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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Latest Activity

Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
16 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत हरिगीतिका जैसे प्रवहमान छंद में शिव महिमा पढ़ने को मिली. मन धन्य हो गया.  जयकार शिव की कर रहे सब, पुण्य  सावन मास में। अर्चक   चले…"
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत बधाई. टेक पर प्रयुक्त लॉक,नॉक, ऐडहॉक, डॉक रचना को और भी रोचक बना रहे हैं. सादर "
Jul 27
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम लो।करते  रहो  नित  भक्ति  प्रभु  की, नित्य प्रभु आराधना।तब  बिन  कहे   हर  एक  होगी,  पूर्ण   मंगल  कामना।।   *आ  जाइये  प्रभु  की  शरण  में,  मोक्ष  का  सुख  पाइये।नित  गाइये  प्रभु  वन्दना  नित,  नाम  हरि का ध्याइये।  संतोष    धन   उनको   मिलेगा, जो    जपेंगे    नाम  ये।वह   मुक्त   होंगे  कष्ट  से  सब, छोड़कर  जग  धाम  ये।।*जयकार शिव की कर रहे सब, पुण्य  सावन मास में।अर्चक   चले   कांवड़   उठाए, प्रभु…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से आभार.  सादर "
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी ! 'साजना' शब्द के प्रयोग से मैं स्वयं भी बहुत संतुष्ट नहीं था किन्तु किसी शीघ्रता में वह बदलाव नहीं हो सका था. आपके द्वारा इंगित अन्य त्रुटियों को भी मैं…"
Jul 24

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है. भावविभोर मन युवा सुलभ स्मृतियों के आलोड़न में बरबस पींगें लिये जा रहा है. तभी तो प्रस्तुति में ’साजना’ जैसा सिनेमाई शब्द भी प्रयुक्त हो…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ तुम्हारा। हरपल था सुरभित अति प्यारा।।मन   साजन  यह  कैसे  भूले। साथ-साथ   तुम  हम  थे   झूले।।*तुम   थे  झूले   थाम   कलाई। मैं   साजन   कितनी  शरमाई।।तुम  जब-जब  थे  पींग बढ़ाते। हम   इक  दूजे  में   खो  जाते।।*झुकीं-झुकीं  मेरी  ये  अँखियाँ। देख रहीं थीं हँस-हँस  सखियाँ।।पर  साजन  तुम  रुके न माने। मिले  मुझे  सखियों   से   ताने।।*भूल  न  पाई  वह  पल प्यारे। स्वप्न   सरीखे   हैं   वह   सारे।।आने…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है. किन्तु थोड़ी बारिश में ही नगरों की व्यवस्था ध्वस्त हो गई है. सादर "
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम रिमझिम बारिश"  है कि नदी नाले उफना जाते है, सड़कों  पर पानी बहने लगता है और तो और " गड्ढे में जा बैठी गाड़ी " ?"
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता प्रदान की है. आपकी इस अमूल्य प्रतिक्रिया के  लिए आपका हृदय से आभार. सादर "
Jul 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा अपनी नन्हीं-नन्हीं विस्फारित आँखों से बरसात की अनवरत बनी झड़ियों में आस-पास के गतिविधियों को, स्नात, तृप्त, उत्फुल्ल वातावरण को बूझने का…"
Jul 10
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए जंगल का कानून है पहला, चुप रहिए... वाह ! क्या कमाल मतला हुआ है. इसमें शामिल व्यंग्य तो गजब ही कर रहा है. सभी अशआर आज की परिस्थिति पर…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की अनुभूतियों पर ही आधारित होते हैं अक्सर. आदरणीय सुशील सरना जी सचमुच ही यह जीवन का रंगमंच है और यहाँ हर कोई अपना किरदार निभाकर जाएगा. सुन्दर दोहे रचे हैं…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते खड़के भीगे लरजेचिड़िया सहमी बादल गरजे,कुत्ते दुबके गैया भागीइक नन्हीं सी गुड़िया जागीसुनकर उसकी तेज रुलाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई सड़कों से बह निकला पानीराहगीरों ने छतरी तानी,छप-छप करते कदम बढ़ातेठोकर खाते गिरते जातेबूँदें ले आयीं कठिनाईरिमझिम-रिमझिम बारिश आई बनकर वैद्य टटोले नाड़ीगड्ढ़े में  जा  बैठी  गाड़ीउफनाया  है  सूखा नालाफूट गया जो बाँधा पालाहर छोटी नाली उफनाईरिमझिम-रिमझिम बारिश आई।#मौलिक/…See More
Jul 5

Profile Information

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Male
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Ujjain
Native Place
Ujjain
Profession
service
About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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हरिगीतिका छंद

  

हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।

यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम लो।

करते  रहो  नित  भक्ति  प्रभु  की, नित्य प्रभु आराधना।

तब  बिन  कहे   हर  एक  होगी,  पूर्ण   मंगल  कामना।।   

*

आ  जाइये  प्रभु …

Continue

Posted on July 24, 2026 at 7:26pm — 2 Comments

चौपाइयाँ

दोहा

बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।

दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। 

चौपाई

वह फुहार वह साथ तुम्हारा। हरपल था सुरभित अति प्यारा।।

मन   साजन  यह  कैसे  भूले। साथ-साथ   तुम  हम  थे   झूले।।

*

तुम   थे  झूले   थाम   कलाई। मैं   साजन   कितनी  शरमाई।।

तुम  जब-जब  थे  पींग बढ़ाते। हम   इक  दूजे  में   खो  जाते।।

*

झुकीं-झुकीं  मेरी  ये  अँखियाँ। देख रहीं थीं हँस-हँस  सखियाँ।।

पर  साजन  तुम  रुके न माने।…

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Posted on July 14, 2026 at 12:30pm — 4 Comments

बरसात

बरसात

 

घन गरजे अंधियारी छाई,

बिजली अम्बर पर इठलाई  

बूँदें टपकी टप-टप भाई

रिमझिम रिमझिम बारिश आई

 

पत्ते खड़के भीगे लरजे

चिड़िया सहमी बादल गरजे,

कुत्ते दुबके गैया भागी

इक नन्हीं सी गुड़िया जागी

सुनकर उसकी तेज रुलाई

रिमझिम रिमझिम बारिश आई

 

सड़कों से बह निकला पानी

राहगीरों ने छतरी तानी,

छप-छप करते कदम बढ़ाते

ठोकर खाते गिरते जाते

बूँदें ले आयीं…

Continue

Posted on July 4, 2026 at 10:33pm — 4 Comments

ग़ज़ल

  

 

ग़ज़ल

2122  2122  212

 

कितने काँटे कितने कंकर हो गये

हर  गली  जैसे  सुख़नवर हो गये

 

रास्तों  पर  तीरगी  है आज भी

शह्र-से जब गाँव  के घर हो गये                                  

 

आत्मनिर्भर हो रहे थे ही कि वे

हुक्म आया घर से बेघर हो गये

 

जो गिरी तो साख गिरती ही गई

अच्छे खासे नोट चिल्लर हो गये

 

सहमी-सहमी हर कली खिलती है अब  

यूँ  बड़े  भँवरों के लश्कर हो…

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Posted on January 8, 2026 at 5:00pm — 8 Comments

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At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

At 11:53pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

 
 
 

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कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

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