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धार्मिक साहित्य

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धार्मिक साहित्य

इस ग्रुप मे धार्मिक साहित्य और धर्म से सम्बंधित बाते लिखी जा सकती है,

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Latest Activity: Jun 15

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जय श्री राम

जय श्री रामदोहे____________________पौष शुक्ल की द्वादशी,सजा अवधपुर धाम।प्राण प्रतिष्ठा हो गए,बाल रूप श्री राम।१।रामलला के साथ में, सजे दसों अवतार।युगे - युगे अवतार लें, जग के तारणहार।२।दो हजार चौबीस सन,मास प्रथम बाईस।रघुवर आए महल में,मिटी हृदय की…Continue

Started by सुरेश कुमार 'कल्याण' Jun 15.

महर्षि वाल्मीकि

महर्षि वाल्मीकिमहर्षि वाल्मीकि का जन्ममहर्षि वाल्मीकि के जन्म के बारे में बहुत भ्रांतियाँ मिलती है कोई कहता है कि उनका जन्म महर्षि कश्यप और अदिति के नौवें पुत्र वरुण और उनकी पत्नी चर्षणी के घर में हुआ। और उनके बड़े भाई महर्षि भृगु भी परम ज्ञानी थे।…Continue

Started by PHOOL SINGH Apr 1.

पुरुषोत्तम श्री राम

श्री राम के जैसा चरित्र न मिलताचाहे ढूँढ लो इस जहान मेंमर्यादा की जो साक्षात मूर्ति, न उनसे बड़ा कोई ज्ञान में।। शिव का क्रोध और दुर्गा-सी शक्तिहनुमान सी भक्ति राम मेंआकर्षण जिनका श्री कृष्ण के जैसा, सत्य-धर्म सी सरलता राम में।। बुद्ध, महावीर-सी…Continue

Started by PHOOL SINGH Jan 24.

राम मंदिर

 राम मंदिर राम व्यापक राम विश्वात्माहर जीव में है राम बसाजन्मभूमि श्री राम कहलाती, भव्य मंदिर एक वहाँ बना।। देश की आत्मा देश की आस्थादिग्दर्शन का स्वरूप बनाचेतना, चिंतन, प्रतिष्ठा का, जो राम प्रताप का आधार बना।। दैवीय शक्तियों का जहाँ पे पहराअवध में…Continue

Started by PHOOL SINGH Jan 23.

सदियों का वनवास अंत कर 1 Reply

गीतपुलकित तन से पुलकित मन से, नाच रहे है जन जन सारे।सदियों  का  वनवास  अंत  कर, सकल  राष्ट्र में राम पधारे।**राजनीति ने करवट  ली  तो, हर  सोया विश्वास जगा है।सच है राजा रंक सभी के, मन में बस उल्लास दिखा है।।घटघट वासी राम भले हों, घटघट उन में आज बसा…Continue

Started by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'. Last reply by Shyam Narain Verma Jan 25.

वैंकुंठधाम आगमन

काल का नियम कठोर है होतासभी को इसको वरना होश्री राम अछूते रह सके न, क्या मानव जीवन का वर्णन हो|| आते साधू रूप में काल देवताश्री राम से वचन एक लेना होगुप्त बात कोई सुन सके न, इस बात की पुष्टि प्रथम हो|| मृत्यु दंड का भागी होगाविघ्न वार्तालाप में डाले…Continue

Started by PHOOL SINGH Jan 18.

क्या युद्ध निश्चित था?

क्यूँ रोकते द्रौपदी कोजब कर्ण लक्ष्य भेद में माहिर थाअपमान कराते द्रौपदी से उसका, जानते थे वो ज्येष्ठ पुत्र है कुंती का|| युद्ध से पहले क्यूँ न बतातेरंगमच के बाद ही क्यूँ न बतातेसुतपुत्र नहीं तू ज्येष्ठ पुत्र है, मेरी बुआ तू कुंती का||  क्या सच है…Continue

Started by PHOOL SINGH Jan 15.

कर्ण का विवाह

प्रथम रुषाली कर्ण की पत्नीजिसे पितृ इच्छा से पातादूसरी कहलाती सुप्रिया, खास भानुमती से जिसका नाता|| अंसावरी को वही बचाताथा आतंकवादियों ने जिसको घेरा  प्रेम करती उससे पहले, फिर सुतपुत्र कह धुत्कारा|| स्वयंवर जीता अंसावरी काप्रेम था उससे करताधुत्कार…Continue

Started by PHOOL SINGH Jan 8.

भीष्म पितामह और केशव

ईश्वर कहती तुमकों केशवसृष्टि का तुम आधार बनोशंका में मैं पड़ा हूँ गहरी, हो सके तो इसका समाधान करों।। पोता हूँ मैं आपका पितामहमुझसे यूं न मखौल करोआपकी आज्ञा में जीता आया, सात्विकता में सदा आप जियो।। कौरवों के कृत्यों की मैं बात न करताक्यूँ पांडवों को…Continue

Started by PHOOL SINGH Jan 5.

महावीर कर्ण और द्रौपदी

सशक्त जो बड़ी सुंदर प्यारीस्वयंवर की जिसके शोभा निरालीमोहित करती हर नृप को, क्यूँ नियति के आगे सदा ही हारी।। सौंदर्य की प्रतिमूर्तिखान गुण-ज्ञान की दुनियाँ जानीहर वीर की वो अभिलाषा, ऐसी अतुलनीय वो सुंदर नारी।। मृगी के जैसे नयन है जिसकेकोयल जैसी उसकी…Continue

Started by PHOOL SINGH Jan 5.

 
 
 

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आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-112 में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।"ओबीओ…See More
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"जनाब सुशील सरना जी आदाब, सुंदर दोहावली के लिए बधाई स्वीकार करें ।"
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"आदरणीय आज़ी तमाम जी, सादर नमस्कार! बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने। इसके लिए आपको हार्दिक बधाई प्रेषित…"
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"अच्छा दोहा- सप्तक लिखा, आ. सुशील सरना जी किन्तु पहले दोहे के तीसरे चरण में, "ओर- ओर " के…"
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Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल : मिज़ाज़-ए-दश्त पता है न नक़्श-ए-पा मालूम
"बहुत बहुत शुक्रिया इस ज़र्रा नवाज़ी का आ चेतन जी"
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक .. इच्छा , कामना, चाह आदि
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय ।"
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Chetan Prakash commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल : मिज़ाज़-ए-दश्त पता है न नक़्श-ए-पा मालूम
"जनाब, आज़ी आदाब, अच्छी ग़ज़़ल हुई, मुबारक हो !"
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Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक .. इच्छा , कामना, चाह आदि
" आदरणीय सुशील सरना साहब, मानव मन की चाह पर सुन्दर दोहावली रची है आपने. हार्दिक बधाई…"
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ग़ज़ल : मिज़ाज़-ए-दश्त पता है न नक़्श-ए-पा मालूम

१२१२ ११२२ १२१२ २२मिज़ाज़-ए-दश्त पता है न नक़्श-ए-पा मालूमहमारे दर्द-ए-जिगर का भी किसको क्या…See More
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