से पूछा हमनेँ।

क्यो होती है किसी की शान्ति मे विघ्न?

क्या ये उचित है जो कर रहा हू मैं?

बेचैन हो उठता हूँ पागल सा लक्षण,

कराह रहा होता हू,

अकेले मे जब होता हू…

Continue

Added by Mahesh Jee on March 28, 2010 at 11:00pm — 5 Comments

"जिन्दगी"

जिन्दगी कबो दुख के धुप ,त…

Continue

Added by Raju on March 28, 2010 at 8:00pm — 6 Comments

हे भगवन तू कईसन दिन दिखावाला ,

हे भगवन तू कईसन दिन दिखावाला ,

आज से बीस साल पाहिले बबुनी जनमली ,

दहेज़ के बात होत रहे हजार में ,

ओ घरी इंजिनियर डाक्टर कलक्टर ,

मिळत रहले चालीस पचास हजार में ,

हमहू सोचनी बैंक में पैसा ,

बीस साल में होई आठ गुना ,

लाईकानो के भाव बढ़ी लउकत बा नमूना ,

ता हम ओ घरी सतर हजार जमा करवानी ,

एही साल पाच लाख साठ हजार पावनी ,

बाकिर इ कम पर गइल,

ऊपर वाला लेकन के भाव ,

बीस लाख के ऊपर चल गइल ,

जवान हमारा लगे पैसा रहे ,

ऊपर से महंगाई के मार… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on March 27, 2010 at 7:22pm — 3 Comments

लोग कहे ला नारी , सब के ऊपर भारी ,

लोग कहे ला नारी ,

सब के ऊपर भारी ,

उनका के उ ना समझले ,

जे रहले अवतारी ,

लोग कहे ला नारी ,

सब के ऊपर भारी ,

कम करावे के होखे ता ,

रूप के जादू जाने ली ,

अलग अलग रूप में इ ,

अपना के ऊपर माने ली ,

बहिन बन के खूब खेलावास ,

माई बारी इ दुःख हारी ,

लोग कहे ला नारी ,

सब के ऊपर भारी ,

मेहरी बन के आवेली ,

मनवा के लोभावे ली ,

इ चाहिआं त जनम सार्थक ,

न त नरक बनावे ली ,

कही कही बारी कलंकनी ,

कही मनो हारी… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on March 26, 2010 at 7:30pm — 2 Comments

आइये अब करे देहात दर्शन





धान के दवनी…

Continue

Added by Ratnesh Raman Pathak on March 26, 2010 at 1:03am — 11 Comments

कभी नहीं भूलेंगे २०१० की बिहार दिवस

सूबे में तीन दिनों से मनाया जा रहा बिहार दिवस भली बहती संपन्न हो गया .

बेहद ही रोचक और अनूठे ढंग से bihar दिवस मनाया गया.आइये प्रकाश डालते है बिहार दिवस में क्या -क्या ख़ास रहा !

सफाई को लेकर प्रशासन की पहल !

पटना जिला प्रशासन ने बिहार दिवस पर राजधानी आने वाले अतिथियों की सेवा सौजन्यता के साथ करने की तैयारी की है। सड़कों की सफाई, पेयजल आपूर्ति, सुरक्षा के प्रबंध के बीच हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन पर आगंतुकों के स्वागत का प्रबंध किया गया है। समारोह स्थल पर जिला नियंत्रण… Continue

Added by Ratnesh Raman Pathak on March 25, 2010 at 3:50pm — 2 Comments

बिहार बिकाश आउर एकर मज़बूरी ,

बिहार बिकाश आउर एकर मज़बूरी ,

का कही एकर मज़बूरी ,

हर दम इ मजबुर रहे,

नेता एकरा मिलले अइसन ,

जाती से सराबोर रहे ,

एकर अइसन भूगोल बनल बा ,

जाती आउर छेत्रन के नाते ,

कही भोजपुरी कही मगह बा ,

कोई मौथली बोलत बाटे ,

ऊपर से मिले घाव पे नमक ,

एकर अपने बनल बा दीमक ,

दिल्ली वाला बारे चलाक ,

एक भाई के कईले पास ,

आपस में इ साथ ना दिहन ,

एकर माजा उ काहे ना लिहन,

जाती बाद बा एकर धुरी ,

बिहार के बाटे इ मज़बूरी ,

मगह मैथली ना… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on March 22, 2010 at 4:45pm — 3 Comments

इलाज का इन्तजार आज भी है ,,,,



मुझे मालूम था,

उसे पा न सकूँगा,

उसे न पाने की कसक,

दिल में आज भी है ,,,

जमाना गुजर गया,,,,

पीढियां बदल गयी,

मुहाबत की गलियों में,

दिल बेकरार आज भी है,,,,,

मेरी तनहा ज़िन्दगी,

उनकी तनहा यादें,

सदियों की रुसवाई में,

दिल रुखसार आज भी है,,,

दिल नादाँ था बेवकूफ नहीं ,,

हार बैठा काँटों के झंझावतों में,

बचने का आसरा ही नहीं,

मगर दूर दरिया के पार,,

दिखती पतवार आज भी है,,,,,

मुझे उनकी सादगी पसंद थी,,

उन्हें…
Continue

Added by ABHISHEK TIWARI on March 21, 2010 at 10:00pm — 7 Comments

दीप जली ज्योति होई , सब कोई हसी केहू ना रोई ,

दीप जली ज्योति होई ,

सब कोई हसी केहू ना रोई ,

इ कब होई .

जब हिंदुस्तान में ,

हिंदुस्तान के ,

सोचे वाला नेता पैदा होई ,

त दीप जली ज्योति होई ,

सब कोई हसी केहू ना रोई ,

अइसन तबो हो सके ला ,

राज अइसन नेता ,

मुह्कर्खी लगा जास ,

नेता जी अइसन बेटा ,

फिर से आ जास ,

कौनो आजाद ,

भगत अइसन रंगदार ,

हिंदुस्तान में होई ,

त दीप जली ज्योति होई ,

सब कोई हसी केहू ना रोई ,

देश के बाटे वाला ,

छोट छोट राजनीती पार्टी… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on March 20, 2010 at 2:34pm — 5 Comments

एक राज कहत बानी....................

सब जान के चुप चाप अब सहत बानी
हम होश में बेहोश हो रहत बानी…
Continue

Added by PREETAM TIWARY(PREET) on March 17, 2010 at 9:19pm — 7 Comments

कब तलक ?, By Guru Jee

कब तलक ?,

यु ही आशु बहाती रहोगी ,

पहले सुनी मांग ,

और अब ,

सुनी गोद होने का डर ,

पलक झपकाये बीना ,

देखती रहोगी ,

कब तलक ?,

उट्ठो ,

आवाज दो ,

रोको उसे ,

वह अपना बर्तमान से ,

और तुम्हारे भाभिस्य से ,

खिलवार कर रहा हैं ,

और तुम यु ही ,

देखती रहोगी ,

कब तलक ?,

जिन्हें पैसे की भूख हैं ,

वो पैसे के लिए ,

कितने घरो का ,

बुझाये दीये ,

अब भी समय हैं ,

आवाज उठाओ ,

जो बर्बाद कर रहे हैं… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on March 15, 2010 at 12:30pm — 5 Comments

यह अमर निशानी किसकी है? ( माखनलाल चतुर्वेदी)

यह अमर निशानी किसकी है?

बाहर से जी, जी से बाहर-

तक, आनी-जानी किसकी है?

दिल से, आँखों से, गालों तक-

यह तरल कहानी किसकी है?

यह अमर निशानी किसकी है?



रोते-रोते भी आँखें मुँद-

जाएँ, सूरत दिख जाती है,

मेरे आँसू में मुसक मिलाने

की नादानी किसकी है?

यह अमर निशानी किसकी है?



सूखी अस्थि, रक्त भी सूखा

सूखे दृग के झरने

तो भी जीवन हरा ! कहो

मधु भरी जवानी किसकी है?

यह अमर निशानी किसकी…
Continue

Added by Admin on March 14, 2010 at 8:50am — 2 Comments

गरीबी..

इक कमरे का है ये मकाँ...


यहाँ आदमियों की जगह नहीं,


खाने को दो दिनों की भूख है


पीने को रिस-रिसकर बहता पानी


बेरंग सी दीवारों की मुन्तज़िरी,


औ छत की रोती सी दीवारें


गोशों में…
Continue

Added by विवेक मिश्र on March 12, 2010 at 12:00am — 6 Comments

ज़िन्दगी की किताब से (रजनी छाबरा)

ज़िन्दगी की किताब से

-------------------

ज़िन्दगी की किताब से

फट जाता है जब

कोई अहम पना

अधूरी रह जाती है

जीने की तमन्ना

कभी कभी बागबान से

हो जाती है नादानी

तोड़ देता है ऐसे फूल को

जिसके टूटने से

सिर्फ शाख ही नहीं

छा जाती है

सारे चमन में वीरानी

रह जाता है मुरझाया पौधा

सीने में छुपाये

दर्द की कहानी

जिस पौध को पानी की बजाए

सींचना पड़ता हो

अश्कों ओर नए खून से

उस दर्द के पौधे का

अंजाम क्या… Continue

Added by Admin on March 11, 2010 at 10:30pm — 6 Comments


मुख्य प्रबंधक
साधु बन बोले राम राम

जिन्दगी आधी बीत गई,

कभी न किया धर्म का काम,

पूलिस पिछे जब पड़ी तो,

साधु बन बोले राम राम,



लूट मार, चोरी डकैती,

किये बहुत कुकर्म मे नाम,

सभी पाप छिप गया,

जनता पूजे अब सुबह शाम,



जनता पूजे सुबह शाम,

अब मजा ही मजा है,

पहले पुलिस से छुप के,

करना पड़ता था गन्दा काम,

अब नेता पुलिस करते रखवाली,

खुब है ऐशोआराम,



खुब है ऐशोआराम,

आप भी बाबा के बन…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 11, 2010 at 7:00am — 1 Comment

का पूछातानी सम्राट जी ?

लोटे बिन चलता नहीं किसका जग में काम!

जिस पशु को माता कहे उसका क्या है नाम !!

उसका क्या ही नाम क्योन पशु मिमियाता है !

भुन्का करता क्योन,क्योन पच्छी गाता है !!

पूछे सम्राट जी ,मिले क्या सिक्के खोटे!

क्या पानी या ढूध,भरा करते है लोटे !!









सोते जागते जिव सब ,क्या लेते है चीज !

धोकर क्या तुम पहनते ,चड्ढी ,पैंट कमीज !!

चड्ढी पैंट कमीज ,साफ क्या पहनो टाई!

मलिन कपडे जब धरो ,मीत क्या करे खिचाई !

पूछे सम्राट जी ,बिना कारन क्या रोते… Continue

Added by santosh samrat on March 10, 2010 at 10:24am — 5 Comments


मुख्य प्रबंधक
मेरी नादानी

मेरी पहली कविता जो मैने १९९६ मे लिखी थी  .....





भूली मुहब्बत की दास्तान हो तुम ,
जहाँ सूरज चाँद सितारे न हो…
Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 9, 2010 at 9:00am — 1 Comment

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
19 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
20 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
20 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
21 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
yesterday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Wednesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service